क्यों नशेयां दे विच पै गयो वे (Kyon Nasheyan De Vich Pai Gyo Ve Lyrics) - संपूर्ण भजन एवं भावार्थ
"क्यों नशेयां दे विच पै गयो वे" एक अत्यंत हृदयस्पर्शी, चेतावनीपूर्ण और सामाजिक-आध्यात्मिक चेतना से परिपूर्ण पावन भजन है। यह भजन पंजाब की उस महान भूमि, संतों, पीरों, ऋषियों और गुरुओं की परंपरा को समर्पित है जो हमेशा से सत्य, संयम, सेवा और सादगी का संदेश देती आई है। आज के आधुनिक दौर में जब युवा पीढ़ी नशे के अंधकार में भटक रही है, तब यह भजन एक गंभीर आईना दिखाता है। इसमें गुरुवाणी के उपदेशों का स्मरण कराते हुए युवा वर्ग को नशे जैसी भीषण सामाजिक और शारीरिक बीमारी से बाहर आने की अत्यंत मार्मिक अपील की गई है। इस लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल (Lyrics), सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, जीवन संदेश और नशा मुक्ति के आध्यात्मिक महत्व का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन — शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें:
मंथन / मुखड़ा:
क्यों नशेयां दे विच पै गयो वे, क्यों मंदे कमी पै गयो वे..
इह धरती गुरूआं पीरां दी, ऋषियां- मुनीयां फकीरां दी।
गुरूबाणी पढ़दा सुनदा सै, क्यों मंदे कमी पै गयो वे- चट्ट...
अंतररा 1:
चट्टा टीके जान गंवाई जानै, क्यों मौत नूं गले लगाई जानै।
क्यों वसदे घर उजाड़ रहयो, तूं किसदी बैंहणी बैंह गयो वे- चट्ट...
अंतररा 2:
इह जीवन रब्बी अमानत वे, करी जावें क्यों तूं खियानत वे,
क्यों देश समाज कानूंन तों, बेखौफ तूं हुदा जा रहयो वे- चट्ट...
अंतररा 3:
मां बाप दी वे जिंदजान है तू, घर- बार पिंड दी शान है तूं.
क्यों चढ़दी जवानी ते आरा, पतझड़ दा तूं चला रहयों वे- चट्ट...
अंतररा 4:
जा धरतीपुतर किसान तूं बन, जा फौजी वीर जवान तू बन,
खा दुध दहीं मखन घियो वीरा, क्यों मिठा मौहरा खा रहयो वे- चट्ट...
अंतररा 5:
असीं सब तेरे हमदर्दी वे, तैनू मुड़ मुड़ कर दे अर्जी वे
जा नशा छोड़ाउ केन्द्र विच, क्यों घरे लुक के बैह गयो वे- चट्ट...
समापन / मंकुल (मधुप जी):
औधे बिल्कुल मुफत इलाज होवे, औथे जिंदगी मुड़ आबाद होवे,
तूं नशा मुक्त हो जावेंगा, गल ‘‘मधुप’’ पते दी कह रिहा वे- चट्ट।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन केवल शब्दों का संकलन नहीं है, बल्कि एक बुजुर्ग, समाज-सुधारक या हितैषी की वह पुकार है जो अपने नौनिहालों को बर्बाद होते देख नहीं सकता। रचनाकार 'मधुप' जी ने बहुत ही सहज और प्रभावशाली शब्दों में युवा पीढ़ी को झकझोरने का प्रयास किया है। भजन का आरंभ इस बात से होता है कि यह भारत भूमि और विशेष रूप से पंजाब की पावन धरा गुरुओं, पीरों, संतों और फकीरों की तपस्थली रही है। जिस भूमि पर गुरु नानक देव जी, गुरु गोबिंद सिंह जी और अनेकों संतों ने मानवता का संदेश दिया, जहाँ 'गुरबाणी' का पाठ गूंजता है, वहाँ के युवाओं का नशे के गर्त में डूब जाना अत्यंत चिंताजनक और लज्जाजनक है।
आगे कवि नशीले पदार्थों (जैसे इंजेक्शन, टीके और केमिकल ड्रग्स) के भयानक दुष्प्रभावों का वर्णन करता है। नशे की लत में इंसान अपने ही हाथों अपनी जान गंवा बैठा है और मौत को खुलेआम बुलावा दे रहा है। जो घर कभी हंसते-खेलते और आबाद हुआ करते थे, वे नशे के कारण उजड़ चुके हैं। जीवन को एक दिव्य 'रब्बी अमानत' (ईश्वर की दी हुई अनमोल धरोहर) बताया गया है, जिसके साथ खिलवाड़ करना या इसे नशे में नष्ट करना सबसे बड़ा पाप और विश्वासघात (खियानत) है। समाज के कानूनों और देश के संविधान से बेखौफ होकर युवा वर्ग अपनी जवानी को तबाह कर रहा है।
