भक्ति काव्य व भजन बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

कभी तो तारोगे आकर संभालोगे कभी तो तारोगे इसी आस में जी रहे हैं प्रभु

पढ़ें कभी तो तारोगे आकर संभालोगे कभी तो तारोगे इसी आस में जी रहे हैं प्रभु का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्त

कलयुग के प्रत्यक्ष देवता हारे के सहारे खाटू श्याम बाबा को समर्पित यह अत्यंत ही पावन भजन "कभी तो तारोगे आकर संभालोगे कभी तो तारोगे इसी आस में जी रहे हैं प्रभु" भक्तों के अंतर्मन की पुकार और ईश्वर के प्रति अगाध प्रेम, विश्वास तथा पूर्ण शरणागति का अनूठा प्रतीक है। खाटू नरेश बाबा श्याम के दरबार में आने वाला हर भक्त इसी आशा और अटूट विश्वास के साथ अपनी झोली फैलाता है कि आज नहीं तो कल, उनके आराध्य उनकी सुध अवश्य लेंगे। यह भजन साधक के भीतर छिपे विरह, विनय, करुणा और अनन्य समर्पण के भाव को जागृत करता है। जब मनुष्य संसार के तमाम प्रपंचों और दुखों से घिरकर चारों तरफ से निराश हो जाता है, तब केवल श्री खाटू श्याम जी का नाम और उनकी कृपा ही उसे इस भवसागर से पार लगाने का एकमात्र संबल बनती है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस दिव्य भजन के संपूर्ण बोल, इसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ, भावार्थ, गायन विधि और जीवन पर पड़ने वाले इसके सकारात्मक प्रभावों का संपूर्ण विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थाई (मुखड़ा):
कभी तो तारोगे आकर संभालोगे कभी तो तारोगे,
इसी आस में जी रहे हैं प्रभु, इसी आस में जी रहे हैं प्रभु!
तुम्हीं हो खेवनहार हमारे, तुम्हीं प्राणधन प्यारे,
इसी आस में जी रहे हैं प्रभु, इसी आस में जी रहे हैं प्रभु।

अंतरा 1:
दुनिया की ठोकर खा-खाकर, हारा मैं संसार से,
अब तो नजरें फेर न लेना अपने इस लाचार से।
कब से द्वारे तेरे खड़ा हूँ, उम्मीद की जोत जलाए,
दर्शन दे दो खाटू वाले, सब दुख दूर भगाए।
इसी आस में जी रहे हैं प्रभु, इसी आस में जी रहे हैं प्रभु।

अंतरा 2:
माना कि मेरे पाप बहुत हैं, अवगुण की खान हूँ,
पर मैं तो आखिर हे कन्हैया! तेरा ही नादान हूँ।
माँ तो अपने बच्चे की हर गलती को भुला देती है,
फिर क्यों मेरी अर्जी बाबा देरी से सुनती है?
इसी आस में जी रहे हैं प्रभु, इसी आस में जी रहे हैं प्रभु।

अंतरा 3:
हारने वाले को गले लगाना, रीत तुम्हारी पुरानी है,
कलयुग में महिमा खाटू श्याम, तेरी सबसे निराली है।
जो भी तेरी शरण में आया, खाली हाथ न लौटा,
किस्मत का सोया हुआ हर भाग्य, पल में फिर से चमका।
इसी आस में जी रहे हैं प्रभु, इसी आस में जी रहे हैं प्रभु।

