Parvati Stotram

बाबा तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाये लिरिक्स ( Baba Tere Charnon Ki Gar Dhool Jo Mil Jaye Lyrics in Hindi ) - Shiv Bhajan - Bhaktilok

169 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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"बाबा तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाये" भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत लोकप्रिय, भावपूर्ण और हृदयस्पर्शी भजन है। यह भजन भक्त के हृदय की व्याकुलता, पूर्ण आत्मसमर्पण और देवादिदेव महादेव के प्रति अनन्य श्रद्धा को अभिव्यक्त करता है। इस भजन का मुख्य भाव 'विनय' और 'शरणागति' है, जहाँ भक्त अपने चंचल मन की दुर्बलताओं को स्वीकार करते हुए भगवान शिव के चरणों की धूलि मात्र से अपने जीवन के उद्धार की कामना करता है। शिव आराधना, सत्संगों, सावन मास के पावन सोमवारों और महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर इस भजन का गायन अत्यंत श्रद्धा के साथ किया जाता है। यह भजन न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि साधक को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठाकर आध्यात्मिक चेतना की ओर अग्रसर करता है। इस लेख में हम इस पावन भजन के लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और इससे जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों का अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ बाबा तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाये ॥

कोरस (स्थायी):
ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय
भोले तेरे चरणों की...
बाबा तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाये।
सच कहता हूँ बाबा, मेरी तक़दीर संवर जाये ॥

अंतरा १:
यह मन बड़ा चंचल है, कैसे तेरा भजन करूँ।
जितना इसे समझाऊँ, उतना ही मचल जाये ॥
बाबा तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाये...

अंतरा २:
सुनते हैं तेरी रहमत दिन रात बरसती है।
इक बूँद जो मिल जाए, दिल की कली खिल जाए ॥
बाबा तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाये...

अंतरा ३:
नजरों से गिरना ना, चाहे जितनी सजा देना।
नज़रों से जो गिर जाए, मुश्किल है संभल जाना ॥
बाबा तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाये...

अंतरा ४:
बाबा इस जीवन की बस इतनी तमन्ना है।
तुम सामने हो मेरे, मेरा दम ही निकल जाए ॥
बाबा तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाये...
सच कहता हूँ बाबा, मेरी तक़दीर संवर जाये ॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन भक्त और भगवान के बीच के अत्यंत घनिष्ठ और निश्छल संबंध को दर्शाता है। इसमें भक्त स्वीकार करता है कि मानव जीवन की सार्थकता केवल ईश्वर के चरणों की शरण में जाने से ही संभव है। 'चरणों की धूल' यहाँ केवल भौतिक धूल नहीं है, बल्कि यह भगवान के अनुग्रह, उनकी कृपा और उनके प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। भक्त कहता है कि यदि उसे महादेव के चरणों की धूलि मिल जाए, तो उसके जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाएंगे और उसकी सोई हुई किस्मत जाग उठेगी।

भजन के पहले अंतरे में मन की चंचलता का वर्णन है। मन स्वभाव से ही अस्थिर है और सांसारिक विषयों की ओर भागता है। भक्त अपनी इस असमर्थता को स्वीकार करते हुए भगवान से प्रार्थना करता है कि वे ही इस चंचल मन को स्थिर करें। दूसरे अंतरे में भगवान की असीम दयालुता और करुणा का गान किया गया है। महादेव को 'आशुतोष' कहा जाता है, जो शीघ्र प्रसन्न होने वाले हैं। उनकी कृपा की एक बूंद भी भक्त के मुरझाए हुए हृदय को प्रफुल्लित कर सकती है। तीसरे अंतरे में भक्त की सबसे बड़ी चिंता व्यक्त की गई है—ईश्वर की उपेक्षा। भक्त कहता है कि वह कोई भी दंड भुगतने को तैयार है, लेकिन भगवान उसे अपनी कृपा-दृष्टि से वंचित न करें। अंतिम अंतरे में मोक्ष और सायुज्य मुक्ति की चरम इच्छा व्यक्त की गई है, जहाँ भक्त अपने प्राण त्यागते समय केवल अपने आराध्य के दर्शन की कामना करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • पूर्ण शरणागति का भाव: यह भजन भक्त को अपने अहंकार को शून्य कर भगवान के चरणों में समर्पित होने की प्रेरणा देता है। हिंदू दर्शन में शरणागति को मोक्ष का सबसे सरल मार्ग माना गया है।
  • मन की चंचलता का यथार्थ चित्रण: श्रीमद्भगवद्गीता में भी अर्जुन ने मन को वायु की भांति चंचल और कठिनता से वश में होने वाला बताया है। यह भजन उसी सत्य को अत्यंत सरल और सुबोध शब्दों में प्रस्तुत करता है।
  • महादेव की कृपालुता का वर्णन: शिव को दया का सागर माना गया है। भजन में उनकी रहमत को दिन-रात बरसने वाली वर्षा के रूप में दर्शाया गया है, जो हर जीव के लिए सुलभ है।
  • आने वाले जीवन की दिशा: यह भजन सांसारिक सुखों की अपेक्षा आध्यात्मिक सुख और ईश्वर के सानिध्य को सर्वोपरि मानता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन का गायन और श्रवण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु कुछ विशेष अवसरों पर इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है:

