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कलयुग बैठा मार कुंडली जाऊँ तो मैं कहाँ जाऊँ भजन लिरिक्स (Kaliyug Betha Mar Kundli Lyrics in Hindi) - Shree Ram Bhajan Master Rana - Bhaktilok

228 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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कलयुग की पृष्ठभूमि में राम का स्मरण

इस भजन में कलयुग की समस्याओं के बीच राम के ideal स्वरूप को पुनः प्राप्त करने की प्रेरणा है।

 कलयुग बैठा मार कुंडली जाऊँ तो मैं कहाँ जाऊँ भजन लिरिक्स (Kaliyug Betha Mar Kundli Lyrics in Hindi) - कलयुग बैठा मार कुंडलीजाऊँ तो मैं कहाँ जाऊँअब हर घर में रावण बैठाइतने राम कहाँ से लाऊँ।।दशरथ कौशल्या जैसेमात पिता अब भी मिल जायेपर राम सा पुत्र मिले नाजो आज्ञा ले वन जायेदशरथ कौशल्या जैसेमात पिता अब भी मिल जायेपर राम सा पुत्र मिले नाजो आज्ञा ले वन जायेभरत लखन से भाईढूंढ कहाँ अब मैं लाऊँअब हर घर में रावण बैठाइतने राम कहाँ से लाऊँ।।जिसे समझते हो तुम अपनाजड़े खोदता आज वहीरामायण की बाते जैसेलगती है सपना कोईजिसे समझते हो तुम अपनाजड़े खोदता आज वहीरामायण की बाते जैसेलगती है सपना कोईतब थी दासी एक मंथराजो में अब घर घर पाऊअब हर घर में रावण बैठाइतने राम कहाँ से लाऊँ।।आज दास का खेम बना हैमालिक से तकरार करेसेवा भाव तो दूर रहावो वक्त पड़े तो वार करेआज दास का खेम बना हैमालिक से तकरार करेसेवा भाव तो दूर रहावो वक्त पड़े तो वार करेहनुमान सा दास आज मेंढूंढ कहा से अब लाऊअब हर घर में रावण बैठाइतने राम कहाँ से लाऊँ।।रौंद रहे बगिया को देखोखुद ही उसके रखवालेअपने घर की नीव खोदतेदेखे मेने घर वालेरौंद रहे बगिया को देखोखुद ही उसके रखवालेअपने घर की नीव खोदतेदेखे मेने घर वालेतब था घर का एक ही भेदीवही आज घर घर पाऊँअब हर घर में रावण बैठाइतने राम कहाँ से लाऊँ।।कलयुग बैठा मार कुंडलीजाऊँ तो मैं कहाँ जाऊँअब हर घर में रावण बैठाइतने राम कहाँ से लाऊँ।।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन के माध्यम से भक्त राम के प्रति अपने प्रेम और श्रद्धा को व्यक्त करते हैं। कलयुग की गतिविधियों की चर्चा करते हुए, गायक ने स्पष्ट किया है कि आज हर घर में रावण का वास है। 'अब हर घर में रावण बैठा' इस पंक्ति के माध्यम से समाज की बिगड़ती नैतिकता और पापों की बढ़ती संख्या को दर्शाया गया है। घर के वातावरण की असहनीय स्थिति को सटीक रूप से व्यक्त करने के लिए, गायक ने दशरथ और कौशल्या के रिश्ते का उदाहरण दिया है, जहाँ राम का सा पुत्र अब मिलना दुर्लभ हो गया है। श्री राम का आदर्श पुत्रत्त्व और उनके विचारों का ध्यान कराते हुए, वह भक्ति और धर्म की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।

भावार्थ की दृष्टि से, इस भजन में भक्त की चिंता का अभिव्यक्ति है। भक्त महसूस करते हैं कि समाज में राम जैसे व्यक्ति की खोज कितनी कठिन हो गई है। 'भरत लखन से भाई, ढूंढ कहाँ अब मैं लाऊँ' इस पंक्ति में भाई-चारे और परिवार के रिश्तों की कमी का संकेत मिलता है। आज के समय में, परिवार के भीतर ही एक-दूसरे के प्रति नफरत और ईर्ष्या देखने को मिलती है, जिसके कारण राम जैसे आदर्श व्यक्तित्व की अनुपस्थिति महसूस की जाती है। रामायण की कहानियाँ जो एक समय में प्रेरणादायक थीं, अब एहसास होता है कि वह केवल सपनों जैसी हैं। भक्त यह महसूस करते हैं कि अपने मन में सेवा भाव का अभाव और दासता के बिना प्रेम की भावना की आवश्यकता है।

इस भजन का मूल थियोलॉजिकल पहलुओं से भरा हुआ है, जो भक्ति मार्ग की महत्वपूर्ण बातों को उजागर करता है। राम वैसे रूप में माने जाते हैं जो आदर्श हैं, और जिस प्रकार से भक्त उनसे प्रेरित होते हैं, वह भक्ति का अक्षय मार्ग है। 'हनुमान सा दास' का प्रयोग करते हुए, गायक ने उन भक्तों को प्रेरित किया है जो भक्ति में सच्चे से जुड़े रहें और अपने जीवन में रामराज्य के सिद्धांतों को लागू करें। ये भावनाएँ हमें प्रेरित करती हैं कि हम अपने व्यवहार में ईश्वर के प्रति श्रद्धा और अपने परिवार व समाज में एक सामंजस्य बना सकें।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का ऐतिहासिक और पौराणिक संदर्भ रामायण में गहरे विचार करने के लिए प्रेरित करता है। रामायण में श्री राम का चरित्र केवल एक नायक का नहीं, बल्कि धर्म, आदर्श और नैतिकता का प्रतीक है। श्री राम ने सदैव धर्म का पालन किया और आदर्श त्याग दिए। उनका जीवन सभी मानवों के लिए प्रेरणास्रोत है। इस भजन के माध्यम से, भक्त इस विचार को आत्मसात करते हैं कि आज जब वातावरण में रावण का प्रकोप है, तब हमें श्री राम के मार्ग पर चलना चाहिए।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। इस भजन का जाप करने से मन और आत्मा की शांति मिलती है। ये ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है और मानसिक तनाव को कम करता है। भक्ति के जरिए, भक्त की काया में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे स्वास्थ्य में सुधार आ सकता है। आत्मिक उन्नति और जीवन की कठिनाइयों का सामना करने का साहस भी इस भक्ति से उत्पन्न होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह सूर्योदय से पहले या शाम को सूर्यास्त के समय करना सबसे अच्छा माना जाता है। अनुकरणीय भाव से दीप जलाना और पूजा सामग्रियों का समर्पण करना चाहिए। उचित अवस्था में बैठकर, मन को संयमित रखकर, प्रेम और श्रद्धा से भजन का गायन करना चाहिए। यह स्थिति भक्तों के मानसिक शांति और ध्यान के लिए आवश्यक है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश है कि कलयुग में रावण का प्रकोप बढ़ गया है और राम जैसे आदर्श व्यक्तित्वों की आवश्यकता है।

क्या इस भजन का जाप करने से सच में लाभ होता है?

जी हां, इस भजन का नियमित जाप मानसिक तनाव को कम करता है और आत्मिक शांति प्राप्त करने में मदद करता है।

क्या इस भजन का कोई विशेष समय है?

इस भजन का जाप सुबह और शाम के समय करना उत्तम माना जाता है, जिससे दिन की सकारात्मक ऊर्जा मिल सके।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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