"ऊँचे ऊँचे मंदिर तेरे ऊँचा तेरा धाम" भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत ही मधुर, भावपूर्ण और लोकप्रिय भजन है। यह भजन महादेव के कैलाशपति रूप, उनकी असीम माया, और उनके अंतर्यामी स्वरूप की महिमा का गान करता है। इस भजन में भक्त का भगवान शिव के प्रति अनन्य समर्पण, विनय और श्रद्धा का भाव परिलक्षित होता है। सनातन धर्म में भगवान शिव को देवों के देव महादेव कहा गया है, जो अत्यंत भोले हैं और अपने भक्तों की थोड़ी सी भक्ति से भी प्रसन्न हो जाते हैं। इस भजन के माध्यम से भक्त संसार की नश्वरता, ईश्वर की सर्वव्यापकता और उनकी अचिंत्य माया को स्वीकार करते हुए उनके चरणों में शीश झुकाता है। यह भजन विशेष रूप से महाशिवरात्रि, सावन के पवित्र महीने, सोमवार के व्रत और विभिन्न धार्मिक सत्संगों के अवसरों पर अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया जाता है। इसके श्रवण मात्र से मन को असीम शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
॥ ऊँचे ऊँचे मंदिर तेरे ऊँचा तेरा धाम ॥
मुखड़ा:
ऊँचे ऊँचे मंदिर तेरे ऊँचा तेरा धाम ।
हे कैलाश के वासी भोले, हम करते हैं तुझे प्रणाम ॥
ऊँचे ऊँचे मंदिर तेरे ऊँचा तेरा धाम...
अंतरा - १:
अद्भुत है संसार यहाँ पर कई भूलेखे हैं ।
तरह-तरह के खेल जगत में हमने देखे हैं ।
तू है भाग्य विधाता तेरे लेख सुलेखे हैं ।
तू लिखने वाला है ये सब तेरे लेखे हैं ।
अजब है तेरी माया, इसे कोई समझ ना पाया ॥
हे कैलाश के वासी भोले, हम करते हैं तुझे प्रणाम...
अंतरा - २:
पारब्रह्म परमेश्वर तू है हर कोई माने रे ।
सब तेरे बालक हैं क्या अपने बेगाने रे ।
तू अंतर्यामी सबकी पीड़ा पहचाने रे ।
सबके ही हृदय में बैठा घट-घट की जाने रे ।
अजब है तेरी माया, इसे कोई समझ ना पाया ॥
हे कैलाश के वासी भोले, हम करते हैं तुझे प्रणाम...
अंतरा - ३:
हे योगेश्वर योग से तूने जगत बनाया है ।
तन पे तूने भस्म रमा के अलख जगाया है ।
कहीं धूप के रंग सुनहरे कहीं पे छाया है ।
तूने किया है वही जो तेरे मन को भाया है ।
अजब है तेरी माया, इसे कोई समझ ना पाया ॥
ऊँचे ऊँचे मंदिर तेरे ऊँचा तेरा धाम ।
हे कैलाश के वासी भोले, हम करते हैं तुझे प्रणाम ॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन भगवान शिव की महिमा, उनकी सर्वव्यापकता और उनकी लीलाओं का एक सुंदर चित्रण है। इसके माध्यम से भक्त यह स्वीकार करता है कि इस चराचर जगत में जो कुछ भी घटित हो रहा है, वह सब महादेव की ही इच्छा और उनकी माया का परिणाम है।
समर्पण और वंदन: भजन की शुरुआत में भक्त महादेव के भव्य स्वरूप और उनके परम पावन निवास स्थान कैलाश पर्वत की वंदना करता है। भक्त कहता है कि हे शिव! आपके मंदिर अत्यंत ऊँचे पर्वतों पर स्थित हैं और आपका धाम (कैलाश) सबसे ऊँचा और दिव्य है। हे कैलाशपति! हम आपके इस पावन रूप को बारंबार प्रणाम करते हैं।
संसार की नश्वरता और भाग्य का विधान: प्रथम अंतरे में भक्त संसार की विचित्रता और भ्रम (भूलेखे) का वर्णन करता है। वह कहता है कि इस संसार में अनेक प्रकार के भ्रम और खेल देखने को मिलते हैं। मनुष्य अपने कर्मों और भाग्य के जाल में उलझा रहता है, लेकिन वास्तव में आप ही सबके भाग्य विधाता हैं। हमारे जीवन की हर परिस्थिति आपके द्वारा लिखी गई पटकथा का हिस्सा है। आपकी माया अत्यंत अजब और रहस्यमयी है, जिसे साधारण बुद्धि से समझना असंभव है।
सर्वव्यापकता और अंतर्यामी रूप: दूसरे अंतरे में भगवान शिव को पारब्रह्म परमेश्वर के रूप में स्वीकार किया गया है। वे सभी जीवों के पिता हैं, उनके लिए कोई अपना या पराया नहीं है। वे घट-घट वासी हैं और प्रत्येक जीव के हृदय की पीड़ा को भली-भांति जानते हैं। उनकी इस समभाव और करुणा की भावना को भक्त नमन करता है।
