Matarani Bhajan

तेरा शुक्रिया है(Tera Shukriya Hai Lyrics in Hindi) | Tinka Soni - Bhaktilok

227 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

श्याम की कृपा के लिए आभार यात्रा

इस भजन में हम श्याम बाबा की अनंत कृपा के लिए कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं।

तेरा शुक्रिया है(Tera Shukriya Hai Lyrics in Hindi):-मुझे कौन जानता था तेरी रेहमतो से पहले मैं कुछ भी तो नहीं था तेरी बंदगी से पहले बड़ा सुकून है बड़ा करार है अब तो ना चैन था ना सुकून था तेरी बंदगी से पहले मुझे श्याम तूने जितना दिया है तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया है .....मुझे श्याम तूने जितना दिया है तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया है वर भी दिया मुझे घर भी दिया है तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया है मुझे श्याम तूने.....तमन्ना नहीं थी मुझे दौलतों की तमन्ना नहीं थी मुझे शोहरतों की फिर भी प्रभु तूने वो सुख दिया है तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया है मुझे श्याम तूने.....ज़माने ने मुझको था दिल से निकाला कृपा है तुम्हारी जो मुझको संभाला मेरी डूबी नैया को किनारा दिया है तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया है मुझे श्याम तूने.....परिवार मेरा है तेरे हवाले तुम ही मेरी बगिया के हो रखवाले तू ही मेरी बाती तू ही मेरा दिया है तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया है मुझे श्याम तूने.....मुझे श्याम अपने साथ में रखना उड़ु ना हवा में औकात में रखना टींके को अपने साथ में रखना उड़ु ना हवा में औकात में रखना असर भी दिया मुझे सबर भी दिया है तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया है मुझे श्याम तूने.....
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय जीवन में कृपा और अनुकंपा की महत्ता है। पहले पद में गायक कहता है कि 'मुझे कौन जानता था तेरी रहमत से पहले', यह वाक्य दर्शाता है कि भगवान के बिना जीवन में पहचान और मूल्य का कोई अस्तित्व नहीं है। भक्ति और श्रद्धा से भरा जीवन ही आत्मा को सुकून और शांति प्रदान करता है, जैसा कि बताया गया है, 'ना चैन था ना सुकून था तेरी बंदगी से पहले'। यह पंक्तियाँ स्पष्ट करती हैं कि श्याम बाबा की कृपा से जीवन का हर पहलू और भी समृद्ध होता है। भक्त अनुभव करते हैं कि जब उनका जीवन भगवान के चरणों में समर्पित होता है, तब उन्हें असीम सुख और शांति प्राप्त होती है। भजन में 'तेरा शुक्रिया है' का जाप करते हुए भक्त अपनी आभार भावना को अभिव्यक्त करता है, जिससे यह संदेश मिलता है कि भक्ति मार्ग पर चलने वाले को हमेशा कृतज्ञ रहना चाहिए।

भावार्थ में, भजन की भावनाएँ आत्मसमर्पण और प्रेम से जुड़ी हैं। जब कोई भक्त कहता है, 'मुझे श्याम तूने जितना दिया है', वह अपने जीवन में भगवान की दी हुई अनगिनत भेंटों का धन्यवाद करता है। यहाँ पर यह संकेत मिलता है कि जीवन में दुनिया के सामर्थ्य और दौलत का कोई मूल्य नहीं होता, जब तक कि वे प्रभु की कृपा के माध्यम से प्राप्त न हों। 'ज़माने ने मुझको था दिल से निकाला', यह पंक्ति हमें मानव संबंधों की जटिलता का एहसास कराती है, जहां समाज की कठिनाइयाँ कभी-कभी व्यक्ति को असहाय बना देती हैं। लेकिन भगवान की कृपा भक्त को संजीवनी देती है, जिससे वह जो भी कठिनाई सहता है, वह उसे पार कर सकता है।

इस भजन के जरिए भक्ति मार्ग की गहराई को समझा जा सकता है। जब भक्त कहता है, 'परिवार मेरा है तेरे हवाले', यह संकेत करता है कि भक्त अपनी पूरी ज़िंदगी और परिवार को भगवान के सम्मान में समर्पित कर देता है। इस भाव से, वह न केवल अपने लिए, बल्कि अपने प्रियजनों के लिए भी ईश्वर की अनुकंपा की कामना करता है। 'तू ही मेरी बाती तू ही मेरा दिया है', यह वाक्य दर्शाता है कि जीवन के अंधकार में केवल ईश्वर की भक्ति ही हमें प्रकाश दे सकती है। यहाँ पर भक्ति का अर्थ केवल आरती करना या प्रार्थना करना नहीं है, बल्कि यह एक साधना है जो हमें आंतरिक शांति प्रदान करती है और हमारे जीवन को ऊँचाई पर ले जाती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व भारतीय धार्मिक परंपराओं में अहंकार और स्वार्थ पर विजय पाने के संदर्भ में है। विभिन्न पुराणों और ग्रंथों में भगवान की महानता और भक्ति का महत्व दर्शाया गया है। जैसे भागवत पुराण में भक्तिविद्या के माध्यम से ईश्वर को पाने का मार्ग बताया गया है। 'भगवद गीता' में भी भक्तों के प्रति भगवान की कृपा और दया का बखान किया गया है। इस भजन का श्रवण या गायन न केवल भक्ति भाव को बढ़ाता है, बल्कि आध्यात्मिक जागरूकता को भी जगाता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन के जाप से मानसिक और आध्यात्मिक लाभ होते हैं। भक्त का मन शांत होता है और जीवन में जीवन की कठिनाइयों के खिलाफ सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है। निरंतर जाप से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है, जिससे व्यक्ति ज्यादा स्थिर और संतुलित बनता है। यह भजन आत्मविश्वास को बढ़ाता है और दवाब भरे समय में भी सुकून बनाए रखने में मदद करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह जल्दी या शाम को किया जा सकता है, जब मन शांत और ताजगी से भरा हो। आमतौर पर, दीपक जलाकर, फूल और फल का अर्पण करके अपनी श्रद्धा व्यक्त की जा सकती है। सही मुद्रा के लिए, भक्त को शांत अवस्था में बैठना चाहिए और अपने हृदय में भगवान के प्रति समर्पण और प्रेम का भाव लाना चाहिए। इस प्रकार, एकाग्रता बढ़ती है और भजन की शक्ति का अनुभव होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश श्याम बाबा की कृपा और आभार जताना है। भक्त अपने जीवन में मिली अनगिनत भेंटों के लिए धन्यवाद अर्पित करता है।

क्या इस भजन को रोजाना गाना चाहिए?

हाँ, इस भजन को नियमित रूप से गाने से मानसिक शांति और दिव्य कृपा प्राप्त होती है। यह दिन की शुरुआत या समापन में विशेष लाभकारी होता है।

क्या इस भजन का विशेष समय है?

इस भजन का विशेष समय सुबह सूर्योदय के समय या शाम को पूजा के समय है, जब मन प्रसन्न और ध्यान से भरा होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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