radha bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

शंभु नाथ रे भजन लिरिक्स (Shambhu Nath Re Lyrics in Hindi) - Agam Agrawal जय जय भोलेनाथ शंभु

अगम अग्रवाल द्वारा गाया गया लोकप्रिय शिव भजन शंभु नाथ रे लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित संपूर्ण भक्ति पाठ।

Agam Agrawal

भगवान शिव के परम कल्याणकारी, निराकार और वैराग्यपूर्ण स्वरूप को समर्पित अत्यंत लोकप्रिय एवं ऊर्जावान भजन "शंभु नाथ रे" (Shambhu Nath Re) आधुनिक भक्ति संगीत की दुनिया में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। युवा और प्रतिभाशाली गायक अगम अग्रवाल (Agam Agrawal) द्वारा अपनी मधुर और गूंजती हुई आवाज में स्वरबद्ध यह भजन शिव भक्तों के हृदय में अगाध श्रद्धा, समर्पण और आनंद का संचार करता है। 'शंभु' शब्द का शाब्दिक अर्थ ही है— 'जो कल्याण या मंगल करता है'। सनातन धर्म में देवों के देव महादेव को संहारक के साथ-साथ परम आशुतोष भी कहा जाता है, जो अपने भक्तों की एक सच्ची पुकार पर ही प्रसन्न हो जाते हैं। यह भजन भगवान शिव की ध्यानमग्न एवं योगेश्वर मुद्रा, उनके गले में लिपटे वासुकि नाग, मस्तक पर सुशोभित द्वितीया का चंद्रमा, जटाओं से प्रवाहित होने वाली पवित्र गंगा और उनके हाथों में सुशोभित डमरू की दिव्य ध्वनि का अत्यंत सजीव एवं काव्यात्मक स्मरण कराता है। इस पावन भजन का गायन और श्रवण विशेष रूप से सोमवार के व्रत, प्रदोष काल, महाशिवरात्रि के महान पर्व तथा सावन मास के पवित्र दिनों में भक्तों को शिव तत्व से जोड़ने का कार्य करता है। यह हमें सांसारिक मोह-माया के बंधनों से ऊपर उठकर उस परम सत्य, आद्य गुरु महादेव की शरण में जाने की प्रेरणा देता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

शंभु नाथ रे, शंभु नाथ रे,
मेरे शंभु नाथ रे, शंभु नाथ रे...

जय जय भोलेनाथ शंभु, जय जय भोलेनाथ,
जय जय भोलेनाथ शंभु, जय जय भोलेनाथ।

भस्म रमाए अंग में सोहे, गले में सर्प विराजे,
जटा जूट से गंगा निकले, डमरू डम-डम बाजे।
मेरे शंभु नाथ रे, शंभु नाथ रे...

नंदी की सवारी तेरी, त्रिशूल हाथ में साजे,
भक्तों के तुम कष्ट मिटाते, डमरू डम-डम बाजे।
मेरे शंभु नाथ रे, शंभु नाथ रे...

कैलाश पर्वत है डेरा, भूत प्रेत का पहरा,
तेरी महिमा अपरंपार है, तू है जगत का रखवाला।
मेरे शंभु नाथ रे, शंभु नाथ रे...

अगम तेरा गुणगान करे है, चरणों में सिर झुकाए,
जो भी तेरी शरण में आवे, मनवांछित फल पाए।
मेरे शंभु नाथ रे, शंभु नाथ रे,
मेरे शंभु नाथ रे, शंभु नाथ रे...
जय जय भोलेनाथ शंभु, जय जय भोलेनाथ,
जय जय भोलेनाथ शंभु, जय जय भोलेनाथ।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

अगम अग्रवाल द्वारा गाये गए इस लोकप्रिय शिव भजन "शंभु नाथ रे" का आंतरिक भाव अत्यंत गहरा और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध है। भजन की शुरुआत भक्त की अत्यंत विनीत और प्रेममयी पुकार से होती है, जिसमें वह अपने आराध्य को 'शंभु नाथ' कहकर संबोधित करता है। यह संबोधन इस बात का प्रतीक है कि साधक का भगवान शिव के साथ एक व्यक्तिगत और आत्मीय संबंध स्थापित हो चुका है।