सृष्टि का निर्माण और योगेश्वर रूप: अंतिम अंतरे में शिव के योगेश्वर रूप की स्तुति की गई है। उन्होंने अपनी योगशक्ति से इस संपूर्ण ब्रह्मांड की रचना की है। वे स्वयं वैरागी हैं, जो शरीर पर भस्म लगाकर अलख जगाते हैं। प्रकृति में जो भी विविधता है—चाहे वह सुनहरी धूप हो या शीतल छाया—वह सब उन्हीं की इच्छा का प्रकटीकरण है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह वेदांत दर्शन और शिव तत्व का संगीतमय निचोड़ है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- शरणागति का भाव: भजन की प्रत्येक पंक्ति भक्त को अहंकार त्यागकर भगवान शिव के चरणों में पूर्ण समर्पण करने की प्रेरणा देती है।
- माया का निरूपण: इसमें संसार को एक रंगमंच और ईश्वर को उसका सूत्रधार माना गया है। "अजब है तेरी माया" पंक्ति जीवन के सुख-दुख और उतार-चढ़ाव को ईश्वर की लीला मानकर स्वीकार करने का संदेश देती है।
- समता का संदेश: "सब तेरे बालक हैं क्या अपने बेगाने रे" के माध्यम से यह भजन जाति, वर्ग और संप्रदाय से ऊपर उठकर सभी मनुष्यों में एक ही दिव्य तत्व को देखने की सीख देता है।
- मानसिक शांति: इस भजन का सरल संगीत और गहरे अर्थ मन को शांत करते हैं और ध्यान की अवस्था में ले जाने में सहायक होते हैं।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
यद्यपि भगवान शिव की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष समय और विधियां अत्यंत फलदायी मानी गई हैं:
शुभ समय:
- प्रातःकाल की पूजा: सुबह के समय इस भजन को सुनने या गाने से दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति के साथ होती है।
- संध्या आरती: शाम के समय शिव मंदिर में या घर के मंदिर में धूप-दीप जलाकर इस भजन का संकीर्तन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- विशेष अवसर: महाशिवरात्रि, सावन के सोमवार, प्रदोष व्रत और शिवरात्रि के जागरण में इस भजन का सामूहिक गायन भक्तों में अपूर्व उत्साह का संचार करता है।
गायन की विधि: इस भजन को गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और शांत भाव होना चाहिए। यदि संभव हो, तो हाथ में ताली या मंजीरे लेकर लयबद्ध तरीके से इसका संकीर्तन करें। भगवान शिव के विग्रह या चित्र के सम्मुख बैठकर आँखें बंद करके इसके भावों को महसूस करना चाहिए।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन देवों के देव भगवान शिव (महादेव) को समर्पित है। शिव का अर्थ है "कल्याणकारी"। वे संहारक भी हैं और रक्षक भी। वे एक ओर जहाँ परम वैरागी और योगेश्वर हैं, वहीं दूसरी ओर वे गृहस्थ जीवन के आदर्श और अत्यंत दयालु आशुतोष (शीघ्र प्रसन्न होने वाले) हैं।
इस भजन में उनके 'कैलाशवासी' और 'योगेश्वर' रूपों पर विशेष बल दिया गया है। कैलाश पर्वत को हिंदू धर्म में आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र और शिव का साक्षात निवास स्थान माना गया है। योगेश्वर के रूप में वे आदिगुरु हैं, जिन्होंने संसार को योग, ध्यान और ज्ञान का मार्ग दिखाया।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
