कलयुग के जागृत एवं प्रत्यक्ष देवता श्री संकटमोचन हनुमान जी की असीम महिमा और उनके चरणों में अनन्य समर्पण का भाव जगाने वाला अत्यंत लोकप्रिय भजन "संकट के साथी को हनुमान कहते हैं" (Sankat Ke Sathi ko Hanuman kahate Hai) भक्तजनों के बीच अत्यंत आदर के साथ गाया जाता है। यह भजन गायक जय शंकर चौधरी द्वारा स्वरबद्ध और प्रस्तुत किया गया है, जो श्रोताओं के हृदय में अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा, साहस और भक्ति का संचार करता है। हिंदू सनातन परंपरा में जब भी जीवन में कोई विकट परिस्थिति, बाधा या संकट उत्पन्न होता है, तो सबसे पहले हनुमान जी का ही स्मरण किया जाता है। अष्ट सिद्धि और नौ निधि के दाता पवनपुत्र हनुमान अपने भक्तों के सभी दुखों को क्षण भर में दूर करने वाले 'संकटमोचन' कहलाते हैं। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल (Lyrics), उसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ, भावार्थ, गायन की विधि, जीवन में इसके महत्व और इससे जुड़ी सभी आवश्यक जानकारियों का संपूर्ण विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
स्थाई (Mukhda):
संकट के साथी को हनुमान कहते हैं,
दुखियों के दुःख को जो हर ले, उसे हनुमान कहते हैं।
राम नाम की महिमा जो दुनिया को बताते हैं,
ऐसे महाबली वीर हनुमान को हम शीश झुकाते हैं।
अंतरा 1 (Antara 1):
लंका को जलाया और सीता की सुधि लाए,
लक्ष्मण के प्राण बचाने संजीवनी बूटी लाए।
अंजनी के लाल महाबली बलशाली कहलाते हैं,
भक्तों की पुकार पर दौड़े चले आते हैं।
अंतरा 2 (Antara 2):
कलयुग में जागृत देव वही कहलाते हैं,
जो राम नाम की माला हर दम जपते हैं।
भूत पिशाच निकट नहीं आवे,
महावीर जब नाम सुनावै।
अंतरा 3 (Antara 3):
संकट मोचन नाम तुम्हारा, सब दुखों को टारे,
जो भी शरण तुम्हारी आए, उसके भाग्य सवारे।
जय शंकर चौधरी गाए महिमा तुम्हारी गाथा,
कण-कण में बसी है हनुमान तेरी पावन गाथा।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन साधक के भीतर के भय, निराशा और कमजोरियों को दूर कर आध्यात्मिक आत्मबल जगाने का एक दिव्य माध्यम है। भजन की प्रथम पंक्ति "संकट के साथी को हनुमान कहते हैं" इस सत्य को स्थापित करती है कि जब दुनिया का हर दरवाजा बंद हो जाता है और चारों तरफ संकट के बादल मंडराते हैं, तब केवल पवनसुत्र हनुमान ही ऐसे साक्षात साथी हैं जो साधक का हाथ थामते हैं।
भजन के अंतरा भागों में हनुमान जी के महान पराक्रम और उनके लोक-कल्याणकारी स्वरूप का स्मरण किया गया है। लंका दहन के समय उनके शौर्य ने अधर्म का नाश किया, वहीं लक्ष्मण जी के मूर्च्छित होने पर द्रोणगिरि पर्वत से संजीवनी बूटी लाकर उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि अपने प्रभु श्री राम के भक्तों के प्राणों की रक्षा के लिए वे अपना सर्वस्व न्योछावर कर सकते हैं। गायक जय शंकर चौधरी ने इस भजन के माध्यम से यह संदेश दिया है कि जो व्यक्ति निष्काम भाव से श्री हनुमान की शरण में जाता है, उसके जीवन के सभी कष्ट स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
श्री हनुमान जी से जुड़े भजनों का सनातन संस्कृति में विशेष स्थान है। यह भजन केवल एक संगीत रचना नहीं है, बल्कि यह संकट के समय धैर्य और साहस बनाए रखने की प्रेरणा देने वाला मानसिक टॉनिक है।
- भय निवारण: इस भजन के निरंतर श्रवण या गायन से मन का अज्ञात भय, चिंता और मानसिक तनाव दूर होता है।
- कलयुग के प्रभाव से मुक्ति: हनुमान जी को कलयुग के अमर और जागृत देवता माना गया है। उनका स्मरण करने मात्र से नकारात्मक ऊर्जाएं दूर होती हैं।
