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प्रभु के नाम से बढ़कर सहारा और क्या होगा लिरिक्स (Prabhu ke naam se badkar sahara aur kya hoga Lyrics in Hindi) - Vishnu Bhajan

विष्णु भजन 'प्रभु के नाम से बढ़कर सहारा और क्या होगा' के लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। सुमन शर्मा जी के इस भजन का भावार्थ और महत्व जानें।

हिंदू सनातन धर्म में नाम-महिमा को सर्वोपरि माना गया है। कलयुग में ईश्वर की प्राप्ति और सांसारिक भवसागर से पार उतरने का सबसे सुगम मार्ग प्रभु का नाम संकीर्तन ही है। इसी पावन और कल्याणकारी भाव को समेटे हुए प्रस्तुत है अत्यंत लोकप्रिय विष्णु भजन "प्रभु के नाम से बढ़कर सहारा और क्या होगा लिरिक्स (Prabhu ke naam se badkar sahara aur kya hoga Lyrics in Hindi)"। यह भजन भक्त के हृदय में पूर्ण शरणागति, वैराग्य, और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास की भावना जागृत करता है। इस भजन का मुख्य स्वर प्रसिद्ध भजन गायिका सुमन शर्मा जी ने दिया है, जिनकी मधुर आवाज ने इसे घर-घर में लोकप्रिय बना दिया है। इस लेख में हम इस भजन के संपूर्ण लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व, कठिन शब्दों के अर्थ और इससे मिलने वाली जीवनोपयोगी सीखों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

प्रभु के नाम से बढ़कर सहारा और क्या होगा


प्रभु के नाम से बढ़कर सहारा और क्या होगा।
हरि के नाम से बढ़कर सहारा और क्या होगा॥

हजारों तर गए पापी प्रभु का नाम ले लेकर,
अरे मानव ना क्यों तरता किनारा और क्या होगा।
प्रभु के नाम से बढ़कर सहारा और क्या होगा॥

बड़ी मतलब की दुनिया में दीवाना तू हुआ फिरता,
अरे मानव संभल कर चल इशारा और क्या होगा।
प्रभु के नाम से बढ़कर सहारा और क्या होगा॥

किए जा काम भलाई के लिए जा नाम ईश्वर का,
वह कण-कण में समाया है नजारा और क्या होगा।
प्रभु के नाम से बढ़कर सहारा और क्या होगा॥

बड़ा अनमोल जीवन है ना इसको यूं लुटा प्यारे,
हरी से भी बड़ा दानी हमारा और क्या होगा।
प्रभु के नाम से बढ़कर सहारा और क्या होगा॥

हरि के नाम से बढ़कर सहारा और क्या होगा॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन मानव जीवन की नश्वरता और ईश्वर के नाम की शाश्वतता का सुंदर चित्रण करता है। भजन की मुख्य पंक्तियां हमें यह समझाती हैं कि इस संसार में मनुष्य के पास अनेक भौतिक साधन हो सकते हैं, परंतु अंत समय में या जीवन के संकट काल में केवल प्रभु का नाम ही एकमात्र सच्चा सहारा बनता है।

भजन का प्रारंभ इस सत्य की घोषणा से होता है कि 'प्रभु के नाम से बढ़कर सहारा और क्या होगा'। इसका अर्थ है कि सांसारिक रिश्ते-नाते, धन-दौलत, और मान-प्रतिष्ठा सब क्षणभंगुर हैं। जब मनुष्य चारों ओर से निराशा से घिर जाता है, तब भगवान का नाम ही उसे मानसिक शांति और संबल प्रदान करता है।

आगे भजन में कहा गया है कि इतिहास गवाह है कि बड़े-बड़े पापी और भटके हुए लोग भी केवल प्रभु का नाम लेकर इस संसार सागर से तर गए। अजामिल, गणिका, और सदन कसाई जैसे उदाहरण हमारे शास्त्रों में मौजूद हैं जिन्होंने अंत समय में या अनजाने में भी प्रभु का नाम लिया और मोक्ष को प्राप्त किया। इसलिए, कवि मनुष्य को सचेत करते हुए कहता है कि जब इतने पापी तर गए, तो तुम क्यों संशय में हो? प्रभु का नाम ही तुम्हारा किनारा (मोक्ष का साधन) है।

यह दुनिया स्वार्थ से भरी हुई है। यहां हर व्यक्ति अपने हित के लिए दूसरों से जुड़ता है। ऐसे में मनुष्य इस मायावी संसार में अंधा होकर घूम रहा है। भजन हमें सचेत करता है कि इस 'मतलब की दुनिया' में संभलकर चलना चाहिए। जीवन में आने वाली कठिनाइयां और असफलताएं वास्तव में ईश्वर का इशारा हैं कि हमें संसार से मोह हटाकर उनकी शरण में आना चाहिए।

