भक्ति काव्य व भजन बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

मैं खड़ा द्वारे पे पल पल करू मैं विनती तेरी भजन इन हिंदी लिरिक्स

इस भजन में माँ की कृपा के लिए विनती की गई है, जो भक्त की कठिनाइयों को दूर करने का आश्वासन देती है।

प्रस्तावना एवं परिचय

माँ की महिमा: संतान की भक्ति का प्रतीक

इस भजन में भक्त अपने कष्टों से मुक्ति के लिए माता से कृपा की प्रार्थना करता है।

मैं खड़ा द्वारे पे पल पल करू मैं विनती तेरी भजन इन हिंदी तेरे दरबार का पाने नज़ारा मैं भी आया हूज़रा देदो माँ चरणों मे सहारा मैं भी आया हूँसुना है दर पे तेरे इस जहाँ की हर खुशी मिलतीजगा दो सोई किस्मत का सितारा मैं भी आया हूँतू जो दया ज़रा सी करदेसर पे हाथ मेरे माँ धर देहो जाये दुखड़े दूरकट जाये हर एक विपदा मेरीमैं खड़ा द्वारे पे पल पलकरू मैं विनती तेरीमाँ मैं खड़ा द्वारे पे पल पलकरू मैं विनती तेरी........॥तेरी किरपा हो जायेबिगड़े काम बने सब मैयामैं रब को ना मानुमेरे लिए तू ही रब मैयातेरी ज्योत जगे दिनदुनिया माने शक्ति तेरीमैं खड़ा द्वारे पे पल पलकरू मैं विनती तेरी........॥कहते है तेरे दिल मेंनदिया ममता की है बहतीकरे प्यार दुलार बड़ातू भक्तो के अंग संग रहतीतेरी दया का अंत नहींकरदे दूर मुसीबत मेरीमैं खड़ा द्वारे पे पल पलकरू मैं विनती तेरी........॥मूरख अज्ञानी हूँमुझको ज्ञान नहीं है कोईतेरी महिमा क्या जानूंपूजा ध्यान नहीं है कोईगर खोल से अंखिया तूफिर तो खुल जाए किस्मत मेरीमैं खड़ा द्वारे पे पल पलकरू मैं विनती तेरी........॥जग जननी ऐ माताज्योतो वाली शेरो वालीतू चाहे तो भर दे पल मेंभक्त की खाली झोलीकहे फिर तू भवरों मेंनैया फसी है नैया मेरीमैं खड़ा द्वारे पे पल पलकरू मैं विनती तेरी........॥तू जो दया ज़रा सी करदेसर पे हाथ मेरे मां धर देहो जाये दुखड़े दूरकट जाये हर एक विपदा मेरीमैं खड़ा द्वारे पे पल पलकरू मैं विनती तेरीमाँ मैं खड़ा द्वारे पे पल पलकरू मैं विनती तेरी.......!!
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह भजन श्रद्धालु की भावना, विश्वास और समर्पण को व्यक्त करता है। इसके प्रारंभ में ही, गायक माँ के दरवाजे पर खड़ा होकर हर पल उनकी विनती करता है। यह दर्शाता है कि भक्त की हर खुशी माँ के दरवार में मानी जाती है। 'पल पल करू मैं विनती तेरी' की पंक्ति यह प्रदर्शित करती है कि श्रद्धालु माँ से सच्ची श्रद्धा के साथ प्रार्थना कर रहा है। यहाँ, 'जगा दो सोई किस्मत का सितारा' का अर्थ है कि भक्त चाहता है कि माँ उसकी छिपी हुई संभावना को प्रकट करें, जो उसके जीवन में सुख लाए। इस मर्मस्पर्शी भजन में माँ की दया का विशेष संदर्भ मिलता है, जो भक्त की हर मुश्किल को दूर करने का आश्वासन देती है।

इसके भावार्थ में, गायक अपने अज्ञानता और मूर्खता को स्वीकारता है। वह कहता है 'मूरख अज्ञानी हूँमुझको ज्ञान नहीं है कोई'। यह दर्शाता है कि भक्त अपने ज्ञान की कमी को पहचानता है और माँ से ज्ञान की प्रार्थना करता है। उसके लिए, आपसी संवाद तत्परता और दया से भरा होता है। 'तेरे दिल में नदिया ममता की है बहती' कहकर वह माँ की अनंत दया को भी प्रस्तुत करता है। इस भजन में सच्चे विश्वास और आस्था के साथ माँ की मदद का भव्य अनुरोध किया गया है। भक्त का यह भी कहना है कि माँ के बिना उसका जीवन अधूरा है, जो दर्शाता है कि माँ ही सर्वोच्च हैं।

थियोलॉजिकल दृष्टिकोण से देखें, तो यह भजन भक्ति मार्ग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ भक्त अपनी सम्पूर्णता के लिए अपनी देवी को स्वीकारता है। 'तेरी ज्योत जगे' इस पंक्ति में, भक्त माँ की दिव्यता और शक्ति की ओर संकेत करता है। यह भक्ति मार्ग का सिद्धांत है कि भक्त जब अपनी पूरी निष्ठा के साथ ऊपरवाले की कृपा की प्रतीक्षा करता है, तो उसे निश्चित रूप से फल मिलता है। भक्तिभाव से प्रेरित होकर, वह अपनी सभी इच्छाओं को माँ के चरणों में अर्पित करता है और यह जताता है कि भक्त की भक्ति असीम है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का धार्मिक और पौराणिक महत्व अत्यधिक है। हिंदू संस्कृति में, माताएँ सर्वोपरी मानी जाती हैं और इनसे कोई भी भक्त सहायता की प्रार्थना करता है। अनेक पुराणों में माताओं का स्थान सर्वोत्तम है। जैसे दुर्गा सप्तशती में देवी दुर्गा का विशेष रूप से गुणगान किया गया है, वहीं यह भजन भी माँ की दया और कृपा की महत्ता को बल देता है। इस प्रकार की प्रार्थनाएँ प्रतिवर्ष भक्तों द्वारा विशेष अवसरों पर या कष्ट काल में की जाती हैं, ताकि माँ की कृपा से विपत्तियाँ मिट सकें।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित जाप करने से मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और आध्यात्मिक उत्थान प्राप्त होता है। इसे गाने से भक्त की चिंताओं और विपत्तियों का निवारण होता है। यह ध्यान में शांति लाने और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने का कार्य भी करता है, जिससे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह या शाम के समय किया जाना चाहिए, जब मन शांत हो। भजन गाते समय एक सफेद या पीले कपड़े में दीप जलाना और प्रसाद अर्पित करना उत्तम रहता है। बैठने की मुद्रा पद्मासन या सुखासन में होनी चाहिए, जहाँ बंधन को तोड़कर मन और आत्मा को मुक्त किया जा सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या इस भजन का पाठ सभी के लिए उपयुक्त है?

हाँ, यह भजन सभी भक्तों के लिए उपयुक्त है, जो यह मानते हैं कि माँ का ध्यान और कृपा ही जीवन की सभी कठिनाइयों को मिटा सकती है।

क्या इस भजन का जाप करते समय कोई विशेष तैयारी करनी चाहिए?

भजन का जाप करते समय मन को एकाग्र करना बहुत आवश्यक है। अपने इरादे को स्पष्ट करना और पूजा के लिए दिशा सही रखना मददगार होगा।

इस भजन को गाने का सबसे अच्छा समय कब है?

इस भजन का जाप सुबह सूर्योदय के समय या शाम को संध्या के समय करना श्रेष्ठ माना जाता है, जब मन शांत एवं ध्यान में हो।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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