Krishna Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

जरी की पगड़ी बाँधे, सुन्दर आँखों वाला लिरिक्स भजन ( Zari Ki Pagdi Baandhe Sundar Aakhon Wala Lyrics in IHndi ) - Krishna Bhajan देवी चित्रलेखा जी

भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं को समर्पित जरी की पगड़ी बाँधे भजन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संचार करता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

कृष्ण-कला की छवि: जरी की पगड़ी

प्रभु श्री कृष्ण की खूबसूरती और लीलाओं का गुणगान करने वाला यह भजन भक्ति का सरल मार्ग प्रदान करता है।

( जरी की पगड़ी बंधे सुंदर आंखों वाला लिरिक्स हिंदी ) -जरी की पगड़ी बांधेसुंदर आंखों वालाकितना सुंदर लागे बिहारीकितना लागे प्याराजरी की पगड़ी बांधे ।कानों में कुण्डल साजेसिर मोर मुकुट विराजेसखियाँ पगली होतीजब जब होठों पे बंसी बाजेहैं चंदा यह सांवरातारे हैं ग्वाल बालाकितना सुंदर लागे बिहारीकितना लागे प्याराजरी की पगड़ी बांधे ।लट घुंघराले बालतेरे कारे कारे गालसुन्दर श्याम सलोनातेरी टेढ़ी मेढ़ी चालहवा में सर सर करतातेरा पीताम्बर मतवालाकितना सुंदर लागे बिहारीकितना लागे प्याराजरी की पगड़ी बांधे ।मुख पे माखन मलतातू बल घुटने के चलतादेख यशोदा भाग्य कोदेवों का मन भी जलतामाथे पे तिलक है सोहेआँखों में काजल डाराकितना सुंदर लागे बिहारीकितना लागे प्याराजरी की पगड़ी बांधे ।तू जब बंसी बजाएतब मोर भी नाच दिखाएयमुना में लहरें उठतीऔर कोयल कू कू गाएहाथ में कँगन पहनेऔर गल वैजंती मालाकितना सुंदर लागे बिहारीकितना लागे प्याराजरी की पगड़ी बांधे ।जरी की पगड़ी बांधेसुंदर आंखों वालाकितना सुंदर लागे बिहारीकितना लागे प्याराजरी की पगड़ी बांधे ।मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना लिरिक्स (Mere Mohan Tera Muskurana Lyrics ) -मोहन हमारे मधुबन में आया न करो (Mohan Hamare Madhuban Me Aaya Na Karo Lyrics in Hindi ) - Bhakti lokहरि नाम की माला जप ले लिरिक्स भजन ( Hari Naam Ki Mala Jap Le Lyrics in Hindi ) - Hari Bhajan Shyam Bhajan - Bhaktilokकभी ना कभी कहीं ना कहीं मेरा श्याम लिरिक्स भजन ( Kabhi Na Kabhi Lyrics in Hindi ) - Khatu Shyam Bhajan Shyam Singh Chouhan -  
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन की मुख्य थीम भगवान श्री कृष्ण के सौंदर्य और उनकी लीलाओं का वर्णन है। 'जरी की पगड़ी बांधे, सुंदर आंखों वाला' यह पंक्ति न केवल कृष्ण के शारीरिक सौंदर्य का उल्लेख करती है, बल्कि उनके दिव्य व्यक्तित्व को भी दर्शाती है। 'कानों में कुण्डल साजे' यह बताता है कि कैसे कृष्ण की संगति में हर वस्तु महत्वपूर्ण होती है। इस भजन में कृष्ण की वाद्य यंत्र बंसी के प्रति प्रेम का भी स्थान है, जो भक्तों के दिलों में उनके प्रति भक्ति जगाता है। जब 'बंसी बाजे' की बात होती है, तो वह भक्तों के लिए अद्भुत आनंद का प्रतीक बन जाती है। इस तरह, भजन न केवल कृष्ण के रूप का वर्णन करता है, बल्कि भक्त के मन में उन संबंधों की वास्तविकता को भी स्थापित करता है जिन्हें हम भक्ति से जोड़ते हैं।

