Matarani Bhajan

ले लो शरण सांवरे भजन लिरिक्स (Le Lo Sharan Sanware lyrics in Hindi) - Shyam Bhajan - Bhaktilok

192 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

श्याम कृपा: संकटमोचन का शरण गीत

इस भजन के माध्यम से भक्ति और शरणागति का अनुभव करें। सांवरे की कृपा से हर संकट दूर होता है।

ले लो शरण सांवरे हालात का मारा हूँ सांवरे आया तेरे द्वार लेलो शरण सांवरे दुनियां ने बिसराया मुझे ना करना तू इनकार ले लो शरण सांवरे मैं जी रहा कैसे कोई ना ये जाने एक जानता हूँ मैं फिर एक तू जाने तूने देखा है श्याम मुझेमैं हूँ कितना लाचार ले लो शरण सांवरे आजा रे सांवरे आजा रे मेरा कस के पकड़ लो हाथ जिनको हंसाते है वो ही रुलाते है क्या क्‍या किया उनकासब भूल जाते है लगती है दिल पे तीर के जैसे बातें ये हरबार ले लो शरण सांवरे ऐसा नहीं तुमसे अनजान हूँ बाबापर क्या करूँ बोलो परेशान हूँ बाबाकहीं छूट ना जाये आस ये तुमसे आ जाओ सरकार ले लो शरण सांवरे कुछ और ही सोचाकुछ और पाता हूँ मैं जीतता आखिरक्यूं हार जाता हूँ मेरी नैया डगमग डोल रही है थाम ले तू पतवार ले लो शरण सांवरे मुश्किल से घांवो को मैंने भरे बाबाहोने लगे वो ही फिर से हरे बाबारख दे तू सिर पे हाथ सचिन के कर दे बेड़ापार ले लो शरण सांवरे नाम है तेरा तारण हारा
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'ले लो शरण सांवरे' में भक्त अपने कष्टों और जीवन की कठिनाईयों का उल्लेख करते हैं। भक्त कहता है, 'हालात का मारा हूँ सांवरे', जो यह दर्शाता है कि वह समाज द्वारा उपेक्षित और तड़पता है। वह भगवान से प्रार्थना करता है कि वह उसे अपने दर पर बुलाए, क्यूंकि 'दुनियां ने बिसराया मुझे', यह उस स्थिति को दर्शाता है जहाँ भक्ति की इस राह में व्यक्ति को अकेलापन और कठिनाई का अनुभव होता है। यह भजन भक्त की आंतरिक पीड़ा, आशा, और भगवान की कृपा की ओर आकर्षण का एक संवेदनशील चित्रण है। भक्त हर क्षण में भगवान के प्रति अपने विश्वास को व्यक्त करता है जब वह कहता है, 'ना करना तू इनकार', जो शाश्वत स्थिरता और आस्था को दर्शाता है।

भजन में भक्त की स्थिति व्यक्त होती है जो निराशा और चिंता के महासागर में तैर रहा है। 'क्या क्‍या किया उन्होने सब भूल जाते हैं', यहां भक्त अपने आत्मिक कष्टों को उजागर करता है और इस मानसिक संघर्ष के बीच, वह परमात्मा की शरण में भागता है। 'लगती है दिल पे तीर के जैसे' के माध्यम से, दर्द और निराशा का अहसास भक्त को उनके अनुभवों से जोड़ता है। भक्ति के इस वृत्तांत के माध्यम से, यह स्पष्ट होता है कि भक्त किस प्रकार अपने जीवन में शांति और सुरक्षा की खोज कर रहा है। भक्त की पुकार 'आजाओ सरकार' एक गहरी भावना को व्यक्त करती है कि जब भी जीवन में समस्त समस्याएँ बढ़ जाती हैं, तब सच्ची भक्ति और श्रद्धा ही उन्हें संबल देती है।

इस भजन में भक्ति मार्ग (Bhakti Marg) की गहराईयों का संज्ञान लिया गया है। कृष्ण की शरणागति का यह भाव भक्त की भावनाओं को स्पष्ट करता है, जहाँ संकट के समय केवल 'मैंने भरे बाबाहोने' और 'रख दे तू सिर पे हाथ' से यह प्रकट होता है कि कितनी सहजता से भक्त अपने अल्पज्ञान के बावजूद भगवान पर विश्वास करता है। यह भजन दर्शाता है कि कैसे भक्त की भक्ति केवल संकट के समय में नहीं, बल्कि सम्पूर्ण जीवन में एक ऐसी शक्ति हो सकती है जो हर कठिनाई को पार करने में सहायक होती है। भक्त का बुलाना 'ले लो शरण सांवरे' यह दर्शाता है कि सच्ची भक्ति और आस्था के माध्यम से व्यक्ति को शांति और आंतरिक बल मिलता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भगवान कृष्ण का उल्लेख करते हुए इस भजन का महत्त्व भारतीय पौराणिक कथाओं में गहराई से छिपा है। श्रीमद्भागवत गीता तथा महाभारत में भगवान कृष्ण को संकटमोचन के रूप में पूजा गया है। वे भक्तों की संकट में सहायक और संजीवनी शक्ति माने जाते हैं। इस भजन के माध्यम से भक्त भगवान कृष्ण की अनुकंपा की याचना करता है, जिससे उनके जीवन के संघर्षों का समाधान हो सके। यह भजन समर्पण, भक्ति और प्रेम का प्रतीक है, जो भक्त को अपने जीवन में सत्ता, साहस और प्रेरणा प्राप्त करने के लिए मार्गदर्शक बनाता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जप करने से मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक लाभ होते हैं। मानसिक शांति और स्थिरता प्राप्त होती है, और भक्त को अपने दुखों और परेशानियों से राहत मिलती है। आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, यह भजन भगवान से साक्षात्कार का माध्यम बनता है जहां भक्त अपनी चिंताओं और आशंकाओं को छोड़कर परमात्मा में पूरी शरणागति करता है। नियमित रूप से इस भजन का जप करने से भक्ति और संबंध की गहराई बढ़ती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप करने का सटीक समय सुबह या शाम का है, जब वातावरण शांति और ध्यान के लिए उपयुक्त होता है। भक्ति की शुरुआत में एक दीप जलाकर भगवान को अर्पित करें और स्वयं को सकारात्मकता से भरें। सही मुद्रा में बैठकर हृदय से भगवान का स्मरण करते हुए भजन का जप करें। पवित्रता और श्रद्धा के साथ, भक्ति लाभ की अनुभूति होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या भजन 'ले लो शरण सांवरे' का कोई प्रसिद्ध संदर्भ है?

यह भजन भगवान कृष्ण की शरण में आत्मसमर्पण का एक प्रतीक है, जो भक्तों को उनकी समस्याओं का हल खोजने के लिए प्रेरित करता है।

भजन में किस प्रकार की भावनाएं व्यक्त की गई हैं?

भजन में भक्त की निराशा, उम्मीद और अपने संकटों के प्रति भगवान से शरण लेने की गहरी भावना व्यक्त की गई है। यह अल्लाह के प्रेम और करुणा का एक काव्यात्मक चित्रण है।

इस भजन का जप करने से क्या लाभ होता है?

इस भजन का जप मानसिक शांति, स्थिरता और आध्यात्मिक जागरण में सहायक होता है। भक्त को भगवान से निकटता और आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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