परिचय एवं भूमिका: मैंने मोहन को बुलाया है वो आता होगा भजन
श्री कृष्ण की अहैतुकी कृपा, प्रेम, विरह और अनन्य समर्पण से ओत-प्रोत 'मैंने मोहन को बुलाया है वो आता होगा' एक अत्यंत लोकप्रिय एवं हृदयस्पर्शी राधा कृष्ण भजन है। सुश्री पूर्णिमा जी की मधुर वाणी में गाया गया यह भजन भक्तों के भीतर प्रभु के प्रति अटूट विश्वास, मिलन की उत्कंठा और आर्त पुकार को जागृत करता है। इस भजन का मुख्य भाव साधक के उस अनंत धैर्य और विश्वास पर आधारित है, जहां वह अपने आराध्य बांकेबिहारी से मिलने के लिए व्याकुल तो है, किंतु साथ ही उसके आगमन पर पूर्ण रूप से आश्वस्त भी है। भक्ति मार्ग में विरह की यह अवस्था साधक को भगवान के और अधिक निकट ले जाती है। जब भक्त अपने इष्ट को प्रेम की डोर से बांधकर आमंत्रित करता है, तो भक्तवत्सल श्यामसुंदर को भी दौड़े चले आना पड़ता है। आज के इस विस्तृत आलेख में हम इसी पावन भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, शब्दार्थ, भावार्थ, और इसके आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जो आपके आध्यात्मिक जीवन को और अधिक समृद्ध बनाएगा।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
स्थाई / मुखड़ा (Refrain):
मैंने मोहन को बुलाया है, वो आता होगा,
तुम भी आना मेरे घर, आज तमाशा होगा!
सामने आओगे या आज भी परदा होगा,
रोज़ अगर ऐसा ही होगा तो कैसा होगा?
अंतरा 1:
आता होगा, वो आता होगा,
सामने आओगे या आज भी परदा होगा!
सामने आओगे या आज भी पर्दा होगा,
सामने आओगे या आज भी परदा होगा!
रोज़ अगर ऐसा ही होगा तो कैसा होगा,
सामने आओगे या आज भी परदा होगा!
विशेष संवाद / काव्य पंक्ति:
मौत आती है तो आ जाए, कोई गम ही नहीं,
(मुझे मौत पर भी यकीन है और तुझ पर भी एतबार है,
देखते हैं पहले कौन आता है, दोनों का इन्तजार है!)
वो भी तो आएगा तो मेरा मसीहा होगा,
सामने आओगे या आज भी परदा होगा!
अंतरा 2:
मैंने मोहन को बुलाया है, वो आता होगा,
तुम भी आना मेरे घर, आज तमाशा होगा!
हम गुनगारों ने सोचा ही नहीं था प्यारे,
अरे मैंने मोहन को बुलाया, मैंने मोहन को बुलाया,
है वो आता होगा,
तुम भी आना मेरे घर, आज तमाशा होगा!
तुम भी आना, सामने आके आज भी पर्दा होगा,
रोज़ अगर ऐसा ही होगा तो कैसा होगा?
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह एक भक्त और भगवान के बीच के जीवंत संवाद का दस्तावेज है। 'मैंने मोहन को बुलाया है, वो आता होगा' पंक्ति में भक्त के भीतर का वह दृढ़ विश्वास झलकता है जो किसी भी परिस्थिति में विचलित नहीं होता। भक्त कहता है कि मैंने अपने आराध्य मोहन (श्री कृष्ण) को अपने हृदय के निमंत्रण पत्र से आमंत्रित किया है और वह अवश्य आएगा।
भजन की अगली पंक्तियाँ—'सामने आओगे या आज भी परदा होगा'—माया और जीवात्मा के बीच के आवरण को दर्शाती हैं। भक्त ईश्वर से प्रार्थना करता है कि हे प्रभु! अब तो दर्शन दे दो, यह माया का पर्दा कब हटेगा? भगवान और भक्त के बीच में भक्त की अपनी अहंकार रूपी या माया रूपी दीवार (परदा) ही बाधा बनती है। भक्त की पुकार में एक अनूठा उलाहना भी है—'रोज़ अगर ऐसा ही होगा तो कैसा होगा?' यानी रोज़ मिलने का वादा करके भी यदि दर्शन नहीं दिए, तो स्थिति कैसी होगी?