भजन के अंतिम चरणों में माता-पिता, समाज और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य की याद दिलाई गई है। युवा इस देश की रीढ़ हैं—वे खेतों में अन्न उगाने वाले धरतीपुत्र किसान बन सकते हैं या सीमाओं की रक्षा करने वाले वीर फौजी जवान बन सकते हैं। दूध, दही, मक्खन और घी खाने वाले इस वीर देश के सपूत आज 'मीठा जहर' (नशा) क्यों खा रहे हैं? अंत में एक सकारात्मक संदेश देते हुए कहा गया है कि निराश होने की आवश्यकता नहीं है, यदि कोई भटक गया है तो वह सरकारी या सामाजिक 'नशा मुक्ति केंद्र' (De-addiction Centre) में जाकर अपना मुफ्त इलाज करवा सकता है और अपनी बिखरी हुई जिंदगी को फिर से आबाद कर सकता है। ऐसे ही अन्य प्रेरणादायक गीतों और श्री हनुमान चालीसा या शिव तांडव स्तोत्र के पाठ से भी मन को स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- सामाजिक एवं नैतिक चेतना: यह भजन पारंपरिक धार्मिक विषयों से हटकर आज की सबसे बड़ी सामाजिक समस्या (नशाखोरी) पर सीधा प्रहार करता है।
- गुरुबाणी और संस्कृति का सम्मान: इसमें पंजाब की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत (गुरुओं, पीरों, संतों की वाणी) को आधार बनाकर युवाओं को जगाया गया है।
- सकारात्मक समाधान: केवल आलोचना करने के बजाय भजन में 'नशा मुक्ति केंद्र' जाकर मुफ्त इलाज कराने का व्यावहारिक और सकारात्मक समाधान भी दिया गया है।
- रचनाकार की संवेदनशीलता: 'मधुप' जी की कलम से निकला यह गीत हर हमदर्द नागरिक, माता-पिता और समाज सेवक की आवाज बन जाता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस प्रकार के सुधारवादी और प्रेरणादायक भजनों को गाने या सुनने के लिए किसी विशेष पूजा-पाठ के मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती, फिर भी निम्नलिखित अवसरों पर इनका विशेष महत्व है:
- युवा सत्संग एवं सामाजिक शिविर: नशा मुक्ति अभियानों, युवा सम्मेलनों और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों में।
- विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में: युवा पीढ़ी को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराने के लिए मॉर्निंग असेंबली या सांस्कृतिक मंचों पर।
- पारिवारिक बैठकों में: परिवार के भटक रहे सदस्यों को प्रेम और समझाइश के साथ सही मार्ग दिखाने के लिए।
- दैनिक श्रवण: सुबह के समय सकारात्मक ऊर्जा और संकल्प शक्ति प्राप्ति के लिए इसे शांत मन से सुना जा सकता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन किसी एक देवी-देवता की स्तुति न होकर संपूर्ण मानवता, मानवता के रक्षक गुरुओं, पीरों और फकीरों की उस पवित्र परंपरा को समर्पित है जो जीव मात्र के कल्याण की कामना करती है। इसमें सिख गुरुओं की वाणी (गुरुबाणी), संतों के उपदेश और भारतीय संस्कृति के उन महान मूल्यों का स्मरण किया गया है जो मनुष्य को नशा मुक्त, संयमशील और कर्तव्यनिष्ठ बनने की प्रेरणा देते हैं।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
इस भजन के रचनाकार 'मधुप' जी हैं। उन्होंने समाज में फैल रही नशाखोरी की महामारी को अपनी आँखों से बहुत करीब से देखा और महसूस किया। एक संवेदनशील साहित्यकार और समाज-सेवी होने के नाते उन्होंने महसूस किया कि केवल कानूनों से नहीं, बल्कि दिलों को छूने वाले संगीत और भजनों के माध्यम से युवाओं को इस दलदल से बाहर निकाला जा सकता है। इसी उद्देश्य से उन्होंने इस मार्मिक गीत की रचना की, जो आज पंजाब और पूरे उत्तर भारत में नशा मुक्ति अभियानों का एक महत्वपूर्ण anthem बन चुका है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा ठेठ पंजाबी मिश्रित हिंदी (लोकभाषा) है, जो आम जनमानस के दिल को सीधे छूती है। इसमें मुहावरों और प्रतीकों का बहुत सुंदर प्रयोग किया गया है जैसे—'रब्बी अमानत', 'मीठा मौहरा', 'चढ़दी जवानी ते आरा', और 'पतझड़ दा चला'. यह काव्य शैली सीधी, सरल होने के साथ-साथ अत्यंत प्रभावशाली और विचारोत्तेजक है। श्रोता या पाठक पहली ही पंक्ति से रचना के भाव से जुड़ जाता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