भावार्थ की दृष्टि से, यह भजन कृष्ण के साथ अनन्त प्रेम और भावनाओं का अद्भुत अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है। 'जब जब होठों पे बंसी बाजे' यह पंक्ति दर्शाती है कि कैसे कृष्ण की बंसी की मधुर ध्वनि पूरी प्रकृति को भी नृत्य करने के लिए प्रेरित कर देती है। इस भजन में कृष्ण की बाल लीलाएँ, उनकी दीवानगी और नवजवान-मोहिनी छवि का ध्यान खींचती हैं, जिससे भक्तों को उनकी छवि में डूबने का अवसर मिलता है। भगवान का 'माखन' खाना और यशोदा माता का उनके प्रति प्रेम सभी भक्ति में एक गहराई जोड़ देती है जो जीवन को धन्य बनाती है। ये भावनाएँ भक्तों को एक ऐसी स्थिति में ले जाती हैं कि वे वर्तमान जीवन की बाधाओं को भूलकर कृष्ण के अद्भुत रूप में खो जाएं।

इस भजन में भक्ति मार्ग की सुगमता को दर्शाया गया है। भक्त जब कृष्ण के रूप, उनके स्वरूप और उनकी लीलाओं पर ध्यान लगाते हैं, तो वे आत्मिक शांति और सच्ची भक्ति का अनुभव करते हैं। न केवल व्यक्तिगत रूप से, बल्कि सामूहिक रूप से भजन गाने से भक्तों में एकजुटता और प्रेम का भाव उत्पन्न होता है। वस्तुतः, यह भजन ज्ञान और प्रेम का एकत्रित्व है, जहाँ भक्त अपने आराध्य की भक्ति में लीन होकर दिव्यता की ओर अग्रसर होते हैं। भक्ति मार्ग की इसी पहचान को इस भजन के माध्यम से बड़े सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व हिंदू पौराणिक कथाओं में गहरा है। भगवान कृष्ण, विशेषकर उनके बाल्यकाल में, अनेक लीलाएँ करते हैं, जिन्हें हम 'भागवत पुराण' व 'महाभारत' में पढ़ते हैं। कृष्ण की माखन चोरी की लीलाएँ, उनकी बंसी का जादू, और यशोदा माँ के साथ अद्वितीय संबंध इस भजन के मूल विषय हैं। यह भजन न केवल आराधना का माध्यम है बल्कि भगवान कृष्ण की कृपा पाने का भी एक उपाय है। भक्त इस भजन के माध्यम से अपनी भावनाओं को प्रस्तुत करते हैं और कृष्ण की दिव्यता का अनुभव प्राप्त करते हैं।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का जाप मानसिक शांति प्रदान करता है और भक्ति में लीन होने का अवसर देता है। भजन सुनने और गाने से मन में एक अद्भुत ऊर्जा का संचार होता है, जिससे भक्ति और श्रवण का आनंद मिलता है। यह भक्तों को तनाव से मुक्ति और आत्मिक संतोष देता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह सूर्योदय से पहले या शाम को सूर্যের अस्त होते समय करना सर्वोत्तम होता है। पूजा स्थल पर दीया जलाना, फूलों की माला चढ़ाना, और स्वच्छता का ध्यान रखना आवश्यक है। बैठने की मुद्रा हमेशा आरामदायक होनी चाहिए, जिससे ध्यान में भावनाएं स्थिरता प्राप्त कर सकें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का अर्थ क्या है?

इस भजन का अर्थ है भगवान श्री कृष्ण के सुंदर रूप का वर्णन करना, जिसमें उनकी अद्भुत लीलाओं और आकर्षण का उल्लेख है।

क्या भजन गाने से कोई विशेष लाभ हैं?

भजन गाने से मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन, और आत्मिक विकास की अनुभूति होती है, जो भक्ति के मार्ग में सहायक है।

क्या इस भजन का जाप करने का कोई विशेष समय है?

इस भजन का जाप सुबह या शाम के समय करना श्रेष्ठ माना जाता है, जब मन शांत और ध्यान केंद्रित हो।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

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