श्री शंकराची आरती(Shri Shankarachi Aarati)- Bhaktilok
लवथवती विकारला ब्रह्माण्डी माला
विशेष कंठ काला त्रिनेत्री ज्वाला
लावण्यसुंदर मस्तकी भाला
तेथुनिया जल निर्मल वही झूलाझुला
जय देव जय देवी
जय देव जय देवी
जय श्री शंकर:
हो स्वामी शंकर:
आरती ओवालु तुज करपुरगौर
जय देव जय देवी
करपुरगौरा भोला नयनी विशाल
अर्धांगी पार्वती सुमनंच्य मल
विभूतिचे उधलाना शितिकांत नीला
ऐसा शंकर शोभे उमावेलहला
जय देव जय देवी
जय देव जय देव जय श्री शंकर
हो स्वामी शंकर:
आरती ओवालु तुझ करपुरगौर
जय देव जय देवी
देवी दैत्य सागरमंथन पाई केले
त्यामाजी अवचिता हलाहल उथले
ते तवा असुरपने प्रशन केले
नीलकंठ नाम प्रसिद्ध झले
जय देव जय देवी
जय देव जय देव जय श्री शंकर
हो स्वामी शंकर:
आरती ओवालु तुझ करपुरगौर
जय देव जय देवी
व्याघरंबर फणीवरधर सुंदर मदनारी
पंचानन मनमोहन मुनिजन सुखकरी
शतकोटिचे बीज वाचे उच्चचारी
रघुकुलतिलक रामदास अंतरी
जय देव जय देवी
जय देव जय देव जय श्री शंकर
हो स्वामी शंकर:
आरती ओवालु तुझ करपुरगौर
जय देव जय देवी