मन हीं मनोरथ छांड़ी दे तेरा किया न होई दोहे का अर्थ(Man Hi Manorath Chhandi De Tera Kiya Na Hoi Dohe Ka Arth in Hindi):-
मन हीं मनोरथ छांड़ी दे, तेरा किया न होई।
पानी में घिव निकसे, तो रूखा खाए न कोई।
मन हीं मनोरथ छांड़ी दे, तेरा किया न होई।
पानी में घिव निकसे, तो रूखा खाए न कोई।
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