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Matarani Bhajan

एक दिन वो भोले भंडारी भजन लिरिक्स (Ek Din Vo Bhole Bhandari Bhajan Lyrics in Hindi) - Bholenath Bhajan by Rajender Jain - Bhaktilok

223 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भोलेनाथ का रासलीला अभिराम भजन

शिव एवं शुक्ल पक्ष की महिमा का बखान करता अद्भुत भजन सुनें और ध्यान करें।

एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज की नारी गोकुल में आ गये हैं पारवती भी मना के हारी ना माने त्रिपुरारी, गोकुल में आ गये हैं ओ मेरे भोले स्वामी कैसे ले जाओ तोहे साथ में, मोहन के सिवा वहा कोई पुरुष ना जाये रास में, हँसी करे गी ब्रिज की नारी मान लो बात हमारी, गोकुल में आ गये है...... ऐसा बनादो मुझे को कोई न जाने इस राज को, मैं हु सहेली तेरी ऐसा बताना ब्रिज राज को, बना के जुड़ा पहन के साड़ी चाल चले मत वाली, गोकुल में आ गये है....... देखा मोहन ने जब तो समझ गए ओ सारी बात रे ऐसी बजायी बंसी सूद बूद भूले भोलेनाथ रे सर से खिसक गयी जब साड़ी मुस्काए गिरधारी भोले शर्मा गए हैं एक दिन वो भोले भंडारी बन कर के ब्रिज की नारी गोकुल में आ गये है पारवती भी मना के हारी ना माने त्रिपुरारी, गोकुल में आ गये है ||

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भगवान भोलेनाथ की लीला का वर्णन किया गया है, जहाँ वे पार्वती जी के साथ गोकुल में नंदलाला के रूप में प्रकट होते हैं। 'एक दिन वो भोले भंडारी' पंक्ति में यह संकेत है कि भोलेनाथ, जो अन्यथा तप और संयम के प्रतिमूर्ति हैं, राधा और कृष्ण के साथ नृत्य करने के लिए प्रेरित होते हैं। यह नृत्य प्रेम और भक्ति का प्रतीक है, जहाँ शिव और पार्वती के प्रेम का जिक्र करते हुए भगवान की निस्वार्थता और भक्ति की महिमा को दर्शाया गया है। इस भजन के माध्यम से, भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी मिलती है, जो हमें श्रद्धा और विश्वास के साथ अपने इष्ट पर ध्यान लगाने के लिए प्रेरित करता है।

गोकुल में आकर भगवान भोलेनाथ ने एक अनोखा रूप धारण कर लिया है जिससे भक्तों में उनके प्रति भक्ति और प्रेम की भावना जागृत होती है। पार्वती जी की मना करने पर भी भोलेनाथ का गोकुल में आना इस बात को दर्शाता है कि प्रेम और भक्ति की कोई सीमा नहीं होती। 'हँसी करे गी ब्रिज की नारी' पंक्ति में हम देखते हैं कि भक्तिभाव में लिपटे ये संवाद हमें सिखाते हैं कि भक्ति में आनंद और उल्लास का होना आवश्यक है। भगवान के इस रूप में भक्ति की खुशबू और तन-मन की शुद्धि का संकेत मिलता है। भक्त को यहां उनके प्रभु को प्रिय बनाने का प्रयास करते हुए दिखाया गया है।

इस भजन में भक्ति योग का गहन तत्व उपस्थित है। भक्ति मार्ग वह मार्ग है जिसमें भक्त अपने इष्ट के साथ एकात्मता अनुभव करता है। शिव और पार्वती के संवाद से हमें यह देखने को मिलता है कि सच्ची भक्ति का अर्थ केवल पूजा-अर्चना करना नहीं है, बल्कि अपने हृदय में प्रेम और समर्पण का होना भी है। 'बना के जुड़ा पहन के साड़ी' में भक्ति का आडम्बरी स्वरुप दिखाया जाता है, जिसमें भक्त की साधना स्वयं को तृप्त करने के लिए होती है, जिससे उसे अपने इष्ट में समर्पण का अनुभव हो। यहां भगवान की आनंद लीला में शामिल होना, भक्त के लिए उनकी कृपा प्राप्त करने का साधन बनता है। इस प्रकार, भजन हमें भक्ति का सही मर्म समझाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन धार्मिक और पौराणिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। शिव और पार्वती के बीच का प्रसंग हमें महाभारत और रामायण में भी मिलता है, जहाँ इन दोनों देवताओं के गठबंधन में सृष्टि के विकास का आधार है। गोकुल, जो कृष्ण के बचपन का संदर्भ है, यह स्पष्ट करता है कि भगवान शिव की लीला केवल उनके तप से नहीं, बल्कि प्रेम और भक्ति के रूप में भी प्रकट होती है। यह भजन उन भक्तों के लिए प्रेरणास्त्रोत है, जो भगवान शिव के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करने का माध्यम तलाशते हैं। यह दर्शाता है कि भगवान कैसे अपने पूजनीयों के साथ प्रेम और निकटता में रहते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का पाठ करने से मानसिक शांति और द्वेष की भावना का निवारण होता है। भावुकता में वृद्धि होती है और मन को आंतरिक शांति मिलती है। जब भक्त इस गीत को गाते हैं, तो उनका मन प्रसन्नता और सादगी से भर जाता है, जिससे तनाव कम होता है। यह भजन उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जो अपनी भक्ति को गहराई से समझना चाहते हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या संध्या के समय करना अत्यंत लाभकारी है। पूजा स्थल पर एक दीया जलाकर, सफेद फूल अर्पित करें और भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा के सामने बैठें। एकाग्रता के साथ इस भजन का गान करें और ध्यान करें। सच्चे मन से गाया गया भजन आपको आध्यात्मिक अनुभव से भर देगा।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन भगवान शिव का किस रूप का वर्णन करता है?

यह भजन भगवान शिव के पार्वती के साथ गोकुल में राधा और कृष्ण के रूप में प्रकट होने की कथा को दर्शाता है।

क्या इस भजन के माध्यम से भक्ति का महत्व बताया गया है?

हाँ, इस भजन में प्रेम, भक्ति और निस्वार्थ सेवा का महत्व बताया गया है, जो भक्ति मार्ग की आत्मा है।

इस भजन को गाने का विशेष समय क्या है?

इस भजन को सुबह या संध्या के समय गाना आदर्श है, जिससे मन को शांति और साधना का अनुभव हो।

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"एक दिन वो भोले भंडारी: शिव और पार्वती की प्रेम कथा, भक्ति का महत्त्व, और मानसिक शांति का साधन। }

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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