Punjabi Devi Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

छांव तेरी चुनरी की भजन लिरिक्स (Chhanv Teri Chunri Ki Lyrics in Hindi) - Devi Bhajan TRIPTI SHAKYA

छांव तेरी चुनरी की भजन लिरिक्स पढ़ें। तृप्ति शाक्य द्वारा गाए गए इस लोकप्रिय देवी भजन के बोल, हिंदी अर्थ और भावार्थ के साथ।

आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती के चरणों में समर्पित लोकप्रिय देवी भजन "छांव तेरी चुनरी की भजन लिरिक्स (Chhanv Teri Chunri Ki Lyrics in Hindi)" जगत जननी की असीम कृपा, ममता और करुणा का एक अत्यंत भावपूर्ण गुणगान है। प्रसिद्ध भजन गायिका तृप्ति शाक्य (Tripti Shakya) की मधुर और सस्वर वाणी में गाया गया यह भजन सनातन धर्म के अनुयाइयों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। सनातन परंपरा में आदि शक्ति को चराचर जगत का कारण, पालनहार और संहारक माना गया है। जब एक साधक अपनी समस्त चिंताओं और दुखों को त्यागकर माता की चुनरी के आंचल की छांव में शरण लेता है, तो उसे एक अलौकिक मानसिक शांति और आत्मिक सुरक्षा का अनुभव होता है। इस विस्तृत लेख में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण बोल, सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, गायन की विधि, आध्यात्मिक महत्व और जीवन दर्शन पर विस्तार से चर्चा करेंगे ताकि भक्तगण माता की आराधना में पूरी तल्लीनता से लीन हो सकें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मूलाधार एवं मुखड़ा (Mukhda):

छांव तेरी चुनरी की, मैया मुझे मिल जाए,
दुनिया की हर ठोकर से, मेरा दिल संभल जाए।
मैया ओ मैया, शेरावाली मैया,
तेरी चुनरिया का साया, मुझको बचाए!

प्रथम अंतरा (First Antara):

जब-जब जीवन की राहों में, अंधेरा सा छाया है,
तेरी ममता की ज्योति ने, रास्ता दिखाया है।
तुझसे ही मेरा जीवन है, तुझसे ही मेरी सांसें,
तेरे दर पर ही मिलती हैं, मन की सब अर्दासें।
चरणों की धूल तेरी, माथे पे लग जाए,
दुनिया की हर ठोकर से, मेरा दिल संभल जाए।

द्वितीय अंतरा (Second Antara):

दुनिया वाले क्या जानें, क्या दर्द पुराना है,
मुझे तो बस मैया तेरे, दर पर ही आना है।
तू है मेरी माँ अम्बे, तू ही मेरी रखवाली,
झोली मेरी भर देना, न रखना कोई खाली।
कृपा की एक बूंद जो, मुझ पर बरस जाए,
दुनिया की हर ठोकर से, मेरा दिल संभल जाए।

अंतिम अंतरा एवं समापन (Final Antara & Chorus):

तृप्ति कहे मैया से, विनती मेरी सुन लेना,
भटकू अगर मैं कभी तो, आंचल में छुपा लेना।
तेरी कृपा का ये बंधन, कभी ना टूटने पाए,
छांव तेरी चुनरी की, मैया मुझे मिल जाए!
मैया ओ मैया, शेरावाली मैया,
तेरी चुनरिया का साया, मुझको बचाए!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन साधक और आराध्या (माँ दुर्गा) के बीच के अनन्य वात्सल्य और प्रेम संबंध को दर्शाता है। पंक्तियों का सूक्ष्म भाव इस प्रकार है:

मुखड़े में भक्त माता से प्रार्थना करता है कि हे मैया! मुझे आपकी लाल चुनरी की छांव प्राप्त हो जाए। इस भौतिक संसार के दुखों और ठोकरों से मेरा विचलित मन स्थिर हो जाए और आपकी कृपा का सुरक्षा कवच मुझे सांसारिक प्रलोभनों और कष्टों से बचा ले।

प्रथम अंतरे में साधक अपने जीवन के संघर्षों का स्मरण करते हुए कहता है कि जब भी उसके जीवन में निराशा या संकट के बादल मंडराए, तब माता के प्रेम और करुणा रूपी प्रकाश ने उसे सही मार्ग दिखाया। उसकी हर श्वास और उसका संपूर्ण अस्तित्व माता को समर्पित है। वह केवल यही चाहता है कि माता के चरणों की पावन रज उसके मस्तक पर सुशोभित हो जाए।