  • सर्वोत्तम समय: प्रातःकाल की पूजा या संध्या आरती के समय शांत वातावरण में इसका गायन मन को एकाग्र करता है।
  • विशेष अवसर: सावन मास के सोमवार, महाशिवरात्रि, प्रदोष व्रत और शिव सत्संगों के दौरान इस भजन का सामूहिक गायन अत्यंत फलदायी माना जाता है।
  • गायन की विधि: इसे शांत चित्त होकर, आँखें बंद करके, महादेव के स्वरूप का ध्यान करते हुए गाना चाहिए। इसमें वाद्य यंत्रों के रूप में हारमोनियम, तबला और मंजीरे का प्रयोग किया जा सकता है, परंतु मुख्य ध्यान भाव और शब्दों के शुद्ध उच्चारण पर होना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन देवादिदेव महादेव (भगवान शिव) को समर्पित है। शिव कल्याणकारी, संहारक और परम योगी हैं। वे अपने भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होने वाले आशुतोष हैं। यद्यपि इस भजन के मूल रचयिता का नाम अज्ञात है, परंतु यह पारंपरिक रूप से संतों की उस मौखिक परंपरा से आता है जहाँ ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम ही सर्वोपरि है। यह भजन आधुनिक युग में विभिन्न प्रसिद्ध गायकों द्वारा गाकर जन-जन तक पहुँचाया गया है। भगवान शिव के साथ-साथ यह भजन माता पार्वती के प्रति भी श्रद्धा व्यक्त करने का माध्यम बनता है, क्योंकि शिव और शक्ति एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की रचना आधुनिक भक्ति काल की मानी जा सकती है, जहाँ शास्त्रीयता के स्थान पर सुगम संगीत और सरल लोकभाषा को प्राथमिकता दी गई है। इसकी पृष्ठभूमि भक्त की उस आंतरिक पुकार से जुड़ी है, जो सांसारिक दुखों और मन की चंचलता से त्रस्त होकर शिव के चरणों में शांति की खोज करता है। यह भजन इस बात का प्रमाण है कि ईश्वर को रिझाने के लिए कठिन साधना की नहीं, बल्कि केवल एक सच्चे और निश्छल हृदय की आवश्यकता होती है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

भजन की भाषा सरल, सुबोध और प्रवाहपूर्ण हिंदी है, जिसमें उर्दू के कुछ सुंदर शब्दों (जैसे- तक़दीर, रहमत, तमन्ना) का बहुत ही सुंदर समन्वय किया गया है। यह भाषा शैली 'खड़ी बोली' के निकट है, जिससे यह आम जनमानस को आसानी से समझ में आती है। इसमें 'मिश्रित काव्य शैली' का प्रयोग किया गया है, जहाँ भक्ति रस (शांत और करुण रस) प्रधान है। प्रत्येक पंक्ति में लय और ताल का ऐसा अनूठा संगम है जो गाते समय साधक को भावविभोर कर देता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • विनम्रता का महत्व: चरणों की धूलि की कामना करना परम विनम्रता और अहंकार के विसर्जन का प्रतीक है। जब तक मनुष्य का अहंकार नष्ट नहीं होता, तब तक उसे ईश्वर की प्राप्ति नहीं हो सकती।
  • आत्म-अवलोकन: अपने मन की चंचलता को स्वीकार करना आध्यात्मिक प्रगति का पहला चरण है। जब हम अपनी कमियों को स्वीकार करते हैं, तभी हम ईश्वर से उन्हें दूर करने की प्रार्थना कर सकते हैं।
  • सहनशीलता और विश्वास: भगवान की न्यायप्रियता पर अटूट विश्वास रखना और उनकी इच्छा को सहर्ष स्वीकार करना ही सच्ची भक्ति है।
  • अंतिम लक्ष्य की स्पष्टता: जीवन का अंतिम ध्येय ईश्वर की स्मृति में प्राण त्यागना होना चाहिए, जो मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
गर धूल यदि चरणों की धूलि ईश्वर की असीम कृपा और आशीर्वाद का प्रतीक
तक़दीर भाग्य / प्रारब्ध संचित कर्मों का फल जो ईश्वर कृपा से बदल सकता है
चंचल अस्थिर / भागने वाला मानव मन की वह अवस्था जो माया के वशीभूत रहती है
रहमत कृपा / दया भगवान शिव की अनवरत बरसने वाली करुणा
तमन्ना अभिलाषा / तीव्र इच्छा मोक्ष और ईश्वर दर्शन की चरम आकांक्षा
दम निकल जाए प्राणों का अंत होना जीवन के अंतिम क्षणों में आराध्य का साक्षात्कार

