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क्या मांगे वो बेटा जिसने माँ की ममता पायी है (Kya Maange Wo beta Jisane Ma Ki Mamta Paayi Hai Lyrics in Hindi) - Meri Mai मेरी माँ Meri Maa - Bhaktilok

408 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माँ की ममता: आत्मा का सच्चा सहारा

इस भजन में माँ की ममता का गान है, जो आत्मा को अमिट सुख और शांति का अनुभव कराता है।

क्या मांगे वो बेटा जिसने माँ की ममता पायी है (Kya Maange Wo beta Jisane Ma Ki Mamta Paayi Hai Lyrics in Hindi) - जब चोट कभी मेरे लग जाती थीतो आँख तेरी भी तो भर आती थीमाँ… ओ… माँ…जब चोट कभी मेरे लग जाती थीतो आँख तेरी भी तो भर आती थीएक छोटी सी फूँक से तेरीसभी दर्द मेरे होते थे गुमआज भी कोई चोट लगे तोयाद आती होयाद आती हो तुमआज भी मेरी आँख भरे तोयाद आती होयाद आती हो तुममाँ… मेरी माँ… मेरी माँ…ओ माँ… मेरी माँमेरी माँ… माँतेरी बातों में अपनीहर एक मैं उलझन काहल पा लेता थातेरे हाथों कि रोटी अक्सर हीभूख से ज्यदा खा लेता थातेरी बातों में अपनीहर एक मैं उलझन काहल पा लेता थातेरे हाथों कि रोटी अक्सर हीभूख से ज्यदा खा लेता थातेरा हिस्सा मैंतेरा क़िस्सा मैंजो सबको सुनाती हो तुमआज भी मेरी बात चले तोयाद आती होयाद आती हो तुमआज भी मेरीआँख भरे तोयाद आती होयाद आती हो तुममाँ… मेरी माँ… मेरी माँ…माँ… मेरी माँ… मेरी माँ…कोने को थामे तेरे आँचल केबेफिक्र मैं सो जाता थामेरे दिल में क्याहै तेरे बिना माँकोई समझा ही ना पता थाजो हो संग तू नातो हो जग सुनाप्यार इतना जताती हो तुमआज भी कोई…लगे तोयाद आती होयाद आती हो तुमआज भी मेरीआँख भरे तोयाद आती होयाद आती हो तुमओ मेरी माँ… मेरी माँ…मेरी माँ… मेरी माँ…

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन की पंक्तियाँ एक बेटे की माँ के प्रति गहरी श्रद्धा और प्रेम को दर्शाती हैं। माँ की ममता अपार होती है, जो हर दर्द और कठिनाई में संजीवनी का काम करती है। गीत के आरंभ में यह कहा गया है कि जब हाथों में चोट आती है, तो माँ की आँखें भी भर आती हैं। यह शब्द उनके त्याग और चिंता को प्रकट करते हैं। आज भी जब पुत्र को चोट लगती है, माँ की याद आ जाती है, यह दर्शाता है कि मातृत्व का संबंध हमेशा बना रहता है। जो प्यार और संजीवनी माँ ने दी है, वह कभी नहीं भूलती। इस भजन की एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे गाते समय भक्त अपने अंदर की भावनाओं को अभिव्यक्त करते हैं, जो इस अद्भुत बंधन को मजबूत बनाता है।

इसके साथ ही, भजन में यह भी कहा गया है कि माँ की बातें और रोटी संतोष का स्रोत हैं। वह न केवल भौतिक पोषण देती है, बल्कि मानसिक और भावनात्मक समर्थन भी प्रदान करती है। हर कठिनाई में मातृत्व की छाया संतोष और सुरक्षा का अनुभव कराती है। माँ के आंचल में सुरक्षित निद्रा से लेकर, उसके साथ बिताया गया हर एक पल उस प्रति अपार प्रेम और आस्था को प्रकट करता है। जब भी कोई विपत्ति आती है, माँ की यादें दिल को सुकून देती हैं। यह भजन वास्तविकता में हर व्यक्ति के लिए एक मजबूत संदर्भ बनाता है, जिसमें माँ का प्रेम ही जीवन का सबसे बड़ा सहारा है।

भक्ति मार्ग की दृष्टि से, यह भजन न केवल माँ के प्रति समर्पण को दर्शाता है, बल्कि यह अध्यात्म का एक उच्चतम स्वरूप है। माँ का आदर्श मातृत्व केवल एक भौतिक संबंध नहीं, बल्कि एक दिव्य ऊर्जा है, जो हर जीवित प्राणी को सहारा देती है। यह भक्ति का एक रूप है, जहाँ भक्त माँ को एक देवी के रूप में स्वीकारता है। इससे यह ज्ञान होता है कि हर एक अनुभव, चाहे वो सुख हो या दुख, माँ के साथ जुड़े होने पर होता है। यह भजन जीवन की सच्चाइयों को स्वीकार करने और माँ की ममता के प्रति आनन्दित होने का एक साधन है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय संस्कृति में मातृत्व के महत्व को दर्शाता है। पुराणों और शास्त्रों में माता को देवी के रूप में पूजा गया है। जैसे महाभारत में कुंती का पात्र, जहाँ वे माँ ही नहीं, बल्कि एक सशक्त महिला के रूप में जानी जाती हैं। इसी तरह, माता सीता का चरित्र भी समर्पण और मातृत्व का प्रतीक है। हमें यह सिखाता है कि माँ केवल जन्म देने वाली नहीं होती, बल्कि जीवन के हर पहलू में सहारा देने वाली होती है। यह भजन इस तथ्य को मनाता है कि मातृत्व में अद्वितीयता निहित है, जो जीवन को प्रबुद्ध करती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति और संतोष प्राप्त होता है। यह व्यक्ति के मन में सकारात्मकता भरता है और माँ के प्रति प्रेम और कृतज्ञता की भावना को जागृत करता है। नियमित रूप से इसे गाने से व्यक्ति की आत्मा को शक्ति एवं साहस मिलता है, जो जीवन की कठिनाइयों का सामना करने में सहायक होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह या शाम के समय करना शुभ माना जाता है। जाप करने से पूर्व एक दीया जलाना और फूलों का चढ़ावा अर्पित करना चाहिए। भक्त को साफ मन और ध्यान से बैठकर इसे गाना चाहिए, जिससे कि माँ के प्रति श्रद्धा और प्रेम अभिव्यक्त हो सके। ध्यान की अवस्था में बैठकर इसे गाते समय भक्ति का भाव मन में लाना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या यह भजन केवल माँ के लिए है?

यह भजन माँ की ममता का गुणगान है, लेकिन इसका अर्थ व्यापक है। यह हर सच्चे प्रेम और देखभाल के प्रतीक के रूप में देखा जा सकता है।

क्या इस भजन को हर दिन गाना चाहिए?

जी हाँ, इस भजन को नियमित रूप से गाने से आंतरिक शांति और माँ के प्रति प्रेम की अनुभूति होती है, जिससे भक्ति का मार्ग भी प्रशस्त होता है।

क्या इस भजन का कोई विशेष समय है?

इस भजन का जाप सुबह या शाम करते समय, सकारात्मक ऊर्जा की संभावना बढ़ जाती है। इस समय का चयन ध्यान और भक्ति के लिए आदर्श है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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