समापन (अंतिम भाव):
सास-सास में नाम तुम्हारा, जपते हैं दिन-रैन,
तुम्हे देखने को तरस रहे हैं, मेरे सांवरे नैन।
अब तो डोरी सौंप दी मैंने, तेरे इन चरणों में,
पार उतारो या डुबाओ, सब कुछ है हाथों में।
इसी आस में जी रहे हैं प्रभु, कभी तो तारोगे आकर संभालोगे...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन किसी सामान्य गीत से कहीं अधिक एक जीवंत आध्यात्मिक प्रार्थना है, जो भक्त और भगवान के बीच के आत्मीय संबंध को प्रकट करती है। भजन के मुखड़े 'कभी तो तारोगे आकर संभालोगे' में भक्त की उस अचल श्रद्धा का दर्शन होता है, जहाँ वह जानता है कि परीक्षा लंबी हो सकती है, परंतु भगवान की करुणा का द्वार कभी बंद नहीं होता। सांसारिक जीवन की भागदौड़ और दुखों से त्रस्त होकर जब मनुष्य चारों तरफ से निराश होता है, तब वह खाटू श्याम बाबा की शरण में आकर अपनी सारी चिंताएं उनके श्रीचरणों में अर्पित कर देता है।

भजन के अंतरों में भक्त अपनी गलतियों और कमियों को स्वीकार करते हुए भी भगवान के वात्सल्यपूर्ण स्वभाव का स्मरण करता है। जिस प्रकार एक माता अपने नादान बालक की हर भूल को क्षमा कर उसे गले लगा लेती है, ठीक उसी प्रकार भक्त को विश्वास रहता है कि उसका सांवरा सरकार भी उसकी पुकार अवश्य सुनेगा। 'हारे के सहारे' की उपाधि से विभूषित खाटू श्याम जी का यह चरित्र ही उन्हें कलयुग का सबसे लोकप्रिय और कृपालु देवता बनाता है। यह भजन साधक को सिखाता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर पर से अपना भरोसा कभी नहीं उठाना चाहिए, क्योंकि धैर्य और सच्ची भक्ति का फल हमेशा आनंददायक होता है.

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

श्री खाटू श्याम बाबा को समर्पित यह भजन न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि साधक के आध्यात्मिक पथ को भी सुगम बनाता है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • शरणागति का संदेश: यह भजन मनुष्य को अहंकार त्यागकर भगवान के चरणों में पूर्ण रूप से समर्पित होने की प्रेरणा देता है।
  • निराशा में आशा का संचार: जीवन की गहरी से गहरी निराशा के क्षणों में भी यह भजन मन को संबल प्रदान करता है।
  • कलयुग में नाम जप की महिमा: भगवान श्री कृष्ण के कलयुग में 'श्याम' रूप में अवतरित स्वरूप का स्मरण कराना इस भजन का मुख्य आधार है।
  • सार्वभौमिक अपील: जाति, पांति और उम्र के बंधनों से परे हर आयु वर्ग के भक्तों को यह भजन आत्मीय शांति और आनंद से भर देता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत के पूर्ण लाभ और मानसिक एकाग्रता के लिए इस भजन का गायन या श्रवण विशेष विधि से किया जाना चाहिए:

  • ब्रह्म मुहूर्त एवं संध्याकाल: प्रातः काल उठकर स्नान के पश्चात पूजा घर में दीप प्रज्वलित कर इस भजन का स्मरण करने से पूरा दिन सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहता है। संध्या के समय आरती के पश्चात इसे गाना मन को शांति देता है।
  • श्री हनुमान चालीसा के पाठ के उपरांत खाटू श्याम बाबा के संकीर्तन में इस भजन को सम्मिलित करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
  • घर में होने वाले साप्ताहिक सत्संग, एकादशी कीर्तन, फाल्गुन मेले और श्याम बाबा के विशेष उत्सवों के दौरान सामूहिक रूप से इस भजन का गान करने से वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय हो जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में महाभारत काल के महान वीर योद्धा बर्बरीक जी हैं, जिन्हें कलियुग में भगवान श्री कृष्ण के वरदान स्वरूप 'खाटू श्याम बाबा' के नाम से पूजा जाता है। बर्बरीक जी ने अपने शीश का दान देकर कलयुग में 'हारे का सहारा' बनने का जो वरदान श्री कृष्ण से प्राप्त किया था, उसी कृपा का गुणगान इस भजन में किया गया है। उनके साथ ही इस परंपरा में अनगिनत संतों और श्याम भक्तों (जैसे आलू सिंह जी महाराज आदि) ने बाबा के यश का गान कर इस धारा को और अधिक समृद्ध किया है.

