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ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम् (Jyotirlinga Stotram Lyrics in Hindi) - Shiv Mantra - Bhaktilok

61 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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ज्योतिर्लिंग स्तोत्र: महादेव की दिव्य आराधना

इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों को तात्कालिक शांति और मोक्ष प्राप्त होता है।

 ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम् (Jyotirlinga Stotram Lyrics in Hindi) - श्रीशैलशृङ्गे विबुधातिसङ्गे तुलाद्रितुङ्गेऽपि मुदा वसन्तम् ।तमर्जुनं मल्लिकपूर्वमेकं नमामि संसारसमुद्रसेतुम् ॥2अवन्तिकायां विहितावतारं मुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम् ।अकालमृत्योः परिरक्षणार्थं वन्दे महाकालमहासुरेशम् ॥3कावेरिकानर्मदयोः पवित्रे समागमे सज्जनतारणाय ।सदैवमान्धातृपुरे वसन्तमोङ्कारमीशं शिवमेकमीडे ॥4पूर्वोत्तरे प्रज्वलिकानिधाने सदा वसन्तं गिरिजासमेतम् ।सुरासुराराधितपादपद्मं श्रीवैद्यनाथं तमहं नमामि ॥5याम्ये सदङ्गे नगरेऽतिरम्ये विभूषिताङ्गं विविधैश्च भोगैः ।सद्भक्तिमुक्तिप्रदमीशमेकं श्रीनागनाथं शरणं प्रपद्ये ॥6महाद्रिपार्श्वे च तटे रमन्तं सम्पूज्यमानं सततं मुनीन्द्रैः ।सुरासुरैरक्षक महोरगाढ्यैः केदारमीशं शिवमेकमीडे ॥7सह्याद्रिशीर्षे विमले वसन्तं गोदावरितीरपवित्रदेशे ।यद्धर्शनात्पातकमाशु नाशं प्रयाति तं त्र्यम्बकमीशमीडे ॥8सुताम्रपर्णीजलराशियोगे निबध्य सेतुं विशिखैरसंख्यैः ।श्रीरामचन्द्रेण समर्पितं तं रामेश्वराख्यं नियतं नमामि ॥9यं डाकिनिशाकिनिकासमाजे निषेव्यमाणं पिशिताशनैश्च ।सदैव भीमादिपदप्रसिद्दं तं शङ्करं भक्तहितं नमामि ॥10सानन्दमानन्दवने वसन्तमानन्दकन्दं हतपापवृन्दम् ।वाराणसीनाथमनाथनाथं श्रीविश्वनाथं शरणं प्रपद्ये ॥11इलापुरे रम्यविशालकेऽस्मिन् समुल्लसन्तं च जगद्वरेण्यम् ।वन्दे महोदारतरस्वभावं घृष्णेश्वराख्यं शरणम् प्रपद्ये ॥12ज्योतिर्मयद्वादशलिङ्गकानां शिवात्मनां प्रोक्तमिदं क्रमेण ।स्तोत्रं पठित्वा मनुजोऽतिभक्त्या फलं तदालोक्य निजं भजेच्च ॥13॥ इति द्वादश ज्योतिर्लिङ्गस्तोत्रं संपूर्णम् ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों का वाचन किया गया है, जिनका विशेष महत्व है। प्रत्येक स्तोत्र में, शिव की विविध रूपों का वर्णन किया गया है, जैसे 'श्रीशैलशृङ्गं' में शिव का अद्वितीय स्वरूप प्रस्तुत किया गया है। इसके बाद 'महाकालमहासुरेशम्' का उल्लेख किया गया है, जो काल के देवता को परिभाषित करता है। भूतकाल, वर्तमान और भविष्य के देवता का पूजन करने से काल से मुक्ति का साधन मिलता है। 'जहां भी भक्त शिव का स्मरण करे, वह स्थान पवित्र हो जाता है'—ऐसी चेतना इस स्तोत्र में विद्यमान है। आश्रय और आशा के प्रतीक के रूप में यहां 'रामेश्वर' की भी स्तुति की गई है, जो शिव और राम का अद्वितीय संबंध दर्शाता है। यह स्तोत्र सम्पूर्ण जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने का साधन है।

