भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

तेरी भंग ना घोट के लाउ भजन इन हिंदी लिरिक्स

पढ़ें तेरी भंग ना घोट के लाउ भजन इन हिंदी लिरिक्स का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

"तेरी भंग ना घोट के लाउ" भजन भगवान शिव की अनन्य भक्ति और उनके प्रति भक्त के सरल, निश्छल प्रेम को समर्पित एक अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण रचना है। सनातन परंपरा में भगवान शिव को 'आशुतोष' कहा गया है, जो बहुत शीघ्र प्रसन्न होने वाले हैं। इस भजन में भक्त की वह भोली-भाली भावना अभिव्यक्त होती है, जहाँ वह अपने आराध्य को प्रसन्न करने के लिए अपनी सामर्थ्य के अनुसार सेवा करने का संकल्प लेता है। यह भजन विशेष रूप से महाशिवरात्रि, सावन के सोमवार और शिव मंदिरों में होने वाले सत्संगों में अत्यंत उत्साह के साथ गाया जाता है। इसमें निहित 'भंग' का प्रतीक केवल एक पदार्थ नहीं, बल्कि भक्त का वह समर्पण है जो संसार की समस्त चिंताओं को घोटकर, पीसकर केवल प्रभु के चरणों में अर्पित कर देना चाहता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

तेरी भंग ना घोट के लाउ, बाबा मैं तो कावड़ लाउं,
तेरी भंग ना घोट के लाउ, बाबा मैं तो कावड़ लाउं।
हो... कावड़ लाऊं, गंगा जल लाऊं,
तेरी भंग ना घोट के लाउ, बाबा मैं तो कावड़ लाउं।

गौरा मैया बैठी हैं, शिव शंकर को मनाती हैं,
भोले बाबा की महिमा, सारी दुनिया गाती है।
मैं तो डमरू बजाने आऊं, बाबा मैं तो कावड़ लाउं,
तेरी भंग ना घोट के लाउ, बाबा मैं तो कावड़ लाउं।

नाग गले में सोहे है, माथे पर चंद्रमा विराजे है,
भक्तों के दुःख हरने को, मेरा भोला साजे है।
मैं तो दर्शन पाने आऊं, बाबा मैं तो कावड़ लाउं,
तेरी भंग ना घोट के लाउ, बाबा मैं तो कावड़ लाउं।

तेरी जटा से गंगा बहे, सारा जग पावन हो जाए,
जो भी शरण में आए, वो भवसागर तर जाए।
मैं तो शीश झुकाने आऊं, बाबा मैं तो कावड़ लाउं,
तेरी भंग ना घोट के लाउ, बाबा मैं तो कावड़ लाउं।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा है। भक्त यहाँ भगवान शिव से संवाद करते हुए कहता है कि हे प्रभु! मैं सांसारिक उलझनों में पड़कर आपको केवल बाहरी आडंबरों से नहीं पूजना चाहता। 'भंग घोटना' यहाँ सांसारिक माया के बंधनों को तोड़ने का प्रतीक है। भक्त कहता है कि मैं कावड़ लेकर आऊंगा, जो कि तपस्या और श्रद्धा का प्रतीक है। गंगा जल का अर्पण करना जीवात्मा की शुद्धि का द्योतक है। भजन के माध्यम से भक्त यह संदेश देता है कि शिव की भक्ति के लिए केवल प्रेम और समर्पण की आवश्यकता है। जब भक्त कहता है कि "मैं तो डमरू बजाने आऊं", तो इसका अर्थ है कि वह अपने जीवन में शिव के नाद (ध्वनि) को आत्मसात करना चाहता है। यह भजन हमें सिखाता है कि ईश्वर की सेवा में दिखावे से अधिक भाव का महत्व है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन भगवान शिव के सौम्य और कल्याणकारी स्वरूप को दर्शाता है। इसकी लयबद्धता और सरल शब्द इसे जन-जन के कंठ का हार बनाते हैं। कावड़ यात्रा के दौरान यह भजन भक्तों में नई ऊर्जा का संचार करता है। यह भजन न केवल शिव की स्तुति है, बल्कि यह कावड़ यात्रा की महिमा का भी गुणगान करता है, जो कि आत्म-संयम और भक्ति का एक कठिन मार्ग है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को विशेष रूप से सावन के महीने में, महाशिवरात्रि के पर्व पर, या किसी भी सोमवार के दिन शिव मंदिर में बैठकर गाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसे गाते समय मन में शिव के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव होना चाहिए। यदि आप घर पर पूजा कर रहे हैं, तो दीपक जलाकर और शिव जी को बेलपत्र अर्पित करते हुए इस भजन का गायन किया जा सकता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
कावड़ शिव भक्ति की यात्रा का प्रतीक तीर्थ यात्रा
भंग शिव को प्रिय प्रसाद/माया का प्रतीक शिव आराधना
भवसागर संसार रूपी सागर मोक्ष प्राप्ति
जटा शिव के बाल गंगा का उद्गम

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  • प्रश्न: यह भजन किस देवता को समर्पित है?
    उत्तर: यह भजन भगवान शिव को समर्पित है।
  • प्रश्न: कावड़ यात्रा का क्या महत्व है?
    उत्तर: कावड़ यात्रा आत्म-शुद्धि और भगवान शिव के प्रति अटूट निष्ठा का प्रतीक है।
  • प्रश्न: क्या इस भजन को घर पर गाया जा सकता है?
    उत्तर: हाँ, इसे किसी भी समय और स्थान पर भक्ति भाव से गाया जा सकता है।
  • प्रश्न: सावन में शिव की पूजा क्यों की जाती है?
    उत्तर: सावन का महीना शिव को अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस दौरान पूजा करने से विशेष फल मिलता है।
  • प्रश्न: क्या इस भजन के गायन के लिए कोई विशेष नियम है?
    उत्तर: कोई कठोर नियम नहीं है, बस मन में पवित्रता और श्रद्धा होनी चाहिए।
  • प्रश्न: 'तेरी भंग ना घोट के लाउ' का क्या अर्थ है?
    उत्तर: यह भक्त की सेवा की एक अनूठी शैली है, जो शिव के प्रति प्रेम को दर्शाती है।
  • प्रश्न: शिव जी को क्या अर्पित करना चाहिए?
    उत्तर: शिव जी को बेलपत्र, जल, दूध और चंदन अत्यंत प्रिय है।
  • प्रश्न: क्या यह भजन बच्चों के लिए उपयुक्त है?
    उत्तर: हाँ, इसकी सरल भाषा इसे बच्चों के लिए भी बहुत आकर्षक बनाती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। यह भजन लोक परंपरा और भक्ति साहित्य का एक सुंदर मिश्रण है। संदर्भ हेतु शिव पुराण और कावड़ यात्रा की पौराणिक मान्यताओं का अध्ययन किया गया है।

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!