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श्री गणेश स्तुति लिरिक्स (Shree Ganesh Stuti Lyrics in Hindi) - नमामि ते गजाननं Ganesh Stuti - Bhaktilok

526 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री गणेश स्तुति: विघ्नों का निवास

गणेश जी की स्तुति करके हम जीवन के सभी विघ्नों से मुक्ति पा सकते हैं।

श्री गणेश स्तुति लिरिक्स (Shree Ganesh Stuti Lyrics in Hindi) - नमामि ते गजाननं अनन्त मोद दायकम्समस्त विघ्न हारकं समस्त अघ विनाशकम्मुदाकरं सुखाकरं मम प्रिय गणाधिपम्नमामि ते विनायकं हृद कमल निवासिनम्॥१॥भुक्ति मुक्ति दायकं समस्त क्लेश वारकम्बुद्धि बल प्रदायकं समस्त विघ्न हारकम्धूम्रवर्ण शोभनं एक दन्त मोहनम्भजामि ते कृपाकरं मम हृदय विहारिणम्॥२॥गजवदन शोभितं मोदकं सदा प्रियम्वक्रतुण्ड धारकं कृष्णपिच्छ मोहनम्विकटरूप धारिणं देववृन्द वन्दितम्स्मरामि विघ्नहारकं मम बन्ध मोचकम्॥३॥सुराणां प्रधानं मूषक वाहनम्रिद्धि सिद्धि संयुतं भालचन्द्र शोभनम्ज्ञानिनां वरिष्ठं इष्ट फल प्रदायकम्सदा भावयामि त्वां सगुण रूप धारिणम् ॥४॥सर्व विघ्न हारकं समस्त विघ्न वर्जितम्विकट रूप शोभनं मनोज दर्प मर्दनम्*सगुण रूप मोहनं गुणत्रय अतीत्मनामि ते नमामि ते मम प्रिय गणेशम्॥५॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

श्री गणेश स्तुति एक भक्ति गीत है जो भगवान गणेश की महत्ता और उनकी कृपा का वर्णन करता है। पहले श्लोक में 'नमामि ते गजाननं' से गणेश जी की गजमुखता का स्मरण किया गया है, जो उनका प्रतीक है। 'अनन्त मोद दायकम्' से यह संकेत मिलता है कि वे अनंत आनंद और सुख के दाता हैं। आगे कहा गया है, 'मम प्रिय गणाधिपं', जो दर्शाता है कि गणेश जी न केवल विघ्नों के नाशक हैं, बल्कि वे भक्तों के प्रिय भी हैं। इस स्तुति में गणेश जी की अनेक विशेषताओं का वर्णन है, जैसे कि 'गजवदन शोभितं', जिससे उनकी विशिष्टता का परिचय मिलता है। यह स्तुति भक्तों को भक्ति और समर्पण की महिमा का एहसास कराती है।

भक्ति गीत में गणेश जी के गुणों का विस्तार से वर्णन किया गया है। 'भुक्ति मुक्ति दायकं' का अर्थ है कि गणेश जी भक्तों को भौतिक और आत्मिक दोनों प्रकार की भुक्ति और मुक्ति देने में सक्षम हैं। यहाँ पर विघ्नों को दूर करने की शक्ति का भी उल्लेख किया गया है, जो उन्हें 'समस्त विघ्न हारकम्' के रूप में दर्शाता है। यह भावार्थ भक्तों को मानसिक और आध्यात्मिक समस्याओं से मुक्ति दिलाने में मदद करता है। 'मम हृदय विहारिणम्' का संदर्भ गणेश जी के हृदय में रहने की प्रेरणा देता है, जो भक्तों को उनकी सुरक्षा और स्नेह का अहसास कराता है।

इस स्तुति में भक्ति मार्ग का बोध भी होता है, जहाँ समर्पण और श्रद्धा के साथ गणेश जी की स्तुति की जाती है। 'सगुण रूप धारिणम्' से यह महत्व दर्शाया गया है कि भगवान के रूपों में उनकी शक्ति और स्वरूप की पहचान होती है। सगुण उपासना में विशेष रूप से भक्त गहन साधना करते हैं, जो उन्हें साधक से सिद्ध बनने में मदद करता है। मातृक नाम का भाव भक्तों को उनसे जोड़ता है और समर्पित होने की भावना में वृद्धि करता है। यह भक्ति मार्ग का अनुसरण करते हुए आत्मा की शांति और आनंद की प्राप्ति सुनिश्चित करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्री गणेश स्तुति का उल्लेख पुराणों में किया गया है, जहाँ भगवान गणेश को विघ्न-विनाशक और बुद्धि के देवता के रूप में प्रस्तुत किया गया है। गणेश जी का वाहन मूषक है, जो साधना के मार्ग में प्रेरणा देता है। महान संतों और पूर्वजों द्वारा गणेश जी की स्तुति का महत्त्व बताया गया है, जहाँ वे भक्तों की समस्याओं को हल करने में सदा उपस्थित रहते हैं। पुराणों में कहीं-कहीं उन्हें समस्त विघ्नों का नाशक माना गया है, जो भक्ति में विभिन्न रूपों के माध्यम से सबकी सहायता करते हैं।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। श्री गणेश स्तुति का जाप करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है और विघ्नों का नाश होता है। इससे व्यक्ति को अनुशासन में रखने की शक्ति मिलती है और दिशा में सुधार आता है। यह भजन ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है, जिससे मानसिक विकास संभव होता है। इस स्तुति का नियमित जाप करने से शुभता और समृद्धि बढ़ती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

श्री गणेश स्तुति का जाप सुबह और शाम का समय श्रेष्ठ होता है। पूजा करते समय एक दीपक जलाना चाहिए और गणेश जी को मोदक या लड्डू का भोग अर्पित करना चाहिए। चुपचाप बैठकर ध्यान लगाना चाहिए और मन में श्रद्धा के साथ गणेश जी का स्मरण करना चाहिए। ऐसा करने से हृदय में शांति और आनंद का अनुभव होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

श्री गणेश स्तुति का क्या महत्व है?

श्री गणेश स्तुति का महत्व इसलिए है क्योंकि यह भक्त को मानसिक शांति और विघ्नों से मुक्ति प्रदान करता है।

क्या इस स्तुति का नियमित जाप करना चाहिए?

हाँ, नियमित रूप से इस स्तुति का जाप करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है और भीतर की ऊर्जा को जागृत किया जा सकता है।

गणेश जी की स्तुति करते समय क्या विशेष ध्यान देना चाहिए?

गणेश जी की स्तुति करते समय श्रद्धा और भक्ति से जी भरकर याद करना चाहिए और ध्यान लगाना चाहिए, जिससे उनका आशीर्वाद प्राप्त हो सके।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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