यह भजन पारंपरिक लोक धुनों और आधुनिक भक्ति संगीत का एक सुंदर मिश्रण है। इसकी रचना लोक मानस की सरल अभिव्यक्ति को ध्यान में रखकर की गई है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में शिवभक्त सदियों से पहाड़ों पर स्थित शिव मंदिरों (जैसे केदारनाथ, अमरनाथ, और कैलाश) की यात्रा करते रहे हैं। ऊँचे पर्वतों पर स्थित इन मंदिरों की चढ़ाई करते समय भक्तों के मुख से स्वतः ही यह भाव फूट पड़ता है कि "ऊँचे ऊँचे मंदिर तेरे ऊँचा तेरा धाम"। यह भजन उसी यात्रा और दुर्गम पर्वतों पर बैठे शिव के प्रति अगाध श्रद्धा की पृष्ठभूमि से उपजा है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और प्रवाहमयी खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें राजस्थानी और पंजाबी लोक शैली का भी पुट मिलता है। इसकी काव्य शैली में निम्नलिखित तत्व प्रमुख हैं:
- अनुप्रास अलंकार: "ऊँचे ऊँचे", "घट-घट", "तरह-तरह" जैसे पुनरुक्ति प्रकाश और अनुप्रास अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है, जो भजन को गेय और कर्णप्रिय बनाते हैं।
- सरल बिंब विधान: "तन पे तूने भस्म रमा के", "धूप के रंग सुनहरे" जैसे बिंब पाठक या श्रोता के मन में भगवान शिव का एक सजीव चित्र अंकित कर देते हैं।
- संबोधनात्मक शैली: भजन में भगवान शिव को सीधे "भोले", "योगेश्वर", "पारब्रह्म" कहकर संबोधित किया गया है, जिससे भक्त और भगवान के बीच का सीधा संबंध स्थापित होता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें केवल भक्ति का मार्ग ही नहीं दिखाता, बल्कि व्यावहारिक जीवन के लिए भी कई महत्वपूर्ण संदेश देता है:
- अहंकार का त्याग: जब हम यह स्वीकार करते हैं कि "तू लिखने वाला है ये सब तेरे लेखे हैं", तो हमारे भीतर का कर्ताभाव समाप्त हो जाता है और हम अहंकार से मुक्त होते हैं।
- समभाव और करुणा: शिव के लिए कोई पराया नहीं है। हमें भी समाज में सभी के प्रति समभाव रखना चाहिए और किसी के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए।
- परिस्थितियों को स्वीकार करना: "तूने किया है वही जो तेरे मन को भाया है" हमें यह सिखाता है कि जीवन में आने वाले सुख और दुख दोनों को ईश्वर का प्रसाद मानकर समता के साथ स्वीकार करना चाहिए।
- वैराग्य और सादगी: शिव का भस्म रमाना और सादा जीवन जीना हमें भौतिक चकाचौंध से दूर रहकर आंतरिक समृद्धि और सादगी अपनाने की प्रेरणा देता है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| कैलाश वासी | कैलाश पर्वत पर रहने वाले | भगवान शिव का परम पावन और दिव्य निवास स्थान। |
| भूलेखे | भ्रम या अज्ञानता | संसार की माया के कारण जीव द्वारा सत्य को न पहचान पाना। |
| भाग्य विधाता | किस्मत लिखने वाले | ईश्वर जो सभी जीवों के कर्मों के अनुसार उनके भाग्य का निर्धारण करते हैं। |
| अंतर्यामी | मन की बात जानने वाले | वह जो प्रत्येक जीव के हृदय में वास करता है और बिना कहे सब समझ जाता है। |
| घट-घट | प्रत्येक शरीर या हृदय | ईश्वर की सर्वव्यापकता, वे हर कण और जीव में मौजूद हैं। |
| योगेश्वर | योगियों के स्वामी | भगवान शिव, जो ध्यान और योग के आदि प्रवर्तक हैं। |
| अलख जगाना | ईश्वर के नाम का प्रचार करना | वैराग्य धारण कर सोई हुई आत्माओं को जगाना। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"ऊँचे ऊँचे मंदिर तेरे ऊँचा तेरा धाम । हे कैलाश के वासी भोले, हम करते हैं तुझे प्रणाम ॥"
हे महादेव! आपके मंदिर पर्वतों की ऊँची चोटियों पर स्थित हैं और आपका परम धाम कैलाश सबसे ऊँचा और पवित्र है। हे कैलाशपति, हे भोलेनाथ! हम आपके चरणों में सादर प्रणाम निवेदित करते हैं।
"अद्भुत है संसार यहाँ पर कई भूलेखे हैं । तरह-तरह के खेल जगत में हमने देखे हैं ॥"
यह संसार अत्यंत विचित्र और रहस्यों से भरा है। यहाँ मनुष्य अनेक प्रकार के भ्रमों और अज्ञानता में जीता है। इस जीवन रूपी रंगमंच पर हमने अनेक प्रकार के खेल और परिस्थितियां देखी हैं।
