Rani Sati Dadi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

घना दिन सो लियो रे अब तो जाग मुसाफिर जाग (Ghanan Din So Liyo Re Ab To Jaag Musafir Jaag Lyrics in Hindi) - Chetawani Bhajan Satish Dehra

घना दिन सो लियो: जीवन के जागरण का भजन। भक्ति, जागरूकता और आत्म-बोध का महत्व समझें।

प्रस्तावना एवं परिचय

जीवन का जागरण: घना दिन सो लियो

इस भजन के माध्यम से जीवन में जागरूकता और भक्ति की अवस्था को प्राप्त करें।

घना दिन सो लियो रे अब तो जाग मुसाफिर जाग पहला सूत्यो मात गरभ में पुन्दा पैर पसार हाथ जोड़ कर बहार निकल्यो हरी ने दियो बिसराए जनम तेरा हो लिया रे अब तो जाग मुसाफिर जाग घना दिन सो लियो, रे अब तो जाग मुसाफिर जाग दूजा सूत्यो मात गोद में हस हस दन्त दिखाए बहन भांजी लोट जिमावे गावें मंगलाचार लाड तेरा हो लिया रे अब तो जाग मुसाफिर जाग घना दिन सो लियो, रे अब तो जाग मुसाफिर जाग तीजा सूत्यो पिया सेज में मन में बहुत उछाल त्रिया चरित इक जाल रचेयो रे हरी ने दियो बिसराए बिआह तेरा हो लिया रे अब तो जाग मुसाफिर जाग घना दिन सो लियो, रे अब तो जाग मुसाफिर जाग चौथा सूत्यो शमशाना में लंबा पैर पसार कहत कबीर सुनो रे भाई साधो दीनी आग लगाए दाग तेरा हो लिया रे अब तो जाग मुसाफिर जाग घना दिन सो लियो, रे अब तो जाग मुसाफिर जाग
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में जीवन के विभिन्न चरणों का वर्णन किया गया है, जिसमें माता के गर्भ में शिशु का जन्म से लेकर मृत्यु के बाद की स्थिति तक की यात्रा का उल्लेख है। पहले चरण में, 'पहला सूत्यो मात गरभ में पुन्दा पैर पसार' दर्शाता है कि कैसे जीवन की शुरुआत माता के गर्भ में होती है। यह जीवन के प्रारंभ का संकेत है, जहाँ शिशु भगवान के आशीर्वादों के साथ नए जीवन की ओर अग्रसर होता है। इसके पश्चात, जब शिशु का जन्म होता है, तब समाज में खुशी का माहौल होता है, जो 'हाथ जोड़ कर बहार निकल्यो हरी ने दियो बिसराए' में व्यक्त किया गया है। भजन हमें याद दिलाता है कि जीवन का यह अमूल्य उपहार है और इसके प्रति जागरूक होना आवश्यक है।

इसके बाद के भाग में, सामाजिक जीवन के सुखद और सुखद क्षणों का उल्लेख है, जैसे कि 'दूजा सूत्यो मात गोद में हस हस दन्त दिखाए' जो पारिवारिक बंधनों की मिठास और आनंद को दर्शाता है। यह भजन बताता है कि किस प्रकार से रिश्ते और परिवार का महत्वपूर्ण स्थान होता है। 'तीजा सूत्यो पिया सेज में मन में बहुत उछाल' हमें यह सिखाता है कि विवाह और प्रेम संबंध जीवन के आनंद का एक उच्चतम स्तर है। अंतिम चरण 'चौथा सूत्यो शमशाना में लंबा पैर पसार' मृत्यु का संकेत है, जो कि जीवन के एक वास्तविक पहलू का प्रदर्शन करता है, जिससे यह समझ में आता है कि जीवन स्थायी नहीं है और इसके लिए हमेशा जागरूक रहना चाहिए।

इस भजन में जीवन और मृत्यु के चक्र को स्पष्टता से प्रदर्शित किया गया है। यह भक्ति मार्ग की वास्तविकता को प्रस्तुत करता है, जहाँ भजन के माध्यम से भक्त अपने जीवन को ईश्वर के प्रति अर्पित करते हैं। 'कहत कबीर सुनो रे भाई साधो दीनी आग लगाए' का अर्थ है कि हमें अपने अंदर की चेतना को जगाना चाहिए और अपने कर्मों की सच्चाई से परिचित होना चाहिए। यह भजन हमें स्वजागरूकता और भक्ति की ओर प्रेरित करता है, जो हमें परिष्कार की दिशा में ले जाता है। भव्यता से जीवन जीने का प्रेरणा हमें यहाँ प्राप्त होती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का संदर्भ भारतीय संस्कृति में जन्म, जीवन, और मृत्यु के चक्र को समर्पित है। पुराणों में जीवन की प्रारंभिक अवस्था का विशेष महत्व है, जहाँ माता का गर्भ पवित्रता का प्रतीक है। यह हमें यह समझाता है कि जीवन का हर क्षण महत्वपूर्ण है। महाभारत और रामायण जैसे ग्रंथों में भी जीवन के अवश्यम्भावी चक्र का विस्तार से वर्णन मिलता है। इसके अलावा, कबीर दास जी के विचार इस भजन में शामिल हैं, जो भक्ति के मार्ग में आत्मज्ञान और जागरूकता की महत्वपूर्णता को दर्शाते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति, स्थिरता और संतुलन प्राप्त होता है। यह भक्ति अनुभव करने में सहायक होता है और जीवन के विभिन्न चक्रों को समझने में मदद करता है। इसका जप करने से आत्म संतोष और आंतरिक शक्ति का विकास होता है, जिससे व्यक्ति जीवन में सकारात्मकता का अनुभव करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप सुबह-सुबह सूर्योदय के समय करना उत्तम होता है। पूजा के समय एक दीपक जलाना और पुष्प अर्पित करना चाहिए। ध्यान पूर्वक बैठकर 'घना दिन सो लियो' भजन का गुनगुनाना चाहिए। सही मानसिकता और तल्लीनता से भक्ति करें, ताकि ईश्वर की कृपा प्राप्त हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश जीवन के चक्र का जागरण और ईश्वर के प्रति जागरूकता है। यह जीवन के चार महत्वपूर्ण चरणों को दर्शाता है और भक्ति की दिशा में प्रेरित करता है।

इस भजन को कब और कैसे गाना चाहिए?

इस भजन का पाठ सुबह-सुबह या शाम को किया जा सकता है। इसे ध्यान पूर्वक गाना चाहिए, और पूजा सामग्रियों के साथ दीपक जलाकर किया जाए।

क्या यह भजन कबीर दास जी से संबंधित है?

हाँ, इस भजन में कबीर दास जी के विचारों का समावेश है। 'कहत कबीर सुनो रे' का उद्धरण उनके भक्ति दृष्टिकोण को व्यक्त करता है, जो जीवन की सच्चाई को पहचानने के लिए प्रेरित करता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!