- भक्ति और समर्पण: यह भजन साधक को अहंकार त्याग कर भगवान श्री राम और हनुमान जी के प्रति शरणागत होने की प्रेरणा देता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस पावन भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, परंतु विशेष अवसरों पर इसका प्रभाव और भी अधिक बढ़ जाता है:
- मंगलवार और शनिवार: हनुमान जी को समर्पित इन दोनों वारों पर प्रातः काल स्नान के पश्चात हनुमान मंदिर में या घर के पूजा स्थल पर दीप प्रज्वलित कर इस भजन का गान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- संकट के समय: जब भी जीवन में कोई बड़ी चुनौती या मानसिक अशांति हो, तब एकाग्रचित होकर इस भजन का पाठ करना चाहिए।
- सत्संग और जागरण: हनुमान भक्तों की मंडली, सुंदरकांड पाठ या रात्रि जागरण के दौरान इस भजन को सामूहिक रूप से गाने पर अद्भुत आनंद की प्राप्ति होती है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन के केंद्र में संकटमोचन महाबली हनुमान हैं, जो भगवान श्री राम के परम भक्त, अष्ट सिद्धि और नौ निधि के दाता तथा माता अंजनी और केसरी नंदन के पुत्र हैं। उनके साथ ही मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का स्मरण इस भजन की आध्यात्मिक चेतना को और अधिक प्रबल करता है। इसके रचयिता एवं गायक जय शंकर चौधरी हैं, जिन्होंने अपनी मधुर वाणी और भक्ति भाव से इसे श्रद्धालुओं के बीच लोकप्रिय बनाया है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
भजन रचना की परंपरा भारत में सदियों पुरानी है। लोक संगीत और शास्त्रीय भक्ति परंपरा के मिश्रण से तैयार यह भजन जय शंकर चौधरी की संगीत साधना का परिणाम है। आधुनिक समय में डिजिटल माध्यमों और श्री हनुमान चालीसा के प्रसार के साथ ही ऐसे भजनों ने घर-घर में हनुमान भक्ति की अलख जगाई है। इसकी पंक्तियां सरल हिंदी और अवधि के मिले-जुले शब्दों में रची गई हैं, जिसे आम जनमानस आसानी से समझ और गा सकता है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा सरल हिंदी, ब्रज और अवधी मिश्रित लोक भाषा है। इसमें उपमा और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग किया गया है। शब्दों की लयबद्धता श्रोताओं को स्वतः ही थिरकने और झूमने पर विवश कर देती है। इसकी काव्य संरचना चौपाई और लोकगीत शैली के अनूठे समन्वय पर आधारित है, जो गाते समय एक अलग ही आनंद की अनुभूति कराती है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन की हर विषम परिस्थिति में भी अपने इष्ट पर अटूट विश्वास रखना चाहिए। संकट आने पर घबराने के बजाय उसका सामना करने का साहस हनुमान जी के चरित्र से मिलता है। जिस प्रकार हनुमान जी ने हर विकट कार्य को 'जय श्री राम' बोलकर सहजता से पूरा किया, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने कर्म पथ पर अडिग रहना चाहिए।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल अर्थ | संदर्भ / भाव |
|---|---|---|
| संकटमोचन | संकटों को दूर करने वाला | हनुमान जी का विशेष नाम |
| सुधि | खबर / सुध-बुध | माता सीता की खोज का प्रसंग |
| संजीवनी बूटी | जीवन देने वाली दिव्य औषधि | लक्ष्मण जी के प्राण रक्षा का प्रसंग |
| महाबली | अत्यधिक बलवान | हनुमान जी का पराक्रम |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"संकट के साथी को हनुमान कहते हैं..." - इस पंक्ति का भाव यह है कि वास्तविक मित्र वही है जो विपत्ति के समय साथ निभाए। हनुमान जी अपने भक्तों के संकटों को हरने वाले परम साथी हैं।
