Hanuman Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

हनुमान तुम्हारा क्या कहना भजन लिरिक्स (HanumanTumhara Kya kehna Lyrics in Hindi) - Hanuman Bhajan LAKHBIR SINGH LAKKHA

लखबीर सिंह लक्खा द्वारा गाया प्रसिद्ध भजन 'हनुमान तुम्हारा क्या कहना' के लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। संकटमोचन हनुमान जी की महिमा का सुंदर वर्णन।

भजन लिरिक्स एवं भावार्थ

हनुमान तुम्हारा क्या कहना भजन लिरिक्स (Hanuman Tumhara Kya Kehna Lyrics in Hindi) - Hanuman Bhajan Lakhbir Singh Lakkha - Bhaktilok

प्रकाशित तिथि: 2026 | श्रेणी: हनुमान भजन | वाचन परंपरा: लखबीर सिंह लक्खा शैली

संकटमोचन पवनसुत हनुमान जी की महिमा अपरंपार है। उनकी असीम कृपा, बल, बुद्धि और भक्ति का गुणगान करने वाले लोकप्रिय भजनों में हनुमान भजन "हनुमान तुम्हारा क्या कहना" का विशेष स्थान है। प्रसिद्ध भजन गायक लखबीर सिंह लक्खा की सुमधुर वाणी में गाया गया यह पावन भजन भक्तों के हृदय में अगाध उत्साह, भक्ति भाव और वीरता का संचार कर देता है। कलियुग में प्रत्यक्ष रूप से सिद्ध माने जाने वाले महाबली हनुमान जी के चरण कमलों में समर्पित यह संकीर्तन हर मंगलवार, शनिवार, और हनुमान जयंती के पावन अवसरों पर देश-विदेश के मंदिरों और घरों में अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया जाता है। इस विस्तृत लेख में हम आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं इस लोकप्रिय भजन के संपूर्ण बोल (Lyrics), सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ तथा इसके गायन से मिलने वाले आध्यात्मिक लाभ।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ स्थायित्व / मुखड़ा ॥

कलयुग में सिद्ध हो देव तुम्ही,
हनुमान तुम्हारा क्या कहना!
तेरी भक्ति का क्या कहना,
तेरी भक्ति का क्या कहना... ||

॥ प्रथम अंतरा ॥

सीता खोजकरी तुमने,
सात समुंदर पार गए।
लंका को किया शमशान प्रभु,
बलवान तुम्हारा क्या कहना!
तेरी भक्ति का क्या कहना... ||

॥ द्वितीय अंतरा ॥

जब लक्ष्मणजी को शक्ति लगी,
तुम धौलागिर पर्वत लाए।
लक्ष्मण को बचाए आ करके,
तब प्राण तुम्हारा क्या कहना!
तेरी भक्ति का क्या कहना... ||

॥ तृतीय अंतरा ॥

तुम भक्त शिरोमणि हो जग में,
तुम वीर शिरोमणि हो जग में।
तेरे रोम-रोम में बसते हैं सियाराम,
सियाराम तुम्हारा क्या कहना!
तेरी भक्ति का क्या कहना... ||

॥ समापन अंतरा ॥

कलयुग में सिद्ध हो देव तुम्ही,
हनुमान तुम्हारा क्या कहना!
तेरी भक्ति का क्या कहना,
तेरी भक्ति का क्या कहना... ||

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन हनुमान जी की अद्भुत शक्तियों, प्रभु श्री राम के प्रति उनकी अनन्य निष्ठा और कलियुग में उनके जागृत स्वरूप का सुंदर वर्णन करता है। भजन के प्रत्येक चरण में उनके महात्म्य को उजागर किया गया है:

मुखड़ा (स्थायी): भक्त भगवान हनुमान को संबोधित करते हुए कहते हैं कि इस कलियुग में यदि कोई प्रत्यक्ष रूप से सिद्ध और जाग्रत देवता है, तो हे हनुमान जी, आपका कोई मुकाबला नहीं है। आपकी आराध्य के प्रति अटूट भक्ति और आपका सेवाभाव अद्वितीय है।

प्रथम अंतरा: माता सीता की खोज में आपने अथाह सात समंदर को एक छलांग में पार कर लिया। रावण की स्वर्ण नगरी लंका को अपनी शक्ति से ध्वस्त कर दिया। हे महाबली! आपकी वीरता और सामर्थ्य का कोई सानी नहीं है।

द्वितीय अंतरा: मेघनाथ के शक्तिबाण से मूर्छित हुए लक्ष्मण जी के प्राणों की रक्षा के लिए आपने रातों-रात हिमालय से पूरा द्रोणाचल (धौलागिर) पर्वत उठा लाए। आपके द्वारा प्राणों की रक्षा करने के इस पराक्रम का वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता।

तृतीय अंतरा: आप इस संसार में समस्त भक्तों में श्रेष्ठ (भक्त शिरोमणि) और वीरों में श्रेष्ठ (वीर शिरोमणि) हैं। आपके रोम-रोम में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम और माता सीता का वास है। आपके इस पवित्र समर्पण का क्या कहना!

