बैठ नज़दीक सांवरे के
September 12, 2022
Deepak Kumar Bind
बैठ नज़दीक सांवरे के
बैठ नज़दीक तू सांवरे के तार से तार जुड़ने लगेगा देख नज़रों से नज़रें मिलाके बात तुझसे वो करने लगेगा ये है भूखा तेरी भावना का ये है प्यासा तेरे प्रेम रस का नंगे पैरों से ये दौड़ा आता प्रेमियों का इसे ऐसा चस्का प्रेम जितना तू इससे बढाए उतना तेरी तरफ ये बढ़ेगा देख नज़रों से नज़रें मिलाके बात तुझसे वो करने लगेगा पास में बैठ कर के प्रभु के अपने दिल की हकीकत सुनाओ एक टक तुम छवि को निहारो कोई प्यारी सी धुन गुनगुनाओ भाव जागेंगे तेरे ह्रदय के प्रेम तेरा उमड़ने लगेगा देख नज़रों से नज़रें मिलाके बात तुझसे वो करने लगेगा होंगी आँखों ही आँखों में बातें खूब समझोगे इसके इशारे देगा निर्देश तुझको कन्हैया बनते जाओगे तुम इसके प्यारे इसके कहने में जब तुम चलोगे नाम दुनिया में तेरा चलेगा देख नज़रों से नज़रें मिलाके बात तुझसे वो करने लगेगा श्याम से प्यार जिसने किया है स्वाद जीवन का उसने लिया है जिसने नज़दीकियां है बढ़ाई उसने मस्ती का प्याला पिया है बिन्नू होंठों पे रख कर के देखो सारा जीवन महकने लगेगा देख नज़रों से नज़रें मिलाके बात तुझसे वो करने लगेगा