Hanuman Bhajan

आ लौट के आजा हनुमान तुम्हे श्री राम बुलाते है भजन लिरिक्स (Aa Laut Ke Aaja Hanuman Lyrics in Hindi) - Rajendra Jain Hanuman Bhajan - Bhaktilok

214 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

हनुमान जी की अंतरात्मा की पुकार: श्री राम का संदेश

इस भजन में हनुमान जी की महिमा और श्री राम की श्रद्धा का अद्भुत संगम है। इसे गाने से भक्ति और शक्ति का संचार होता है।

आ लौट के आजा हनुमान तुम्हे श्री राम बुलाते हैं लक्ष्मण के बचा ले तू प्राण तुम्हे श्री राम बुलाते हैं आ लौट के आजा हनुमान तुम्हे श्री राम बुलाते हैं गए पवन सूत लाने संजीवन अब तक क्यों नही आये सेनापति सुग्रीव पुकारे नर बानर घबराए सब लोग भये सुनसान तुम्हे श्री राम बुलाते हैं आ लौट के आजा हनुमान तुम्हे श्री राम बुलाते हैं कभी तड़पते कभी बिलखते जीभर के प्रभु रोते आये लखन तुम अपनी माँ के हो इकलौते बेटे यू रुदन करत है महान तुम्हे श्री राम बुलाते हैं आ लौट के आजा हनुमान तुम्हे श्री राम बुलाते हैं बीत गयी सब रैन घड़ी रही ना एक पल भी बाकि देख देख के राह तुम्हारी बैरन अंखिया तांकी कहीं उदय ना हो जाये घात तुम्हे श्री राम बुलाते हैं आ लौट के आजा हनुमान तुम्हे श्री राम बुलाते हैं रात समय हनुमान संजीवन ले सेना में आये झूमर लाली धन्य बजरंगी लक्ष्मण प्राण बचाए तब जाग उठे बलवान तुम्हे श्री राम बुलाते हैं आ लौट के आजा हनुमान तुम्हे श्री राम बुलाते हैं आ लौट के आजा हनुमान तुम्हे श्री राम बुलाते हैं लक्ष्मण के बचा ले तू प्राण तुम्हे श्री राम बुलाते हैं आ लौट के आजा हनुमान|| तुम्हे श्री राम बुलाते हैं ||
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन की मूल थीम हनुमान जी की श्री राम के प्रति भक्ति और प्रेम को प्रदर्शित करना है। भजन में बार-बार कहा गया है कि 'आ लौट के आजा हनुमान', जो कि हनुमान जी के प्रति एक याचना है। यह उस समय की कहानी की ओर इशारा करती है जब लक्ष्मण जी की हालत काफी नाजुक है और श्री राम व्यथित हैं। 'तुम्हे श्री राम बुलाते हैं' का उद्धारण सुंदरता से दर्शाता है कि हनुमान जी की सेवा का महत्व कितना अधिक है। भक्त जन की मनोदशा और राम जी की चिंता दोनों इस भजन में भव्यता से व्यक्त की गई है। भक्त हनुमान जी से निवेदन करते हैं कि वे जल्दी आएं ताकि लक्ष्मण जी की जान बच सके। इससे भक्त की भावनाएँ और उनकी आस्था स्पष्ट होती है।

भजन के भावार्थ में हनुमान जी के प्रति भक्ति और सेवा का अचूक संदेश छिपा हुआ है। हनुमान जी जो संकट के समय में श्री राम के लिए अटूट सेवा करते हैं, इस भजन में उनके महत्त्व को उजागर किया गया है। जब भक्त 'कभी तड़पते कभी बिलखते' का जिक्र करते हैं, तो यह श्री राम जी के प्रति उनकी गहरी भावनाओं को दर्शाता है। यह केवल एक साधारण याचना नहीं है, बल्कि यह भक्त के हृदय की गहराइयों से निकला हुआ वेदना है। यह दिखाता है कि जब भक्त भगवान की सहायता की याचना करता है, तो किस प्रकार उनकी आत्मा एक गहरी संतोष और धैर्य की खोज में होती है।

इस भजन का अधिष्ठान भक्तिरस में निहित है, जो श्रद्धा और प्रेम का आदान-प्रदान दर्शाता है। हनुमान जी, जिन्हें भक्ति में अणु के समान माना गया है, इस भजन में भक्त के दुःख को समझने वाले और उन्हें शक्ति देने वाले के रूप में उभरे हैं। यह भक्ति मार्ग को दर्शाता है, जहां भक्त अपनी समस्याओं और दुःखों को भगवान के चरणों में डालकर उन्हें हल करने की याचना करता है। यह भजन 'एकलौती माँ के बेटे' का भी ज़िक्र करता है, जो हमें बताता है कि कर्तव्य और दायित्व की पूर्ति में भगवान की शरण लेना कितना आवश्यक है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व पौराणिक संदर्भों में बहुत गहरा है। रामायण में हनुमान जी की कथा हमें दिखाती है कि किस प्रकार उन्होंने श्री राम की सहायता की, विशेषकर जब लक्ष्मण जी की जान बचाने की बात आई थी। यह भजन इसी पृष्ठभूमि में रचा गया है, जहां श्री राम की पुकार को सुनकर हनुमान जी संकट में आकर सहायता करते हैं। भक्त जन यह मानते हैं कि हनुमान जी की कृपा से हर कष्ट दूर हो जाता है और भक्त की श्रद्धा को हर बार हनुमान जी जीत की ओर ले जाते हैं।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। इस भजन का जप करने से मानसिक शांति और आत्मबल की प्राप्ति होती है। भक्तों के लिए हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने का यह एक सशक्त माध्यम है। नियमित इसका जप करने से चिंता और तनाव में कमी आती है, और आध्यात्मिक जीवन में सुधार होता है। भक्त जन अनुभव करते हैं कि हनुमान जी की भक्ति से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप सुबह के समय सूर्योदय से पहले किया जाना चाहिए जब चित्त एकाग्र और शुद्ध होता है। आरंभ में एक दीया जलाना और पुष्प अर्पित करना अति शुभ माना जाता है। भक्त इससे अपने मन को शुद्ध करके हनुमान जी और श्री राम के प्रति श्रद्धा और प्रेम की भावना को जगाते हैं। एक शुद्ध आसन पर बैठकर मनन करना और भावपूर्वक जप करना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन को गाने का उचित समय क्या है?

इस भजन को संध्या वेला में या सुबह के समय जपना श्रेष्ठ माना जाता है, ताकि मन एकाग्रता से भक्ति में लिप्त हो सके।

क्या इस भजन के जप से शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है?

हाँ, इस भजन का जप करते समय मानसिक शांति मिलती है, जिससे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और कई बार शारीरिक स्वास्थ्य भी बेहतर हो जाता है।

क्या यह भजन सभी के लिए लाभकारी है?

यह भजन सभी भक्तों के लिए लाभकारी है जो हनुमान जी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं। यह भजन भक्ति, साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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