बाबा बालक नाथ जी की भक्ति परंपरा में "चढ़ गई नाम खुमारी मैनू चढ़ गई" एक अत्यंत ही मार्मिक और लोकप्रिय भजन है। यह भजन उस भक्त की आंतरिक दशा को व्यक्त करता है जिसने संसार के सभी सुखों को तुच्छ जानकर केवल श्याम नाम के रस में स्वयं को विभोर कर लिया है। इस भजन में भक्त स्वयं को एक "जोगन" (योगिनी) के रूप में चित्रित करता है, जिसे नाम-रूपी मदिरा का नशा चढ़ गया है और अब उसे दुनिया की कोई वस्तु आकर्षित नहीं करती। यह भजन बाबा बालक नाथ जी के दरबार में विशेष रूप से गाया जाता है, जहाँ भक्त अपने इष्ट "बांके बिहारी" से मिलन की व्याकुलता व्यक्त करते हैं। भजन की भाषा पंजाबी और हिंदी का सुंदर मिश्रण है, जो इसे एक अलग ही लोक-स्वाद प्रदान करती है। इसकी धुन सुनते ही भक्त का मन भक्ति भाव से भर उठता है और वह भी नाम-खुमारी में झूमने लगता है। यह भजन न केवल एक गीत है, बल्कि एक साधना है, जो साधक को प्रेम और समर्पण की गहराई तक ले जाती है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
चढ़ गई नाम खुमारी मैनू चढ़ गई
चढ़ गई नाम खुमारी मैनू चढ़ गई नाम खुमारी
कमली रमली जोगन रोगन कर गया बांके बिहारी
कोई दवा ना होवे जिसदी लगया रोग निराला
नाम श्याम दा ले के मैनू दे दो जहर प्याला
उसदे नाम दी बुटी सखियो सब रोगा ते भारी
चढ़ गई नाम खुमारी मैनू चढ़ गई नाम खुमारी
जिसदे नाम दी मैं हाँ जोगन ओ वृन्दावन वासी
आके अपना दर्श दिखा दे मर ना जावा प्यासी
कुंडला वाले श्याम नू कह दो ओ जीतया मैं हारी
चढ़ गई नाम खुमारी मैनू चढ़ गई नाम खुमारी
चाँद सितारे स्वर्ग नजारे कुछ ना मैनू भावे
झल्ला होके दिल ऐ पुकारे इको नगमा गावे
एक पासे मेरा श्याम प्यारा दूजे दुनिया सारी
चढ़ गई नाम खुमारी मैनू चढ़ गई नाम खुमारी
नाम खुमारी चढ़ गई ऐसी आप ही रोवा हँसा
सागर दिल दा हाल अपना आ मैं तैनू दसा
मिल जावे जे मुरली वाला जावा वारी वारी
चढ़ गई नाम खुमारी मैनू चढ़ गई नाम खुमारी
कमली रमली जोगन रोगन कर गया बांके बिहारी
चढ़ गई नाम खुमारी मैनू चढ़ गई नाम खुमारी
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का मूल भाव यह है कि भक्त के जीवन में जब हरि-नाम का प्रेम रूपी नशा चढ़ जाता है, तो वह संसार के सभी सुखों और दुखों से परे हो जाता है। "चढ़ गई नाम खुमारी" का अर्थ है कि भगवान के नाम का ऐसा प्रभाव हुआ कि भक्त की चेतना ही बदल गई। वह स्वयं को "कमली रमली जोगन" कहता है, अर्थात् वह एक ऐसी योगिनी बन गया है जो भटक-भटक कर अपने प्रियतम को खोज रही है। "रोगन" शब्द यहाँ उस आध्यात्मिक रोग को दर्शाता है, जो भक्त को लगा है और जिसे केवल "बांके बिहारी" ही ठीक कर सकते हैं। यह रोग कोई साधारण रोग नहीं है, बल्कि विरह की अग्नि है, जिसकी कोई दवा नहीं है। भक्त कहता है कि हे सखी! मुझे श्याम नाम का जहर प्याला दे दो, ताकि मैं इस भव-रोग से मुक्त हो जाऊं। यहाँ "जहर प्याला" एक रूपक है, जो यह दर्शाता है कि भक्त संसार के मोह को त्यागकर केवल नाम-रस में डूब जाना चाहता है।