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • प्रत्यक्ष देवता: कलियुग में हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधि के दाता तथा अजर-अमर वरदान प्राप्त देवता माना गया है।
  • ऊर्जा और उत्साह: इस भजन को सुनने से मन में सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और साहस का संचार होता है।
  • रामभक्ति का प्रतीक: यह भजन हमें यह सिखाता है कि सच्ची शक्ति वही है जो प्रभु की सेवा और दीन-दुखियों के कल्याण में लगे।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को मंगलवार और शनिवार के दिन विशेष रूप से स्नान-ध्यान के पश्चात हनुमान जी के विग्रह या चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित करके गाना चाहिए। सुंदरकांड पाठ, रामायण सत्संग, या जागरण के दौरान लखबीर सिंह लक्खा की तर्ज पर इस भजन को गाने से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है। साधक चाहें तो नियमित रूप से सुबह की पूजा में भी इसका स्मरण कर सकते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के मुख्य आराध्य संकटमोचन श्री हनुमान जी हैं, जो भगवान शिव के अंशावतार और श्री राम के परम भक्त हैं। इसके साथ ही इस भजन की प्रस्तुति को लोकप्रिय बनाने में प्रसिद्ध भक्ति गायक श्री लखबीर सिंह लक्खा जी का अभूतपूर्व योगदान रहा है, जिन्होंने अपनी सुमधुर आवाज से घर-घर में इस भजन को पहुँचाया है। आप अधिक जानकारी के लिए श्री हनुमान चालीसा पाठ का भी अध्ययन कर सकते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन पारंपरिक लोकधुनों और समकालीन भक्ति संगीत शैली का एक सुंदर मिश्रण है। इसे नब्बे के दशक से लेकर आज तक विभिन्न कैसेट, सीडी और डिजिटल प्लेटफार्मों पर लाखों भक्तों द्वारा सुना जाता रहा है। यह रचना सीधे तौर पर वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस की कथाओं से प्रेरित है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

भजन की भाषा सरल, सहज और आम जनमानस की समझ में आने वाली हिंदी/अवधी मिश्रित बोलचाल की भाषा है। इसमें तुकबंदी और लयबद्धता का विशेष ध्यान रखा गया है ताकि गायन करते समय संगीत और भाव का अद्भुत सामंजस्य बना रहे।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें यह सिखाता है कि जीवन की बड़ी से बड़ी बाधा (समुंदर पार करना या पर्वत लाना) भी अटूट विश्वास और भक्ति के आगे छोटी पड़ जाती है। हनुमान जी का चरित्र हमें नम्रता, सेवा, गुरुनिष्ठा और शक्ति का सदुपयोग करने की प्रेरणा देता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पदावली सरल अर्थ संदर्भ / प्रसंग
सिद्ध देव जो देवता तुरंत कृपा करते हैं और जाग्रत रूप में माने जाते हैं कलियुग के संदर्भ में
शमशान करना उलझनों या शत्रुओं के गढ़ को तहस-नहस कर देना लंका दहन के प्रसंग में
धौलागिर पर्वत संजीवनी बूटी वाला द्रोणाचल पर्वत लक्ष्मण मूर्छा निवारण
भक्त शिरोमणि भक्तों में सबसे श्रेष्ठ हनुमान जी की उपाधि

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"कलयुग में सिद्ध हो देव तुम्ही" - इस पंक्ति का अर्थ है कि वेदों और पुराणों में हनुमान जी को अजर-अमर कहा गया है और आज भी कलियुग में सच्चे मन से पुकारने पर वे अपने भक्तों की रक्षा के लिए तुरंत उपस्थित होते हैं। "तेरे रोम-रोम में बसते हैं सियाराम" - यह पंक्ति हनुमान जी के निष्कलंक प्रेम को दर्शाती है, जहाँ उनके शरीर के एक-एक कण में केवल श्रीराम का वास है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

अंजनि सुत हनुमान की जय!

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्री रामदूतम शरणं प्रपद्ये॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम हनुमान तुम्हारा क्या कहना (Hanuman Tumhara Kya Kehna)
मुख्य आराध्य संकटमोचन श्री हनुमान जी
गायक श्री लखबीर सिंह लक्खा
भाषा हिंदी
विषय हनुमान भक्ति, शक्ति और पराक्रम
उपयुक्त अवसर मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती, जागरण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह प्रसिद्ध भजन मुख्य रूप से लोकप्रिय भजन सम्राट श्री लखबीर सिंह लक्खा जी की मधुर आवाज में गाया गया है।

इस भजन को विशेषकर मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती, और किसी भी प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान या सत्संग-जागरण के दौरान गाया जा सकता है।

इस भजन का मुख्य भाव हनुमान जी की अपार वीरता, प्रभु श्री राम के प्रति उनकी अनन्य भक्ति और कलियुग में उनके संकटमोचन स्वरूप की महिमा का गुणगान करना है।

हाँ, इसे घर पर अकेले या परिवार के साथ पूजा के दौरान पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ गाया जा सकता है।

ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी को भगवान राम द्वारा कलियुग के अंत तक पृथ्वी पर रहकर भक्तों की रक्षा करने का वरदान प्राप्त है, इसलिए इन्हें जाग्रत और सिद्ध देवता माना जाता है।

युद्ध के दौरान लक्ष्मण जी के मूर्छित होने पर हनुमान जी द्वारा संजीवनी बूटी की पहचान न होने पर पूरा द्रोणागिरि (धौलागिर) पर्वत उठा लाने के प्रसंग को इसमें दर्शाया गया है।

निसंदेह, हनुमान जी के भजनों के श्रवण से भय, चिंता और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है तथा मन को गहरी शांति एवं संबल प्राप्त होता है।

इस भजन के संपूर्ण और शुद्ध बोल आप हमारी वेबसाइट Bhaktilok.in पर प्राप्त कर सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री पारंपरिक भजन साहित्य, लोक-संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर पाठकों की सुविधा के लिए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसमें प्रयुक्त शब्द और भाव भक्तों की भावनाओं को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किए गए हैं।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • - श्री रामचरितमानस (तुलसीदास जी रचित)
  • - वाल्मीकि रामायण - सुंदरकांड एवं लंकाकाण्ड प्रसंग
  • - पारंपरिक हनुमान लोकगीत एवं संकीर्तन परंपरा

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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