Matarani Bhajan गुरुवार विशेष (भगवान श्री हरि विष्णु व गुरुदेव)

तुझसे मेरी किस्मत फितरत है साई भजन इन हिंदी

पढ़ें तुझसे मेरी किस्मत फितरत है साई भजन इन हिंदी का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

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SEO Title: तुझसे मेरी किस्मत फितरत है साई भजन लिरिक्स और विस्तृत भावार्थ | Tujhase Meri Kismat Fitarat Hai Sai

Meta Description: शिरडी के साईं बाबा का अत्यंत लोकप्रिय भजन 'तुझसे मेरी किस्मत फितरत है साई' के सम्पूर्ण लिरिक्स, हिंदी भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व, शब्दार्थ और पंक्ति-दर-पंक्ति व्याख्या का प्रामाणिक संग्रह।

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Categories: Matarani Bhajan, Subramanya Ashtottara Shatanamavali, Sai Baba Bhajan

शिरडी के परम पावन संत श्री साईं बाबा को समर्पित भजन "तुझसे मेरी किस्मत फितरत है साई" भक्ति रस से सराबोर एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी रचना है। यह भजन भक्त के अंतःकरण में छिपे पूर्ण आत्मसमर्पण (शरणागति) के भाव को प्रकट करता है। साईं बाबा का संपूर्ण जीवन सादगी, करुणा, सहिष्णुता और 'सबका मालिक एक' के अद्वैत सिद्धांत पर आधारित था। इस भजन के माध्यम से एक साधक अपने जीवन की दिशा, दशा, भाग्य (किस्मत) और अपने स्वभाव (फितरत) को बाबा के श्रीचरणों में समर्पित कर देता है। जब कोई भक्त पूर्ण श्रद्धा और सबूरी (धैर्य) के साथ इस भजन का गायन या श्रवण करता है, तो उसे मानसिक शांति, आध्यात्मिक संतोष और बाबा की दिव्य उपस्थिति का साक्षात अनुभव होता है। यह भजन न केवल एक प्रार्थना है, बल्कि यह जीव और परमात्मा के बीच के उस अटूट संबंध को भी रेखांकित करता है जो समय और परिस्थितियों से परे है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

|| तुझसे मेरी किस्मत फितरत है साई ||

स्थायी (मुखड़ा)

तुझसे मेरी किस्मत फितरत है साईं,
तुझसे ही मेरी हर राहत है साईं।
तेरे बिना मैं कुछ भी नहीं हूँ,
तू ही मेरी सच्ची इबादत है साईं॥

अंतरा - 1

शिरडी के दाता तू ही विधाता,
तुझसे ही मेरा जनमों का नाता।
चरणों में तेरे जन्नत है मेरी,
तू ही मेरी बिगड़ी बनाने आता॥

अंतरा - 2

धूनी की उदी माथे सजाऊँ,
तेरी दया से मैं सब कुछ पाऊँ।
श्रद्धा सबूरी का मार्ग दिखाकर,
भवसागर से पार मैं जाऊँ॥

अंतरा - 3

सबका है मालिक एक ही दाता,
दीन-दुखियों का तू ही सहारा।
साईं रहम नजर करना हम पर,
तेरे बिना कोई नहीं हमारा॥

समर्पण (तिहाई)

तुझसे मेरी किस्मत फितरत है साईं,
तू ही मेरी सच्ची इबादत है साईं॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

"तुझसे मेरी किस्मत फितरत है साई" भजन का मूल भाव पूर्ण शरणागति और अनन्य भक्ति का है। इस भजन में प्रयुक्त प्रत्येक शब्द भक्त के हृदय की व्याकुलता और साईं के प्रति अगाध विश्वास को दर्शाता है। यहाँ 'किस्मत' का अर्थ केवल भाग्य नहीं, बल्कि जीवन की समस्त घटनाओं और प्रारब्ध से है। भक्त स्वीकार करता है कि उसका भाग्य किसी और के हाथ में नहीं, बल्कि उसके प्यारे साईं के हाथों में सुरक्षित है। 'फितरत' शब्द मनुष्य के मूल स्वभाव को दर्शाता है; भक्त कहता है कि उसका स्वभाव भी साईं की शिक्षाओं और उनकी करुणा के रंग में रंग चुका है।

