Latest Bhakti Song मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

अब के बरस तुझे धरती की रानी कर देंगे लिरिक्स (Ab Ke Baras Tujhe Dharti Ki Rani Kar Denge Lyrics in Hindi) - Desh Bhakti Song

इस भजन में मातृभूमि के प्रति बलिदान और समर्पण का गहरा संदेश है, जो भक्तों को प्रेरित करता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

धरती की रानी के प्रति अर्पित बलिदान

संकल्प और त्याग का यह भक्ति गीत आत्मा को जागृत करता है और देशभक्ति के जज़्बे को पुनर्जीवित करता है।

अब के बरस तुझे धरती की रानी कर देंगे अब के बरस तेरी प्यासों मे पानी भर देंगे अब के बरस तेरी चुनर को धानी कर देंगे अब के बरस ये दुनिया तो फानी है हो बहता सा पानी है हो होतेरे हवाले ये ज़िंदगानी ये ज़िंदगानी कर देंगे अब के बरस....... दुनिया की सारी दौलत से इज़्ज़त हम को प्यारी मुट्ठी मे किस्मत है अपनी हम को मेहनत प्यारी मिट्टी की कीमत का जग में कोई रतन नहीं है ज़िल्लत के जीवन से बदतर कोई कफ़न नहीं है देश का हर दीवाना अपने प्राण चीर कर बोला बलिदानों के खून से अपना रंग लो बसंती चोला अब के हमने जानी है हो अपने मन में ठानी है हो हमलावरो की ख़तम कहानी ख़तम कहानी कर देंगे अब के बरस....... सुख सपनों के साथ हजारों दुख भी तू ने झेले हंसी खुशी से भीगे फागुन अब तक कभी ना खेले चारों ओर हमारे बिखरे बारूदी अफ़साने जलती जाती शमा जलते जाते हैं परवाने फिर भी हम ज़िंदा हैं अपने बलिदानों के बाल पर हर शहीद फरमान दे गया सीमा पर जल जल कर यारों टूट भले ही जान लेकिन कभी ना झुकना कदम कदम पर मौत मिलेगी लेकिन फिर भी कभी ना रुकना बहुत से लिया अब ना सहेंगे सीने भड़क उठे है नस नस में बिजली जागी है बाज़ू फ़ड़क उठे हैं सिंहासन की खाई करो ज़ुल्मो के ठेकेदारों देश के बेटे जाग उठे तुम अपनी मौत निहारो अंगारो का जश्न बनेगा हर शोला जागेगा बलिदानों की इस धरती से हर दुश्मन भागेगा हमने कसम निभानी है देनी हर क़ुर्बानी है हमने कसम निभानी है देनी हर क़ुर्बानी है अपने सरों की अपने सरों की अंतिम निशानी भर देंगे अब के बरस...........
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य थीम धरती की रानी यानी हमारी मातृभूमि के प्रति भक्ति और प्रगाढ़ प्रेम को दर्शाता है। 'अब के बरस तुझे धरती की रानी कर देंगे' की पंक्तियाँ स्पष्ट करती हैं कि हम अपनी श्रद्धा और बलिदान से अपनी मातृभूमि को सर्वोच्च स्थान पर स्थापित करने का संकल्प करते हैं। इसके जरिए यह बताया गया है कि दुनिया की हर दौलत और समृद्धि से ज्यादा महत्वपूर्ण है हमारी इज़्ज़त, हमारा सम्मान। 'मिट्टी की कीमत का जग में कोई रतन नहीं है' बताता है कि हम प्रवासी और परायों के हाथों में अपनी मातृभूमि की कीमत नहीं गिरने देंगे। इस भक्ति गीत में बलिदान की भावना और अपने देश के प्रति समर्पण का संदेश है।

इस भजन में भावनात्मक और आध्यात्मिक क्षण भी समाहित हैं। 'हमलावरो की ख़तम कहानी' से स्पष्ट होता है कि हम बाहरी हमलों के प्रति सशक्त रहने और साहसिकता दिखाने का संकल्प लेते हैं। 'सुख सपनों के साथ हजारों दुख भी तू ने झेले' यह पंक्ति हमें यह समझाती है कि मातृभूमि ने हमें विपरीत परिस्थितियों में भी संजीवनी दी है। हमारी पहचान केवल सुख से नहीं होती, बल्कि आपकी मातृभूमि के लिए सहन किए गए दुख से भी होती है। यह एक ऐसा गीत है जो हमें साहस, शक्ति और एकता के संकेत देता है, यह हमें याद दिलाता है कि हमारी मातृभूमि की सुरक्षा हमारे दायित्व है।

शक्ति और धर्म की इस पेशकश में भक्ति मार्ग का आदान-प्रदान है। 'हर शोला जागेगा' और 'तुम अपनी मौत निहारो' बताता है कि भक्त अपने प्राणों की आहुति देकर भी मातृभूमि की रक्षा के लिए तैयार हैं। यह सजगता हमारे आध्यात्मिक सफर का हिस्सा है। भक्तों के लिए यह गीत एक प्रेरणा का स्रोत है, जो न केवल देश के प्रति प्रेम को पाती है, बल्कि हमें यह भी सिखाता है कि हमारे बलिदान कितने भी कठिन हों, हमारे इरादे कभी नहीं टूटेंगे। यह मानवता और देश के प्रति अपार प्रेम और त्याग का प्रतीक है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय संस्कृति में बलिदान और मातृभूमि के प्रति समर्पण का भाव दशार्ता है। इसे सुनने से भक्ति और देशभक्ति की भावना को पुनः जागृत किया जाता है। पौराणिक कथाओं में, जैसे कि महाभारत में युधिष्ठिर और अर्जुन का बलिदान, मातृभूमि की रक्षा के लिए हमेशा प्रेरणादायक रहा है। इस गीत में एक अद्वितीय सन्देश है कि सबसे बड़ा बलिदान ही सबसे बड़ा सम्मान है। यह हमें सिखाता है कि अपने देश के प्रति कृतज्ञता और प्रेम बड़े कार्यों का मार्ग प्रशस्त करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित पाठ मन की शांति, शक्ति, और प्रेरणा का स्रोत है। यह देशभक्ति की भावना को जागृत करता है और भक्तों को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग बनाता है। मानसिक तनाव कम करने और आत्मविश्वास बढ़ाने में भी सहायक है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

सुबह का समय भजन के लिए सबसे उपयुक्त है। पूजा स्थल को साफ करें, एक दीया जलाएं, और पुष्प चढ़ाएं। एकाग्रता के साथ इस भजन का पाठ करें। ध्यान केंद्रित करें कि आप मातृभूमि की रक्षार्थ प्रेरणा प्राप्त कर रहे हैं। आपका मन और हृदय भक्ति से परिपूर्ण होना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन को कौन गाता है और इसका क्या महत्व है?

इस भजन को महेंद्र कपूर ने गाया है, जो भारत की संस्कृति और मातृभूमि के प्रति प्रेम की गहरी अभिव्यक्ति है। यह देशभक्ति को प्रोत्साहित करता है।

क्या इस भजन को किसी विशेष अवसर पर गाया जा सकता है?

इस भजन को स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस या किसी राष्ट्रीय समारोह के दौरान गाना विशेष रूप से उपयुक्त और प्रेरक होगा।

क्या इस भजन का पाठ ध्यान में उपयोगी है?

हां, इस भजन का पाठ ध्यान और प्राणायाम के दौरान किया जा सकता है। यह मानसिक शांति और ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।

श्रेणियां: Latest Bhakti Song

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!