भजन के मध्य में आने वाला संवाद अत्यंत मार्मिक है—'मौत आती है तो आ जाए, कोई गम ही नहीं... देखते हैं पहले कौन आता है, दोनों का इन्तजार है।' यह पंक्ति भक्त की पराकाष्ठा को दर्शाती है। भक्त भगवान के प्रेम में इतना मग्न है कि उसे मृत्यु का भी भय नहीं है। वह कहता है कि मुझे मेरे मोहन पर और मृत्यु दोनों पर समान रूप से विश्वास है, देखना यह है कि पहले कौन आता है। यदि मृत्यु आती है तो वह भी मेरे लिए प्रियतम से मिलाने का माध्यम बन जाएगी और यदि मोहन आते हैं तो वे मेरे मसीहा बनकर मेरे सभी दुखों का अंत कर देंगे।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
इस राधा कृष्ण भजन की निम्नलिखित मुख्य विशेषताएं हैं:
- गायक/कलाकार: यह सुश्री पूर्णिमा जी की ओजस्वी और भावपूर्ण शैली में गाया गया है, जो श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता है।
- भक्ति का प्रकार: यह भजन माधुर्य भाव और कांता भाव के साथ-साथ दास्य और सख्य भाव का अनूठा समन्वय प्रस्तुत करता है।
- साधना में उपयोग: एकांत साधना, सत्संग, और रात्रि जागरण के समय इस भजन का गायन मन को एकाग्र करता है।
- आत्मविश्वास और प्रेम: यह भजन सिखाता है कि ईश्वर के प्रति प्रेम में शर्त नहीं होती, बल्कि अनन्य प्रतीक्षा होती है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन का गायन किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल) या गोधूलि बेला (संध्याकाल) में इसे गाना या सुनना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
- स्थान: मंदिर के प्रांगण में, घर के पूजा स्थल पर या शांत एकांत कमरे में बैठकर इसका स्मरण करें।
- मुद्रा: नेत्र बंद करके, रीढ़ की हड्डी सीधी रखकर भगवान श्री कृष्ण के स्वरूप का ध्यान करते हुए गाएं।
- संगीत यंत्र: हारमोनियम, ढोलक और मंजीरे के साथ इसे गाने पर इसका प्रभाव और अधिक गहरा हो जाता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन के केंद्र में लीलापुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण (मोहन) हैं, जिन्हें ब्रजराज, बांकेबिहारी और द्वारकाधीश के रूप में भी पूजा जाता है। श्री कृष्ण प्रेम और आनंद के अवतार हैं। संत परंपरा में मीराबाई, सूरदास और रसखान जैसे महापुरुषों ने भी इसी प्रकार के विरह और मिलन के भावों को अपने पदों में व्यक्त किया है। सुश्री पूर्णिमा जी जैसी ख्याति प्राप्त कथाव्यास और भजन गायिका ने इस परंपरा को आधुनिक काल में अत्यंत सुंदरता से जीवित रखा है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
यह भजन सरल और प्रवाहमयी ब्रज-हिन्दी मिश्रित बोलचाल की भाषा में रचित है। इसमें रूपक अलंकार और विरोधाभास अलंकार का बहुत ही सुंदर प्रयोग किया गया है, जैसे 'सामने आओगे या आज भी परदा होगा' और 'तमाशा होगा'। काव्य की दृष्टि से यह पद मुक्तक शैली में है, जो सीधे श्रोता के हृदय को स्पर्श करता है। इसमें प्रयुक्त शब्दावली इतनी सहज है कि एक आम भक्त भी इसे आसानी से समझ सकता है और गुनगुना सकता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण जीवन सीख देता है:
- अटूट विश्वास: भगवान की कृपा पर कभी भी संदेह नहीं करना चाहिए। यदि आपने पुकारा है, तो वे आएंगे ही।
- अहंकार का त्याग: 'परदा' इस बात का प्रतीक है कि हमारे और ईश्वर के बीच हमारे अपने अहंकार की दीवार है। इसे गिराना आवश्यक है।
