भक्ति काव्य व भजन बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

चाहे जमाना रूठे पर ये लगन न छुटे भजन इन हिंदी लिरिक्स

पढ़ें चाहे जमाना रूठे पर ये लगन न छुटे भजन इन हिंदी लिरिक्स का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

भक्ति और समर्पण की अनूठी मिसाल पेश करने वाला यह लोकप्रिय भजन "चाहे जमाना रूठे पर ये लगन न छुटे" प्रभु श्री श्याम (खाटू श्याम जी) के चरणों में अगाध प्रेम और अटूट विश्वास का प्रतीक है। कलियुग के धणी खाटू वाले श्याम बाबा के दरबार में जब भक्त अपनी हाजिरी लगाते हैं, तो संसार की परवाह किए बिना केवल अपने सांवरे से नाता जोड़ लेते हैं। यह भजन साधक के भीतर के उस परम भाव को जागृत करता है जहाँ लोक-लाज, समाज और जमाने के विरोध की कोई परवाह नहीं रहती, बल्कि एकमात्र लक्ष्य सांवरे श्याम की दीवानगी और उनकी चरण-सेवा बन जाता है। इस लेख में हम इस दिव्य भजन के संपूर्ण लिरिक्स, सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, और इसके आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

चाहे जमाना रूठे पर ये लगन न छुटे |
रहे साथ में सदा साँवरा साथ कभी ना छुटे |
दुनियाँ ना मेरे किसी काम की |
मैं तो दीवानी अपने श्याम की |
चाहे ज़माना रूठे पर ये लगन ना छूटे ||

श्याम है जबसे मन में समाया |
कितनी बदल गई जीवन की छाया |
हर सपना पूरा होने लगा है |
कितनी निराली है इसकी माया |
अब चाहे हर रिश्ता टूटे बस ये संग ना छुटे |
मिली है निशानी जब से नाम की |
मैं तो दीवानी अपने श्याम की |
महिमा निराली इसके धाम की |
मैं तो दीवानी अपने श्याम की |
चाहे ज़माना रूठे पर ये लगन ना छूटे।।

इसकी कृपा शोहरत मिली है |
मुरझाए मन की कली हर खिली है |
गिरने ना मुझको उसने दिया है |
मिला जख्म जो भी उसी ने सिया है |
अब चाहे गम जितने टूटे पर दामन ना छुटे |
महिमा निराली इसके धाम की |
मैं तो दीवानी अपने श्याम की |
चाहे ज़माना रूठे पर ये लगन ना छूटे।।

श्याम को जो भी अपना बनाए बेचैनी धीरज पाये |
श्याम को जो भी गुणगान गाये |
रहे दूर उससे सदा दुःख के साये |
बनके दीवाना वो यश लुटे बाकी लगे सब झूठे |
पूजा करू मैं खाटू धाम की |
मैं तो दीवानी अपने श्याम की |
चाहे ज़माना रूठे पर ये लगन न छुटे।।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का प्रत्येक शब्द भक्त और भगवान के बीच के अनन्य प्रेम संबंध को दर्शाता है। आइए इस पावन भजन के आंतरिक भाव को समझें:

मुखड़ा भाव: भक्त कहती है कि भले ही पूरा संसार उसके खिलाफ हो जाए, समाज या जमाने के लोग उससे रूठ जाएं, लेकिन श्याम बाबा के चरणों से उसकी यह लगन (प्रेम की डोर) कभी नहीं छूटनी चाहिए। उसकी एकमात्र कामना यह है कि सांवरा सदा उसके साथ रहे और उसका साथ कभी न छूटे। भौतिक दुनिया की सुख-सुविधाएं या रिश्ते उसके किसी काम के नहीं हैं, क्योंकि उसका रोम-रोम और मन केवल अपने श्याम की दीवानगी में डूबा हुआ है।

प्रथम अंतरा भाव: जब से खाटू श्याम का रूप भक्त के मन में बसा है, उसके जीवन की पूरी छाया (दशा और दिशा) बदल गई है। निराशा के बादल छंट गए हैं और जीवन के हर सपने को पंख लग गए हैं। बाबा की माया इतनी निराली है कि अब यदि संसार के बाकी सारे रिश्ते भी टूट जाएं, तो भी कोई परवाह नहीं, बस श्याम का यह संग नहीं छूटना चाहिए। उसे श्याम नाम की ऐसी अमूल्य निशानी मिल गई है जो इस भवसागर से पार लगा सकती है।