भजन का अंतिम संदेश कर्मयोग और भक्ति का सुंदर समन्वय है। मनुष्य को निरंतर भलाई के कार्य करने चाहिए और साथ ही ईश्वर का नाम स्मरण करते रहना चाहिए। ईश्वर सृष्टि के कण-कण में व्याप्त है। जब हम इस सत्य को स्वीकार कर लेते हैं, तो पूरा संसार ही ईश्वर का रूप नजर आने लगता है। यह मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ और अनमोल है, इसे व्यर्थ के सांसारिक प्रपंचों में नहीं गंवाना चाहिए। भगवान हरि से बड़ा कोई दानी नहीं है, जो केवल एक बार सच्चे मन से पुकारने पर अपना सर्वस्व भक्त पर न्योछावर कर देते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे अन्य भजनों से विशिष्ट और अत्यंत प्रभावशाली बनाती हैं:

  • नाम संकीर्तन की महिमा: यह भजन पूरी तरह से 'नाम जप' के महत्व पर केंद्रित है। शास्त्रों में कहा गया है - "कलियुग केवल नाम अधारा, सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा"। यह भजन इसी शास्त्रीय सत्य को सरल शब्दों में प्रस्तुत करता है।
  • वैराग्य और चेतना: यह भजन मनुष्य को उसकी अज्ञानता की नींद से जगाता है। यह संसार की निस्सारता और स्वार्थी स्वभाव को उजागर कर भक्त को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
  • सरलता और सुगमता: भजन की भाषा अत्यंत सरल खड़ी बोली है, जिसे कोई भी सामान्य व्यक्ति आसानी से समझ सकता है और गा सकता है।
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार: इस भजन को सुनने या गाने से मन में निराशा के भाव दूर होते हैं और एक नई आशा व सकारात्मकता का संचार होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि प्रभु का नाम किसी भी समय लिया जा सकता है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए निम्नलिखित समय और विधि अत्यंत फलदायी मानी गई है:

  • ब्रह्ममुहूर्त या प्रातःकाल: सुबह के समय मन शांत और एकाग्र होता है। इस समय इस भजन को सुनने या गाने से पूरे दिन मन में शांति और सकारात्मकता बनी रहती है।
  • संध्या आरती के समय: शाम की पूजा या आरती के बाद परिवार के सदस्यों के साथ बैठकर इस भजन का कीर्तन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • सत्संग और एकादशी व्रत: एकादशी, पूर्णिमा या किसी भी विशेष धार्मिक उत्सव पर भगवान विष्णु की पूजा के दौरान इस भजन का सामूहिक संकीर्तन करना विशेष फलदायी होता है।
  • गायन की विधि: इस भजन को गाते समय मन में पूर्ण समर्पण और श्रद्धा का भाव होना चाहिए। हाथों से ताली बजाकर या मंजीरे के साथ सामूहिक रूप से गाने पर इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से भगवान विष्णु (हरि) को समर्पित है। सनातन धर्म में भगवान विष्णु को सृष्टि का पालनहार माना गया है। वे अत्यंत कृपालु और दयालु हैं। जब-जब पृथ्वी पर पाप बढ़ता है या उनके भक्त संकट में होते हैं, वे अवतार लेकर उनका उद्धार करते हैं।

इस भजन की पृष्ठभूमि में उन सभी संतों और भक्तों का आशीर्वाद समाहित है जिन्होंने नाम-महिमा का प्रचार किया। संत कबीर, गोस्वामी तुलसीदास, और संत मीराबाई ने भी अपनी रचनाओं में बार-बार यही संदेश दिया है कि प्रभु का नाम ही इस कलयुग में सबसे बड़ा सहारा है। गायिका सुमन शर्मा जी ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति से इस भजन को जन-जन के कंठ का हार बना दिया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की रचना पारंपरिक भक्ति काव्य शैली में की गई है। भारत में मध्यकाल से ही नाम-महिमा के पदों की रचना की समृद्ध परंपरा रही है। यह भजन उसी परंपरा का आधुनिक और सुगम रूप है। इसकी पृष्ठभूमि में श्रीमद्भागवत महापुराण के वे प्रसंग हैं जहां भगवान के नाम की शक्ति को दर्शाया गया है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि सांसारिक सुख अस्थाई हैं और केवल आध्यात्मिक उन्नति ही आत्मा का वास्तविक लक्ष्य है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और प्रवाहमयी हिंदी है। इसमें कुछ पारंपरिक और लोकप्रचलित शब्दों का प्रयोग किया गया है जो सीधे हृदय को छूते हैं।

