Shyam Bhajan

लूट के ले गया दिल जिगर सांवरा जादूगर श्याम भजन (Loot Ke Le Gaya Dil Jigar Sanwara Jagugar Lyrics in Hindi) - सांवरा जादूगर Nikunj Kamra - Bhaktilok

252 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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लूट के ले गया दिल जिगर सांवरा जादूगर श्याम भजन (Loot Ke Le Gaya Dil Jigar Sanwara Jagugar Lyrics in Hindi) - सांवरा जादूगर Nikunj Kamra

श्याम बाबा की अलौकिक महिमा, उनकी मोहक छवि और भक्तों के साथ उनके आत्मीय प्रेम को समर्पित अत्यंत भावपूर्ण और लोकप्रिय भजन "लूट के ले गया दिल जिगर सांवरा जादूगर" (Loot Ke Le Gaya Dil Jigar Sanwara Jagugar Lyrics in Hindi) है। सुप्रसिद्ध युवा भजन गायक निकलुंज कामरा (Nikunj Kamra) द्वारा गाये गए इस श्याम भजन ने खाटू श्याम प्रेमियों के हृदयों में एक विशेष स्थान बना लिया है। सनातन भक्ति परंपरा में, विशेषकर राजस्थान के खाटू धाम से जुड़ी कृष्ण-श्याम आराधना में, बांके बिहारी और खाटू श्याम जी को 'जादूगर' की संज्ञा दी जाती है क्योंकि उनकी एक झलक मात्र से भक्त अपनी सुध-बुध खो बैठते हैं। यह भजन जीवात्मा और परमात्मा के बीच के अनन्य प्रेम, विरह, और पूर्ण शरणागति (Surrender) का अत्यंत सुंदर और काव्यात्मक चित्रण प्रस्तुत करता है। इस लेख में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, और इसके आध्यात्मिक महत्व की विस्तृत चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

शुद्ध उच्चारण और अनन्य भक्ति भाव के साथ स्मरण करें:

मूल मुखड़ा:

लूट के ले गया दिल जिगर संवारा जादूगर।
संवारा मेरा संवारा, संवारा मेरा संवारा॥

प्रथम अंतरा:

मैं तो गयी भरने को यमुना से पानी,
देख छबि नटखट की हुई मैं दीवानी।
उसने मारी जो तिरछी नज़र संवारा जादूगर,
संवारा मेरा संवारा, संवारा मेरा संवारा॥

द्वितीय अंतरा:

तान सुनी बांसुरी की सुध बुध मैं खोई,
भूल गयी लोकलाज बस तेरी मैं होई।
छोड़ के तुझ को जाऊं किधर संवारा जादूगर,
संवारा मेरा संवारा, संवारा मेरा संवारा॥

अन्तिम अंतरा / समापन:

बाँध ली रमण तुझ से आशा की लडियां,
हैं यही तमन्ना शेष जीवन की घडिया।
तेरे चरणों में जाए गुजर संवारा जादूगर,
संवारा मेरा संवारा, संवारा मेरा संवारा॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का संकलन नहीं है, बल्कि यह एक भक्त के भीतर जागृत होने वाले अनन्य प्रेम और समर्पण की पराकाष्ठा है। आइए इस भजन के प्रत्येक अंश के गहरे आध्यात्मिक अर्थ को समझें:

मुखड़ा (Loot Ke Le Gaya Dil Jigar Sanwara Jagugar): भक्त अपने इष्टदेव श्याम सांवरा को 'जादूगर' कहकर संबोधित करता है। जादूगर वह होता है जो अपनी कला से सबको मोह ले। इसी प्रकार सांवरे की रूप-छवि, उसकी मुस्कान और उसकी मोहिनी मूरत ने भक्त के दिल और जिगर को पूरी तरह से चुरा लिया है। अब भक्त का अपने मन पर कोई नियंत्रण नहीं रहा, उसका संपूर्ण अस्तित्व श्याममय हो चुका है।