भजन के प्रथम भाग में भक्त कहता है कि साईं के बिना उसका कोई अस्तित्व नहीं है। वह अपनी प्रार्थनाओं, ध्यान और कर्मों को 'इबादत' का रूप देता है, जो कि सूफी मत और सगुण भक्ति का एक सुंदर समन्वय है। शिरडी के साईं बाबा ने सदैव हिंदू-मुस्लिम एकता और सभी धर्मों के मूल सत्य को एक माना। इसलिए इस भजन की भाषा में भी वह गंगा-जमुनी तहजीब दिखाई देती है, जहाँ 'इबादत' और 'विधाता' जैसे शब्द एक साथ मिलकर ईश्वर की सर्वव्यापकता को सिद्ध करते हैं।

द्वितीय और तृतीय अंतरे में बाबा की चमत्कारी 'उदी' (पवित्र भस्म) और उनके मूल मंत्र 'श्रद्धा-सबूरी' का गुणगान किया गया है। उदी केवल राख नहीं है, बल्कि यह संसार की नश्वरता और बाबा के आशीर्वाद का प्रतीक है। जब भक्त इसे अपने माथे पर लगाता है, तो उसके शारीरिक और मानसिक कष्ट स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं। श्रद्धा (पूर्ण विश्वास) और सबूरी (धैर्य) वे दो सिक्के हैं जो बाबा अपने भक्तों से मांगते हैं। इस मार्ग पर चलकर ही जीव इस संसार रूपी भवसागर को पार कर मोक्ष प्राप्त कर सकता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन साईं भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है क्योंकि यह अत्यंत सरल शब्दों में गहन वेदांत और सूफी दर्शन को समेटे हुए है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • पूर्ण आत्मसमर्पण का भाव: यह भजन साधक को अहंकार से मुक्त कर ईश्वर के चरणों में पूर्ण समर्पण करना सिखाता है।
  • सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक: भजन में प्रयुक्त शब्दावली जैसे 'इबादत', 'रहम', 'विधाता' और 'जन्नत' इस बात का प्रमाण हैं कि साईं बाबा की शिक्षाएं किसी एक धर्म तक सीमित नहीं थीं।
  • श्रद्धा और सबूरी का संदेश: यह भजन जीवन के कठिन समय में धैर्य बनाए रखने और ईश्वर पर अटूट विश्वास रखने की प्रेरणा देता है।
  • मानसिक शांति की प्राप्ति: इस भजन के नियमित श्रवण और कीर्तन से मन की चंचलता शांत होती है और अवसाद व तनाव से मुक्ति मिलती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि ईश्वर का स्मरण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु शास्त्रों और संतों की परंपरा के अनुसार कुछ विशेष समय पर भजन गायन का महत्व अत्यधिक बढ़ जाता है:

