Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

વિશ્વંભરી સ્તુતિ (Vishwambhari Stuti lyrics in Gujarati) - by Kinjal Dave

विश्वम्भरी स्तुति देवी की स्तुति है, जो सुख, शांति और कल्याण की प्राप्ति हेतु की जाती है।

प्रस्तावना एवं परिचय

विश्वम्भरी देवी की स्तुति: सम्पूर्ण सुख का साधन

इस स्तुति के माध्यम से भक्त देवी विश्वम्भरी से सुख, शांति एवं कल्याण की प्रार्थना करते हैं।

विश्वम्भरी स्तुति - विश्वम्भरी अकिल विश्वतणि जनिता,विद्या धरी वदनमा वसजो विधाता|दुर्बुद्धिने दूर करी सद्बुद्धि आपो,माम् पाहि ओम भगवती भव दुख कापो||भुलो पड़ी भवरणे भटकु भवानी,सूजे नहीं लगिर कोई दिशा जवानी|भासे भयंकर वळी मनना उतापो,माम् पाहि ओम भगवती भव दुख कापो||आ रंकने उगरवा नथी कोई आरो,जनमान्ध छु जननी हु ग्रहि बाल तारो||ना शुनो भगवती शिशु ना विलापो,माम् पाहि ओम भगवती भव दुख कापो||मा कर्म जन्म कथनी करता विचारुं,आ सृष्टिमा तुज बिना नथी कोई मरूं|कोने कहुं कठण योग तणो बलापो,माम् पाहि ओम भगवती भव दुख कापो||हूं काम क्रोध मद मोह थकी छकेलो,आडंबरें अति घणो मदथी बकेलो|दोषो थकी दुषित न करी माफ पापो,माम् पाहि ओम भगवती भव दुख कापो||ना शास्त्र ना श्रवणं पयपान पीधु,ना मंत्र के स्तुति कथा नथी काई किधु|श्रद्धा धरी नथी किया तव नाम जापो,माम् पाहि ओम भगवती भव दुख कापो||रे रे भवानी बहु भूल थई छे मारी,आ जिन्दगी थई मने अत्याशय अकारी|दोषो प्रजाळी सधळा तव छाप छापो,माम् पाहि ओम भगवती भव दुख कापो||खाली न कोई स्थल छे वीन आप घारो,ब्रह्माण्डमा अणु अणु मही वास तारो|शक्ति न माप गणवा अगणित मापो,माम् पाहि ओम भगवती भव दुख कापो||पापे प्रपंच करवा जिंदगी पूरो,खोटो खरो भगवती पण हूँ तमारो|जाडयांधकार दूर करी सद्बुद्धि आपो,माम् पाहि ओम भगवती भव दुख कापो||शिखे सुनें रसिक छंद ज एक चित्ते,तेना थकी त्रिविध ताप टळे खचीतें|वाधे विशेष वळी अंबा तणा प्रतापो,माम् पाहि ओम भगवती भव दुख कापो||श्री सदगुरु ना शरणमा रहिने भजु छु,रात्रि दिनें भगवती तुजने भजु छु|सद्भक्त सेवक तणा परिताप चापो,माम् पाहि ओम भगवती भव दुख कापो||अंतर विषय अधिक उर्मि थता भवानी,गाउ स्तुति तव बलें नमिने मृगानी|संसारना सकल रोग समूल कापो,माम् पाहि ओम भगवती भव दुख कापो||
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय भगवती विश्वम्भरी की स्तुति करना है। भक्त इस स्तुति में देवी से समस्त कष्टों से मुक्ति की प्रार्थना कर रहे हैं। पहले पद में भगवती विश्वम्भरी को 'अखिल विश्वतणी' कहा गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि देवी सृष्टि की माता हैं। यहाँ 'विद्या धरी वदनमा' का तात्पर्य है कि देवी ज्ञान का प्रकाश हैं और हमें सच्ची बुद्धि प्रदान करने का अनुरोध किया गया है। इस स्तुति में 'दुर्बुद्धिने दूर करी सद्बुद्धि आपो' पंक्ति से यह स्पष्ट होता है कि भक्त दुर्व्यवहार, अज्ञानता और कष्टों से मुक्ति के लिए देवी से सहायता मांग रहे हैं। भक्त देवी की कृपा की कामना करते हैं कि वे सभी दुखों का नाश करें और जीवन में सुख लाएं।

