Miloge Mohan To Batayenge Bhajan Lyrics in Hindi
प्रस्तुतकर्ता: Bhaktilok Editorial Team | अद्यतन: २०२६ | श्रेणी: श्री कृष्ण भजन
सनातन धर्म और भक्ति परंपरा में श्री बांके बिहारी, सांवरिया सेठ और कन्हैया की उपासना का विशेष स्थान रहा है। 'मिलोगे मोहन तो बताएँगे' यह अत्यंत लोकप्रिय, हृदयस्पर्शी और भावपूर्ण भजन भगवान श्री कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम, विरह, समर्पण और अटूट विश्वास का अनूठा प्रतीक है। जब एक भक्त का हृदय संसार के प्रपंचों से उकताकर केवल और केवल अपने प्रियतम मोहन की शरण में जाने के लिए आकुल होता है, तब उसके अंतर से ऐसे ही भजन स्वतः प्रस्फुटित होते हैं। यह भजन न केवल संगीतमय संकीर्तन का एक माध्यम है, बल्कि यह उस परम आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति कराता है जहाँ भक्त और भगवान के बीच का द्वैत समाप्त होकर केवल प्रेम शेष रह जाता है। इस विस्तृत लेख में हम इस दिव्य भजन के संपूर्ण हिंदी लिरिक्स, इसका गूढ़ भावार्थ, गायन की विधि, आध्यात्मिक संदेश और जीवन में इसके महत्व का सम्पूर्ण विवेचन प्रस्तुत कर रहे हैं।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
बोलो सांवरिया सेठ की जय हो, जय हो!
मिलोगे मोहन तो बताएँगे तो बताएँगे,
तुम्ही सरकार हो मेरे, ओ साँवरे ओ साँवरे!
स्वामी हो मनके, दरबार सबसे ऊँचा,
मन मोहन मोरे पिया, हर मस्तक है नीचा,
दिल में साँवरिया हम बसायेंगे,
तुम ही आधार हो मेरे, ओ साँवरे ओ साँवरे, ओ साँवरे ओ साँवरे!
सोना चांदी रूपया नहीं, कमी तेरे दाता,
सेठों के सांवरा सेठ, जग तुझसे ही पाता,
जग तुझसे ही पाता, तेरी चौखट से झोली भर जाएंगे,
तुम ही पालनहार हो मेरे,
ओ साँवरे ओ साँवरे, ओ साँवरे ओ साँवरे!
ओ गोधन के रखवाले, बंसीधर ब्रिज वासी,
ओ मोरमुकुट वाले, अखियां दर्शन प्यासी,
जहाँ भी तुम हो सर झुकायेंगे,
तुम ही परिवार हो मेरे,
ओ साँवरे ओ साँवरे, ओ साँवरे ओ साँवरे!
मीरा के मनमोहन, विष अमृत कर डाला,
राधा भई प्रेम दीवानी, भगवा रंग डाला,
दीवाने हम भी बन जाएंगे,
तुम दिलदार हो मेरे,
ओ साँवरे ओ साँवरे, ओ साँवरे ओ साँवरे!
पीरो की धरती पर, तेरी ही ठुकराई,
कृपालु साँवरिया तेरी, महिमा जग छाई,
यार महेश सुरेश हो जाएंगे, ओ कृष्ण मुरार मेरे,
ओ साँवरे ओ साँवरे, ओ साँवरे ओ साँवरे!
मिलोगे मोहन तो बताएँगे तो बताएँगे,
तुम्ही सरकार हो मेरे, ओ साँवरे ओ साँवरे !!
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन भक्त और भगवान के बीच संवाद की एक अत्यंत सुंदर शैली में रचा गया है। मखड़े की पंक्तियाँ "मिलोगे मोहन तो बताएँगे" इस बात का द्योतक हैं कि भक्त के मन में अपने प्रियतम श्री कृष्ण के लिए अनगिनत शिकायतें, अनुनय-विनय और प्रेम की अनकही बातें संचित हैं, जो केवल उनके साक्षात् दर्शन के उपरांत ही प्रकट की जा सकती हैं। भक्त अपने इष्ट को अपनी संपूर्ण दुनिया, अपनी सरकार और अपने मन का स्वामी मानता है।
भजन के पहले अंतरे में भक्त कहता है कि हे सांवरिया! तुम्हारे दरबार में किसी भी वस्तु की कोई कमी नहीं है। तुम समस्त सेठों के भी सेठ हो और संपूर्ण जगत तुमसे ही सब कुछ प्राप्त करता है। भक्त भौतिक धन-दौलत की कामना न करके केवल उस चौखट से अपनी झोली प्रेम और भक्ति से भरने की प्रार्थना करता है। वह जानता है कि असली पालनहार वही कन्हैया है।
अगले चरणों में ब्रज के सौंदर्य, बंसीधर के रूप, मोरमुकुट और गोधन के रखवाले रूप का स्मरण किया गया है। भक्त कहता है कि मेरी आँखें आपके दर्शन के लिए तृषित हैं। मीरा और राधा के प्रेम प्रसंग का उल्लेख करते हुए भक्त यह स्वीकार करता है कि जब आपने मीरा के विष को अमृत बना दिया और राधा को अपने प्रेम में रंग दिया, तो हम भी आपके प्रेम में दीवाने होकर इस संसार में आपके रंग में रंग जाएंगे। अंत में सभी भक्तों और मित्रों (महेश, सुरेश आदि) के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि हे कृष्ण मुरार! आप ही हमारे एकमात्र रक्षक और सर्वस्व हैं।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- आराध्य देव: भगवान श्री कृष्ण (सांवरिया सेठ, बंसीधर, मोरमुकुट वाले)।