  • गुरुवार का विशेष दिन: गुरुवार (बृहस्पतिवार) को गुरु की उपासना का दिन माना जाता है। शिरडी के साईं बाबा को गुरु रूप में पूजा जाता है, इसलिए गुरुवार के दिन इस भजन का गायन विशेष फलदायी होता है।
  • संध्या काल की प्रार्थना: शाम के समय घर के मंदिर में या साईं मंदिर में धूप-दीप जलाकर इस भजन को सामूहिक रूप से गाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • काकड़ और शेज आरती के समय: शिरडी में बाबा की विभिन्न आरतियों के समय भी भक्त इस प्रकार के भावपूर्ण भजनों का संकीर्तन करते हैं। आप अपने घर पर भी श्री साईं बाबा आरती के पश्चात इस भजन का गायन कर सकते हैं।
  • गायन की विधि: शांत चित्त होकर, आँखें बंद कर बाबा के दिव्य स्वरूप का ध्यान करते हुए इस भजन को गाएं। वाद्य यंत्रों में ढोलक, मंजीरा और हारमोनियम का प्रयोग इसके माधुर्य को और बढ़ा देता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन साक्षात ब्रह्म स्वरूप शिरडी के साईं बाबा को समर्पित है। साईं बाबा को उनके भक्त भगवान दत्तात्रेय का अवतार मानते हैं। दत्तात्रेय स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश के एकीकृत रूप हैं। साईं बाबा ने अपने जीवन काल में चमत्कारों के माध्यम से नहीं, बल्कि अपने आचरण, प्रेम और करुणा से लोगों का कल्याण किया। उन्होंने शिरडी की एक जीर्ण-शीर्ण मस्जिद (जिसे उन्होंने 'द्वारकामाई' नाम दिया) में रहकर अपना संपूर्ण जीवन व्यतीत किया। उनके विचार और शिक्षाएं आज भी करोड़ों लोगों का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं। सनातन धर्म में जिस प्रकार भगवान शिव और विष्णु की आराधना की जाती है, उसी प्रकार साईं बाबा की पूजा भी अत्यंत श्रद्धा के साथ की जाती है। कई साधक बाबा के साथ-साथ कार्तिकेय स्वरूप भगवान सुब्रह्मण्य की भी आराधना करते हैं, जिसके लिए वे सुब्रह्मण्य अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ करते हैं, क्योंकि सभी देवता अंततः एक ही परम सत्ता के विभिन्न रूप हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

"तुझसे मेरी किस्मत फितरत है साई" एक आधुनिक युग का भावप्रधान भजन है। इसकी रचना समकालीन कवियों द्वारा साईं संध्या और संकीर्तन उत्सवों को ध्यान में रखकर की गई है। इस भजन की पृष्ठभूमि शिरडी की पावन भूमि और बाबा के इतिहास से जुड़ी है। जब बाबा शिरडी में साक्षात निवास करते थे, तब देश-विदेश से लोग अपनी मन्नतें लेकर आते थे। बाबा उनकी झोली खुशियों से भर देते थे। इसी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक सत्य को इस भजन में पिरोया गया है। यह भजन इस विश्वास को सुदृढ़ करता है कि भले ही बाबा आज भौतिक रूप से हमारे बीच उपस्थित नहीं हैं, परंतु उनकी समाधि आज भी उतनी ही जाग्रत है और अपने भक्तों की पुकार सुनती है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और मर्मस्पर्शी है। इसमें मुख्य रूप से खड़ी बोली हिंदी का प्रयोग किया गया है, जिसमें उर्दू और सूफी शब्दावली का प्रचुर मात्रा में समावेश है।

काव्य शैली की दृष्टि से यह एक 'पद' या 'गीत' है, जिसमें लय और ताल का अद्भुत सामंजस्य है। इसमें 'साईं', 'विधाता', 'नाता', 'आता' जैसे तुकांत शब्दों (Rhyming Words) का प्रयोग किया गया है, जिससे यह सुनने में अत्यंत कर्णप्रिय लगता है। रूपक अलंकार का सुंदर प्रयोग करते हुए भक्त के जीवन को बाबा के चरणों की 'जन्नत' बताया गया है। यह सरल भाषा शैली ही इस भजन को जन-जन का प्रिय बनाती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन केवल एक संगीतमय रचना नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन जीने की अमूल्य सीख देता है:

