Maa Siddhidatri Katha: माँ सिद्धिदात्री की कथा, आरती, मंत्र एवं पूजा विधि (Navratri Day 9) – Lyrics in Hindi

21 Mar 2026 1,014 पाठ ~9 मिनट पाठ ~1286 शब्द 🕉️ Siddhidatri
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✨ माँ सिद्धिदात्री: सिद्धियों की दाता, अर्धनारीश्वर की रहस्यमयी गाथा

पूजा विधि, कथा, आरती एवं दुर्गा सप्तशती पाठ

🙏 नवरात्रि का नौवाँ दिन – सभी सिद्धियों की अधिष्ठात्री देवी 🙏

🕉️ माँ सिद्धिदात्री का स्वरूप एवं महत्व (Significance & Form)

नवरात्रि के नौवें दिन माँ दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा की जाती है। यह देवी समस्त सिद्धियों (अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व) की प्रदाता हैं। इनकी कृपा से भक्त को अष्टसिद्धियाँ और नवनिधियाँ प्राप्त होती हैं। माँ सिद्धिदात्री का वाहन सिंह है और ये चार भुजाओं वाली हैं। इनके दाहिने हाथों में सुदर्शन चक्र और गदा तथा बाएँ हाथों में शंख और कमल विराजमान हैं।

इनकी सबसे विशिष्ट पहचान यह है कि ये अर्धनारीश्वर स्वरूप में भगवान शिव के साथ विराजमान हैं। पुराणों के अनुसार, जब भगवान शिव ने आधी देही माँ सिद्धिदात्री को धारण किया, तब वे अर्धनारीश्वर कहलाए। यह रहस्यमयी गाथा बताती है कि सृष्टि की सम्पूर्ण शक्ति पुरुष और प्रकृति के संयोग से ही संचालित होती है। माँ सिद्धिदात्री की उपासना से साधक का जीवन सिद्धियों से भर जाता है और वह मोक्ष का अधिकारी बनता है।

🪔 माँ सिद्धिदात्री की पूजा विधि (Puja Vidhi)

प्रातःकाल स्नान कर श्वेत या गुलाबी वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर माँ सिद्धिदात्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। देवी को खीर, केले और सफेद मिष्ठान्न का भोग अर्पित करें। विशेष रूप से नारियल और पान चढ़ाने का विधान है।

पूजा के समय दुर्गा सप्तशती के “सिद्धिदात्री रहस्य” का पाठ करें। फिर निम्न मंत्रों का जाप करें। पूजा के अंत में आरती करें और प्रसाद वितरित करें। नवरात्रि के अंतिम दिन होने के कारण कन्या पूजन (हवन) का भी विशेष महत्व है।

📿 माँ सिद्धिदात्री के मंत्र (Mantras)

  • ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः।
  • प्रणाम मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
  • ध्यान मंत्र: वन्दे वाञ्छित मनोरथं चन्द्रार्धकृतशेखराम्। सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा सिद्धिदात्री यशस्विनीम्।।
  • सिद्धिदात्री गायत्री: ॐ सिद्धिदात्र्यै च विद्महे, शिवशक्त्यै च धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्।।

📜 अर्धनारीश्वर की रहस्यमयी गाथा – Maa Siddhidatri Katha

प्राचीन काल की बात है। एक बार भगवान शिव ने घोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर माँ आदिशक्ति प्रकट हुईं। शिव ने कहा, “हे माँ, मैं चाहता हूँ कि आप मुझसे अभिन्न रहें। बिना शक्ति के मैं शव के समान हूँ।” माँ ने मुस्कुराकर कहा, “तथास्तु।” तब माँ सिद्धिदात्री ने अपने तेज से भगवान शिव के शरीर के बाएँ भाग में स्थान ग्रहण किया। इस प्रकार अर्धनारीश्वर का अद्भुत स्वरूप बना – दायाँ भाग शिव (पुरुष) और बायाँ भाग शक्ति (प्रकृति)।

यह रूप सम्पूर्ण सृष्टि के रहस्य को दर्शाता है – पुरुष और प्रकृति के संयोग से ही सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति और संहार संभव है। इस घटना के बाद भगवान शिव “अर्धनारीश्वर” कहलाए। माँ सिद्धिदात्री ने उन्हें अष्टसिद्धियाँ प्रदान कीं। तभी से वे “सिद्धिदात्री” नाम से विख्यात हुईं।

