भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

हनुमत के गुण गाते चलो भजन इन हिंदी

पढ़ें हनुमत के गुण गाते चलो भजन इन हिंदी का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

सनातन धर्म में प्रभु नाम संकीर्तन को कलयुग में भवसागर से पार उतरने का सबसे सुगम और अचूक माध्यम माना गया है। "हनुमत के गुण गाते चलो भजन" (Hanumat Ke Gun Gate Chalo Bhajan) एक ऐसा ही परम पावन और भक्ति रस से सराबोर संकीर्तन है, जो भक्त के हृदय में अटूट श्रद्धा, समर्पण और विश्वास का संचार करता है। यह भजन संकटमोचन श्री हनुमान जी की असीम अनुकंपा, उनके कृपालु स्वरूप और शरणागतवत्सलता को समर्पित है। जब जीवन के मार्ग में चारों ओर घोर निराशा, अंधकार और संकट के बादल छा जाते हैं, तब पवनपुत्र हनुमान जी की शरण ही एकमात्र सहारा बनती है। इस भजन के माध्यम से साधक अपने मन को सांसारिक व्याधियों से हटाकर प्रभु के चरणों में लीन करने का प्रयास करता है। प्रस्तुत लेख में हम इस दिव्य भजन के संपूर्ण लिरिक्स, उसका गहन आध्यात्मिक भावार्थ, पंक्ति-दर-पंक्ति व्याख्या और इसके गायन के महत्व का सविस्तार विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

हनुमत के गुण गाते चलो, प्रेम की श्रद्धा को बढ़ाते चलो।
हनुमत के गुण गाते चलो, प्रेम की श्रद्धा को बढ़ाते चलो।
राह में आया जो कोई दुखी, किरपा सब पे बहाते चलो॥
॥ प्रेम की श्रद्धा पूर्वक चलो... ॥

सारी दुनिया ने ठुकराया, द्वार पे अर्जी लगा दी।
चारों ओर अँधेरा छाया, तब मैंने तुझको बुलाया।
आशा के दीप जलाते चलो, किरपा सब पे बहाते चलो॥
॥ प्रेम की श्रद्धा पूर्वक चलो... ॥

भक्तों के हो तुम प्रतिपाला, संकट मोचन बाला।
गल वैजन्ती माला, सुन्दर लाल लंगोटे वाला।
सारे जग में है तेरा ही नाम, किरपा सभी पे लुटाते चलो॥
॥ प्रेम की श्रद्धा पूर्वक चलो... ॥

चारों ओर सिर्फ निराशा ही, तेरी ही आशा है।
जब-जब तुझको पुकारा, तेरी शरण ही सहारा।
ध्यान लगा के रटते चलो, किरपा सभी पे लुटाते चलो॥
॥ प्रेम की श्रद्धा पूर्वक चलो... ॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन मूल रूप से जीवात्मा की परमात्मा (और उनके अनन्य भक्त हनुमान जी) के प्रति पूर्ण शरणागति (प्रपत्ति) का जीवंत दस्तावेज है। भजन की शुरुआत ही एक अत्यंत कल्याणकारी संदेश से होती है कि हमें जीवन यात्रा में आगे बढ़ते हुए निरंतर हनुमान जी के दिव्य गुणों का गान करना चाहिए। "प्रेम की श्रद्धा को बढ़ाते चलो" का अर्थ है कि हमारी भक्ति केवल यांत्रिक न हो, बल्कि उसमें प्रेम और श्रद्धा का निरंतर संवर्धन होना चाहिए।

भजन का द्वितीय भाग सांसारिक यथार्थ को दर्शाता है। जब मनुष्य को संसार के सगे-संबंधी और परिस्थितियां ठुकरा देती हैं, तब उसे समझ आता है कि यह संसार नश्वर और स्वार्थी है। ऐसी स्थिति में जब वह हनुमान जी के द्वार पर अपनी 'अर्जी' (प्रार्थना) लगाता है, तो उसके जीवन का अंधकार दूर होने लगता है। हनुमान जी केवल अपने भक्तों का ही कल्याण नहीं करते, बल्कि वे अपने भक्तों को भी यह सीख देते हैं कि वे मार्ग में मिलने वाले हर दुखी व्यक्ति पर करुणा और कृपा की वर्षा करें। यह परोपकार की भावना ही सच्ची हनुमान-भक्ति है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे आम भजनों से अलग और अधिक प्रभावशाली बनाती हैं:

  • पूर्ण शरणागति का भाव: यह भजन सिखाता है कि जब सारे सांसारिक सहारे टूट जाएं, तब हनुमान जी की शरण में जाने से अभयदान मिलता है।
  • परोपकार का संदेश: "राह में आया जो कोई दुखी, किरपा सब पे बहाते चलो" - यह पंक्ति दर्शाती है कि हनुमान जी के भक्त का हृदय भी हनुमान जी की तरह ही दयालु होना चाहिए।
  • सकारात्मकता का संचार: घोर निराशा और अंधकार के समय यह भजन आशा के दीप जलाने की प्रेरणा देता है।
  • नाम संकीर्तन की महिमा: कलयुग में केवल नाम स्मरण से ही मुक्ति संभव है, यह भजन इसी सनातन सत्य को प्रतिपादित करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि प्रभु का स्मरण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर अत्यंत फलदायी माने गए हैं:

  • मंगलवार और शनिवार: ये दोनों दिन हनुमान जी की आराधना के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं। इन दिनों सुबह या शाम के समय इस भजन का गायन करने से मानसिक शांति मिलती है।
  • हनुमान जयंती व सुंदरकांड पाठ: सुंदरकांड पाठ अथवा हनुमान जयंती के पावन अवसर पर सामूहिक संकीर्तन के रूप में इस भजन को गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • साधना विधि: स्वच्छ वस्त्र धारण कर, हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के सम्मुख घी या चमेली के तेल का दीपक जलाकर, एकाग्र चित्त से इस भजन का गायन करना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन कलयुग के जाग्रत देवता, पवनपुत्र, अंजनीसुत श्री हनुमान जी को समर्पित है। हनुमान जी को अष्टसिद्धि और नवनिधि के दाता के रूप में पूजा जाता है। वे भगवान श्री राम के परम भक्त हैं। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी रामचरितमानस में हनुमान जी की महिमा का विशद वर्णन किया है। यह भजन उसी समृद्ध रामभक्ति और हनुमान-भक्ति की परंपरा का विस्तार है, जो संतों द्वारा जनमानस में प्रवाहित की गई है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन लोक-परंपरा से प्रेरित एक आधुनिक भक्ति गीत है। इसकी रचना सरल और सुबोध हिंदी भाषा में की गई है ताकि समाज का प्रत्येक वर्ग, चाहे वह बच्चा हो या वृद्ध, इसे आसानी से गा सके और इसके भाव को आत्मसात कर सके। इसकी पृष्ठभूमि उत्तर भारत के कीर्तन मंडलियों और मंदिरों में गाए जाने वाले पारंपरिक भजनों से मेल खाती है, जहां सामूहिक रूप से ढोलक और मंजीरे की थाप पर भक्त झूम उठते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और प्रवाहमयी खड़ी बोली हिंदी है। इसमें तत्सम और तद्भव शब्दों का सुंदर समन्वय है। काव्य शैली की दृष्टि से यह एक 'गीत' या 'पद' है, जिसमें लयबद्धता (Rhythm) और गेयता (Melody) का अद्भुत समावेश है। "प्रतिपाला", "संकट मोचन", "वैजन्ती माला" जैसे शब्द हनुमान जी के पारंपरिक स्वरूप को सजीव करते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें केवल भक्ति करना ही नहीं सिखाता, बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाता है:

  1. निराशा में आशा: जीवन में चाहे कितना भी अंधकार क्यों न हो, ईश्वर पर विश्वास रखने से हमेशा एक नया मार्ग प्रशस्त होता है।
  2. करुणा और सेवा: दूसरों के दुखों को दूर करना ही ईश्वर की सच्ची सेवा है।
  3. अहंकार का त्याग: जब हम स्वीकार करते हैं कि "सारी दुनिया ने ठुकराया", तब हमारा सांसारिक अहंकार नष्ट होता है और हम वास्तविक सत्य की ओर बढ़ते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
हनुमत श्री हनुमान जी ज्ञान, शक्ति और भक्ति के पुंज।
किरपा (कृपा) दया, अनुकंपा ईश्वर का वह अनुग्रह जो भक्त का कल्याण करता है।
अर्जी प्रार्थना, निवेदन भगवान के चरणों में अपनी व्यथा रखना।
प्रतिपाला पालन करने वाला, रक्षक भक्तों की हर परिस्थिति में रक्षा करने वाले।
वैजन्ती माला विजय की माला भगवान विष्णु और उनके अवतारों द्वारा धारण की जाने वाली दिव्य माला।
संकट मोचन कष्टों को हरने वाले सभी प्रकार के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक कष्टों का निवारण करने वाले।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

1. "हनुमत के गुण गाते चलो, प्रेम की श्रद्धा को बढ़ाते चलो..."
हे मानव! तू अपने जीवन मार्ग पर चलते हुए निरंतर हनुमान जी के दिव्य चरित्र और उनके गुणों का गान करता चल। अपनी भक्ति में प्रेम और अटूट श्रद्धा का निरंतर विस्तार कर।

2. "राह में आया जो कोई दुखी, किरपा सब पे बहाते चलो..."
यदि तेरी इस जीवन यात्रा में तुझे कोई भी दुखी या पीड़ित व्यक्ति मिले, तो हनुमान जी का सेवक होने के नाते तू उस पर अपनी दया और सहायता की वर्षा कर। दूसरों की सेवा ही हनुमान जी की सर्वोत्तम पूजा है।

