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मत भूलो श्री श्याम नाम को जाना सागर पार है लिरिक्स (Mat Bhulo Shri Shyam Naam Ko Lyrics in Hindi) - Khatu Shyam Bhajan - Bhaktilok

192 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

श्याम नाम: जीवन की पतवार और सागर पार

इस भजन के माध्यम से श्री श्याम की कृपा से जीवन की नैया को सुरक्षित करने की प्रेरणा मिलती है।

मत भूलो श्री श्याम नाम को जाना सागर पार है ।जीवन है छोटी सी नैया श्याम नाम पतवार है ॥टेर ॥लेकर प्रभु का नाम जगत में कितनों ने भव पार कियाश्याम नाम की ज्योत ने कितने जीवन को गुलजार कियास्वारथ की दुनियां में अपना ये सच्चा आधार है ॥१॥ मत भूलो श्री श्याम....||श्याम नाम के भजने का तो कोई निश्चित काल नहींजब भी मौका मिले सुमरले प्रभु सा दीन दयाल नहींप्रभु से ज्यादा प्रभु के नाम में शक्ति की भरमार है ॥२॥ मत भूलो श्री श्याम....||जीवन नैया सौंप प्रभु को तुम प्यारे अलमस्त बनोशरणागत की हर पल रक्षा करते बाबा श्याम सुनो‘नन्दू’ अब किस बात का डरना रक्षक जब सरकार हैं ॥ ३॥ मत भूलो श्री श्याम....||
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय श्री श्याम नाम की महिमा है, जो जीवन की कठिनाइयों में आश्रय का प्रतीक है। 'मत भूलो श्री श्याम नाम को जाना सागर पार है' से यह अर्थ प्रतीत होता है कि श्याम नाम ही वह साधन है जिसके सहारे जीव आत्मिक यात्रा पूरी कर सकता है। 'जीवन है छोटी सी नैया, श्याम नाम पतवार है' में स्पष्ट होता है कि हमारे जीवन की नैया (नाव) छोटी है लेकिन श्याम नाम उसे सुरक्षित रख सकता है। इस भजन में यह भी बताया गया है कि कितने भक्तों ने श्याम नाम के माध्यम से संसार के संकटों को पार किया है। 'स्वार्थ की दुनियां में अपना ये सच्चा आधार है' ये बताता है कि भौतिकता की व्यापकता के बावजूद, भक्ति और श्री श्याम नाम ही वो चीज हैं जो हमें स्थिरता और शांति प्रदान कर सकती हैं।

भजन में यह भाव व्यक्त किया गया है कि प्रभु का नाम, ख़ासकर श्याम का नाम, मात्र उच्चारित करने से अधिक प्रभावी है क्योंकि इसमें गहरी शक्ति है। 'श्याम नाम के भजने का तो कोई निश्चित काल नहीं' इस पंक्ति से यह संकेत मिलता है कि भक्ति का कोई समय नहीं होता, हर पल प्रभु का नाम सुमरना चाहिए। भावार्थ में यह भी बतलाया गया है कि सच्चा भक्त अपने आराध्य का नाम जानते हुए भी उसे अनुग्रहित मान कर याद करता है। जब भक्त खुद को आराध्य के प्रति शरणागत समझता है तो 'अलमस्त बनो' की भावना उत्पन्न होती है, जिससे भक्त को आंतरिक खुशी मिलती है और उसे नकारात्मकता से डरने की जरूरत नहीं होती।

इस भजन का आध्यात्मिक तत्व इस तथ्य में निहित है कि भक्तिपथ पर चलने से जीवन की नैया सुरक्षित रहती है। 'जीवन नैया सौंप प्रभु को' का अर्थ है कि हमें अपनी सारी चिंताओं को प्रभु को सौंपना चाहिए और आध्यात्मिक मार्ग पर चलना चाहिए। भक्ति की शक्ति यही है कि यह मनुष्य को सच्चे सुख की ओर ले जाती है। जब हम अपने मन को प्रभु में लगाते हैं, तब संदेह, डर और चिंताएँ दूर हो जाती हैं। यह भजन हमें बताता है कि भक्ति में ही जीवन का सार निहित है। जब रक्षक स्वयं सरकार हैं, तो भक्त को किस बात का डर।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्री श्याम की उपासना की सांस्कृतिक और धार्मिक महत्वता है, जो भगवती कृष्ण की विभिन्न लीला में निहित है। श्याम नाम का जाप भारतीय धार्मिक परंपरा में अत्यधिक महत्वपूर्ण माना गया है। भगवत पुराण और श्रीमद्भागवत गीता में भक्ति के माध्यम से मुक्ति प्राप्ति के विविध संदर्भ उपलब्ध हैं। भक्तों में श्री श्याम की उपासना करने का प्रचलन आज भी कायम है, जो कठिनाईयों में आश्रय देने का प्रबंधन करता है। इसे विशेष रूप से खाटू श्याम की पूजा में मान्यता है, और इसके कर्मकांडों से भक्तों को अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए मार्गदर्शन मिलता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। श्याम नाम का जाप करने से मानसिक शांति और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। इससे चिंताओं और तनाव में कमी आती है, और मन की स्थिरता बढ़ती है। यह भजन नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा को जुटाने में सहायक होता है। श्रद्धालुओं द्वारा नियमित रूप से इस भजन का गायन करने पर, आत्मिक उन्नति और सच्चे सुख की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का सही समय सुबह या शाम का है, जब वातावरण शांत हो। भजन गाने से पहले एक दीया जलाना और कुछ फूलों का चढ़ावा देना शुभ रहता है। सही स्थिति में बैठकर, मानसिक शांति से इस भजन का जाप करना चाहिए। मन में भगवान की छवि बना कर और श्रद्धा में पूरी भावना के साथ भजन का पाठ करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश है कि श्री श्याम का नाम ही जीवन की कठिनाइयों को पार करने का साधन है और भक्ति में शक्ति है।

क्या इस भजन का कोई विशेष समय है?

इस भजन को गाने का कोई निश्चित न समय है, लेकिन सुबह या शाम को सुमिरने से विशेष लाभ होता है।

श्याम नाम का जप करने से क्या लाभ होते हैं?

श्याम नाम का जाप करने से मानसिक शांति, उत्साह, और आत्मिक विकास में मदद मिलती है, जिससे जीवन में शुभता आती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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