Shyam Bhajan

दुनिया चलती पेरो पर मै श्याम भरोसे चलता हु (Duniya chalti paro par main shyam bharose chalta hu Lyrics in Hindi) - Shyam Bhajan - Bhaktilok

199 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्याम भजन | Shyam Bhajan

दुनिया चलती पेरो पर मै श्याम भरोसे चलता हु (Duniya Chalti Paro Par Main Shyam Bharose Chalta Hu) - सम्पूर्ण लिरिक्स, अर्थ एवं भक्ति भाव

अपडेटेड: 2026 | श्रेणी: श्याम भजन, खाटू श्याम जी के भजन

श्री खाटू श्याम बाबा के चरणों में समर्पित यह अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण भजन "दुनिया चलती पेरो पर मै श्याम भरोसे चलता हु" (Duniya Chalti Paro Par Main Shyam Bharose Chalta Hu) हर उस भक्त के हृदय की गहराइयों को छू लेता है जो पूर्ण रूप से हारे के सहारे बाबा श्याम पर अपनी अटूट श्रद्धा रखता है। कलयुग के अवतारी खाटू श्याम (श्री बर्बरीक जी) के दरबार में जब एक भक्त अपनी समस्त चिंताओं को त्यागकर केवल बाबा के नाम का संबल थाम लेता है, तब उसके जीवन के सभी संकट स्वतः ही टल जाते हैं। इस भजन के माध्यम से गायक संजय मित्तल जी ने एक साधारण भक्त के अनन्य समर्पण और भगवान श्री कृष्ण के प्रति उसकी अगाध निष्ठा का बहुत ही सुंदर सजीव चित्रण किया है। इस विस्तृत लेख में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण बोल (Lyrics), सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, और इसके आध्यात्मिक महत्व कासांगोपांग विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थाई (मکھड़ा):

दुनिया चलती पैरो पर, मैं श्याम भरोसे चलता हूँ,
मेरा कुछ भी नहीं है बाबा, तेरे भरोसे पलता हूँ।
दुनिया चलती पैरो पर, मैं श्याम भरोसे चलता हूँ...

अंतरा 1:

भूल के सारी दुनियादारी, श्याम का दामन थमा है,
देख के इसकी रहमत भारी, खुद सुदामा माना है।
श्याम चरण में स्वर्ग सा सुख है, यह मैंने माना है,
दुनिया चलती पैरो पर, मैं श्याम भरोसे चलता हूँ...

अंतरा 2:

ना घबरावे दिल मेरा, अब श्याम मेरे साथ है,
संकट आवे जब-जब मुझ पर, चलता आगे-आगे है।
श्याम के दर पर आके देखो, सोई किस्मत जग जावे,
दुनिया चलती पैरो पर, मैं श्याम भरोसे चलता हूँ...

अंतरा 3:

सांसे तो एक वहम है, श्याम के नाम से जीता हूँ,
प्यासा लगे तो मैं बस थोड़ी, श्याम की मस्ती पीता हूँ।
कृष्ण ये बोले अपना हर पल, श्याम भरोसे जीता हूँ,
दुनिया चलती पैरो पर, मैं श्याम भरोसे चलता हूँ...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन की प्रत्येक पंक्ति में एक भक्त की अपने आराध्य खाटू श्याम के प्रति अनन्य निर्भरता (शरणगति भाव) झलकती है। सांसारिक लोग अपनी बुद्धि, बल, धन और शारीरिक पैरों के सहारे जीवन का सफर तय करते हैं, परंतु एक सच्चा आस्तिक और श्याम भक्त अपनी शारीरिक क्षमताओं से ऊपर उठकर भगवान की कृपा पर अपना पूरा जीवन समर्पित कर देता है।

"मेरा कुछ भी नहीं है बाबा, तेरे भरोसे पलता हूँ" - यह पंक्ति जीव के अहंकार के पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। भक्त यह स्वीकार करता है कि उसकी सांसें, उसका आहार, उसका परिवार और उसका भरण-पोषण सब कुछ केवल और केवल खाटू श्याम बाबा की अहैतुकी कृपा पर निर्भर है। जिस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा की मित्रता निभाते हुए उनकी झोली भर दी थी, उसी प्रकार श्याम भक्त भी यह मानता है कि बाबा की रहमत के आगे सुदामा जैसी गरीबी भी कुबेर के समान समृद्ध हो जाती है।