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"बाबा तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाये, सच कहता हूँ बाबा मेरी तक़दीर संवर जाये"
हे महादेव! यदि मुझे आपके श्रीचरणों की पावन धूलि का एक कण भी प्राप्त हो जाए, तो मेरा यह तुच्छ जीवन धन्य हो जाएगा और मेरा भाग्य संवर जाएगा। आपके चरणों की शरण ही मेरे समस्त दुखों का अंत है।

"यह मन बड़ा चंचल है कैसे तेरा भजन करूँ, जितना इसे समझाऊँ उतना ही मचल जाये"
मेरा मन अत्यंत अस्थिर है, यह क्षण भर भी एक स्थान पर नहीं टिकता। मैं इसे जितना भी समझाने का प्रयास करता हूँ, यह उतना ही सांसारिक विषयों की ओर भागता है। ऐसी स्थिति में मैं आपका भजन कैसे करूँ? आप ही इस मन को स्थिर करें।

"सुनते हैं तेरी रहमत दिन रात बरसती है, इक बूँद जो मिल जाए दिल की कली खिल जाए"
मैंने सुना है कि आपकी दया और कृपा की वर्षा अनवरत रूप से आपके भक्तों पर होती रहती है। मुझे उस कृपा सागर से केवल एक बूंद की आवश्यकता है, जिससे मेरा सूखा और व्याकुल हृदय खिल उठे और मुझे परम आनंद की प्राप्ति हो।

"नजरों से गिरना ना चाहे जितनी सजा देना, नज़रों से जो गिर जाए मुश्किल है संभल जाना"
हे प्रभु! मेरे पापों और भूलों के लिए आप मुझे जो चाहें दंड दे दें, परंतु मुझे अपनी कृपा-दृष्टि से दूर न करें। क्योंकि जो आपकी नज़रों से गिर जाता है, उसका इस संसार में पुनः संभलना असंभव हो जाता है। आपकी उपेक्षा ही सबसे बड़ी सजा है।

"बाबा इस जीवन की बस इतनी तमन्ना है, तुम सामने हो मेरे मेरा दम ही निकल जाए"
मेरे इस नश्वर जीवन की केवल एक ही अंतिम इच्छा है कि जब मेरे प्राण इस शरीर को छोड़ें, तब आप साक्षात मेरे सम्मुख उपस्थित हों और मैं आपके दर्शन करते हुए मोक्ष को प्राप्त करूँ।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

भगवान शिव की शरण में जाने के लिए निम्नलिखित मंत्रों और श्लोकों का पाठ इस भजन के साथ अत्यंत फलदायी माना जाता है:

॥ शिव पंचाक्षर मंत्र ॥

ॐ नमः शिवाय

अर्थ: मैं भगवान शिव को नमन करता हूँ, जो समस्त सृष्टि के कल्याणकर्ता और परमेश्वर हैं।

इसके अतिरिक्त, महामृत्युंजय मंत्र का जप भी साधक को अभय प्रदान करता है और उसे जन्म-मरण के चक्र से मुक्त करता है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

जानकारी का बिंदु विवरण
भजन का नाम बाबा तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाये
आराध्य देव भगवान शिव (भोलेनाथ)
मुख्य भाव विनय, समर्पण, शरणागति
भाषा हिंदी (उर्दू शब्दों के सुंदर समन्वय के साथ)
गायन का सर्वोत्तम समय प्रातःकाल, संध्याकाल, प्रदोष काल
मुख्य पर्व महाशिवरात्रि, सावन सोमवार
आध्यात्मिक लाभ मानिक शांति, एकाग्रता, भक्ति भाव की वृद्धि

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन देवादिदेव महादेव (भगवान शिव) को समर्पित है।

चरणों की धूलि का अर्थ है पूर्ण समर्पण, अहंकार का त्याग और भगवान की असीम कृपा प्राप्त करना।

यह भजन मन को शांत करता है, चंचलता को दूर करता है और साधक में समर्पण का भाव जाग्रत करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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