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Mahadev Bhajan

जय तू जय देवा सदाशिवा आरती महादेवा लिरिक्स (Jai Tu Jai Deva Sadashiva Aarti Mahadeva Lyrics in Hindi) - ranjana thakur Shiv Aarti - Bhaktilok

581 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री शिव आरती: दिव्यता का उद्घाटन

महादेव की महिमा का बखान करती इस आरती का जाप भक्ति और श्रद्धा से करें।

जय तू जय देवा सदाशिवा आरती महादेवा जय तू जय देवा ।।धृ ।।महादेव निघाले शिकारी ढवळ्या नंद्यावरी महादेव निघाले ।।जीनबा त्याहीचा सोनेरी लगाम कारागिरी जय तू जय देवा ।।जय तू जय देवा सदाशिवा आरती महादेवा जय तू जय देवा ।।धृ ।।चार बाई सडका सोडोनी हिंडता राणोरानी चार बाई सडका ।।गीरजा एकली गुंफेत उदास तिचे चित्त गिरजा एकली ।।तेथे देव नांदतो हा माळी धनाचा गवळी तेथे देव नांदतो ।।धन गवळी धनात मोतिशेष पाण्यात धन गवळी धनात ।।धन तू धनाचा धन गवळी गायी म्हशीं वाडे भरी धन तू धनाचा ।।गायी म्हशीन भर वाडे भक्त देतील झाडे गायी म्हशीन ।।काशी आमुची गुरु माय वंदीन तिचे पाय काशी आमुची ।।धु धु नागाचा धूनकारगरजले अंबर धु धु नागाचा ।।आडवी आहेसे बेल नदी सूर्यासमोर वाहे आडवी आहेसे ।।पांचा दिवसाची पंचमी आली हो नागेश्वरा पांचा दिवसाची ।।फुलोरे बांधले अवसरी आनंद घरोघरी फुलोरे बांधले ।।कापूर जळतो मणावरी नागाच्या दरबारी कापूर जळतो ।।म्होरका पूरभा स्वयंवर देवाच्या वाटेवर म्होरका पूरभा ।।ओटा बांधला चौफेर मंधी वडाचे झाड ओटा बांधला ।।जय तू जय देवा सदाशिवा आरती महादेवा जय तू जय देवा ।।धृ ।।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस आरती में भगवान शिव की अनेक विशेषताओं और उनके भक्तों के प्रति उनके अनुकंपा का वर्णन किया गया है। 'जय तू जय देवा सदाशिवा आरती महादेवा' की पंक्तियाँ महादेव की स्तुति करते हुए उनकी दिव्यता और शक्तियों का बखान करती हैं। आरती में यह बताया गया है कि महादेव का स्वरूप कैसे धरती पर भक्ति की धारा को स्थापित करता है और भक्तों को मानसिक शांति और समृद्धि प्रदान करता है। 'महादेव निघाले शिकारी' में महादेव की अद्वितीयता का परिचय मिलता है, प्रेरणा मिलती है कि वह अपने अनुयायियों की आवश्यकताओं को समझते हैं।

इस भगवती भक्ति में एक गहराई है जो भक्त के हृदय को सुकून देती है। 'काशी आमुची गुरु माय' पंक्ति ने काशी की महिमा को दर्शाया है, जो शिव की पूजा के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। भक्तों के मन में महादेव के प्रति असीम प्रेम और श्रद्धा का भाव पनपता है। विशेष रूप से, 'धन गवळी धनात मोतिशेष पाण्यात' का संदर्भ यह दर्शाता है कि महादेव सच्चे धन, यानी आत्मिक समृद्धि की ओर हमारे मार्गदर्शक हैं। कष्ट एवं कठिनाइयों में भी उनका ध्यान हमें सही रास्ते पर ले जाता है।

इस आरती में भक्तिपथ के सिद्धांत और दर्शन को बखाना गया है। भक्त अपने समर्पण के माध्यम से शिव से जुड़कर आत्मा की जगत की सच्चाइयों का अनुभव कर सकता है। 'धु धु नागाचा धूनकार' की पंक्तियाँ कुण्डलिनी शक्ति का प्रतीक है, जो शिव में समाहित होती है। भक्ति मार्ग पर चलते हुए व्यक्ति अपनी चेतना को ऊपर उठाता है और आत्मा के साथ शिव के एकत्व का अनुभव करता है। यहाँ तक कि 'फुलोरे बांधले अवसरी' जैसे वाक्य भी जीवन की रंगीनियों और खुशी को दर्शाते हैं जो शिव भक्ति के द्वारा मिलती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस आरती का प्रमुख संदर्भ शैव परंपरा में गहराई से जुड़ा हुआ है। भगवान शिव का धार्मिक ऐतिहासिक महत्व अद्वितीय है, जिसे 'शिवपुराण' और 'महाभारत' में विस्तार से वर्णन किया गया है। शिव को तांडव और नृत्य का देवता माना गया है, जो अराजकता में भी नियंत्रक बने रहते हैं। उनके प्रति भक्ति सर्वोच्च और निरंतर होती है। भक्त इस आरती के माध्यम से आनंद और शांति की अनुभूति करते हैं।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। इस आरती का जाप करने से मानसिक शांति, नकारात्मकता का शमन, और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। शिव आरती के जाप से भक्त आर्थिक स्थिरता और सामाजिक समृद्धि भी प्राप्त कर सकते हैं। यह आरती भक्तों को कठिनाई और कष्टों में धैर्य देने के साथ-साथ आध्यात्मिक रूप से जागरूक करती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस आरती का जाप सुबह या शाम के समय करना सबसे उत्तम होता है। देव की पूजा के लिए एक दीपक जलाकर, शुद्धता के साथ मन और शरीर को तैयार करना आवश्यक है। बैठने की मुद्रा सीधी और आरामदायक होनी चाहिए। ध्यान में स्थित होकर शिव की महिमा का ध्यान करते हुए आरती का जाप करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस आरती का महत्व क्या है?

यह आरती भगवान शिव की भक्ति का प्रतीक है और यह मनुष्य को मानसिक शांति और समर्पण का अनुभव कराती है।

क्या आरती का नियमित जाप करना चाहिए?

हां, इस आरती का नियमित जाप करने से भक्त को आर्थिक, मानसिक, और आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं।

आरती में किन पंक्तियों का विशेष महत्व है?

आरती की पंक्तियाँ जैसे 'धन गवळी धनात मोतिशेष पाण्यात' का अर्थ है कि भगवान शिव सच्चे धन और समृद्धि के प्रतीक हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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