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

श्याम बाबा के दरबार में प्रतिदिन हज़ारों भजन गाए जाते हैं, परंतु वे भजन जो सीधे हृदय को स्पर्श करते हैं, उनकी पृष्ठभूमि में भक्तों का सच्चा अनुभव और विरह वेदना होती है। यह भजन राजस्थान के खाटू धाम के साथ-साथ देश-विदेश के कोने-कोने में बैठे उन तमाम श्याम प्रेमियों की आवाज बनता है जो अपने जीवन के संघर्षों के बीच बाबा की एक झलक पाने और उनकी कृपा का अनुभव करने के लिए व्याकुल रहते हैं। इसकी लय और ताल साधक को मंत्रमुग्ध कर देती है.

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल, सुबोध और प्रवाहमयी हिंदी (ब्रि भाषा मिश्रित खड़ी बोली) में रचा गया है। इसमें रूपक और अनुप्रास अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है जैसे 'दुनिया की ठोकर खा-खाकर' और 'खेवनहार हमारे'। शब्दों की सरलता ऐसी है कि एक साधारण भक्त से लेकर शास्त्रीय संगीत के मर्मज्ञ तक इसे आसानी से गा और समझ सकते हैं। इसकी शब्दावली सीधे हृदय के तार झंकृत करती है.

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

इस पावन भजन से हमें निम्नलिखित जीवनोपयोगी और आध्यात्मिक शिक्षाएं मिलती हैं:

  1. धैर्य और सहनशीलता: जीवन में विपत्तियाँ आने पर भी ईश्वर पर अटूट विश्वास रखना चाहिए।
  2. अहंकार का त्याग: मनुष्य को अपनी योग्यताओं का अभिमान छोड़कर भगवान को अपना 'खेवनहार' मानना चाहिए।
  3. क्षमा और करुणा: जिस प्रकार ईश्वर हमारी भूलों को क्षमा करते हैं, हमें भी आपस में क्षमा भाव रखना चाहिए।
  4. निरंतर स्मरण: सांसारिक कार्यों को करते हुए भी मन में ईश्वर का स्मरण बनाए रखना ही सच्ची भक्ति है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
तारोगे पार लगाना / मोक्ष देना संसार रूपी सागर से जीवात्मा का उद्धार करना
खेवनहार नाव चलाने वाला / नाविक जीवन की नौका को संकटों से पार लगाने वाले भगवान
प्राणधन प्राणों से भी प्रिय धन ईश्वर जिनका स्मरण जीवन का सबसे बड़ा मूल्य है
अवगुण दोष / बुराइयां मानव स्वभाव की कमजोरियां जिन्हें भगवान क्षमा करते हैं
शरणागति पूर्ण समर्पण अपनी इच्छा को भगवान की इच्छा में विलीन कर देना

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

भजन की प्रत्येक पंक्ति एक नया आध्यात्मिक संदेश देती है। जब भक्त कहता है— "दुनिया की ठोकर खा-खाकर, हारा मैं संसार से", तो वह इस नश्वर संसार की असारता और स्वार्थी स्वभाव का वर्णन करता है। संसार जब हर तरफ से मुँह मोड़ लेता है, तब केवल भगवान का दरबार ही एकमात्र ऐसा स्थान बचता है जहाँ सांत्वना मिलती है। अगली पंक्ति— "माना कि मेरे पाप बहुत हैं, अवगुण की खान हूँ"— साधक की दीनता और निरभिमानता को दर्शाती है। भगवान कभी भी भक्त के गुणों को नहीं, बल्कि उसकी पुकार में छिपे सच्चे भाव को देखते हैं। यही इस भजन की सबसे बड़ी खूबी है.