द्वितीय अंतरे में भक्त संसार की अज्ञानता और अपने आंतरिक संताप का वर्णन करते हुए कहता है कि दुनिया के लोग उसके दुखों को नहीं समझ सकते, उसका एकमात्र गंतव्य और शरणस्थली माता का दरबार ही है। वह माता को अपनी सच्ची रक्षक मानते हुए अपनी झोली खुशियों से भरने की प्रार्थना करता है।

अंतिम चरण में गायिका तृप्ति शाक्य के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि यदि कभी साधक का मन मार्ग से विचलित भी हो, तो माता उसे अपने ममतामयी आंचल में छुपा लें और अपनी शरण में रखें।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

देवी भजनों की सनातन परंपरा में माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों—महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली—की स्तुति की जाती है। यह भजन विशेष रूप से देवी के वात्सल्य और ममतामयी रूप को उजागर करता है। नवरात्रि के पावन दिनों में, जागरण के समय अथवा माता की चौकी में इस भजन का संकीर्तन करने से घर का वातावरण पवित्र और ऊर्जावान हो जाता है। देवीभागवत पुराण और दुर्गा सप्तशती में वर्णित है कि श्रद्धापूर्वक माता का स्मरण करने से अभय की प्राप्ति होती है और साधक के सभी भय दूर होते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन का गायन या श्रवण प्रातःकालीन ब्रह्ममुहूर्त में, संध्या वंदन के समय, अथवा किसी भी मांगलिक उत्सव, दुर्गा पूजा और नवरात्रि के नौ दिनों में विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। इसे सस्वर समूह में अथवा एकांत में बैठकर माता की जोत जलाकर भावपूर्ण ढंग से गाया जा सकता है। इसके नियमित श्रवण से मन की एकाग्रता बढ़ती है और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की मुख्य आराध्य देवी माता दुर्गा (शेरावाली माँ) हैं, जो संपूर्ण ब्रह्मांड की शक्ति स्वरूपा हैं। इस भजन को अपनी सुरीली और भावपूर्ण आवाज से सजाने वाली प्रसिद्ध भजन गायिका तृप्ति शाक्य (Tripti Shakya) हैं, जिन्होंने अपने सुमधुर स्वरों से देश-विदेश के लाखों भक्तों को देवी भक्ति से जोड़ा है। आप माता की अन्य स्तुतियों के लिए श्री दुर्गा चालीसा और अम्बे तू है जगदंबे काली आरती का भी पाठ कर सकते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

आधुनिक देवी संगीत परंपरा में पारंपरिक लोक धुनों और शास्त्रीय संगीत के मिश्रण से इस भजन की रचना की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य आधुनिक जीवन की भागदौड़ और तनाव से जूझ रहे इंसानों को मानसिक संबल प्रदान करना है। माता की चुनरी को भारतीय संस्कृति में सम्मान, सुरक्षा, पवित्रता और आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है, जिसे केंद्र में रखकर इस रचना को गढ़ा गया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन अत्यंत सरल, सुबोध और प्रवाहमयी हिंदी-अवधी मिश्रित बोलचाल की भाषा में रचित है, जिसे आमजन आसानी से समझ सकते हैं और गा सकते हैं। इसमें रूपक अलंकार और उपमा का सुंदर प्रयोग किया गया है, जैसे 'चुनरी की छांव' को सुरक्षा का आंचल बताना। शब्दावली इतनी मधुर है कि यह सीधे हृदय को स्पर्श करती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

इस भजन से हमें यह गहरी आध्यात्मिक सीख मिलती है कि मनुष्य को अपने जीवन के हर सुख-दुख में ईश्वर (आदि शक्ति) पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए। जब हमें संसार के लोग या परिस्थितियां धोखा दे दें, तब केवल ईश्वरीय शरण ही एकमात्र संबल बचती है। शरणागत की रक्षा करना भगवान का स्वभाव है, और जो पूरी श्रद्धा से झुकता है, उसकी झोली कभी खाली नहीं रहती।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पंक्ति सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
चुनरी की छांव माता के आंचल का सुरक्षा और शीतलता प्रदान करने वाला साया ईश्वरीय कृपा और शरण
ठोकर संसार के कष्ट, असफलताएं और दुख सांसारिक मोह-माया के प्रपंच
अर्दासें प्रार्थनाएं, मनोकामनाएं भक्त की ईश्वर के प्रति पुकार
चरणों की धूल माता के चरणों की पावन रज परम पवित्रता और अहंकार का त्याग
शेरावाली सिंह पर सवार होने वाली माँ दुर्गा शक्ति और शौर्य की प्रतीक

