भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

तूँ मोल छवि कृष्ण की (Tu Mol Chavi krishn ki Lyrics in Hindi)

तूँ मोल छवि कृष्ण की भजन का उद्देश्य भक्तों के दिल में कृष्ण के प्रति भक्ति और प्रेम का अनुभव कराना है।

प्रस्तावना एवं परिचय

कृष्ण की अनमोल छवि की आराधना

कृष्ण भक्तों के हृदय में प्रेम और भक्ति के स्पंदन के साथ इस भजन का गायन करें।

तूँ मोल छवि कृष्ण की (Tu Mol Chavi krishn ki Lyrics in Hindi) - बाबा. ये जग है पराया सब तेरी माया तूँ मोल छवि कृष्ण कीओ..ओ..तूँ मोल छवि कृष्ण की अनमोल छवि कृष्ण की बाबा ..ये दर तेरा पाया तूँ दिल में समाया तूँ मोल छवि कृष्ण कीओ….ओ…कैसे भूल पाऊँगा में बाबा इस जग की ….खुमारियाँ ओ…….ओ…..कैसे भूल पाऊँगा में बाबा इस जग की ….खुमारियाँ मेरे अपनों ने ही रुलाया सताया मुझको .. की खुआरियाँ. एसे में तुम्हें मैंने पाया कृपा की मिली छाया तूँ मोल छवि कृष्ण की ओ..ओ..तूँ मोल छवि कृष्ण की अनमोल छवि कृष्ण की बाबा ..ये दर तेरा पाया तूँ दिल में समाया तूँ मोल छवि कृष्ण की ओ….ओ…ज़बसे बाबा तूँ मुझे मिला है आज दुख भी नहीं कोई ओ…..ओ….ज़बसे बाबा तूँ मुझे मिला है आज दुख भी नहीं कोई आज समझ आया कलयुग में तुझसे भड़कर कोई नहीं ..बाबा तूँ मेरे पिता है तुझे सब पता है तूँ मोल छवि कृष्ण की ओ..ओ..तूँ मोल छवि कृष्ण की अनमोल छवि कृष्ण की बाबा ..ये दर तेरा पाया तूँ दिल में समाया तूँ मोल छवि कृष्ण की ओ….ओ…कैसे भूल गया रे तूँ प्राणी मेरे ठाकुर की कहानियाँ ओ….ओ…..कैसे भूल गया रे तूँ प्राणी मेरे ठाकुर की कहानियाँ आज भी चुलकाना में बो पीपल देता तुझकों निशानियाँ मोहन एक झलक दिखलादे हम सब का “ यश ” भड़ा दे तूँ मोल छवि कृष्ण की ओ..ओ..तूँ मोल छवि कृष्ण की अनमोल छवि कृष्ण की बाबा ..ये दर तेरा पाया तूँ दिल में समाया तूँ मोल छवि कृष्ण की ओ….ओ...
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह भजन 'तूँ मोल छवि कृष्ण की' भक्ति और श्रद्धा की एक विशेष अभिव्यक्ति है। भजन में भगवान कृष्ण की अनमोल छवि का जिक्र है, जिसे सच्चे भक्त अपनी आत्मा में समाहित करते हैं। गायक कहता है कि यह संसार केवल भौतिक है, जबकि Krishna की सुंदरता और उनके प्रति भक्ति अनमोल है। "ये जग है पराया सब तेरी माया" इस पंक्ति से यह व्यक्त होता है कि सभी भौतिक चीजें अस्थायी हैं, जबकि कृष्ण का प्रेम सच्चा और शाश्वत है। भक्त अपने दुखों और संघर्षों का सामना करते हुए भगवान कृष्ण के साथ अपनी जुड़ाव की बात करते हैं, यह दिखाते हुए कि कैसे भगवान ने उन्हें कठिनाइयों से उबारा। जब वे कहते हैं, "कैसे भूल पाऊँगा में बाबा इस जग की खुमारियाँ", तब यह उनके जीवन की सूक्ष्मता की पहचान और भगवान की कृपा की आवश्यकता को दर्शाती है।