प्रथम अंतरा (यमुना से पानी और तिरछी नज़र): यहाँ गोपियों और राधा रानी के उस पौराणिक प्रसंग का स्मरण होता है जहाँ वे यमुना तट पर जल भरने जाती थीं और कन्हैया की नटखट लीलाओं की शिकार हो जाती थीं। प्रभु की एक 'तिरछी नज़र' (तिरछे नयन) सामान्य मनुष्य के अहंकार और संसारिक बंधनों को भेदकर सीधा हृदय में उतर जाती है। यही वह आकर्षण है जो जीव को संसार से हटाकर परमात्मा की ओर खींच लाता है.

द्वितीय अंतरा (बांसुरी की तान और लोकलाज का त्याग): भगवान श्रीकृष्ण की बांसुरी का स्वर जब कानों में पड़ता है, तो भक्त लोक-लाज, समाज के बंधनों और संसारी मर्यादाओं की परवाह करना छोड़ देता है। जब परमात्मा का प्रेम प्रगाढ़ हो जाता है, तो बाहरी दुनिया की आलोचना या प्रशंसा का कोई अर्थ नहीं रह जाता। भक्त के सामने केवल एक ही सत्य बचता है—कान्हा, और वह विवश होकर कहता है कि हे सांवरे! अब तुझे छोड़कर मैं और कहाँ जाऊँ?

अंतिम अंतरा (शेष जीवन की घड़ियाँ और चरण-शरण): जीवन की संध्या बेला में या संपूर्ण जीवन यात्रा में भक्त की एकमात्र अभिलाषा यही बचती है कि उसकी आशाओं की डोर केवल श्याम प्रभु से बँधी रहे। उसके जीवन की अंतिम साँसें और बची हुई घड़ियाँ प्रभु के चरणों की सेवा में ही व्यतीत हों। यही सच्ची शरणागति (Surrender) है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

खाटू श्याम जी और बांके बिहारी के दरबार में गाए जाने वाले इस भजन की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • माधुर्य भाव भक्ति: इस भजन में दास्य या साख्य नहीं, बल्कि माधुर्य और गाढ़ प्रेम का भाव प्रधान है, जो मीराबाई और सूरदास के पदों की याद दिलाता है।
  • संगीत और लय: निकुंज कामरा की मधुर वाणी और ऊर्जावान संगीत संयोजन ने इसे हर आयु वर्ग के भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय बना दिया है।
  • मानसिक शांति और आनंद: इस संकीर्तन को सुनने या गाने से मन के संताप दूर होते हैं और मानसिक एकाग्रता एवं आंतरिक शांति की प्राप्ति होती है।
  • खाटू श्याम आराधना: कलयुग के अवतारी हारे के सहारे बाबा श्याम के भक्तों के लिए यह भजन एक ऊर्जा स्त्रोत है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत के लिए समय और स्थान से अधिक भाव की शुद्धता का महत्व होता है, तथापि कुछ विशेष अवसरों पर इस भजन का गान अत्यंत आनंददायी होता है:

  1. दैनिक पूजा और संध्या आरती: संध्या के समय जब घर का वातावरण शांत हो, तब दीप प्रज्वलित कर इस भजन का स्मरण करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  2. श्याम संकीर्तन एवं जागरण: खाटू श्याम जी के मासिक उत्सव, फाल्गुन मेले या घर पर आयोजित होने वाले जागरण और कीर्तन में यह भजन समा बांध देता है।
  3. एकांत साधना एवं ध्यान: सुबह के समय ध्यान या योग के पश्चात शांत चित्त से इस भजन को सुनने से मन भगवान मेंलीन हो जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन पूर्णतः भगवान श्री कृष्ण के श्याम स्वरूप—जिन्हें कलयुग में श्री खाटू श्याम बाबा के रूप में पूजा जाता है—को समर्पित है। राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू धाम में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। खाटू श्याम जी बर्बरिक (महाभारत के वीर योद्धा) के रूप में जाने जाते हैं, जिन्हें भगवान श्री कृष्ण ने वरदान दिया था कि कलयुग में वे उनके नाम 'श्याम' से पूजे जाएंगे और उनके दर्शन मात्र से भक्तों के सारे कष्ट दूर हो जाएंगे। इस परंपरा में निकुंज कामरा जैसे युवा कलाकारों ने आधुनिक संगीत के साथ पारंपरिक भक्तिभाव को सुंदर ढंग से जोड़ा है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भजनों की यह धारा सदियों पुरानी ब्रज और राजस्थानी लोक-संस्कृति से निकली है। "सांवरा जादूगर" की कल्पना उस कन्हैया पर आधारित है जो अपनी बंसी की धुन और नटखट हरकतों से ब्रजवासियों का मन मोह लेता था। आधुनिक युग में युवा संगीतकारों जैसे निकुंज कामरा ने इस पारंपरिक भाव को आज की पीढ़ी के अनुकूल धुनों में पिरोया है, जिससे नई पीढ़ी भी सनातन संस्कृति और श्याम भक्ति से जुड़ रही है। ऐसे भजनों के माध्यम से भगवान के बाल और युवा स्वरूप के प्रति प्रेम सहज ही जागृत हो जाता है.

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, मधुर और प्रवाहमान हिंदी (ब्रज मिश्रित बोलचाल की हिंदी) है। इसमें रूपक और मानवीकरण अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है—जैसे सांवरे को 'जादूगर' कहना और उसकी नज़र को 'दिल चुराने वाला' बताना। शब्दों का चयन इतना भावुक है कि कोई भी साधारण श्रोता भी इसे आसानी से समझ सकता है और तुरंत गुनगुनाने लगता है। काव्य की दृष्टि से यह एक अतुकांत एवं लयबद्ध पद शैली है जो संकीर्तन के लिए बिल्कुल उपयुक्त है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि:

  • माया का त्याग: जब मनुष्य का मन ईश्वर में रम जाता है, तो संसार के कृत्रिम आकर्षण और लोक-लाज के भय स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
  • पूर्ण शरणागति: भगवान से प्रार्थना केवल मांगने के लिए नहीं, बल्कि उनके चरणों में जीवन समर्पित करने के लिए होनी चाहिए।
  • प्रेम की सर्वोपरि स्थिति: ज्ञान और कर्म से भी ऊंची कोटि का मार्ग प्रेम (भक्ति) का है, जहाँ भक्त अपने आराध्य के बिना एक पल भी चैन से नहीं रह सकता।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
सांवरा जादूगर श्याम सुंदर, मनमोहक रूप वाले वह ईश्वर जो अपनी माया और प्रेम से सबका मन मोह लेता है
दिल जिगर मन, प्राण और आंतरिक भावनाएं भक्त का संपूर्ण अंतःकरण जो प्रभु को समर्पित हो चुका है
सुध बुध खोई होश गंवा देना, सुधि न रहना ईश्वरीय प्रेम में तल्लीन होकर बाहरी दुनिया से बेखबर हो जाना
लोकलाज समाज का डर या संकोच सच्चे प्रेम में बाधक बनने वाले सामाजिक बंधन
आशा की लडियां उम्मीदों के धागे, भरोसे की डोर भगवान के साथ अटूट विश्वास का संबंध

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

भजन की प्रत्येक पंक्ति भक्तों के आंतरिक भावों को उजागर करती है:

  • "लूट के ले गया दिल जिगर संवारा जादूगर..." — भगवान ने मेरे मन और प्राणों को अपनी सुंदरता से चुरा लिया है, अब मेरा मन मेरे वश में नहीं है।
  • "मैं तो गयी भरने को यमुना से पानी, देख छबि नटखट की..." — मैं तो अपने सांसारिक कार्य करने गई थी, किंतु प्रभु की नटखट छवि देखकर उन पर मुग्ध हो गई।
  • "तान सुनी बांसुरी की सुध बुध मैं खोई..." — बंसी की आवाज़ सुनते ही मेरी सारी चतुराई और सुध-बुध समाप्त हो गई।
  • "तेरे चरणों में जाए गुजर संवारा जादूगर..." — हे प्रभु! अब मेरी यही अंतिम इच्छा है कि मेरा शेष जीवन आपके चरणों की शरण में ही बीते।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