जब भक्त यह कहता है कि "संकट आवे जब-जब मुझ पर, चलता आगे-आगे है", तो वह बाबा के उस अभयदान की याद दिलाता है जो उन्होंने अपने भक्तों को दे रखा है - "हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा"। भक्त का विश्वास इतना दृढ़ हो जाता है कि वह भौतिक सांसों को केवल एक भ्रम मानता है और असली जीवन श्याम नाम की मस्ती और संकीर्तन में ही अनुभव करता है। ऐसे पावन भावों के स्मरण मात्र से मन को असीम शांति मिलती है। इसी प्रकार के अन्य मधुर भजनों के लिए आप हमारा खाटू श्याम भजन संग्रह पढ़ सकते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • आराध्य देव: कलयुग के अवतारी शीश के दानवीर खाटू श्याम बाबा (बर्बरीक जी)।
  • भक्ति का भाव: अनन्य शरणागति, पूर्ण विश्वास, और अहंकार का त्याग।
  • लोकप्रियता: इसे देश-विदेश के श्याम प्रेमियों द्वारा फाल्गुनी मेलों, कीर्तन-संकीर्तन और एकादशी जागरण में अत्यंत उत्साह के साथ गाया और सुना जाता है।
  • मानसिक संबल: यह भजन अवसाद, तनाव और जीवन की कठिनाइयों से जूझ रहे भक्तों को मानसिक संबल और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन का गायन या श्रवण विशेषतः निम्नलिखित अवसरों पर अत्यधिक फलदायी और आनंददायक माना जाता है:

उपयुक्त समय

  • प्रतिदिन प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त में ध्यान के समय।
  • संध्यावंदन के उपरांत शांत वातावरण में।
  • शुक्ल पक्ष की एकादशी और द्वादशी तिथि को विशेष रूप से।
  • खाटू श्याम बाबा के मासिक कीर्तन या जागरण के दौरान।

श्रवण विधि

  • स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • खाटू श्याम बाबा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित करें।
  • पूर्ण तन्मयता और भावविभोर होकर शब्दों के अर्थ पर ध्यान दें।
  • भजन के पश्चात बाबा को मिश्री-माखन या चूरमा का भोग लगाएं।

भजन से जुड़े प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पंक्ति सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
श्याम भरोसा श्री खाटू श्याम जी पर अटूट विश्वास अपने बल का त्याग कर ईश्वर की कृपा पर पूर्ण निर्भरता।
दुनियादारी मोह-माया और सांसारिक रिश्ते-नाते ऐसी आसक्ति जो भगवान से दूर ले जाए, उसका त्याग।
सुदामा माना सुदामा जैसी दीनता और प्रभु की मित्रता भक्त और भगवान के बीच का अटूट और पवित्र प्रेम संबंध।
श्याम की मस्ती नाम स्मरण का आनंद और नशा भक्ति रस में सराबोर होकर सांसारिक दुखों से मुक्त होना।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम दुनिया चलती पेरो पर मै श्याम भरोसे चलता हु (Duniya Chalti Paro Par)
आराध्य देव श्री खाटू श्याम बाबा (बर्बरीक जी)
गायक कलाकार श्री संजय मित्तल जी
गीतकार श्री महेंद्र शरण बंसल
संगीतकार विनय कपूर
भाषा सरल हिंदी / राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा
भक्ति भाव शरणागति, समर्पण, प्रेम और विश्वास
प्रमुख प्रसंग खाटू श्याम जागरण, एकादशी उत्सव एवं संकीर्तन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध और लोकप्रिय श्याम भजन के मुख्य गायक प्रसिद्ध भजन सम्राट श्री संजय मित्तल जी हैं। इनकी सुरीली आवाज में यह भजन भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है।

इस भावपूर्ण भजन के गीतकार श्री महेंद्र शरण बंसल जी हैं, जिन्होंने अपनी लेखनी से श्याम प्रेमियों के भावों को बहुत सुंदर रूप दिया है।

खाटू श्याम बाबा महाभारत काल के वीर योद्धा बर्बरीक हैं, जिन्हें भगवान श्री कृष्ण ने कलियुग में अपने नाम 'श्याम' से पूजे जाने का वरदान दिया था। उन्हें "हारे का सहारा" भी कहा जाता है।

यह भजन हमें यह सिखाता है कि मनुष्य को अपनी भौतिक सफलताओं या पैरों के बल पर घमंड नहीं करना चाहिए, बल्कि अपने जीवन की हर सांस और हर पग के लिए भगवान श्याम पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए।

यह भजन खाटू श्याम जी के मासिक जागरण, फाल्गुन लक्खी मेले, एकादशी उत्सव और घरों में होने वाले पारिवारिक संकीर्तन में विशेष रूप से गाया जाता है।

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संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

यह लेख पारंपरिक भक्ति साहित्य, श्याम प्रेमियों के अनुभवों और उपलब्ध ऑडियो-विजुअल संदर्भों के आधार पर संकलित किया गया है।

श्रेणियां: Shyam Bhajan

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Sep 2026

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