आगे भक्त कहता है कि "उसदे नाम दी बुटी सखियो सब रोगा ते भारी" अर्थात् श्याम के नाम की जड़ी-बूटी सभी रोगों से बड़ी है। यह नाम-औषधि भक्त के सभी कष्टों को हर लेती है। भक्त वृन्दावन वासी श्याम से प्रार्थना करता है कि वे आकर अपना दर्शन दे दें, क्योंकि वह प्यासा है और उसकी प्यास बुझाने वाला कोई नहीं है। "कुंडला वाले श्याम" अर्थात् कुंडल धारण करने वाले श्याम, जिन्हें भक्त कहता है कि मैं तो हार गया, तुम जीत गए। यहाँ भक्त अपने अहंकार को त्यागकर पूर्ण समर्पण का भाव व्यक्त कर रहा है। भक्त को चाँद, सितारे, स्वर्ग के नज़ारे आदि कुछ भी अच्छे नहीं लगते, क्योंकि उसका मन तो केवल एक ही नगमा गाता है—श्याम का नाम। उसके लिए एक ओर उसका श्याम प्यारा है, और दूसरी ओर सारी दुनिया। वह श्याम को चुनता है। अंत में भक्त कहता है कि उसके दिल का सागर उमड़ रहा है, वह रोता है और हँसता है, और यदि मुरली वाला मिल जाए तो वह उस पर वारी-वारी जाए। यह भजन पूर्णतः विरह और मिलन की भावना का सुंदर चित्रण है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन बाबा बालक नाथ जी की परंपरा का एक अमूल्य रत्न है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- देवता एवं संदर्भ: यह भजन मुख्य रूप से श्री कृष्ण (बांके बिहारी, श्याम, मुरली वाला) को समर्पित है, जिनकी उपासना बाबा बालक नाथ जी के माध्यम से की जाती है। बाबा बालक नाथ जी को शिव का अवतार माना जाता है, लेकिन उनके दरबार में श्याम-नाम की महिमा का गुणगान भी विशेष रूप से होता है।
- भक्ति भाव: इस भजन में माधुर्य और विरह भक्ति का अद्भुत संगम है। भक्त स्वयं को नारी भाव (जोगन) में रखकर अपने इष्ट से मिलन की व्याकुलता व्यक्त करता है।
- भाषा: पंजाबी और हिंदी का मिश्रण इसे एक लोकप्रिय और सहज बनाता है।
- संगीत: इसकी धुन बहुत ही मधुर और भावपूर्ण है, जो श्रोताओं को भक्ति में लीन कर देती है।
- महत्व: यह भजन सिखाता है कि भगवान का नाम ही सबसे बड़ा रोग निवारक है। जो भक्त इस भजन को श्रद्धा से गाता है, उसके सभी दुख दूर होते हैं और मन को शांति मिलती है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को किसी भी शुभ अवसर पर गाया जा सकता है, लेकिन विशेष रूप से:
- समय: प्रातःकाल और सायंकाल की आरती के समय, विशेषकर गुरुवार और रविवार को। बाबा बालक नाथ जी के मंदिरों में चैत्र मास और श्रावण मास में यह भजन विशेष रूप से गाया जाता है।
- विधि: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घी का दीपक जलाएं और बाबा बालक नाथ जी एवं श्री कृष्ण की प्रतिमा के समक्ष बैठें। मन को एकाग्र करके भजन गाएं। ढोलक, मंजीरा या हारमोनियम के साथ गाना और भी सुंदर लगता है।
- ध्यान: गाते समय श्याम के रूप का ध्यान करें, उनकी मुरली की ध्वनि सुनें और स्वयं को वृन्दावन में उपस्थित अनुभव करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसे बाबा बालक नाथ जी की भक्ति परंपरा और श्री कृष्ण भक्ति के साहित्यिक स्रोतों के आधार पर संकलित किया गया है। भजन के बोल पारंपरिक रूप से प्रचलित हैं और इन्हें यथावत प्रस्तुत किया गया है। भावार्थ और महत्व की व्याख्या शास्त्रीय भक्ति सिद्धांतों और लोक परंपरा के अनुरूप की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस भजन को श्रद्धा और भक्ति भाव से ग्रहण करें।
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