भावार्थ की दृष्टि से, यह भजन भक्त की भावनाओं को सहृदयता से व्यक्त करता है। 'भूलो पड़ी भवरणे' की पंक्ति यह दर्शाती है कि भक्त इस जीवन के चक्र में भ्रमित हो गया है और उसे सही रास्ता नहीं मिल रहा है। भक्त अपने पापों एवं दोषों के प्रति आत्मस्वीकृति करते हैं, जिससे भगवान की असीम दया की आवश्यकता स्पष्ट होती है। इस प्रकार की विनम्रता और आत्म-समर्पण के भाव से भक्ति में गहराई आती है। 'मा कर्म जन्म कथनी करता विचारू' इस पंक्ति में भक्त अपने कर्मों के परिणामों के प्रति जागरूकता व्यक्त करते हैं और देवी से मार्गदर्शन की प्रार्थना करते हैं।

इस भजन में भक्ति मार्ग (Bhakti Marg) का सच्चा स्वरूप दृष्टिगोचर होता है। भक्त भगवान की अनुकंपा से अपने मन की चंचलता और सांसारिक बंधनों से मुक्ति की अपेक्षा कर रहे हैं। भक्ति का यह मार्ग न केवल आध्यात्मिक अनुभव की ओर ले जाता है, बल्कि यह जीवन के समस्त दुखों और समस्याओं का समाधान भी प्रस्तुत करता है। 'महाकाली, भवानी' जैसे शब्दों का उपयोग कर, भक्त देवी के प्रति अनन्य भक्ति एवं श्रद्धा का प्रदर्शन कर रहे हैं। इस स्तुति में 'आ संतोष, शांति, समर्पण' की भावना स्पष्ट झलकती है, जो आंतरिक शांति की प्राप्ति के लिए आवश्यक है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस स्तुति का विशेष महत्व न केवल भक्तों के लिए है, बल्कि यह पुराणों में भी महत्वपूर्ण स्थान रखती है। देवी मां के विभिन्न स्वरूपों का महत्व हिन्दू धर्म में अनंत है। भगवती का रूप सृष्टि की रक्षक एवं पालनकर्ता के रूप में देखा जाता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भक्तों को अपने जीवन में समस्याओं के समाधान के लिए देवी माँ के प्रति पूर्ण विश्वास और आस्था होनी चाहिए। पौराणिक दृष्टिकोण से, देवी भगवती का ध्यान एवं स्तुति भक्तों के लिए उद्धार का साधन मानी जाती है, जिससे भक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन के नियमित पाठ से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा एवं आध्यात्मिक जागरूकता की प्राप्ति होती है। भक्त इस स्तुति को गाकर अपने दुखों से मुक्ति, बुद्धि की वृद्धि और मानसिक तनाव से छुटकारा पा सकते हैं। यह न केवल मानसिक बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य को भी मजबूती प्रदान करती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

विश्वम्भरी स्तुति का जप सुबह या शाम के समय करना उत्तम रहता है। इस दौरान भक्त को एक स्वच्छ स्थान पर बैठकर ध्यान मुद्रा में होना चाहिए। दीये की ज्योति जलाकर, देवी को पुष्प अर्पित करना चाहिए। मन को एकाग्र करते हुए, श्रद्धा पूर्वक स्तुति का जाप करने से भक्ति में वृद्धि होती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

विश्वम्भरी स्तुति का महत्व क्या है?

इस स्तुति का महत्व है कि यह भक्त को मानसिक संपूर्णता, आत्मीयता और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है। यह जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का मार्ग प्रशस्त करती है।

क्या इस स्तुति का पाठ नियमित करना चाहिए?

जी हां, विश्वम्भरी स्तुति का नियमित पाठ करने से मन शांति, सकारात्मक विचार, और संपूर्ण स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है, जिससे भक्त का जीवन सुखमय बनता है।

कौनसी देवी की स्तुति है यह?

यह स्तुति देवी विश्वम्भरी की है, जो सृष्टि की माता मानी जाती हैं और समस्त दुखों के नाशक के रूप में प्रगट होती हैं।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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