ज्योतिर्लिंग स्तोत्र भक्तों के लिए एक मार्गदर्शक का कार्य करता है। भक्त जब इस स्तोत्र का पाठ करते हैं, तब उनकी आत्मा शिव की ऊर्जा से भर जाती है। 'नमामि संसारसमुद्रसेतुम्' का अर्थ है कि भगवान शिव संसार के समुद्र को पार करने वाले हैं, जो जीवों को आकर्षित कर उन्हें मोक्ष दिलाने का कार्य करते हैं। स्तोत्र में वर्णित प्रत्येक ज्योतिर्लिंग की पूजा करने से भक्त शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य प्राप्त करते हैं। भावार्थ में यह स्पष्ट है कि जिन भक्तों का शिव में अटूट विश्वास होता है, वे अवश्य ही भक्तिमार्ग पर आगे बढ़ते हैं। यह स्तोत्र मानसिक संशय और भयावहता को दूर करते हुए भक्तों को एक अद्वितीय शांति की अनुभूति कराता है।

इस स्तोत्र का अध्ययन करते समय भक्ति मार्ग की वास्तविकता की गहराई समझ में आती है। प्रत्येक पद में पूजा और भक्ति का एक विशेष चित्रण है। 'सद्भक्तिमुक्तिप्रदमीशमेकं' कहकर यह स्पष्ट किया गया है कि शिव की आराधना से मनुष्य केवल भौतिक सुख नहीं, अपितु मुक्ति भी प्राप्त कर सकता है। यह ज्ञान अध्यात्म की गहराई में प्रवेश करता है और यह दर्शाता है कि आस्था और समर्पण से संगठित कान्ति से भक्त अपने जीवन को एक नई दिशा दे सकते हैं। 'तदालोक्य निजं भजेच्च' में इस बात की पुष्टि होती है कि अंतःकरण से शिव को खोजने पर जीवन का उद्देश्य स्पष्ट होता है। यदि भक्त अपने दिल से प्रभु के प्रति प्रेम और भक्ति व्यक्त करें, तो उन्हें शिव का आशीर्वाद अवश्य मिलता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

ज्योतिर्लिंग स्तोत्र, पुराणों में वर्णित बारह ज्योतिर्लिंगों के शक्तिशाली मंत्र हैं, जिनका प्रयोग भक्तों द्वारा भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। यह स्तोत्र मुख्य रूप से शिवपुराण में वर्णित है, जहां इसे महामृत्युंजय मंत्र के साथ सामंजस्यित किया गया है। शास्त्रों में वर्णित है कि जो कोई इस स्तोत्र का पाठ श्रद्धा और भक्ति से करता है, वह संसार के सभी दुखों से मुक्ति प्राप्त कर लेता है। यह स्तोत्र, भक्ति की सामुदायिक भावना को भी प्रोत्साहित करता है, क्योंकि इसमें शिव की कृपा शंका को समाप्त करती है और भक्तों के मन में साहस भरती है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का पाठ करने से मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति होती है। भक्तों को सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है। निरंतर इस स्तोत्र का जाप करने से भक्त आत्मिक बल प्राप्त करते हैं और सभी शारीरिक और मानसिक कष्ट दूर होते हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का पाठ सुबह के समय या शिवरात्रि के दिन करना उत्तम माना गया है। पूजा करते समय साफ वस्त्र पहनें और एक शुद्ध स्थान पर सामने एक दीया जलाएं। फूल, फल या धूप अर्पित करें और मन में भगवान शिव के प्रति भक्ति भाव रखें। ध्यान लगाएं कि आप एकाग्रता से स्तोत्र का पाठ कर रहे हैं, जिससे आपकी मनोकामनाएं पूर्ण हों।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?

ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का पाठ सुबह के समय या शिवरात्रि पर करना उत्तम रहता है।

इस स्तोत्र के क्या लाभ हैं?

इस स्तोत्र के जाप से मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक विकास होता है। भक्तों को सभी प्रकार की मानसिक और भौतिक दिक्कतों से मुक्ति मिलती है।

क्या ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का पाठ कुम्भ मेला आदि में किया जा सकता है?

हाँ, ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का पाठ धार्मिक आयोजनों, जैसे कुम्भ मेला और शिवरात्रि में किया जा सकता है। इससे विशेष पुण्य लाभ प्राप्त होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 31 Aug 2026

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