श्याम आराधना और कृष्ण भक्ति को पुष्ट करने वाले कुछ प्रमुख महामंत्र:

ॐ श्री श्याम देवाय नमः

हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥

इन महामंत्रों का जाप करने से मन शुद्ध होता है और श्याम भजन गाने व सुनने की एकाग्रता बढ़ती है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम लूट के ले गया दिल जिगर सांवरा जादूगर (Loot Ke Le Gaya Dil Jigar)
गायक / कलाकार निकुंज कामरा (Nikunj Kamra)
आरध्य देव श्री खाटू श्याम बाबा / भगवान श्रीकृष्ण
श्रेणी / लेबल श्याम भजन (Shyam Bhajan)
भाषा हिंदी / ब्रज मिश्रित लोक भाषा
मुख्य भाव माधुर्य भक्ति, प्रेम, विरह और शरणागति
उपयुक्त अवसर श्याम संकीर्तन, एकादशी, जागरण, दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

उत्तर: इस लोकप्रिय श्याम भजन के गायक सुप्रसिद्ध युवा भजन गायक निकुंज कामरा (Nikunj Kamra) हैं।

उत्तर: यह भजन कलियुग के अवतारी भगवान श्री खाटू श्याम बाबा (और भगवान श्रीकृष्ण) को समर्पित है।

उत्तर: इस भजन में जीवात्मा का परमात्मा के प्रति माधुर्य भक्ति, अनन्य प्रेम, आकर्षण और पूर्ण शरणागति के भाव को दर्शाया गया है।

उत्तर: इस भजन को आप अपने घर की दैनिक पूजा में, खाटू श्याम संकीर्तन के दौरान, जागरण में या एकादशी के पावन अवसर पर गा या सुन सकते हैं।

उत्तर: जिस प्रकार एक जादूगर अपनी कला से सबका मन मोह लेता है, उसी प्रकार खाटू श्याम बाबा अपनी मनमोहक मुस्कान, नटखट हरकतों और कृपा से भक्तों के हृदयों को मोह लेते हैं, इसलिए उन्हें 'जादूगर' कहा गया है।

उत्तर: हाँ, इसकी धुन बहुत सरल और तालबद्ध है, जिसके कारण नए कलाकार भी इसे आसानी से हारमोनियम और ढोलक के साथ गा सकते हैं।

उत्तर: भगवान के गुणों और उनकी लीलाओं का स्मरण करने से मन के विचार शांत होते हैं और तनाव दूर होता है, जिससे आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है।

उत्तर: हाँ, आप Bhaktilok.in पर इस भजन के संपूर्ण लिरिक्स देवनागरी लिपि में शुद्ध उच्चारण के साथ प्राप्त कर सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख खाटू श्याम संकीर्तन परंपरा, निकुंज कामरा की प्रस्तुति और सनातन भक्ति साहित्य के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध भजन लिरिक्स और उसका आध्यात्मिक अर्थ प्रदान करना है। सभी पंक्तियों और भावार्थों को प्रामाणिक परंपराओं के अनुरूप संकलित किया गया है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • खाटू श्याम जी की लोक कथाएं एवं संकीर्तन परंपरा
  • ब्रज माधुर्य भक्ति साहित्य एवं पद संग्रह
  • निकुंज कामरा द्वारा प्रस्तुत लोकप्रिय श्याम भजन एल्बम एवं ऑडियो रिकॉर्डिंग
  • सनातन धर्म ग्रंथ एवं भक्ति रस ग्रंथ

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Sep 2026

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