एक अन्य कथा के अनुसार, देवराज इंद्र ने माँ सिद्धिदात्री की आराधना करके सभी सिद्धियाँ प्राप्त की थीं। जब भी देवताओं पर कोई संकट आता, वे माँ की शरण में जाते और देवी उनकी रक्षा करतीं। महिषासुर के वध के समय भी माँ सिद्धिदात्री ने ही चंडिका के रूप में सभी देवियों को शक्ति प्रदान की थी।

जो भक्त नवरात्रि के नौवें दिन विधि-विधान से माँ सिद्धिदात्री की पूजा करता है, उसे सभी प्रकार की सांसारिक और आध्यात्मिक सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं। उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।

'जय माता दी, जय सिद्धिदात्री मैया। शिव की अर्धांगिनी, सिद्धियों की सुखदायिनी।।'

🍛 खीर एवं नारियल का महत्व (Significance of Offerings)

माँ सिद्धिदात्री को खीर अर्पित करना अति शुभ माना जाता है। यह भोग देवी को प्रसन्न करता है और घर में सुख, शांति और धन-धान्य की वृद्धि करता है। नारियल चढ़ाने से भक्त की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। सफेद वस्तुएँ जैसे दही, चावल, मिष्ठान्न भी देवी को प्रिय हैं। नवरात्रि के अंतिम दिन कन्या पूजन में नौ कन्याओं को भोजन कराने से माँ सिद्धिदात्री विशेष प्रसन्न होती हैं।

🎵 माँ सिद्धिदात्री की आरती – Lyrics in Hindi (Siddhidatri Mata Ki Aarti)

जय जय सिद्धिदात्री माता, जय जय सिद्धिदात्री माता।
शिव की अर्धांगिनी, सब सिद्धियों की दाता।। जय जय...

चार भुजा शोभित, सिंह विराजी।
शंख चक्र गदा कमल, मन मोहन छाजी।। जय जय...

सृष्टि रचना करती हो, संहारकर्ता।
तुम हो आदि शक्ति, तुम हो विधाता।। जय जय...

खीर का भोग लगे, नारियल प्रिय भारी।
दीन दुखी जन आए, पूरी करो तुम हारी।। जय जय...

अष्टसिद्धि नवनिधि की, दाता हो धनी।
भक्त जनों की रक्षा करो, सदा सुख मानी।। जय जय...

आरती माता की जो कोई, नर नित्य गावे।
सुख संपत्ति से भरपूर, वह जनम पावे।। जय जय सिद्धिदात्री माता...
            

✨ माँ सिद्धिदात्री की पूजा के लाभ (Benefits)

  • ✅ सभी आठों सिद्धियाँ (अणिमा, महिमा आदि) प्राप्त होती हैं।
  • ✅ नवनिधियों की प्राप्ति होती है, धन-धान्य बढ़ता है।
  • ✅ जीवन के सभी संकट दूर होते हैं।
  • ✅ रोगों से मुक्ति और दीर्घायु मिलती है।
  • ✅ मानसिक शांति, आत्मविश्वास और ऊर्जा का संचार होता है।
  • ✅ कार्यक्षेत्र में उन्नति एवं सफलता प्राप्त होती है।
  • ✅ मोक्ष की प्राप्ति होती है, भवबंधन से मुक्ति मिलती है।
  • ✅ अर्धनारीश्वर स्वरूप की उपासना से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: माँ सिद्धिदात्री का वाहन क्या है?
उत्तर: माँ सिद्धिदात्री का वाहन सिंह है।

प्रश्न 2: सिद्धिदात्री माता को किस चीज का भोग लगता है?
उत्तर: इन्हें खीर, नारियल और सफेद मिष्ठान्न अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है।

प्रश्न 3: नवरात्रि के किस दिन सिद्धिदात्री माता की पूजा होती है?
उत्तर: नवरात्रि के नौवें दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।

प्रश्न 4: अर्धनारीश्वर स्वरूप का क्या महत्व है?
उत्तर: यह स्वरूप पुरुष (शिव) और प्रकृति (शक्ति) के अभिन्न संबंध को दर्शाता है। इसके बिना सृष्टि का संचालन असंभव है।

माँ सिद्धिदात्री समस्त सिद्धियों की अधिष्ठात्री हैं। उनकी कृपा से साधक जीवन में सफलता, संपत्ति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करता है। नवरात्रि के इस अंतिम दिन माता की विधिवत पूजा करें, अर्धनारीश्वर की रहस्यमयी गाथा का स्मरण करें और उनका अनंत आशीर्वाद प्राप्त करें।

🙏 ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्र्यै नमः। जय अम्बे, जय सिद्धिदात्री मैया। 🙏

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