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"छांव तेरी चुनरी की, मैया मुझे मिल जाए..." - भक्त की सबसे बड़ी अभिलाषा यह है कि उसे सांसारिक भौतिक वस्तुओं के स्थान पर केवल माता की कृपा का आंचल प्राप्त हो जाए।
"दुनिया की हर ठोकर से, मेरा दिल संभल जाए..." - यह संसार असफलताओं और दुखों से भरा है; केवल माँ का आशीर्वाद ही हृदय को धैर्य और संबल दे सकता है।
"तुझसे ही मेरा जीवन है, तुझसे ही मेरी सांसें..." - साधक यह स्वीकार करता है कि उसका अस्तित्व पूरी तरह से पराशक्ति पर निर्भर है।
"तृप्ति कहे मैया से, विनती मेरी सुन लेना..." - गायिका तृप्ति शाक्य समस्त भक्तों की ओर से यह प्रार्थना करती हैं कि माता अपने बच्चों को कभी न त्यागें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

माता दुर्गा के इस भजन के साथ निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है:

"या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै నమో नमः॥"

यह श्लोक बताता है कि समस्त संसार में जो भी शक्ति, चेतना और ममता है, वह सब उन्हीं जगदम्बा का ही स्वरूप है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विशेषता विवरण
भजन का नाम छांव तेरी चुनरी की भजन लिरिक्स (Chhanv Teri Chunri Ki Lyrics)
आराध्य देवी माँ दुर्गा / शेरावाली मैया / आदिशक्ति
प्रसिद्ध गायिका तृप्ति शाक्य (Tripti Shakya)
श्रेणी (Category) देवी भजन, देवी गीत, नवरात्रि स्पेशल
भाषा हिंदी / सरल ब्रज-अवधी मिश्रित
मुख्य भाव शरणागति, वात्सल्य, प्रेम और समर्पण
शुभ अवसर नवरात्रि, जागरण, माता की चौकी, मंगलवार एवं शुक्रवार पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध देवी भजन को सुप्रसिद्ध और लोकप्रिय भजन गायिका तृप्ति शाक्य (Tripti Shakya) ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।

यह भजन जगत जननी आदिशक्ति, शेरावाली माता दुर्गा को समर्पित है, जिन्हें संकटमोचनी और पालनहार माना गया है।

इस भजन को नवरात्रि, माता के जागरण, चौकी, कन्या पूजन, तथा प्रतिदिन सुबह-शाम की पूजा के समय अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया और सुना जा सकता है।

इस भजन का मुख्य संदेश माता के चरणों में पूर्ण शरणागति (Surrender) और अटूट विश्वास रखना है, जिससे जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।

हाँ, इसे घर पर अकेले ध्यान लगाते हुए अथवा परिवार के साथ माता की चौकी या संध्या आरती के समय सस्वर गाया जा सकता है।

देवी भजनों के संकीर्तन से मानसिक शांति मिलती है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि व सकारात्मकता का संचार होता है।

जी हाँ, इस लेख में आपको "छांव तेरी चुनरी की" भजन के संपूर्ण बोल (Lyrics) देवनागरी लिपि और सरल हिंदी अर्थ सहित उपलब्ध कराए गए हैं।

माता की चुनरी को उनके आशीर्वाद, पवित्रता, प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। भक्त इसे अपने माथे से लगाकर माता का आशीर्वाद ग्रहण करते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। यह आलेख सनातन संस्कृति, देवी उपासना परंपरा और लोक संगीत के तत्वों को ध्यान में रखते हुए प्रामाणिक और भक्तिमय दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को सटीक और भावपूर्ण भजन सामग्री प्रदान करना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • देवीभागवत पुराण एवं दुर्गा सप्तशती (कल्याण संस्करण)
  • सनातन देवी भक्ति संगीत परंपरा एवं लोक गाथाएं
  • पारंपरिक श्री दुर्गा भजन संग्रह एवं लोक संकीर्तन पुस्तिकाएं

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!