द्वितीय अंतरा भाव: भक्त स्वीकार करती है कि उसे जो भी मान-सम्मान और शोहरत मिली है, वह केवल इसी की कृपा का परिणाम है। जीवन की हर मुरझाई हुई कली इसके आशीर्वाद से खिल उठी है। जब भी भक्त संकट में गिरा या लड़खड़ाया, तो श्याम ने उसे गिरने नहीं दिया। जीवन में मिलने वाले हर दर्द और जख्म पर उसी सांवरे ने मरहम लगाया है (सिया है)। अब चाहे दुखों के पहाड़ टूट पड़ें, लेकिन बाबा का दामन कभी नहीं छूटेगा।

अंतिम अंतरा भाव: जो भी मनुष्य श्याम को अपना मान लेता है, उसकी सारी बेचैनी और चिंताएं दूर हो जाती हैं और उसे परम धीरज की प्राप्ति होती है। जो निरंतर श्याम का गुणगान करता है, उसके जीवन से दुखों के साये हमेशा के लिए दूर हो जाते हैं। जो इस प्रेम में दीवाना बन जाता है, वह सांवरे की कृपा रूपी यश को लूट लेता है और बाकी सारा संसार उसे झूठा और नश्वर प्रतीत होने लगता है। भक्त अंत में यही कहती है कि वह केवल खाटू धाम की पूजा करती है क्योंकि वह पूरी तरह अपने श्याम की दीवानी हो चुकी है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन खाटू श्याम जी के भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है। इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • अनन्य समर्पण (Unflinching Devotion): यह भजन सिखाता है कि ईश्वर के प्रति प्रेम में दुनिया की आलोचना की कोई परवाह नहीं करनी चाहिए।
  • संकट निवारक श्याम बाबा: बाबा श्याम को हारे का सहारा माना गया है, और इस भजन में भी उनके द्वारा भक्तों के जख्मों पर मरहम लगाने का सुंदर वर्णन है।
  • मानसिक शांति: इस भजन के नियमित स्मरण या श्रवण से मन की बेचैनी समाप्त होती है और असीम धैर्य की प्राप्ति होती है।
  • खाटू धाम की महिमा: राजस्थान के प्रसिद्ध खाटू श्याम जी मंदिर की महिमा और वहां के दर्शन के महत्व को इसमें उजागर किया गया है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत को अपने जीवन में उतारने के लिए सही भाव और विधि का होना आवश्यक है:

  • नित्य पूजा के समय: प्रातःकाल स्नान के पश्चात या संध्याकालीन बेला में धूप-दीप प्रज्वलित करके इस भजन का पाठ या गान करना अत्यंत फलदायी होता है।
  • श्याम सत्संग और कीर्तन: एकादशी, द्वादशी या किसी भी विशेष श्याम एकादशी व्रत के अवसर पर आयोजित होने वाले सत्संग में इस भजन को सामूहिक रूप से गाया जाता है।
  • एकांत साधना: जब मन अशांत हो, तब एकांत में बैठकर इस भजन के लिरिक्स को गुनगुनाने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा मिलती है।

भजन से जुड़े देवता एवं परंपरा | Associated Deity & Tradition

यह भजन भगवान श्री कृष्ण के कलियुगी अवतार, खाटू श्याम (बर्बरीक जी) को समर्पित है। महाभारत काल के महान योद्धा बर्बरीक ने अपने शीश का दान भगवान श्री कृष्ण को दिया था, जिससे प्रसन्न होकर कृष्ण जी ने उन्हें कलियुग में अपने 'श्याम' नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था। तब से लेकर आज तक राजस्थान के सीकर जिले स्थित खाटू श्याम जी के इतिहास और उनकी महिमा का गुणगान पूरे भारतवर्ष में श्रद्धा के साथ किया जाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

इस भजन से हमें जीवन के कई गहरे आध्यात्मिक पाठ सीखने को मिलते हैं:

  1. निडर भक्ति: समाज या दुनिया क्या कहेगी, इसकी चिंता किए बिना अपने आराध्य से प्रेम करना ही सच्ची भक्ति है।
  2. अटूट विश्वास: कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर पर भरोसा बनाए रखना कि वह हमारी रक्षा अवश्य करेगा।
  3. माया का त्याग: भौतिक संसार के झूठे आकर्षणों और रिश्तों से ऊपर उठकर परमात्मा से नाता जोड़ना।
  4. धैर्य और संतोष: श्याम नाम के स्मरण से जीवन के सारे कष्ट स्वतः दूर हो जाते हैं और मन में संतोष आता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भाव
लगन प्रेम की डोर, निष्ठा ईश्वर के प्रति अटूट आकर्षण
साँवरा श्री कृष्ण / श्याम बाबा भक्त के प्रियतम आराध्य
सिया है सिलना, मरहम लगाना कष्टों और जख्मों को ठीक करना
धाम पवित्र तीर्थ स्थल खाटू श्याम जी का दरबार
दीवाना प्रेमी, मस्तमौला भक्ति के रंग में पूरी तरह रंगा हुआ

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम चाहे जमाना रूठे पर ये लगन न छुटे
आराध्य देव श्री खाटू श्याम जी (बर्बरीक)
भाषा हिंदी / सरल ब्रज-अवधि मिश्रित
मुख्य भाव अनन्य प्रेम, समर्पण और विरह-भक्ति
गायन अवसर श्याम संकीर्तन, एकादशी, जागरण, दैनिक पूजा
मुख्य संदेश दुनिया की परवाह किए बिना श्याम से प्रेम करना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रશ્न 1: "चाहे जमाना रूठे पर ये लगन न छुटे" भजन किस भगवान को समर्पित है?

यह भजन कलियुग के अवतार खाटू श्याम जी (बर्बरीक) को समर्पित है।

प्रश्न 2: इस भजन को गाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?

इसे आप सुबह की पूजा, संध्या वंदन या विशेष रूप से एकादशी के दिन होने वाले श्याम कीर्तन में गा सकते हैं।

प्रश्न 3: इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि भगवान के प्रति हमारी निष्ठा और प्रेम इतना पक्का होना चाहिए कि पूरा समाज या जमाना क्यों न रूठ जाए, हमारी भक्ति कम नहीं होनी चाहिए।

प्रश्न 4: क्या इस भजन को घर पर अकेले गाया जा सकता है?

हाँ, इसे एकांत में या परिवार के साथ बैठकर दोनों ही स्थितियों में अत्यंत भावुकता के साथ गाया और सुना जा सकता है।

प्रश्न 5: खाटू श्याम बाबा को किसका अवतार माना जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खाटू श्याम जी को महाभारत के वीर योद्धा बर्बरीक का रूप माना जाता है, जिन्हें श्री कृष्ण ने अपने नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था।

प्रश्न 6: श्याम भजन सुनने से क्या लाभ होता है?

श्याम भजन सुनने से मन को असीम शांति मिलती है, मानसिक तनाव कम होता है और भगवान के प्रति विश्वास और मजबूत होता है।

प्रश्न 7: क्या इस भजन के लिरिक्स हिंदी में आसानी से याद किए जा सकते हैं?

हाँ, इसकी भाषा अत्यंत सरल और भावपूर्ण है, जिससे इसे बहुत जल्दी याद किया जा सकता है।

प्रश्न 8: खाटू श्याम जी का मुख्य मंदिर कहाँ स्थित है?

खाटू श्याम जी का प्रसिद्ध मुख्य मंदिर राजस्थान के सीकर जिले के खाटू नामक कस्बे में स्थित है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह पृष्ठ खाटू श्याम भक्तों की आध्यात्मिक भावनाओं और पारंपरिक संकीर्तन परंपरा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। प्रस्तुत भजन के लिरिक्स और भावार्थ पाठकों को शुद्ध भक्ति रस प्रदान करने के उद्देश्य से संकलित किए गए हैं।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

स्रोत एवं संदर्भ

  • पारंपरिक खाटू श्याम संकीर्तन साहित्य एवं भजन संग्रह।
  • श्री खाटू श्याम जी कथा एवं महिमा ग्रंथ।
  • लोकप्रिय भक्ति संगीत परंपरा एवं क्षेत्रीय संकीर्तन पुस्तिकाएं।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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