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण करने से साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है:

ॐ श्री श्यामेश्वराय नमः |
हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा ||

इसके अतिरिक्त श्रीमद्भगवद्गीता के इस श्लोक का स्मरण भी इस भाव को पुष्ट करता है:

"अनन्याश्चिन्तयन्तो मां యే जनाः पर्युपासते। तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

बिंदु विवरण
भजन का नाम कभी तो तारोगे आकर संभालोगे (Kabhie To Taroge)
आरध्य देव श्री खाटू श्याम बाबा (वीर बर्बरीक)
भाषा सरल हिंदी / ब्रज भाव
मुख्य भाव अनन्य भक्ति, विरह, विनय और पूर्ण शरणागति
उपयुक्त अवसर एकादशी, फाल्गुन मेला, दैनिक पूजा, सत्संग
संबंधित लिंक शिव तांडव स्तोत्र, श्री हनुमान चालीसा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्ना 1: यह भजन किस देवता को समर्पित है?
उत्तर: यह भजन कलयुग के अवतारी भगवान श्री खाटू श्याम बाबा (वीर बर्बरीक) को समर्पित है।

प्रश्ना 2: इस भजन को कब और किस समय गाना सबसे अच्छा रहता है?
उत्तर: इस भजन को प्रातःकालीन पूजा के समय, संध्या वंदन के दौरान या एकादशी के व्रत पर विशेष रूप से गाया जा सकता है।

प्रश्ना 3: 'खेवनहार' शब्द का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: 'खेवनहार' का अर्थ वह नाविक है जो हमारी जीवन रूपी नाव को इस भवसागर से सुरक्षित पार लगाता है, जो कि यहाँ भगवान श्याम हैं।

प्रश्ना 4: इस भजन से हमारे जीवन को क्या प्रेरणा मिलती है?
उत्तर: यह भजन कठिन परिस्थितियों में भी भगवान पर अटूट विश्वास रखने और कभी भी निराश न होने की प्रेरणा देता है।

प्रश्ना 5: क्या घर पर सामूहिक रूप से यह भजन गाया जा सकता है?
उत्तर: हाँ, पारिवारिक सत्संग या श्याम बाबा के संकीर्तन में सामूहिक गान से घर का वातावरण अत्यंत सकारात्मक और पवित्र बनता है।

प्रश्ना 6: खाटू श्याम बाबा को 'हारे का सहारा' क्यों कहा जाता है?
उत्तर: ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति दुनिया से हार जाता है और चारों तरफ से निराश हो जाता है, बाबा श्याम उसकी बांह पकड़कर उसे विजयी बनाते हैं।

प्रश्ना 7: क्या इस भजन के स्मरण से मानसिक शांति मिलती है?
उत्तर: बिल्कुल, इस भजन के भावपूर्ण बोल और मधुर स्वर मन की चंचलता को शांत कर असीम मानसिक शांति प्रदान करते हैं।

प्रश्ना 8: इस लेख में दी गई जानकारी का स्रोत क्या है?
उत्तर: यह सामग्री सनातन भक्ति परंपरा, संकीर्तन ग्रंथों और पारंपरिक श्याम कथाओं के आधार पर संकलित की गई है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत पूरी प्रमाणिकता, भक्ति रस और साहित्यिक सुंदरता के साथ पाठकों के लिए प्रस्तुत किया गया है। Bhaktilok.in की संपादकीय टीम यह सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक devotional content सनातन संस्कृति की गरिमा और पाठकों की आध्यात्मिक जिज्ञासा के अनुरूप हो।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन भक्ति साहित्य एवं संकीर्तन संग्रह
  • श्रीमद्भगवद्गीता - यथारूप
  • खाटू श्याम जी की पौराणिक कथाएं एवं लोक परंपराएं
  • पारंपरिक भजन संकलन एवं लोक गाथाएं

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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