  1. अहंकार का विसर्जन: "तेरे बिना मैं कुछ भी नहीं हूँ" - यह पंक्ति हमें सिखाती है कि मनुष्य को अपने धन, बल या बुद्धि पर अहंकार नहीं करना चाहिए। सब कुछ ईश्वर की ही देन है।
  2. धैर्य और विश्वास (श्रद्धा-सबूरी): जीवन में चाहे कितनी भी विकट परिस्थितियां आएं, हमें अपना धैर्य (सबूरी) नहीं खोना चाहिए और ईश्वर पर पूर्ण विश्वास (श्रद्धा) रखना चाहिए।
  3. समानता का भाव: "सबका है मालिक एक" का सिद्धांत हमें जाति, धर्म, वर्ग और लिंग के भेद से ऊपर उठकर सभी मनुष्यों से प्रेम करने की सीख देता है।
  4. करुणा और सेवा: दीन-दुखियों की सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है। बाबा ने सदैव भूखों को भोजन कराने और असहायों की सहायता करने का उपदेश दिया।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश (Word/Phrase) सरल हिंदी अर्थ (Simple Meaning) आध्यात्मिक संदर्भ (Contextual Meaning)
फितरत स्वभाव या आदत भक्त का मूल चरित्र जो साईं के रंग में रंग चुका है।
इबादत पूजा, प्रार्थना या उपासना बिना किसी स्वार्थ के ईश्वर की निश्छल आराधना।
विधाता सृष्टि का रचयिता, ईश्वर साईं बाबा को संपूर्ण ब्रह्मांड का नियंता मानना।
उदी पवित्र भस्म (राख) द्वारकामाई की धूनी की राख जो रोगों और पापों का नाश करती है।
सबूरी धैर्य, धीरज कठिन समय में विचलित न होकर ईश्वर की इच्छा पर विश्वास रखना।
रहम नजर कृपा दृष्टि, दया भाव भक्त पर गुरु की असीम अनुकंपा और आशीर्वाद।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

आइए, इस पावन भजन की प्रत्येक पंक्ति के गहरे आध्यात्मिक अर्थ को समझें:

1. "तुझसे मेरी किस्मत फितरत है साईं, तुझसे ही मेरी हर राहत है साईं।"
भावार्थ: हे साईं बाबा! मेरा भाग्य और मेरा स्वभाव सब आपसे ही संचालित है। इस संसार में मुझे जो भी सुख, शांति और राहत मिलती है, वह केवल आपकी ही कृपा का परिणाम है। आपके बिना मेरा कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है।

2. "तेरे बिना मैं कुछ भी नहीं हूँ, तू ही मेरी सच्ची इबादत है साईं।"
भावार्थ: हे प्रभु! आपके बिना मैं शून्य हूँ, मेरा जीवन निरर्थक है। मेरी हर सांस, मेरा हर विचार और मेरी हर प्रार्थना केवल आपके चरणों में समर्पित है। आप ही मेरी पूजा और आप ही मेरी इबादत हैं।

3. "शिरडी के दाता तू ही विधाता, तुझसे ही मेरा जनमों का नाता।"
भावार्थ: हे शिरडी में निवास करने वाले परम कृपालु दाता! आप ही इस सृष्टि के विधाता (रचयिता) हैं। मेरा और आपका संबंध केवल इस जन्म का नहीं है, बल्कि यह कई जन्मों का अटूट और सनातन नाता है।

4. "चरणों में तेरे जन्नत है मेरी, तू ही मेरी बिगड़ी बनाने आता।"
भावार्थ: मुझे किसी स्वर्ग या जन्नत की लालसा नहीं है, क्योंकि आपके श्रीचरणों में ही मुझे परम आनंद और स्वर्ग का अनुभव होता है। जब भी मेरे जीवन में कोई विपत्ति आती है, आप ही मेरी बिगड़ी हुई परिस्थितियों को सुधारने दौड़े चले आते हैं।

5. "धूनी की उदी माथे सजाऊँ, तेरी दया से मैं सब कुछ पाऊँ।"
भावार्थ: द्वारकामाई की पवित्र धूनी से उत्पन्न उदी को मैं अत्यंत श्रद्धा के साथ अपने माथे पर लगाता हूँ। आपकी असीम दया और कृपा से मुझे जीवन की समस्त भौतिक और आध्यात्मिक संपदा प्राप्त हो जाती है।

6. "श्रद्धा सबूरी का मार्ग दिखाकर, भवसागर से पार मैं जाऊँ।"
भावार्थ: आपने मुझे जो 'श्रद्धा' और 'सबूरी' का दिव्य मार्ग दिखाया है, उसी मार्ग पर चलकर मैं इस मायावी संसार रूपी भवसागर को सुगमता से पार कर मोक्ष की प्राप्ति करूँगा।

7. "सबका है मालिक एक ही दाता, दीन-दुखियों का तू ही सहारा।"
भावार्थ: आपका यह परम वाक्य 'सबका मालिक एक' संपूर्ण मानवता को एकता के सूत्र में बांधता है। आप ही सभी असहायों, गरीबों और दीन-दुखियों के एकमात्र सच्चे रक्षक और सहारे हैं।