  • काव्य रूप: यह एक गेय पद (भजन) है जिसे सुगम संगीत के विभिन्न रागों में गाया जा सकता है।
  • अलंकार और बिंब: भजन में 'दीवाना', 'किनारा', 'इशारा' जैसे सुंदर बिंबों का प्रयोग किया गया है जो जीवन की यात्रा और ईश्वर की कृपा को दर्शाते हैं।
  • शैली: इसकी शैली उपदेशात्मक और संवादात्मक है, जहां कवि सीधे मानव मन को संबोधित कर रहा है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि जीवन जीने की एक संपूर्ण आचार संहिता है। इससे हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण सीख मिलती हैं:

  1. संसार की वास्तविकता को समझें: यह दुनिया स्वार्थ पर टिकी है। इसलिए सांसारिक संबंधों में अत्यधिक आसक्ति रखने के बजाय ईश्वर से सच्चा संबंध जोड़ना चाहिए।
  2. सत्कर्म करें (कर्मयोग): भजन कहता है - 'किए जा काम भलाई के'। भक्ति का अर्थ कर्म से भागना नहीं है, बल्कि निष्काम भाव से दूसरों की सेवा और भलाई करना है।
  3. ईश्वर की सर्वव्यापकता: भगवान केवल मंदिरों या मूर्तियों में नहीं, बल्कि सृष्टि के कण-कण में समाए हैं। हमें हर जीव में ईश्वर के दर्शन करने चाहिए।
  4. जीवन का सदुपयोग: मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है। इसे व्यर्थ के वाद-विवाद, क्रोध, और वासनाओं में नष्ट नहीं करना चाहिए, बल्कि आत्म-कल्याण में लगाना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
तर गए पार हो गए / मोक्ष पा लिया सांसारिक जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति पाना।
किनारा तट / आश्रय भवसागर से पार लगाने वाला अंतिम गंतव्य या मोक्ष।
दीवाना पागल / भ्रमित सांसारिक माया और मोह-माया में अंधा हुआ मनुष्य।
इशारा संकेत जीवन के कष्टों के माध्यम से ईश्वर द्वारा सचेत करने का संकेत।
कण-कण प्रत्येक अणु में ईश्वर की सर्वव्यापकता (Omnipresence)।
दानी दान देने वाला भगवान विष्णु, जो बिना किसी भेदभाव के भक्तों पर कृपा बरसाते हैं।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

पंक्ति: "प्रभु के नाम से बढ़कर सहारा और क्या होगा। हरि के नाम से बढ़कर सहारा और क्या होगा॥"
भावार्थ: इस संसार में मनुष्य के पास संकट के समय अनेक सहारे हो सकते हैं, जैसे मित्र, परिवार या धन। परंतु ये सभी सहारे सीमित और अस्थाई हैं। केवल भगवान का नाम ही ऐसा सहारा है जो इस लोक में भी और परलोक में भी जीव की रक्षा करता है।

पंक्ति: "हजारों तर गए पापी प्रभु का नाम ले लेकर, अरे मानव ना क्यों तरता किनारा और क्या होगा।"
भावार्थ: इतिहास और पुराण साक्षी हैं कि वाल्मीकि, अजामिल जैसे हजारों पापी केवल प्रभु के नाम का आश्रय लेकर मुक्त हो गए। जब उनका उद्धार हो सकता है, तो हे साधारण मनुष्य! तुम संशय क्यों करते हो? तुम्हारे लिए भी प्रभु का नाम ही मोक्ष का एकमात्र किनारा है।

पंक्ति: "बड़ी मतलब की दुनिया में दीवाना तू हुआ फिरता, अरे मानव संभल कर चल इशारा और क्या होगा।"
भावार्थ: यह संसार अत्यंत स्वार्थी है। यहां लोग केवल अपने सुख और स्वार्थ के लिए संबंध रखते हैं। तुम इस झूठी दुनिया के मोह में पागल होकर घूम रहे हो। जीवन में मिलने वाले धोखे और दुःख वास्तव में ईश्वर का इशारा हैं कि तुम संभल जाओ और सच्चे मार्ग पर आओ।

पंक्ति: "किए जा काम भलाई के लिए जा नाम ईश्वर का, वह कण-कण में समाया है नजारा और क्या होगा।"
भावार्थ: मनुष्य का कर्तव्य है कि वह निरंतर परोपकार और भलाई के कार्य करता रहे और साथ ही मन में ईश्वर का नाम स्मरण रखे। जब तुम्हारी दृष्टि शुद्ध होगी, तो तुम्हें सृष्टि के हर कण में ईश्वर का दिव्य रूप दिखाई देगा। इससे सुंदर नजारा और क्या हो सकता है।