- समर्पण: भक्त को अपने इष्ट के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित होना चाहिए, यहाँ तक कि मृत्यु का भय भी प्रेम के आगे गौण हो जाना चाहिए।
- धैर्य और प्रतीक्षा: साधना के मार्ग में परीक्षा की घड़ी आती है, ऐसे में धैर्य नहीं खोना चाहिए।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| मोहन | मोहने वाले, श्री कृष्ण | आत्मा को आकर्षित करने वाले परमात्मा |
| परदा | आवरण, पर्दा, घूंघट | माया और अहंकार जो भगवान के दर्शन में बाधक है |
| तमाशा | अद्भुत लीला या खेल | भक्त और भगवान के मिलन का अलौकिक आनंद |
| मसीहा | उद्धारकर्ता, संकटमोचन | संसार रूपी भवसागर से पार लगाने वाले भगवान |
| एतबार | भरोसा, विश्वास | ईश्वर की अहैतुकी कृपा पर अटूट आस्था |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
मैंने मोहन को बुलाया है, वो आता होगा: इस पंक्ति में साधक का अदम्य आत्मविश्वास झलकता है। उसने अपने आंसुओं और प्रेम से कान्हा को निमंत्रण दिया है, इसलिए उसे विश्वास है कि वे अवश्य पधारेंगे।
तुम भी आना मेरे घर, आज तमाशा होगा: यहाँ 'तमाशा' शब्द साधारण अर्थों में नहीं, बल्कि उस अलौकिक आनंद और उत्सव के लिए है जो भगवान के आने से भक्त के जीवन में घटित होता है।
सामने आओगे या आज भी परदा होगा: भक्त पूछता है कि क्या आज भी मेरे कर्मों और माया के बीच कोई दूरी बनी रहेगी या आज सीधा साक्षात्कार होगा।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के भाव को पुष्ट करने के लिए निम्नलिखित श्रीमद्भागवत गीता और पुराणों के श्लोकों का स्मरण किया जा सकता है:
"ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम। मम वर्मनुवर्तन्ते मनुष्य्याः पार्थ सर्वशः॥"
अर्थात: जो भक्त जिस प्रकार मेरी शरण में आता है, मैं उसी के अनुरूप उसे फल देता हूँ। हे पार्थ! मनुष्य सभी प्रकार से मेरे ही मार्ग का अनुसरण करते हैं। आप राधा कृष्ण स्टेटस और अन्य भजनों के माध्यम से भी अपनी भक्ति को और प्रगाढ़ कर सकते हैं।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | मैंने मोहन को बुलाया है वो आता होगा (Maine Mohan Ko Bulaaya Hai) |
|---|---|
| आराध्य देवता | भगवान श्री कृष्ण (राधा-कृष्ण) |
| प्रसिद्ध गायिका | सुश्री पूर्णिमा जी |
| भाषा | हिंदी / ब्रजभाषा मिश्रित |
| मुख्य भाव | प्रेम, विरह, अनन्य विश्वास और समर्पण |
| संगीत श्रेणी | कृष्ण भजन / संकीर्तन |
| उपयुक्त अवसर | जन्माष्टमी, एकादशी, सत्संग, दैनिक पूजा |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
भक्तलोक (Bhaktilok) पर प्रकाशित यह सामग्री वेदों, पुराणों, संतों की परंपरा और पारंपरिक लोक-भक्ति के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध, प्रामाणिक और भावपूर्ण भजन सामग्री उपलब्ध कराना है। किसी भी प्रकार की त्रुटि या सुझाव के लिए आप संपर्क कर सकते हैं।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्भागवत महापुराण (भक्ति योग संदर्भ)
- पारंपरिक संकीर्तन एवं भजन संग्रह
- सुश्री पूर्णिमा जी के लाइव भजन एवं प्रवचन संदर्भ
- सनातन संस्कृति एवं ब्रज साहित्य लोकगीत परंपरा
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