भक्ति काव्य व भजन बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

छोड़ कर संसार जब तू जाएगा भजन लिरिक्स (chod kar sansaar jab tu jaayega Lyrics in Hindi) - Shaym Veer Ragav

भजन 'छोड़ कर संसार जब तू जाएगा' में संसार के असारत्व और प्रभु के प्रति भक्ति का गहरा संदेश छिपा है।

प्रस्तावना एवं परिचय

आध्यात्मिक विमर्श: संसार का त्याग और भक्ति

यह भजन हमें प्रभु के प्रति समर्पण और संसार के असारत्व की याद दिलाता है।

छोड़ कर संसार जब तू जाएगा कोई ना साथी तेरा साथ निभाएगा।गर प्रभु का भजन किया ना सत्संग किया ना दो घड़ियाँ यमदूत लगा कर तुझको ले जाएगा हथकडिया।कौन छुडाएगा कोई ना साथी तेरा साथ निभाएगा॥भगवान मेरी नईya उस पार लगा देना इस पेट भरण की खातिर तू पाप कमाता निसदिन समसान में लकड़ी रख कर तेरे आग लगेगी इकदिन।ख़ाक हो जाएगा कोई ना साथी तेरा साथ निभाएगा॥सत्संग की गंगा है यह तू इस में लगाले गोता वरना संसार से इकदिन जाएगा तू भी रोता।फिर पछतायेगा कोई ना साथी तेरा साथ निभाएगा॥क्यूँ करता तेरा मेरा यह दुनिया रैन बसेरा यहाँ कोई ना रहने पाता है चंद दिनों का डेरा।हंस उड़ जाएगा कोई ना साथी तेरा साथ निभाएगा॥आ सतगुरु शरण में प्यारे तू प्रीत लगाले बंदे कट जायेंगे यह तेरे जनम जनम के फंदे।जीते भी लकड़ी मरते भी लकड़ी देख तमाशा लकड़ी का -
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि जीवन की अस्थिरता और संसार की माया को समझा जाए। इसे सुनकर हम महसूस करते हैं कि जब हम संसार से विदा हो जाएंगे, तब किसी का भी साथ नहीं होगा। यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि हम प्रभु का भजन नहीं करते हैं और सत्संग से दूर रहते हैं, तो यमदूत हमें पकड़ लेगा। इस संदर्भ में यह ध्यान देने योग्य है कि 'कोई ना साथी तेरा साथ निभाएगा' यह पंक्ति उस त्रासदी को उजागर करती है जो मृत्यु के समय अकेलेपन का अनुभव करने के लिए हमें रोने के लिए छोड़ सकती है। यह भजन सचेत करता है कि इस जीवन में जो भी भौतिक सुख हैं, वे तात्कालिक हैं और अंततः नाशवान हैं।

इस भजन में संसार के त्याग की भावना है और यह मानव जीवन के उद्देश्य को समझाने का प्रयास करता है। भजन में सजगता से कहा गया है कि जब हम अपने करियर या भौतिक इच्छाओं के लिए जीवित हैं, तब हमारा आंतरिक ध्यान भटक जाता है। मनुष्य इस भौतिक संसार में फंसकर धीरे-धीरे आत्मा को भूल जाता है। चूंकि 'सत्संग की गंगा है यह', यह हमें प्रोत्साहित करता है कि हमें सत्संग में अपने समय को व्यतीत करना चाहिए। यह एक गहरी भावनात्मक चेतना है, जो हमें धार्मिकता और साधना के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है।

भगवद गीता और उपनिषदों के अनुसार भक्ति मार्ग का अनुसरण करना ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य है। यह भजन इसी पर जोर देता है कि भगवान के प्रति प्रेम और भक्ति से मनुष्य यह समझ सकता है कि शरीर का क्या महत्व है। 'जीते भी लकड़ी, मरते भी लकड़ी' इस विशेष वाक्य में यह बताया गया है कि हमारे कार्य पूरे जीवन में केवल भौतिक वस्तुओं के लिए होते हैं। वास्तविकता यह है कि सभी भौतिक वस्तुएँ बेतुकी हैं; केवल भक्ति और ज्ञान हमारे लिए सच्चा आधार प्रदान कर सकते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन हमारे प्राचीन ग्रंथों, जैसे उपनिषदों और भगवद गीता के संदेशों के अनुरूप है। उपनिषदों में संसार के असार होने का उल्लेख है और यह कि आत्मा अजर-अमर है। रामायण और महाभारत में भी इस विचार को महत्व दिया गया है। भक्ति का मार्ग अपनाने से व्यक्ति आत्मा के सत्य का अनुभव कर सकता है। यह भजन इस आदर्श को स्पष्ट रूप से हमारे सामने रखता है कि हमारे सांसारिक सम्बन्ध अस्थायी हैं और एक दिन हमें यह सब त्यागना होगा।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति, आंतरिक संतुलन, और पारिवारिक संबंधों में सुधार होता है। यह ध्यान और ध्यान की अवस्था में रखने में मदद करता है। भक्ति के साथ इस भजन को गाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे व्यक्ति को दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ मिल सकता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन का पाठ सुबह या शाम के समय करना सबसे उपयुक्त होता है। ध्यान लगाते समय एक साफ जगह पर बैठकर, ऊर्जा को केंद्रित करने के लिए दीया जलाना चाहिए। समर्पण और भक्ति भाव से इसे गाने पर मन की शांति और भक्ति में वृद्धि होती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश संसार के असारत्व और प्रभु के प्रति सच्चे भक्ति को अपनाने का है। यह हमें याद दिलाता है कि मृत्यु के समय हमारा कोई साथी नहीं होगा।

क्या यह भजन विशेष समय पर गाना चाहिए?

हां, यह भजन सुबह या शाम का समय बेहतर होता है। इस समय संबल और शांति के साथ इसे गाना पूर्ण अनुभव को बढ़ाता है।

इस भजन का अर्थ क्या है?

इस भजन का अर्थ है कि सांसारिक जीवन की वस्तुएं अस्थायी हैं और हमें प्रभु के भजन में अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि मृत्यु के समय हम अकेलापन महसूस न करें।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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