प्रस्तावना एवं परिचय
मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
श्री गणेशाय: नम :
जय मां छिनमस्तिका
चित में वसो चिंतपूर्णी
छिन्मस्तिका मात |
सात बहन की लाड़ली
हो जग में विख्यात |
माईदास पर की कृपा
रूप दिखाया श्याम|
सब की हो वरदायनी
शक्ति तुमे प्रणाम |
छिन्मस्तिका मात भवानी
कलिकाल में शुभ कलियानी|
सती आपको अंश दिया है
चिंतपूर्णी नाम किया है |
चरणों की है लीला न्यारी
चरणों को पूजा हर नर नारी |
देवी देवता नतमस्तक
चैन नाह पाये भजे न जब तक |
शांत रूप सदा मुस्काता
जिसे देख आनंद आता |
एक और कलेश्वर सजे
दूसरी और शिववाड़ी विराजे |
तीसरी और नारायण देव
चौथी और मुचकुंद महादेव|
लक्ष्मी नारायण संग विराजे
दस अवतार उन्ही में साजे|
तीनो दुवार भवन के अंदर
बैठे ब्रह्मा विष्णु ब शंकर |
काली लक्ष्मी सरस्वती मां
सत रज तम से व्याप्त हुई मां|
हनुमान योद्धा बलकारी
मार रहे भैरव किलकारी |
चौंसठ योगिनी मंगल गावे
मृदंग छैने महंत वजावे |
भवन के नीचे बाबड़ी सूंदर
जिसमे जल बेहता है झर झर |
संत आरती करे तुम्हरी
तुमेः पूजते है नर नारी |
पास है जिसके बाग निराले
जहाँ है पुष्पों की है बनमाला |
कंठ आपके माला विराजे
सुहा सुहा चोला अंग साजे|
सिंह यहाँ संध्या को आता
छिन्मस्तिका शीश नबाता|
निकट आपके है गुरुद्वारा
जो है गुरु गोबिंग का प्यारा |
रणजीत सिंह महाराज बनाया
तुम स्वर्ण का छत्र चढ़ाया |
भाव तुम्ही से भक्ति पाया
पटियाला मंदिर बनबाया |
माईदास पर कृपा करके
आई होशिअरपुर विचर के |
अठूर क्षेत्र मुगलो नेह घेरा
पिता माईदास ने टेरा|
अम्ब छेत्र के पास में आये
दोह पुत्र कृपा से पाये |
वंश माये नेह फिर पुजवाया
माईदास को भक्त बनबाया |
सो घर उसके है अपनाया
सेवारत है जो हर्षाया |
तीन आरती है मंगलमह
प्रात: मद्या और संद्यामय |
असोज चैत्र मेला लगता
पर सावन में आनंद भरता|
पान ध्वजा – नारियल चढ़ाऊँ
हलवा चन्ना का भोग लगाऊं|
छनन य चुन्नी शीश चढ़ाऊँ
माला लेकर तुम्हे ध्याऊँ|
मुझको मात विपद ने घेरा
जय माँ जय माँ आसरा तेरा|
ज्वाला से तुम तेज हो पति
नगरकोट की शवि है आती|
नयना देवी तुम्हे देखकर
मुस्काती है मैया तुम पर|
अभिलाषा मां पूरन कर दो
हे चिंतपूर्णी मां झोली भर दो|
ममता वाली पलक दिखा दो
काम क्रोध मद लोभ हटा दो |
सुख दुःख तो जीवन में आते
तेरी दया से दुःख मिट जाते |
चिंतपूर्णी चिंता हरनी
भय नाशक हो तुम भय हरनी |
हर बाधा को आप ही टालो
इस बालक को आप संभालो|
तुम्हारा आशीर्वाद मिले ज
सुख की कलियाँ खिले तब|
कहा तक तुम्हरी महिमा गाऊं
दुवार खड़ा हो विनय सुनाऊ|
चिंतपूर्णी मां मुझे अपनाओ
“सतीश ” को भव पार लगाओ
दोहा :
चरण आपके छू रहा हु चिंतपूर्णी मात |
लीला अपरंपार हे हो जगमें विख्यात ||
2.मूल मंत्र:
” ओइम ऐ ही कली श्री चामुण्डाय विच्चै:”
*** Singer - Rahul pathak ***
वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन "माँ चिंतपूर्णी चालीसा लिरिक्स (Maa Chintpurni Chalisa Lyrics in Hindi) - Rahul pathak Mata Chintpurni - Bhaktilok " बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।
भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?
शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।
क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?
हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।
शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?
हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।
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