"तू है भाग्य विधाता तेरे लेख सुलेखे हैं । तू लिखने वाला है ये सब तेरे लेखे हैं ॥"
हे शिव! आप ही इस सृष्टि के नियंता और भाग्य विधाता हैं। आपके द्वारा लिखे गए विधान (लेख) हमेशा कल्याणकारी और सुंदर होते हैं। हमारे जीवन की हर घटना आपके द्वारा ही रचित है।
"पारब्रह्म परमेश्वर तू है हर कोई माने रे । सब तेरे बालक हैं क्या अपने बेगाने रे ॥"
आप ही परम सत्य, पारब्रह्म परमेश्वर हैं, इस सत्य को संपूर्ण जगत स्वीकार करता है। इस संसार के सभी जीव आपकी ही संतान हैं, इसलिए आपके दरबार में कोई अपना या पराया नहीं है।
"तू अंतर्यामी सबकी पीड़ा पहचाने रे । सबके ही हृदय में बैठा घट-घट की जाने रे ॥"
आप अंतर्यामी हैं और बिना कहे ही हर दुखी हृदय की पीड़ा को समझ लेते हैं। आप प्रत्येक जीव के हृदय में विराजमान होकर उनके गुप्त विचारों और भावनाओं को भी जानते हैं।
"हे योगेश्वर योग से तूने जगत बनाया है । तन पे तूने भस्म रमा के अलख जगाया है ॥"
हे योगियों के देव! आपने अपनी असीम योगशक्ति से इस चराचर जगत का सृजन किया है। स्वयं सृष्टि के स्वामी होकर भी आप वैरागी की तरह शरीर पर भस्म लगाकर ज्ञान और वैराग्य का संदेश देते हैं।
"कही धूप के रंग सुनहरे कही पे छाया है । तूने किया है वही जो तेरे मन को भाया है ॥"
प्रकृति में कहीं सुनहरी धूप है तो कहीं शीतल छाया, अर्थात जीवन में कहीं सुख है तो कहीं दुख। यह सब आपकी ही लीला है और इस संसार में वही घटित होता है जो आपकी दिव्य इच्छा के अनुकूल होता है।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के गायन के पश्चात या पूर्व में भगवान शिव के निम्नलिखित कल्याणकारी मंत्रों और श्लोकों का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
२. शिव पंचाक्षर मंत्र:
ॐ नमः शिवाय
३. शिव ध्यान श्लोक:
ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं।
रत्नाकल्पोज्ज्वलांगं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्॥
इन मंत्रों का जप करने से साधक को भय से मुक्ति मिलती है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आप हमारी वेबसाइट पर महामृत्युंजय मंत्र और शिव तांडव स्तोत्र का विस्तृत अर्थ भी पढ़ सकते हैं।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| भजन का नाम | ऊँचे ऊँचे मंदिर तेरे ऊँचा तेरा धाम |
| आराध्य देव | भगवान शिव (भोलेनाथ, कैलाशपति) |
| मुख्य भाव | समर्पण, श्रद्धा, वैराग्य, भक्ति भाव (भक्ति रस) |
| भाषा | सरल हिंदी (खड़ी बोली) |
| गायन के विशेष अवसर | महाशिवरात्रि, सावन सोमवार, प्रदोष व्रत, शिव सत्संग |
| मुख्य संदेश | ईश्वर की सर्वव्यापकता, माया की अचिंत्यता और शरणागति |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के बोल और भावार्थ को विभिन्न प्रामाणिक स्रोतों, शिव पुराण के प्रसंगों और पारंपरिक संकीर्तन पद्धतियों के आधार पर संकलित और विश्लेषित किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध और त्रुटिहीन लिरिक्स के साथ-साथ भजन के गहरे आध्यात्मिक अर्थों से अवगत कराना है ताकि उनकी साधना और भक्ति अधिक फलदायी हो सके।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- शिव पुराण: भगवान शिव के योगेश्वर और अंतर्यामी स्वरूप का पौराणिक संदर्भ।
- श्रीमद्भगवद्गीता: ईश्वर की माया और कर्मफल के सिद्धांत का दार्शनिक आधार।
- पारंपरिक भजन संग्रह: लोक संस्कृति में प्रचलित प्रामाणिक पाठ और धुनें।
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