- शरीर ईश्वर का मंदिर है: यह जीवन भगवान की दी हुई अमानत है, इसे नशे में व्यर्थ गंवाना सबसे बड़ा अपराध है।
- परिवार और समाज के प्रति कर्तव्य: हम केवल अपने लिए नहीं जीते, हमारे माता-पिता, परिवार और समाज की हमसे बहुत उम्मीदें हैं।
- परिश्रम और पुरुषार्थ का महत्व: नशा कायरता की निशानी है; असली शान तो किसान, जवान बनकर देश की सेवा करने में है।
- सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है: गलती हो जाना एक बात है, लेकिन सुधार के अवसरों (नशा मुक्ति केंद्र) का लाभ न उठाना मूर्खता है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | संदर्भ / भाव |
|---|---|---|
| रब्बी अमानत | ईश्वर की दी हुई पवित्र धरोहर | मानव शरीर और जीवन का अनमोल मूल्य |
| खियानत | विश्वासघात या बेईमानी | जीवन रूपी अमानत को नशे में नष्ट करना |
| मीठा मौहरा | धीमा जहर | नशीले पदार्थ जो शुरू में अच्छे लगते हैं पर अंततः मार डालते हैं |
| चढ़दी जवानी | युवावस्था का जोश और ऊर्जा | जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और उत्पादक काल |
| मधुप | भ्रमर / रचनाकार का उपनाम | गीत के रचनाकार द्वारा दिया गया अंतिम संदेश |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"इह धरती गुरूआं पीरां दी, ऋषियां- मुनीयां फकीरां दी।"
अर्थात यह पावन भूमि गुरुओं, पीरों, संतों और त्यागियों की भूमि है। यहाँ के कण-कण में अध्यात्म और सदाचार बसा है, इसलिए यहाँ के निवासियों को आचरण भी उच्च रखना चाहिए।
"इह जीवन रब्बी अमानत वे, करी जावें क्यों तूं खियानत वे।"
अर्थात यह जीवन हमें भगवान ने एक पवित्र उपहार के रूप में दिया है। नशे के जरिए इसे बर्बाद करना इस दिव्य अमानत के साथ विश्वासघात करने के समान है।
"जा नशा छोड़ाउ केन्द्र विच, क्यों घरे लुक के बैह गयो वे।"
अर्थात यदि कोई इस बुरी संगत में फंस गया है तो उसे छिपकर अपनी किस्मत पर रोने के बजाय आगे बढ़कर नशा मुक्ति केंद्र जाना चाहिए, जहाँ सहायता और इलाज दोनों उपलब्ध हैं।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
भारतीय संस्कृति में स्वास्थ्य और संयम को सबसे बड़ा धन माना गया है। आयुर्वेद और वेदों में भी शरीर को स्वस्थ रखने का उपदेश दिया गया है:
"शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्"
(अर्थात: यह शरीर ही सभी धर्मों और सत्कर्मों को पूरा करने का पहला साधन है। इसलिए इसकी रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है।)
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | क्यों नशेयां दे विच पै गयो वे (Kyon Nasheyan De Vich Pai Gyo Ve) |
|---|---|
| विषय / थीम | नशा मुक्ति, सामाजिक जागरूकता, युवा प्रेरणा |
| रचनाकार | मधुप जी ('मधुप') |
| भाषा | पंजाबी मिश्रित हिंदी / लोकभाषा |
| मुख्य भाव | करुणा, चेतावनी, प्रेम और मार्गदर्शन |
| उपयुक्त अवसर | नशा मुक्ति अभियान, युवा सत्संग, सामाजिक कार्यक्रम |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख Bhaktilok के संपादकीय मंडल द्वारा समाज में सकारात्मक ऊर्जा और नैतिक मूल्यों के प्रसार के लिए तैयार किया गया है। सामग्री को प्रामाणिक परंपरा, लोकगीत संकलन और साहित्यिक मानकों के आधार पर संरचित किया गया है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत यह सुनिश्चित किया गया है कि प्रत्येक पाठक को भजन के आध्यात्मिक, सामाजिक और व्यावहारिक पक्षों की सटीक जानकारी मिले।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- 1. पारंपरिक पंजाबी लोक-साहित्य एवं सामाजिक जागरूकता गीत संग्रह।
- 2. गुरुबाणी उपदेश एवं संत परंपरा के नैतिक मूल्य।
- 3. सामाजिक नशा मुक्ति अभियान और परामर्श साहित्य।
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