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Shri Hanumant Stuti

भीष्म स्तुति- इति मतिम्पकल्पिता वितृष्णा(Bhishma Stuti Lyrics in Saskrit) - Bhaktilok

179 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भीष्म पितामह की स्तुति: धर्म की अनंत शक्ति

यह स्तुति विशेष रूप से भीष्म पितामह की श्रद्धा और बलिदान का उद्घाटन करती है।

भीष्म स्तुति: इति मतिम्पकल्पिता वितृष्णा धर्मराज ते शरणं प्रपद्ये। सर्वेऽपि धर्मस्य च वर्तमानोन् विद्वांसा धर्मविदां तथागम्ये। यस्मिन् प्रशान्ति शीतले प्रसन्नो यत्र प्रियतमा सर्वथा च कृति। भ्रातृभिः पञ्च जनोऽत्यस्तृण- वीर्यं हुतं च राजविजयं च। न्यायसूत्रं चारु संकल्पं शिवाय सदा स सकतीं च भजामि। भीष्मपितामह तपोबल, नमः पुनस्त्वं शरणं प्रपद्ये।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भीष्म स्तुति की पंक्तियों में भीष्म पितामह की महानता और उनके द्वारा जीवनभर निभाए गए धर्म की अनूठी सराहना की गई है। 'धर्मराज ते शरणं प्रपद्ये' से स्पष्ट होता है कि भीष्म ने सदैव धर्म का पालन किया और अपने अनुशासन में एक आदर्श स्थापित किया। उनके बलिदान और ज्ञाने का जिक्र करते हुए यह उपासना हमें प्रेरित करती है कि हम भी अपने जीवन में धर्म के प्रति प्रतिबद्ध रहें। भविष्य में आने वाली पीढ़ियों के लिए उनके आदर्श और सिद्धांत एक रोशनी की किरण बनकर कार्य करेंगे। यह ध्यान कहीं न कहीं उन ज्वालाों का भी सूचक है, जो जिंदगी की चुनौतियों में व्यक्तित्त्व को बनाए रखने की प्रेरणा देती हैं।

इस भक्ति गीत में प्रकट की गई भावनाएँ गहरी और प्रेरणादायक हैं। भीष्म का चरित्र तप और त्याग का प्रतीक है, और इस स्तुति में उनके शान्त और दृढ़ स्वभाव का बखान है। 'यत्र प्रियतमा सर्वथा च कृति' का अर्थ है कि जहाँ भीष्म हैं, वहाँ प्रेम और सद्भाव का माहौल है। यह भक्तों को यह सिखाता है कि जीवन में प्रेम, समर्पण और साहस का अत्यंत मूल्य है। भीष्म का बलिदान और वचनबद्धता हमें सिखाती है कि हम किसी भी परिस्थिति में अपने वचन के प्रति अडिग रहें। यह स्तुति हमें एक आस्था और अनुग्रह का बोध कराती है।

भीष्म स्तुति में ध्यान दिया गया है कि भक्त किन मूल्यों को धारण करते हुए अपने आस्था के पथ पर चले। 'न्यायसूत्रं चारु संकल्पं' का संवाद करता है कि सभी कार्य क्रम और कानून के अनुसार किए जाने चाहिए। यह वास्तविकता हमें सही दिशा में आगे बढ़ने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का पालन करने के लिए प्रेरित करती है। इसके अलावा, भीष्म का तप उनके समर्पण और भक्ति मार्ग का भी संकेतक है। उनके जीवन से हमें एक उच्चतम कोटि की भक्ति का ज्ञान प्राप्त होता है, जो हमें सत्य और न्याय के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भीष्म पितामह का चरित्र महाभारत में विशेष महत्व रखता है। वे धर्म के प्रति अपने निष्ठा और अधर्म के खिलाफ उनके संघर्ष के कारण बहुत revered हैं। भीष्म का उद्देश्य सदा से धर्म की रक्षा करना रहा, जिसके चलते उन्होंने युद्ध में भी न केवल प्रतिज्ञा की बल्कि अपने कर्तव्यों के प्रति प्रतिबद्धता भी दिखाई। इस स्तुति का संदर्भ उनके बलिदान एवं आदर्श जीवन से है, जो हमें प्रेरित करता है कि हम भी अपने कार्यों में निष्ठां से बचे। महाभारत में भीष्म की कथा हमें यह सिखाती है कि धर्म के मार्ग में चलने से किसी भी कठिनाई का सामना किया जा सकता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। भीष्म स्तुति का जाप करने से मानसिक शांति, स्फूर्ति, और आध्यात्मिक जागरूकता में वृद्धि होती है। यह भक्ति भाव हमें संतोष प्रदान करती है और हमारी चिंताओं को दूर करती है। नियमित रूप से यह स्तुति करने से व्यक्ति में सामर्थ्य और आत्म-विकास की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भीष्म स्तुति का जाप सुबह या शाम के समय करना लाभकारी होता है। विशेषकर प्रात: सूर्य की पहली किरणों के साथ इस स्तुति का जाप कर मन को शुद्ध किया जा सकता है। इस दौरान एक दीया जलाना और फल-फूल चढ़ाना उचित होता है। इस जाप के समय मन में ध्यान केंद्रित करना और श्रद्धा से भरा आत्म स्वरूप का निर्माण आवश्यक है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भीष्म स्तुति का क्या महत्व है?

भीष्म स्तुति का महत्व इसके द्वारा दी जाने वाली प्रेरणा और श्रद्धा में है। यह हमें धर्म की रक्षा और मानवता के प्रति समर्पण का बोध कराती है।

इस स्तुति को कब और कैसे करना चाहिए?

इस स्तुति का जाप सुबह या शाम करना बेहतर होता है। दीप जलाकर और श्रद्धा पूर्वक इसे गाना चाहिए, जिससे वातावरण में सकारात्मकता का संचार हो।

क्या भीष्म स्तुति पढ़ने से मन की शांति मिलती है?

हाँ, भीष्म स्तुति का जाप करने से मन को शांति और स्फूर्ति मिलती है। यह व्यक्ति को आंतरिक संतोष और सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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