भजन की अगली पंक्तियों में भगवान शिव के अद्वितीय और अलौकिक स्वरूप का वर्णन किया गया है। महादेव संपूर्ण ऐश्वर्य और वैराग्य के प्रतीक हैं। उनके अंग-प्रत्यंग पर लगी भस्म (विभूति) इस नश्वर संसार की वास्तविकता और वैराग्य का संदेश देती है। उनके गले में लिपटा हुआ सर्प इस बात का प्रमाण है कि शिव ने मृत्यु और भय पर पूर्ण विजय प्राप्त कर ली है और वे भयमुक्त हैं। उनकी जटाओं से निकलने वाली माता गंगा का प्रवाह इस पूरी सृष्टि को पवित्र करने वाली उनकी करुणा को दर्शाता है, जबकि उनके डमरू की 'डम-डम' ध्वनि संपूर्ण ब्रह्मांड में नादब्रह्म की उत्पत्ति का प्रतीक है।

भजन में नंदी की सवारी और हाथ में त्रिशूल का उल्लेख शिव के शक्ति और धर्म के संरक्षक होने की पुष्टि करता है। त्रिशूल सत, रज और तम— तीनों गुणों का नियंत्रण करता है। कैलाश पर्वत का एकांत वास और वहां गणों का पहरा इस बात को दर्शाता है कि परमात्मा भौतिक मोह-माया से परे आंतरिक शांति में निवास करते हैं। अंत में गायक अगम स्वयं को समर्पित करते हुए यह संदेश देते हैं कि जो भी मनुष्य सच्चे मन से देवाधिदेव महादेव के चरणों में शीश झुकाता है, उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और उसे भवसागर से मुक्ति मिलती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • आध्यात्मिक वैराग्य का संदेश: यह भजन साधक को भोग-विलास से दूर हटकर शिव के सादगीपूर्ण और वैराग्यमय जीवन से जोड़ने का कार्य करता है।
  • सुलभ एवं कर्णप्रिय संगीत: अगम अग्रवाल की ऊर्जावान और लयबद्ध शैली इस भजन को युवाओं और वृद्धों— दोनों के बीच समान रूप से लोकप्रिय बनाती है।
  • शिव महिमा का संपूर्ण सार: भस्म, सर्प, गंगा, डमरू, त्रिशूल और नंदी— शिव स्वरूप के इन सभी प्रमुख प्रतीकों का सुंदर समावेश इस भजन में मिलता है।
  • मानसिक शांति और एकाग्रता: इस भजन के नियमित श्रवण से मन का भटकाव कम होता है और ध्यान लगाने में सहायता मिलती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

शिव भजनों का आनंद और उनका आध्यात्मिक प्रभाव सही समय और उचित भाव से सुनने पर कई गुना बढ़ जाता है। इस भजन को निम्नलिखित अवसरों पर विशेष रूप से गाया व सुना जा सकता है:

उत्तम तिथियां एवं पर्व

  • प्रत्येक सप्ताह का सोमवार का दिन
  • प्रत्येक मास का प्रदोष व्रत
  • महाशिवरात्रि का पावन पर्व
  • सावन मास (श्रावण मास) के सभी सोमवार एवं विशेष दिन

गायकी एवं श्रवण विधि

  • प्रातःकाल स्नान के पश्चात शिव मंदिर में या घर के पूजा स्थल पर।
  • संध्या बेला में दीपक प्रज्वलित करने के उपरांत।
  • शिवलिंग पर जलाभिषेक या दुग्धाभिषेक करते समय पृष्ठभूमि में।
  • सामूहिक सत्संग और जागरण के दौरान भक्ति भाव से।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity & Saint

इस भजन के केंद्र में सनातन धर्म के सर्वोच्च आराध्य, त्रिमूर्ति में संहारक तथा परम योगी के रूप में प्रतिष्ठित भगवान शिव (महादेव) हैं। शिव ही आदि हैं और शिव ही अंत हैं। उन्हें मृत्युंजय, नीलकंठ, भोलेनाथ और आशुतोष के नाम से भी जाना जाता है। इस भजन को स्वरबद्ध करने वाले युवा गायक अगम अग्रवाल हैं, जिन्होंने अपनी सुमधुर आवाज और आधुनिक संगीत संयोजन के माध्यम से पारंपरिक भक्ति संगीत को युवा पीढ़ी के बीच बेहद लोकप्रिय बनाया है। अगम अग्रवाल की गायकी में एक विशिष्ट प्रकार का उत्साह और समर्पण झलकता है जो श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

