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अपनी मुक्ति का तू तो यतन कर ले (Apane Mukti Ka Tu To Yatan Kar Le Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

 

अपनी मुक्ति का तू तो यतन कर ले (Apane Mukti Ka Tu To Yatan Kar Le Lyrics in Hindi) - 


अपनी मुक्ति का तू तो यतन कर ले।

रोज थोड़ा-थोड़ा हरि सुमिरन कर ले।।


बालापन हँस खेल गमायौ।

तरुण भयौ मस्ती में छायौ।

अब तो आदत में परिवर्तन कर ले।

रोज थोड़ा-थोड़ा हरि सुमिरन कर ले


ये काया कुछ काम न आवै।

धन दौलत तेरे साथ न जावै।।

आगे रास्ते को अपने सुगम कर ले।

रोज थोड़ा-थोड़ा हरि सुमिरन कर ले


बड़े भाग्य मानुष तन पायौ।

वादा कर तू प्रभु से आयौ।

अपने वादे पर वन्दे अमल कर ले।

रोज थोड़ा-थोड़ा हरि सुमिरन कर ले


कुटुम कबीला यहीं रह जाएगौ।

बेटा तुझको नाक नचाएगौ।।

अपनी इच्छाओं का दमन कर ले।

रोज थोड़ा-थोड़ा हरि सुमिरन कर ले


अहंकार की छोड़ डगरिया।

माया को तज दे बाबरिया।

महावीर वाणी को अमृतमय कर ले।

रोज थोड़ा-थोड़ा हरि सुमिरन कर ले

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