Radha Kriya Kataksh Stotram

शिव तांडव स्तोत्र लिरिक्स हिंदी (shiv Tandav stotra Lyrics in Hindi) - Pt. Hari Nath Shiv Tandav Stotram - Bhaktilok

142 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

प्रस्तावना एवं परिचय

जटा के जल से शीश 

भाल कंध सब तरल दिखे

गले में सर्प माल और 

कण्ठ में गरल दिखे

डमड डमड निनाद 

डमरु शंभू हाथ में करे

निमग्न ताण्डव प्रभू 

कृपा करें बला हरे........||


कपाल भाल दिव्य 

गङ्गा धार शोभामान है

जटा के गर्त में 

अनेक धारा वेगवान है

ललाट शुभ्र अग्नि 

अर्ध चन्द्र विद्यमान है

वो शिव ही मेरा लक्ष्य 

मेरी रुचि आत्मा प्राण है.......||


वो जिनका मन समस्त 

जग के जीवों का निवास है

वो जिनके वाम भाग 

माता पार्वती का वास है

जो सर्वव्याप्त जिनसे 

सारी आपदा का नाश है

उन्हीं त्रिलोक धारी शिव 

से मुझको सुख की आस है.......||


वो दें अनोखा सुख जो 

सारे जीवनों के त्राता हैं

जो लाल भूरे मणि 

मयी सर्पों के अधिष्ठाता हैं

दिशा की देवियों के 

मुख पे भिन्न रंग दाता हैं

विशाल गज का चर्म 

जिनको वस्त्र सा सजाता है.......||


करें हमें समृद्ध वो 

कि चंद्र जिनके भाल है

वो जिनका केश बांधे 

बैठा सिर पे नाग लाल है

गहरा पुष्प रंग जिनके 

पाद का प्रक्षाल है

वो जिनकी महिमा इंद्र 

ब्रह्मा विष्णु से विशाल है........||


उलझ रही जटा से 

रिद्धि सिद्धियों की प्राप्ति है

कपाल अग्नि कण से 

कामदेव की समाप्ति है

समस्त देवलोक 

स्वामियों के पूज्य ख्याति है

वो जिनके शीश अर्धचन्द्र 

की द्युती विभाति है.......||


है मेरी रुचि उन्हीं में 

जो त्रिनेत्र हैं कामारी हैं

मस्तक पे जिनके धगद 

धगद ध्वनियों की चिंगारी हैं

माँ पार्वती के वक्ष 

पे करते जो कलाकारी हैं

ऐसे हैं एकमात्र जो 

अधिकारी वो पुरारी हैं.......||


है जिनके कंठ में 

नवीन मेघ जैसी कालिमा

है जिनकी अंग कांति 

जैसे शुभ्र शीत चंद्रमा

जो गज का चर्म पहने हैं 

जगत का जिनपे भार है

वो सम्पदा बढ़ाएं 

जिनके शीश गंगा धार है......||


वो जिनका नीलकंठ 

नीलकमल के समान है

मथा जिन्होंने कामदेव 

और त्रिपुर का मान है

जो भव के गज के दक्ष 

के अंधक के यम के काल हैं

भजते हैं हम उन्हें 

जो काल के भी महाकाल है.......||


जो दंभ मान हीन 

पार्वती रमण पुरारी हैं

जो पार्वती स्वरूप 

मंजरी के रस बिहारी हैं

जो काम त्रिपुर भव गज 

अंधक का अंत करते हैं

उन पार्वती रमण को 

हम शीश झुका भजते हैं.......||


ललाट पर कराल विष

धरों के विष की आग है

धधकता सा प्रतीत होता 

भाल का कुछ भाग है

जो मंद सी मृदंग ध्वनि 

पे ताण्डव नर्तन करें

हम उनकी जय जयकार 

करके उनके पग पे सर धरें......||


पत्थर में व पर्यंक में 

सर्पों व मोती माल में

मिट्टी में रत्न में शत्रु 

मित्र बक मराल में

तिनके में या कमल 

में प्रजा में या भूपाल में

समदृष्टि हो कब होंगे 

ध्यानस्थ महाकाल में.......||


कर ध्यान भव्य भाल 

शिव का चक्षुओं में नीर भर

एकाग्र करके मन को 

बैठ गंगा जी के तीर पर

कब हाथ जोड़ शीश 

धर बुरे विचार त्याग कर

कब होंगे हम सुखी 

चंद्रशेखर का ध्यान धर......||


जो नित्य इस महा स्तोत्र 

का पठन स्मरण करे

जो श्रद्धा भक्ति स्नेह से 

वर्णन करे श्रवण करे

सदा रहे वो शुद्ध शंभु 

भक्ति का वरण करे

रहे अबाध शंभु ध्यान 

मोह का हनन करे........||


जो पूजा की समाप्ति पर 

रावण रचित यह स्तोत्र

पढ़ता शिव का ध्यान 

कर पाता शिव का गोत्र

साधन वाहन सकल 

धन सुख ऐश्वर्य महान

यश वैभव संपत्ति सहज 

देते शिव भगवान..........||



प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें।

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित यह भजन "शिव तांडव स्तोत्र लिरिक्स हिंदी (shiv Tandav stotra Lyrics in Hindi) - Pt. Hari Nath Shiv Tandav Stotram - Bhaktilok" मर्यादा पुरुषोत्तम के पावन चरित्र का स्मरण कराता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के सिद्धांतों के अनुसार, राम का नाम स्वयं राम से भी अधिक सामर्थ्यवान है। इस भजन की लय और शब्द भक्त को सीधे साकेत धाम की पावन चेतना से जोड़ते हैं।

भजन का प्रमुख भाव शरणागति का है। जब जीव समस्त सांसारिक प्रपंचों से थककर भगवान राम के चरणों में शरण लेता है, तो उसे परम अभय की प्राप्ति होती है। राम नाम की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है और अंतःकरण में धर्म और सत्य के प्रति निष्ठा दृढ़ होती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

सनातन ग्रंथों के अनुसार, राम नाम का जाप कलयुग का सर्वश्रेष्ठ साधन माना गया है। वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में राम नाम की असीम महिमा गाई गई है। यह भजन साधक के मन में वैराग्य, संयम, दया और कर्तव्य परायणता जैसे नैतिक मूल्यों का संचार करता है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। राम नाम के संकीर्तन से व्यक्ति का आत्मबल जागृत होता है, भय तथा शंकाओं का नाश होता है और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य रखने की शक्ति प्राप्त होती है। यह पारिवारिक सौहार्द और मर्यादा की स्थापना में सहायक है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

राम भजन का संकीर्तन प्रातःकाल स्नान के पश्चात राम दरबार की प्रतिमा के सम्मुख घी का दीपक जलाकर करें। तुलसी की माला से राम नाम का जप करने के पश्चात इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

राम भजन के गायन से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?

राम भजन के संकीर्तन से मानसिक शांति, उत्तम चरित्र, और विपत्तियों में धैर्य बनाए रखने का आत्मबल प्राप्त होता है।

राम नाम जप के लिए सर्वश्रेष्ठ माला कौन सी है?

भगवान श्री राम के मंत्र जाप और संकीर्तन के लिए तुलसी की माला को सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत पवित्र माना गया है।

क्या राम भजन बच्चों के संस्कारों के लिए उपयोगी है?

हाँ, भगवान राम के मर्यादापूर्ण चरित्र के भजन सुनने से बच्चों में बड़ों के प्रति सम्मान, सत्यप्रियता और उच्च नैतिक संस्कारों का विकास होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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