"शंभु नाथ रे" भजन की रचना पारंपरिक शिव स्तुति और आधुनिक भजन शैली के अनूठे मेल पर आधारित है। इसे विशेष रूप से उन शिव भक्तों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है जो ऊर्जावान संगीत के साथ-साथ भगवान शिव के गुणों का स्मरण करना पसंद करते हैं। इस प्रकार के भजन वर्तमान समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया के माध्यम से घर-घर तक पहुंच रहे हैं, जिससे नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों से जुड़ रही है। अगम अग्रवाल के प्रोजेक्ट्स में हमेशा से ही शुद्धता और भक्ति भाव का विशेष ध्यान रखा जाता है, जो इस भजन में भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल, सहज और प्रवाहमयी हिंदी-अवधी मिश्रित बोलचाल की भाषा में रचित है, जिसे आमजन आसानी से समझ सकता है और गा सकता है। इसकी काव्य शैली लयात्मक (Rhyming) है, जिसमें अनुप्रास और पुनरुक्ति अलंकारों का सुंदर प्रयोग किया गया है (जैसे- 'डम-डम बाजे', 'शंभु नाथ रे, शंभु नाथ रे')। यह शैली भजन को गाते समय एक विशेष प्रकार की ताल और गति प्रदान करती है, जिससे मंडली में या अकेले गाते समय आनंद की प्राप्ति होती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • अहंकार का त्याग: भस्म रमाए हुए शिव यह सिखाते हैं कि अंत में सब कुछ राख हो जाना है, इसलिए जीवन में अहंकार का कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
  • संकट में धैर्य: जैसे विषधर सर्प गले में होने पर भी शिव शांत रहते हैं, वैसे ही मनुष्य को विपरीत परिस्थिति में धैर्य नहीं खोना चाहिए।
  • शरणागत की रक्षा: भगवान शिव अपनी शरण में आने वाले हर छोटे-बड़े जीव और भक्त के सभी कष्टों का निवारण करते हैं।
  • नियमित साधना का महत्व: निरंतर नाम स्मरण और गुणगान से साधक का मन पवित्र और शांत होता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पदावली सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
शंभु कल्याण करने वाला जो सबका मंगल और कल्याण करे
भस्म विभूति / राख नश्वरता और परम वैराग्य का प्रतीक
जटा जूट बिखरी हुई लंबी जटाएं योगियों और तपस्वियों का सर्वोच्च स्वरूप
डमरू शिव का वाद्य यंत्र ब्रह्मांडीय नाद और सृष्टि की उत्पत्ति का नाद
अपरंपार जिसकी कोई सीमा न हो ईश्वर की अनंत महिमा

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"भस्म रमाए अंग में सोहे, गले में सर्प विराजे..."
इस पंक्ति का अर्थ है कि भगवान शिव अपने शरीर पर भस्म रमाते हैं जो उनके परम वैरागी होने का प्रतीक है। उनके गले में भयानक सर्प भी आभूषण की तरह सुशोभित रहता है, जो यह दर्शाता है कि वे भय और काल से परे हैं।

"जटा जूट से गंगा निकले, डमरू डम-डम बाजे..."
यहाँ कवि वर्णन करता है कि शिव की पवित्र जटाओं से मोक्षदायिनी गंगा प्रवाहित होती हैं और उनके हाथ में सुशोभित डमरू अपनी 'डम-डम' ध्वनि से संपूर्ण ब्रह्मांड में ऊर्जा का संचार करता है।

"कैलाश पर्वत है डेरा, भूत प्रेत का पहरा..."
महादेव का निवास स्थान भौतिक सुख-सुविधाओं से दूर बर्फ से ढका कैलाश पर्वत है, जहाँ उनके गणों के रूप में भूत-प्रेत और अघोरी निवास करते हैं, जो यह बताता है कि भगवान किसी बाहरी दिखावे के मोहताज नहीं हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं मंत्र | Related Mantra & Shlok