पंक्ति: "बड़ा अनमोल जीवन है ना इसको यूं लुटा प्यारे, हरी से भी बड़ा दानी हमारा और क्या होगा।"
भावार्थ: यह मानव तन देवताओं के लिए भी दुर्लभ है। इसे व्यर्थ के भोग-विलास में नष्ट मत करो। भगवान हरि अत्यंत दयालु और दानी हैं। वे अपने भक्तों को बिना मांगे ही परम पद प्रदान कर देते हैं। उनकी शरण में आओ और अपने जीवन को धन्य बनाओ।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

भगवान विष्णु की आराधना और नाम-महिमा को सुदृढ़ करने के लिए निम्नलिखित मंत्रों का जप इस भजन के साथ अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:

"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"

यह द्वादशाक्षर मंत्र भगवान विष्णु का परम पावन मंत्र है, जो साधक को सभी पापों से मुक्त कर मोक्ष प्रदान करता है।

"हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥"

यह महामंत्र कलयुग के समस्त दोषों का नाश करने वाला और नाम-महिमा का साक्षात स्वरूप है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण बिंदु जानकारी
भजन का नाम प्रभु के नाम से बढ़कर सहारा और क्या होगा
समर्पित देवता भगवान विष्णु / हरि
मुख्य गायिका सुमन शर्मा (Suman Sharma)
भाषा सरल हिंदी (खड़ी बोली)
मुख्य भाव शरणागति, वैराग्य, भक्ति रस
उपयुक्त अवसर प्रातःकालीन प्रार्थना, सत्संग, एकादशी, विष्णु पूजा
मुख्य संदेश नाम-महिमा, सत्कर्म, मानव जीवन की अमूल्यता

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन को अपनी अत्यंत मधुर और भावपूर्ण आवाज में प्रसिद्ध भजन गायिका सुमन शर्मा (Suman Sharma) जी ने गाया है।

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि सांसारिक वस्तुएं और रिश्ते अस्थाई हैं। केवल भगवान का नाम ही जीवन का सच्चा और स्थाई सहारा है। मनुष्य को सत्कर्म करते हुए प्रभु का स्मरण करना चाहिए।

सनातन धर्म के अनुसार, 84 लाख योनियों के बाद मानव जीवन प्राप्त होता है। यह जीवन ईश्वर प्राप्ति और मोक्ष का साधन है, इसलिए इसे 'अनमोल' कहा गया है और इसे व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए।

इस भजन को प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) या संध्या काल की आरती के समय सुनना और गाना सबसे उत्तम माना जाता है। यह मन को शांत और एकाग्र करता है।

इसका अर्थ है कि ईश्वर सर्वव्यापी हैं। वे सृष्टि के प्रत्येक अणु और जीव में निवास करते हैं। जब भक्त के मन में यह भाव जाग्रत होता है, तो उसे हर जगह ईश्वर की ही लीला दिखाई देती है।

हां, एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन भगवान विष्णु के भजनों का कीर्तन करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है, इसलिए यह भजन एकादशी के लिए अत्यंत उपयुक्त है।

'इशारा' का तात्पर्य जीवन में आने वाले दुखों, संकटों और सांसारिक धोखों से है। ये परिस्थितियां मनुष्य को यह संकेत देती हैं कि संसार झूठा है और उसे ईश्वर की शरण में जाना चाहिए।

इस भजन का गायन अत्यंत शांत चित्त, श्रद्धा भाव और समर्पण के साथ करना चाहिए। इसे व्यक्तिगत साधना या सामूहिक सत्संग दोनों में गाया जा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "प्रभु के नाम से बढ़कर सहारा और क्या होगा" भजन के आध्यात्मिक और व्यावहारिक पहलुओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इस सामग्री का संकलन और संपादन सनातन धर्म के ग्रंथों, श्रीमद्भागवत महापुराण की कथाओं और पारंपरिक भजन संकीर्तन पद्धतियों के आधार पर किया गया है। यह "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" पाठकों को न केवल भजन के बोल प्रदान करती है, बल्कि उनके भीतर भक्ति और वैराग्य के बीज बोने का प्रयास भी करती है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत महापुराण: नाम-महिमा और अजामिल उपाख्यान के संदर्भ।
  • विष्णु पुराण: भगवान विष्णु की सर्वव्यापकता और दानी स्वभाव का वर्णन।
  • पारंपरिक संकीर्तन पद्धति: सुमन शर्मा जी द्वारा गाए गए भजन के प्रामाणिक बोल।

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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