8. "साईं रहम नजर करना हम पर, तेरे बिना कोई नहीं हमारा।"
भावार्थ: हे साईं नाथ! हम अज्ञानी जीवों पर अपनी दयामयी और कृपालु दृष्टि सदैव बनाए रखना। इस विशाल और स्वार्थी संसार में आपके अतिरिक्त हमारा कोई रक्षक या हितैषी नहीं है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के गायन के पूर्व या पश्चात साईं बाबा के इन सिद्ध मंत्रों का जाप करने से साधना की गहराई और अधिक बढ़ जाती है:

"ॐ शिरडी वासाय विद्महे, सच्चिदानंदाय धीमहि, तन्नो साईं प्रचोदयात॥"

यह साईं गायत्री मंत्र भक्त के बुद्धि और विवेक को जाग्रत करता है। इसके अतिरिक्त, बाबा की नित्य प्रार्थना में इस श्लोक का पाठ भी अत्यंत कल्याणकारी माना गया है:

"अनंतकोटि ब्रह्मांडनायक राजाधिराज योगीराज परब्रह्म श्री सच्चिदानंद सद्गुरु साईनाथ महाराज की जय॥"

यह उद्घोष बाबा की सर्वव्यापकता और उनके परब्रह्म स्वरूप को स्थापित करता है। यदि आप बाबा के विभिन्न नामों का स्मरण करना चाहते हैं, तो साईं बाबा के 108 नाम का पाठ भी कर सकते हैं, जो साधक के जीवन से सभी विघ्न-बाधाओं को दूर करता है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम तुझसे मेरी किस्मत फितरत है साई
समर्पित देवता शिरडी के श्री साईं बाबा (दत्तात्रेय अवतार)
मुख्य संदेश श्रद्धा, सबूरी, पूर्ण शरणागति और 'सबका मालिक एक'
भजन की भाषा सरल हिंदी (सूफी एवं खड़ी बोली का मिश्रण)
भक्ति का भाव समर्पण भाव, शांत रस, दास्य भाव
उपयुक्त अवसर गुरुवार व्रत पूजा, साईं संध्या, दैनिक संध्या आरती, रामनवमी, गुरु पूर्णिमा
मुख्य प्रतीक धूनी की उदी, द्वारकामाई, शिरडी समाधि

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन का मुख्य संदेश पूर्ण शरणागति (Surrender) है। यह सिखाता है कि जब हम अपने भाग्य (किस्मत) और अपने स्वभाव (फितरत) को गुरु या ईश्वर के चरणों में सौंप देते हैं, तो हमारे जीवन के सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं और हमें परम शांति मिलती है।

साईं बाबा की पूजा के लिए गुरुवार (बृहस्पतिवार) का दिन सबसे उत्तम माना जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, साईं मंदिरों में दर्शन करते हैं और विशेष रूप से बाबा के भजनों का कीर्तन करते हैं।

'उदी' शिरडी की द्वारकामाई मस्जिद में अनवरत जलने वाली पवित्र धूनी की राख है। भजन में कहा गया है कि उदी को माथे पर लगाने से बाबा की कृपा प्राप्त होती है और सभी शारीरिक व मानसिक कष्ट दूर हो जाते हैं। यह संसार की नश्वरता का भी प्रतीक है।

'श्रद्धा' का अर्थ है ईश्वर या गुरु के प्रति अटूट विश्वास और प्रेम। 'सबूरी' का अर्थ है धैर्य और धीरज। साईं बाबा के अनुसार, इन दोनों गुणों को धारण करने वाला व्यक्ति जीवन के हर संकट को पार कर सकता है।

हाँ, इस भजन का पाठ या श्रवण प्रतिदिन सुबह या शाम की प्रार्थना के समय किया जा सकता है। यह मन को शांत रखने और दिनभर सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है।

यह सिद्धांत सिखाता है कि ईश्वर एक ही है, चाहे लोग उसे किसी भी नाम (राम

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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