इस भजन के श्रवण के पश्चात भगवान शिव के पंचाक्षर मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। शिव साधना से जुड़े कुछ प्रमुख श्लोक एवं मंत्र निम्नलिखित हैं:

ॐ नमः शिवाय् ॥
"मूल पंचाक्षर शिव मंत्र"

करचरणकृतं वा कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसं वा अपराधम् ।< विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व जय जय करुणाब् श्रीमहादेव शम्भो ॥
"शिव अपराध क्षमा स्तोत्र"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम शंभु नाथ रे (Shambhu Nath Re)
गायक / स्वर अगम अग्रवाल (Agam Agrawal)
आराध्य देव भगवान शिव / महादेव (Lord Shiva)
भाषा हिंदी / अवधी मिश्रित
विषय एवं थीम शिव महिमा, वैराग्य, भक्ति और शरणगति
प्रमुख भाव समर्पण, आनंद, भक्ति और विनय
उपयुक्त अवसर सोमवार व्रत, सावन मास, प्रदोष, महाशिवरात्रि

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध शिव भजन के गायक लोकप्रिय युवा भजन गायक अगम अग्रवाल (Agam Agrawal) हैं।

'शंभु' संस्कृत भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है— "जो कल्याण, मंगल या सुख को उत्पन्न करता है अथवा कल्याणकारी है"। यह भगवान शिव का एक प्रमुख नाम है।

इस भजन को आप प्रतिदिन सुबह या शाम की पूजा के समय गा सकते हैं। विशेष रूप से सोमवार के दिन, प्रदोष व्रत, सावन मास और महाशिवरात्रि पर इसका श्रवण और गायन अत्यंत फलदायी होता है।

इस भजन के मुख्य बोल हैं— "शंभु नाथ रे, शंभु नाथ रे, मेरे शंभु नाथ रे... जय जय भोलेनाथ शंभु, जय जय भोलेनाथ।"

हाँ, महाशिवरात्रि और सावन के मेलों तथा सत्संग के दौरान यह भजन अत्यंत उत्साह के साथ मंदिरों और पंडालों में बजाया जाता है।

भस्म इस संसार की नश्वरता का प्रतीक है। यह सिखाती है कि शरीर अंततः मिट्टी या राख हो जाना है, इसलिए भौतिक शरीर से ऊपर उठकर आत्मा की शुद्धि पर ध्यान देना चाहिए।

यह भजन हमें अहंकार का त्याग करने, विपरीत परिस्थितियों में धैर्य रखने और पूर्ण समर्पण के साथ महादेव की शरण में जाने की प्रेरणा देता है।

हाँ, भक्तजन इसे देवनागरी (हिंदी) के साथ-साथ अंग्रेजी और क्षेत्रीय लिपियों में भी ऑनलाइन पढ़ और गा सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री: Bhaktilok.in पर प्रस्तुत यह भजन आलेख और संपूर्ण लिरिक्स पाठकों की धार्मिक एवं आध्यात्मिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पूरी प्रमाणिकता के साथ तैयार किया गया है। इसमें किसी भी प्रकार की भ्रामक या असत्यापित जानकारी का समावेश नहीं किया गया है। यदि आप शिव भक्ति से जुड़ी अन्य रचनाएं पढ़ना चाहते हैं, तो हमारी वेबसाइट के अन्य पृष्ठों का अवलोकन करें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक शिव स्तोत्र एवं भजन संग्रह परंपरा।
  • अगम अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत आधिकारिक ऑडियो एवं वीडियो प्रकाशन संदर्भ।
  • शिव पुराण एवं सनातन पौराणिक ग्रंथ कथा संदर्भ।

संबंधित भजन एवं लेख

श्री शिव तांडव स्तोत्रम्

रावण रचित महाकाल का अत्यंत ओजस्वी और शक्तिशाली स्तोत्र।

महामृत्युंजय मंत्र अर्थ सहित

अकाल मृत्यु से रक्षा करने वाला और आयु-स्वास्थ्य वर्धक वैदिक मंत्र।

श्री हनुमान चालीसा लिरिक्स

संकट मोचन हनुमान जी की महिमा और संपूर्ण चालीसा पाठ।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!