गीत में करुणा और आंतरिक शांति की खोज का एक गहरा भाव है। भक्त अपने जीवन में आए संघर्षों और शोक का जिक्र करते हैं, जिसमें उन्होंने अपनों द्वारा दुख भोगा। परंतु इस सबमें, वे भगवान कृष्ण के प्रति अपने प्रेम का अनुभव करते हैं। उनका कहना है, "एसे में तुम्हें मैंने पाया कृपा की मिली छाया", यह दर्शाता है कि भगवान उनकी शरण में आए और उन्हें समर्पित किया। यह गीत यह भी कहता है कि जब भक्त सच में भगवान से मिलता है, तब उसके जीवन की सभी कठिनाइयाँ भी समाप्त हो जाती हैं। जब वे कहते हैं, "ज़बसे बाबा तूँ मुझे मिला है आज दुख भी नहीं कोई", तब यह सत्य है कि कृष्ण का प्रेम वास्तविक आनंद और शांति लाता है।

भक्ति मार्ग के संदर्भ में, यह भजन कृष्ण के प्रति अपार प्रेम और भक्ति की गहराई को दर्शाता है। गीत में यह समझा जाता है कि भगवान केवल उपासना के पात्र नहीं हैं, बल्कि वे भक्त के जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। कृष्ण की कहानियाँ, जो कई पुराणों और ग्रंथों में वर्णित हैं, गोपियों के साथ रासलीला, कंस का वध और भागवत गीता में शिक्षा देने की अमर कथा के माध्यम से भक्तों को प्रेरित करती हैं। भक्त यह स्वीकार करता है कि भगवान की छाया में हर दुख को सहन करना संभव है और उनकी अद्भुत शक्ति से सभी समस्याओं का समाधान होता है। इस प्रकार, भक्ति का मार्ग केवल पूजा-अर्चना नहीं, बल्कि अपने हृदय में भगवान की छवि को समाहित करने की प्रक्रिया है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भगवान कृष्ण के प्रति अटूट भक्ति का प्रतीक है और भारतीय धार्मिकता में गहराई से जुड़ा हुआ है। कृष्ण की छवि को अनमोल माना गया है, जो भक्तों के दिलों में बसी होती है। पुराणों में कृष्ण की लीलाओं का वर्णन मिलता है, जहाँ उनका प्रेम और करुणा अनंत हैं। गीता में उन्होंने भक्ति का महत्व बताया है, जो जीवन के उतार-चढ़ाव में सहारे देती है। इससे भक्तों को सिखाने का प्रयास किया गया है कि भगवान की भक्ति और प्रेम के द्वारा सभी कष्टों का निवारण संभव है। इस गीत का महत्व इसी भक्ति में निहित है, जो भक्तों को कठिनाईयों से पार करने के लिए प्रेरित करता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, विनम्रता और आंतरिक संतुलन प्राप्त होता है। भक्तों का ध्यान भगवान की अनमोल छवि की ओर केंद्रित होता है, जिससे वे अपने दुखों से मुक्त होते हैं। नियमित गीत का गान करने से आत्मविश्वास और बोधि की वृद्धि होती है। इसके अलावा, यह आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करता है, जिससे व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मकता का अनुभव करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का गुणगान सुबह या शाम का समय सर्वोत्तम होता है। श्रद्धापूर्वक एक दीप जलाकर भक्तिपूर्ण मन से इस भजन का जाप करें। बैठने के लिए सुखासन या पद्मासन की शुद्ध मुद्रा अपनाएं। मन में भगवान कृष्ण की छवि को स्मरण करते हुए इस भजन का 반복 करें। संकल्प करें कि कृष्ण की भक्ति आपके जीवन के उद्देश्य को संवारने में सहायक होगी।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन में कृष्ण की छवि का क्या महत्व है?

कृष्ण की छवि भक्ति, प्रेम और जीवन के अनमोल तत्वों का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि भक्ति में असली सुख और शांति मिलती है।

क्या यह भजन केवल एक पूजा के लिए गाया जाता है?

नहीं, यह भजन भक्तों के दैनिक जीवन में कृष्ण की उपस्थिति का अहसास कराने के लिए भी गाया जाता है। यह मन को स्थिर करता है।

कृष्ण की कहानियों का इस भजन में क्या उपयोग है?

कृष्ण की कहानियाँ भक्तों को प्रेरित करती हैं। वे भक्तों के जीवन में कृष्ण की कृपा की आवश्यकता का एहसास कराती हैं।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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