- भक्ति भाव: माधुर्य भाव, सख्य भाव, दास्य भाव और अनन्य समर्पण (शरणगति)।
- सांस्कृतिक महत्व: यह भजन उत्तर भारत, विशेषकर राजस्थान, ब्रज और मध्य प्रदेश के संकीर्तन समारोहों, एकादशी जागरण और खाटू श्याम जी के मेलों में अत्यंत चाव से गाया जाता है।
- मानसिक शांति: इस भजन के निरंतर श्रवण और गायन से चित्त की एकाग्रता बढ़ती है और सांसारिक तनाव दूर होते हैं।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
भक्ति संगीत के लिए समय की कोई विशेष पाबंदी नहीं होती, तथापि ब्रह्म मुहूर्त, संध्या बेला (गोधूलि समय), एकादशी, जन्माष्टमी, या किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के अवसर पर इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसे हारमोनियम, ढोलक और मंजीरे की थाप के साथ सामूहिक रूप से गाने पर विशेष आनंद की प्राप्ति होती है। प्रातःकालीन पूजा के समय इसे सुनने से पूरे दिन सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन के केंद्र में भगवान श्री कृष्ण का 'सांवरिया सेठ' रूप है। इसके साथ ही इसमें भक्त मीराबाई और राधा रानी के अनन्य प्रेम प्रसंगों का स्मरण किया गया है। मीराबाई का विष का प्याला अमृत बनना और राधा रानी का कृष्णमय हो जाना इस बात का प्रमाण है कि जो भी सच्चे मन से मोहन की शरण में जाता है, उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। ऐसे ही अन्य लोकप्रिय पदों के लिए आप श्री कृष्ण भजन संग्रह पढ़ सकते हैं।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
यह भजन सरल, सुबोध और लोक-प्रिय हिंदी एवं ब्रजभाषा के संमिश्रण से तैयार किया गया है। इसमें रूपक अलंकार और अनुप्रास की सुंदर छटा देखने को मिलती है। शब्दों की लयात्मकता ऐसी है कि संगीतकार इसे आसानी से तालबद्ध कर सकते हैं और सामान्य जन भी इसे बिना किसी कठिन अभ्यास के गुनगुना सकते हैं।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
इस भजन से हमें यह गहरी सीख मिलती है कि भौतिक ऐश्वर्य और धन-दौलत से बढ़कर भगवत्प्रेम और संतों की संगति है। जीवन में चाहे कितनी भी विषम परिस्थितियाँ क्यों न आएं, जैसे मीराबाई के जीवन में आईं, यदि ईश्वर पर अटूट विश्वास है तो हर विष अमृत बन जाता है। हमें अपने अहंकार को त्यागकर उस 'सांवरिया सेठ' के चरणों में अपनी झोली फैलानी चाहिए। इसी प्रकार की भक्तिमयी शिक्षाओं के लिए गीता के उपदेश का अध्ययन भी उपयोगी रहता है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल अर्थ | संदर्भ / भाव |
|---|---|---|
| साँवरिया सेठ | भगवान श्री कृष्ण का धनी रूप | जो समस्त संसार के भंडारे भरने वाले हैं |
| सरकार | स्वामी, मालिक या संरक्षक | भक्त अपने जीवन की बागडोर कृष्ण को सौंपता है |
| बंसीधर | हाथ में बांसुरी धारण करने वाले | श्री कृष्ण का पारंपरिक और मनमोहक स्वरूप |
| दिलदार | उदार हृदय वाले, प्रेमी | भक्तों पर सब कुछ लुटा देने वाले कृपालु |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | मिलोगे मोहन तो बताएँगे (Miloge Mohan To Batayenge) |
|---|---|
| आराध्य देव | भगवान श्री कृष्ण (सांवरिया सेठ) |
| भाषा | सरल हिंदी / ब्रजभाव मिश्रित |
| मुख्य थीम | प्रेम, विरह, शरणागति और अनन्य भक्ति |
| उपयुक्त अवसर | सत्संग, एकादशी, संकीर्तन, खाटू श्याम यात्रा |
| संबंधित पाठन | श्री हनुमान चालीसा और अन्य स्तोत्र |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह सामग्री पारंपरिक संकीर्तन साहित्य, लोक प्रचलित गीतों और भक्तों के अनुभवों के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध और प्रामाणिक भक्ति साहित्य उपलब्ध कराना है। किसी भी प्रकार की त्रुटि या सुझाव के लिए आप हमारी संपादकीय टीम से संपर्क कर सकते हैं।
स्रोत एवं संदर्भ
- पारंपरिक ब्रज और राजस्थानी संकीर्तन संग्रह
- मीराबाई पदवली एवं कृष्ण भक्ति साहित्य
- श्री खाटू श्याम महिमा एवं संकीर्तन ग्रंथ
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