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पूजा की थाली सजा रखी है माँ तेरी ज्योत जला रखी है भजन इन हिंदी लिरिक्स

माँ की ज्योति की महिमा को बखानती ये भजन भक्तों को सुख, शांति और आशीर्वाद का अनुभव कराता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

माँ के ज्योति की आराधना: सुख और शांति की प्रार्थना

इस भजन के माध्यम से माँ की ज्योति को जलाते हुए हम उनके आशीर्वाद की याचना करते हैं।

पूजा की थाली सजा रखी है माँ, तेरी ज्योत जला रखी है। हृदय में तेरा नाम बसाये हैं, प्रेम से मन में तेरा गुण गाते हैं। स्तुति हम तुझसे करते हैं माँ, संकटों में तेरा नाम लेते हैं। तेरा आसरा है, तेरा सहारा है, सच्चे भक्तों का तूं सौभाग्य है। पल-पल में तेरा ध्यान करें, दुलार में तेरा नाम लें। खुशियों में तेरे गीत गाएं, दुखों में तेरा सहारा पाएं। हर हर पल तेरी महिमा गाएं, सच्चे मन से तुझसे जुड़ जाएं। भक्ति के मार्ग पर चलेंगे हम, अराधना में तेरा सामना करें। ध्यान लगाएंगे तेरी ज्योत पर, करुणा में तेरा दर्शन करें। माँ, तू है सुखों की देवी, तेरे चरणों में सुखों का सागर। तेरे नाम से बढ़ता है आशीर्वाद, प्रार्थना में तेरा प्रभाव। जिन्हें तुझसे प्रेम है, उन्हें सुख देते हैं, दुखों को दूर करते हैं, भक्तों पर ऐसी कृपा। तू है सृष्टि की माता, तू है सबकी देवी, आशा की किरण, तेरा जलता है दीप। जन्मों का बंधन तोड़ दे, प्रेम को बुन दे, माँ, तेरा ध्यान हमेशा करते हैं।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय मां की आराधना और उनकी ज्योति का वर्णन है। यहां भक्त की हृदय से मां के प्रति भक्ति दिखाई देती है, जिसमें भक्त मन में मां का नाम बसा कर, उनके गुणों का गुणगान करता है। 'पूजा की थाली सजा रखी है माँ, तेरी ज्योत जला रखी है' का अभिप्राय है कि भक्त ने अपनी पूजा की थाली को सजाया है और मां की ज्योति को प्रज्वलित किया है, जो कि भक्ति का प्रतीक है। इस भजन में भक्त मां का नाम लेते हुए अपने संकटों से उबरने की अपेक्षा करता है, जो कि सही भक्ति मार्ग का एक महत्वपूर्ण पहलू है।

भजन के भावार्थ में यह स्पष्टता है कि भक्त अपने जीवन में मां को सदा अपने संग चाहता है। जैसे-'तेरा आसरा है, तेरा सहारा है, सच्चे भक्तों का तूं सौभाग्य है।'यहां भक्त मां की कृपा को विशेष रूप से महत्व देता है। ऊर्जा और प्रेम से भरा यह भजन भक्त को मजबूती और साहस प्रदान करता है, जिससे वह कठिनाइयों का सामना कर सके। 'ध्यान लगाएंगे तेरी ज्योत पर, करुणा में तेरा दर्शन करें' का अर्थ है कि भक्त मां के दिव्य प्रकाश में ध्यान लगाते हुए उनके क्षमावान रूप का ध्यान करता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग की महत्वपूर्ण बातें उजागर की गई हैं। 'हर हर पल तेरी महिमा गाएं' से यह इंगित होता है कि भक्ति या श्रद्धा का एक स्थायी रूप होनी चाहिए। यह भजन उन भक्तों के लिए आदर्श है जो अपनी कल्पना में मां के प्रति अगाध प्रेम रखते हैं। भाषाई दृष्टि से देखें तो 'जन्मों का बंधन तोड़ दे' का यह संदेश है कि सत्य भक्ति के द्वारा ही जीवन के बंधनों को त्यागा जा सकता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन हिन्दू धर्म में माता की पूजा की महत्ता दर्शाता है, जो कि कई पुरानी पौराणिक कथाओं में वर्णित हैं। मां दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती के रूप में वे भक्तों की रक्षा करती हैं। समकालिन भक्ति आंदोलनों में भी, जैसे संत तुकाराम या संत कबीर से जुड़े कार्यों में, मां की उपासना को एक अद्वितीय स्थान प्राप्त है। इसे जीवन के हर पहलू में सुख और शांति के स्रोत के रूप में माना जाता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का निरंतर जाप करने से मानसिक शांति मिलती है और व्यक्ति के तनाव का स्तर कम होता है। यह भक्ति भाव से जीवन में सकारात्मकता लाने में मदद करता है, जिससे स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति का संतुलन बना रहता है। निश्चिततौर पर यह भजन तात्कालिक समस्याओं में सहायता करता है और भक्त को आंतरिक शक्ति प्रदान करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय करना अत्यंत लाभकारी है। पूजा के लिए एक साफ स्थान पर सफाई और प्रकाश का विशेष ध्यान रखें। पूजा करते समय दीप जलाना और फूल, फल या मिठाई का भोग अर्पित करना उचित रहेगा। ध्यान रखें कि भक्तिपूर्ण मनोभाव से ही इस भजन का उच्चारण करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या यह भजन रोज़ पढ़ा जा सकता है?

हाँ, इस भजन का रोज़ पाठ करने से मां का आशीर्वाद प्राप्त होता है और भक्त को निश्चित ही मानसिक और आध्यात्मिक लाभ मिलता है।

इस भजन का विशेष प्रभाव कब होता है?

विशेष रूप से नवरात्रि या किसी पवित्र उत्सव के समय इस भजन का पाठ करने से मां का विशेष कृपा बरसती है।

क्या इस भजन का पाठ किसी मंत्र की तरह किया जा सकता है?

जी हाँ, इस भजन के सरल और सशक्त शब्दों का जाप करते हुए इसे ध्यान और साधना का रूप भी दिया जा सकता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 14 Oct 2026

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