"लंका को जलाया और सीता की सुधि लाए..." - यह पंक्ति हनुमान जी के रावण की लंका दहन और अशोक वाटिका में माता सीता को रामजी की अंगूठी देने के ऐतिहासिक पौराणिक प्रसंग को दर्शाती है।
"भूत पिशाच निकट नहीं आवे, महावीर जब नाम सुनावै..." - यह हनुमान चालीसा की प्रसिद्ध पंक्ति का सार है, जो यह बताती है कि हनुमान जी के स्मरण से नकारात्मक शक्तियां और भय पास भी नहीं फटकते।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्री रामदूतम शरणं प्रपद्ये॥
इस पावन श्लोक के साथ हनुमान भजनों का पाठ करने से मानसिक एकाग्रता और आंतरिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। आप हनुमान जी के आशीर्वाद के लिए सुंदरकांड पाठ का भी अध्ययन कर सकते हैं।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विवरण | तथ्य / जानकारी |
|---|---|
| भजन का नाम | संकट के साथी को हनुमान कहते हैं (Sankat Ke Sathi ko Hanuman kahate Hai) |
| गायक / कलाकार | जय शंकर चौधरी (Jai Shankar Chaudhary) |
| आराध्य देव | संकटमोचन श्री हनुमान जी |
| भाषा | हिंदी / अवधी |
| मुख्य भाव | भक्ति, समर्पण, भय निवारण और संकट मोचन महिमा |
| उपयुक्त अवसर | मंगलवार पूजा, शनिवार व्रत, जागरण, हनुमान जयंती |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
'संकट के साथी को हनुमान कहते हैं' भजन के गायक कौन हैं?
इस लोकप्रिय भजन को गायक जय शंकर चौधरी ने अपने मधुर स्वरों में गाया है।
इस भजन को किस दिन गाना सबसे उत्तम माना जाता है?
इस भजन को मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी के समक्ष दीप प्रज्वलित करके गाना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
हनुमान जी को संकटमोचन क्यों कहा जाता है?
हनुमान जी ने अपने भक्तों और प्रभु श्री राम के सभी संकटों का हमेशा निवारण किया है, इसलिए उन्हें 'संकटमोचन' कहा जाता है।
क्या इस भजन को घर पर नियमित रूप से गाया जा सकता है?
हाँ, इस भजन को घर के पूजा स्थल पर प्रातः या संध्या आरती के समय नियमित रूप से गाया जा सकता है जिससे सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
हनुमान जी की पूजा से कौन से ग्रह शांत होते हैं?
हनुमान जी की उपासना से मंगल और शनि से जुड़े दोषों का निवारण होता है। आप श्री शनी देव आरती का पाठ भी साथ में कर सकते हैं।
इस भजन का मुख्य आध्यात्मिक संदेश क्या है?
यह भजन सिखाता है कि संकट के समय केवल भगवान और अपने इष्ट पर अटूट विश्वास रखना चाहिए, वे हर विपत्ति से उबारते हैं।
क्या हनुमान जी के स्मरण मात्र से भय दूर होता है?
हाँ, सनातन परंपरा और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार हनुमान जी का स्मरण करने से बड़े से बड़ा भय और मानसिक संकट दूर हो जाता है।
हनुमान भक्ति से जीवन में क्या लाभ मिलता है?
हनुमान जी की भक्ति से बल, बुद्धि, विद्या, साहस और आरोग्य की प्राप्ति होती है तथा साधक निर्भय बनता है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह सामग्री Bhaktilok.in के उच्च संपादकीय मानकों के तहत सनातन धार्मिक साहित्य, लोक परंपराओं और हनुमान भक्ति के स्रोतों का अध्ययन करके तैयार की गई है। इसका उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक, शुद्ध और प्रेरणादायक भक्ति सामग्री उपलब्ध कराना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्री हनुमान चालीसा एवं सुंदरकांड (तुलसीदास कृत पारंपरिक ग्रंथ)
- सनातन लोक कथाएं एवं हनुमान भजन परंपरा
- वैदिक ज्योतिष एवं पंचांग संदर्भ ग्रंथ
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