Hanuman Bhajan

संकट ने घेरा है आज तेरा राम पुकारे रे हनुमान भजन लिरिक्स (Sankat Ne Ghera Hai Aaj Tera Ram Pukare Lyrics in Hindi) - Hanuman Bhajan Rekha Garg - Bhaktilok

167 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

राम के संकट में हनुमान की भक्ति

हनुमान जी की शरण में आएं, संकटों का निवारण करें और राम की कृपा प्राप्त करें।

संकट ने घेरा हैं आज तेरा राम पुकारे रे आजा मेरे हनुमान भाई की मूरछा को तोड़के प्राण बचा ले रे आजा मेरे हनुमान ॥ पापी ने धोखे से शक्ति को दे मारामूर्छित पड़ा देखो कैसे लखन प्यारा मेरी लाज तू आकर बचा तेरा राम पुकारे रे आजा मेरे हनुमान ॥ माता को जाकर के मैं क्या बताऊं दुनीया को अब कैसे मुखड़ा दिखाऊंगा तुझे आँख में आंसू लिए तेरा राम पुकारे रे आजा मेरे हनुमान ॥ सूरज के उगने से पहले चले आना वरना मुझे भी तू जिन्दा नहीं पाना भाई का गम कैसे सहूं तेरा राम पुकारे रे आजा मेरे हनुमान ॥ तेरे राम को जब भी दुखड़ों ने घेरा है आकर के तूने ही यम से उभरा है अब ‘हर्ष’ क्यूँ देरी करे तेरा राम पुकारे रे आजा मेरे हनुमान ॥
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन के माध्यम से भक्त श्री राम की स्तुति करते हुए हनुमान जी से निराशा और संकट के समय सहायता की याचना कर रहे हैं। पहले चरण में कहा गया है कि संकट ने भक्त को घेर लिया है और राम की पुकार पर हनुमान जी को आना चाहिए। यहाँ 'संकट' शब्द से अभिप्रेत है कि जीवन में आने वाली कठिनाइयों से मुक्ति का मार्ग केवल हनुमान जी के निर्देशन में ही संभव है। 'भाई की मूरछा को तोड़के प्राण बचा ले' से यह दर्शाया गया है कि हनुमान जी की शक्ति सभी बुराइयों को नष्ट कर सकती है। भक्त का राम से जुड़ाव, भक्ति की गहराई और यह विश्वास कि हनुमान जी प्राणों की रक्षा करेंगे, भक्ति के उत्कृष्ट भाव को दर्शाता है।

इस भजन में भावनात्मक तीव्रता का समावेश है। विशेष रूप से, जब संभवतः भक्त ने अपने भाई लखन की स्थिति को देखकर चिंता प्रकट की है। यह दिखाता है कि भक्ति केवल व्यक्तिगत या आध्यात्मिक नहीं होती, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक संबंधों से भी जुड़ी होती है। भक्त हनुमान से कहता है, 'मेरी लाज तू आकर बचा', जो उस स्थिति की गंभीरता को प्रदर्शित करता है। आत्मीयता, आंसू, और क्रोध की भावनाएँ मिलकर एक गहन भक्ति भावना को जन्म देती हैं। प्रार्थना करना केवल एक कार्य नहीं, बल्कि हृदय से जुड़ी एक तड़प है। भक्त हनुमान जी से राम की कृपा प्राप्त करने के लिए अपनी भावना प्रकट कर रहा है और चाहता है कि संकट की घड़ी में हनुमान जी उनकी मदद करें।

इस भजन का मुख्य उद्देश्य भक्ति मार्ग का अनुसरण करना है। भारतीय दर्शन में, भक्ति मार्ग को भगवान से जुड़ने का सर्वोत्तम और सरलतम तरीका माना जाता है। भक्त के शब्दों में न केवल संकट का वर्णन किया गया है, बल्कि आत्मीयता और विश्वास का अभिव्यक्ति भी है। जब भक्त कहता है, 'तेरे राम को जब भी दुखड़ों ने घेरा है', तब वह यह संकेत देता है कि हर बार जब भी संकट आया है, हनुमान जी ने उनकी सहायता की है। यह विश्वास, शरणागति का भाव, और हनुमान जी की असीम शक्ति की ओर इशारा करता है। यह भक्ति का प्रमाण है कि कैसे हर भक्ति मार्ग पर चलने वाले को एक सच्चे मार्गदर्शक की आवश्यकता होती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भजन में हनुमान जी की महिमा का गुणगान करते हुए भक्त ने संकट में जब भी राम को पुकारा, तब हनुमान ने दिव्य सहायता प्रदान की। रामायण में हनुमान जी को राम का अनन्य भक्त माना गया है। वे संकट के समय हमेशा साथ रहते हैं और भक्तों की लाज बचाते हैं। उनकी भक्ति ही सुनिश्चित करती है कि भक्त का उद्धार हो। पुराणों में भी ऐसी कई कथाएँ हैं जहाँ हनुमान जी ने भक्तों को संकट से उबारा है, जैसे जब उन्होंने रावण का सामना करना पड़ा। इस भजन में संकट, भक्ति और अपनी सीमाओं को पार करने की प्रेरणा दी गई है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। इस भजन का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति, आत्मबल, और सकारात्मकता की वृद्धि होती है। भक्त को संकट के समय में सहारा मिलता है और राम के प्रति भक्ति और प्रेम का भाव बढ़ता है। हनुमान जी की कृपा से शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सामना करने में साहस मिलता है। यह भक्ति, व्यक्ति के जीवन में एक नई ऊर्जा, स्फूर्ति और संकल्प शक्ति का संचार करती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ प्रात: काल सूर्योदय के समय या संध्या समय करना सर्वोत्तम रहता है। पूजा के दौरान एक दीप जलाना और हनुमान जी के चित्र के सामने बैठकर ध्यान करने से मन शांति और एकाग्रता में बढ़ती है। भक्त को समर्पण भाव से भावुकता के साथ पाठ करना चाहिए, जिससे असीम शक्ति का अनुभव किया जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का प्रमुख संदेश क्या है?

इस भजन का प्रमुख संदेश यह है कि संकट के समय में हनुमान जी का स्मरण करना चाहिए, क्योंकि वे संकटों को दूर करने की शक्ति रखते हैं।

क्या यह भजन विशेष अवसरों पर गाना चाहिए?

यह भजन किसी भी कठिनाई या संकट के समय गाना चाहिए, विशेषकर जब व्यक्ति मानसिक या भावनात्मक कठिनाई का सामना कर रहा हो।

हनुमान जी की भक्ति का क्या महत्व है?

हनुमान जी की भक्ति का महत्व यह है कि वे संकटों में जनहित के लिए सदैव तत्पर रहते हैं, और उनकी कृपा से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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