Shri Shani Dev Arati मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

रिध्दि सिद्धि के दाता सुनो गणपति लिरिक्स (Riddhi Siddhi Ke Data Suno Ganpati Lyrics in Hindi) - Dwarka Mantri Ganesh Bhajan

गणेश जी के प्रति भक्ति दर्शाते हुए, यह भजन रिध्दि सिद्धि की प्राप्ति की प्रार्थना करता है, और दिव्य कृपा की आवश्यकता को उजागर करता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

गणेश की कृपा: रिध्दि सिद्धि का मंत्र

इस भजन के द्वारा गणेश जी से रिध्दि और सिद्धि की कृपा प्राप्त करने की प्रार्थना करें।
रिध्दि सिद्धि के दाता सुनो गणपति आपकी मेहरबानी हमें चाहिये पहले सुमिरन करूँ गणपति आपका लब पे मीठी सी वाणी हमें चाहिये रिध्दि सिद्धि के दाता सुणो गणपति। रिध्दि सिद्धि के दाता सुनो गणपति आपकी मेहरबानी हमें चाहिये पहले सुमिरन करूँ गणपति आपकालब पे मीठी सी वाणी हमें चाहिये रिध्दि सिद्धि के दाता सुणो गणपति।। सर झुकाता हूँ चरणों मे सुन लीजिये आज बिगड़ी हमारी बना लीजिये ना तमन्ना है धन की ना सर ताज की तेरे चरणों की सेवा हमें चाहिये रिध्दि सिद्धि के दाता सुणो गणपति।। तेरी भक्ति का दील मे नशा चूर हो बस आँखो मे Baba तेरा नूर हो कण्ठ पे शारदा माँ हमेशा रहे रिध्दि सिद्धि का वर ही हमें चाहिये रिध्दि सिद्धि के दाता सुनो गणपति।। सारे देवों मे गुणवान दाता हो तुम सारे वेदों मे ज्ञानो के ज्ञाता हो तुम ज्ञान देदो भजन गीत गाते रहे बस यही ज़िन्दगानी हमें चाहिये रिध्दि सिद्धि के दाता सुनो गणपति।। रिध्दि सिद्धि के दाता सुनो गणपति आपकी मेहरबानी हमें चाहिये पहले सुमिरन करूँ गणपति आपका लब पे मीठी सी वाणी हमें चाहिये रिध्दि सिद्धि के दाता सुनो
साझा करें:
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ भजन का मुख्य थीम रिध्दि और सिद्धि की प्राप्ति की तथा गणेश जी की कृपा को केंद्रित करता है। 'रिध्दि सिद्धि के दाता सुनो गणपति' पंक्ति से स्पष्ट होता है कि भक्त गणेश जी को ईश्वर मानते हुए उनसे समृद्धि और सिद्धि की कृपा की कामना कर रहा है। यह भजन उनकी महानता को उजागर करता है, जहाँ भक्त अपने मन की गहराई से गणपति की भक्ति में डूबा हुआ है। 'पहले सुमिरन करूँ गणपति आपका' का अर्थ है कि भक्त अपने कार्य शुरु करने से पहले गणेश जी का स्मरण करना चाहता है। यह दर्शाता है कि हर कार्य में सफलता पाने के लिए गणपति की कृपा अति आवश्यक समझी जाती है।

भावार्थ के स्तर पर, यह भजन श्रद्धा और भक्ति के साथ साथ आत्मसमर्पण का भी प्रतीक है। 'सर झुकाता हूँ चरणों में सुन लीजिये' कहकर भक्त अपने विनम्रता को प्रकट करता है। यह भाव बताता है कि धन और ताज की आकांक्षा का त्याग कर भक्त केवल गणेश जी की कृपा और चरणों की सेवा को प्राथमिकता देता है। यह भजन भक्त की गहरी भावना को दर्शाता है जो आत्मिक शुद्धता और भक्ति की ओर अग्रसर है। भक्त की यह भावना यह भी निरूपित करता है कि जीवन की सबसे महत्वपूर्ण चीज सत्कर्म और भक्ति है।
इस भजन में एक गहरा धार्मिक दृष्टिकोण भी छिपा है। सभी देवताओं में सबसे अधिक गुणवान और विद्या के ज्ञाता गणेश जी हैं। 'सारे देवों में गुणवान दाता हो तुम' पंक्ति से संकेत मिलता है कि भक्त उनके प्रति श्रद्धा रखता है। भारतीय संस्कृति में, गणेश जी को समस्त विघ्नों का नाशक माना जाता है, और इस भजन में यह भावनाएँ रुढ़ीकृत की गई हैं। भक्ति मार्ग पर चलना सर्वस्व समर्पण का प्रतीक है, और इस भजन द्वारा भक्त गणेश जी की अनुकंपा की अपेक्षा करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ यह भजन भक्ति और श्रद्धा का एक अनूठा स्वरुप प्रस्तुत करता है, जो पुराणों में गणेश जी के महत्व और उनके प्रति भक्तों की श्रद्धा को दर्शाता है। गणेश जी का वर्णन 'गणेश पुराण' और 'शिवपुराण' में विस्तृत रूप से किया गया है। विशेषकर, 'विघ्नहानि' माने जाने वाले गणेश जी को हर नए कार्य की शुरुआत से पूर्व पूजा जाना चाहिए। इस भजन के माध्यम से भक्त गणेश जी से दीक्षा, विद्या, और धन के वर की प्रार्थना करता है, जो वेदों और पुराणों में उल्लेखित है।
प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। इस भजन का नियमित जाप मानसिक शांति और समृद्धि का अनुभव कराता है। यह तनाव को दूर करने में मदद करता है और भक्त को आंतरिक बल प्रदान करता है। यदि कोई व्यक्ति इस भजन का पालन करता है, तो उसके जीवन में सकारात्मकता और प्रगति की संभावना बढ़ जाती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि इस भजन के जाप का उचित समय सुबह का होता है, विशेषकर उत्तर मुहूर्त में। पूजन करते समय दीप जलाना और मिठाई का भोग लगाना शुभ माना जाता है। श्रद्धा पूर्वक बैठकर ध्यान मुद्रा में भगवान गणेश का स्मरण करें, और शांत मन से भजन का उच्चारण करें।
�� अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) इस भजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?इस भजन का मुख्य उद्देश्य गणेश जी से रिध्दि और सिद्धि की कृपा प्राप्त करना है, जो हर भक्त की जीवन की आवश्यकताएँ हैं।
कौन सा दिन इस भजन का जाप करने के लिए सर्वोत्तम है?गणेश चतुर्थी और मंगलवार विशेष रूप से इस भजन का जाप करने के लिए श्रेष्ठ माने जाते हैं।
इस भजन के द्वारा कौन-सी विशेष प्रार्थनाएँ की जा सकती हैं?इस भजन के माध्यम से भक्त साधन, ज्ञान और दिव्य कृपा की प्रार्थना कर सकते हैं, जिससे जीवन की कठिनाइयाँ समाप्त हो सकें।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!