3. "सारी दुनिया ने ठुकराया, द्वार पे अर्जी लगा दी..."
जब इस मतलबी संसार ने मुझे बेसहारा छोड़ दिया और हर तरफ से मुझे निराशा हाथ लगी, तब मैंने हार मानकर हनुमान जी के पावन चरणों में अपनी करुण पुकार (अर्जी) लगा दी।

4. "चारों ओर अँधेरा छाया, तब मैंने तुझको बुलाया..."
जब मेरे जीवन में अज्ञान, भय और संकट का घोर अंधकार छा गया, तब मैंने हे संकटमोचन! आपको हृदय से पुकारा और आपने मेरी पुकार सुनी।

5. "भक्तों के हो तुम प्रतिपाला, संकट मोचन बाला..."
हे हनुमान जी! आप अपने अनन्य भक्तों के रक्षक और पालनहार हैं। आप बाल रूप में भी सूर्य को निगलने वाले और सभी संकटों को तत्क्षण हरने वाले 'बालाजी' हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

हनुमान जी की आराधना करते समय इस भजन के साथ निम्नलिखित दिव्य श्लोक का संपुट लगाना अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है:

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥

यह श्लोक हनुमान जी के वेग, बुद्धि और उनकी श्रीराम भक्ति को नमन करता है। इसके साथ ही श्री हनुमान चालीसा का पाठ भी इस भजन के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण जानकारी
भजन का नाम हनुमत के गुण गाते चलो (Hanumat Ke Gun Gate Chalo)
आराध्य देव श्री हनुमान जी (संकटमोचन)
मुख्य भाव भक्ति रस, शरणागति, करुणा, परोपकार
भाषा सरल हिंदी (खड़ी बोली)
उपयुक्त अवसर मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती, सुंदरकांड पाठ, नित्य प्रार्थना
संबंधित पाठ बजरंग बाण, हनुमान चालीसा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: "हनुमत के गुण गाते चलो" भजन का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: इस भजन का मुख्य संदेश ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा रखना, संकट के समय विचलित न होना और समाज के दुखी व पीड़ित लोगों की सेवा व सहायता करना है।

प्रश्न 2: हनुमान जी को "संकट मोचन" क्यों कहा जाता है?
उत्तर: हनुमान जी अपने भक्तों के जीवन में आने वाले सभी प्रकार के शारीरिक, मानसिक, और दैविक कष्टों को तुरंत दूर कर देते हैं, इसलिए उन्हें संकट मोचन कहा जाता है।

प्रश्न 3: इस भजन का गायन किस दिन करना सबसे उत्तम होता है?
उत्तर: वैसे तो प्रभु का भजन रोज करना चाहिए, लेकिन मंगलवार और शनिवार के दिन इस भजन का गायन विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

प्रश्न 4: "वैजन्ती माला" और "लाल लंगोटे" का क्या महत्व है?
उत्तर: वैजन्ती माला विजय और दिव्यता का प्रतीक है, जबकि लाल लंगोटे वाला स्वरूप हनुमान जी के ब्रह्मचर्य, शक्ति और सादगी को दर्शाता है।

प्रश्न 5: क्या इस भजन को बच्चे भी गा सकते हैं?
उत्तर: हां, इस भजन की भाषा अत्यंत सरल और सुबोध है, जिससे बच्चे भी इसे आसानी से सीख और गा सकते हैं। इससे उनमें नैतिक मूल्यों का विकास होता है।

प्रश्न 6: "अर्जी लगाना" का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?
उत्तर: आध्यात्मिक रूप से अर्जी लगाने का अर्थ है अपने अहंकार को त्यागकर पूर्ण समर्पण के साथ भगवान के चरणों में अपनी प्रार्थना और व्यथा को सौंप देना।

प्रश्न 7: क्या इस भजन के साथ हनुमान चालीसा का पाठ करना आवश्यक है?
उत्तर: आवश्यक नहीं है, परंतु यदि आप इस भजन के बाद या पहले हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, तो यह आपकी साधना को और अधिक सघन बनाता है।

प्रश्न 8: हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल उपाय क्या है?
उत्तर: हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल उपाय है निष्काम भाव से भगवान श्री राम के नाम का जप करना और दीन-दुखियों की सेवा करना।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के पाठ और भावार्थ को विभिन्न प्रामाणिक स्रोतों, पारंपरिक संकीर्तन पद्धतियों और सनातन धर्म के ग्रंथों के आलोक में संकलित किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध और प्रेरणादायी सामग्री पहुंचाना है ताकि वे हनुमान जी की भक्ति के वास्तविक मर्म को समझ सकें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण एवं श्री रामचरितमानस (गोस्वामी तुलसीदास)
  • पारंपरिक भजन संग्रह एवं संकीर्तन मंडलियां
  • सनातन धर्म के प्रमुख स्तोत्र एवं मंत्र संग्रह

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 04 Oct 2026

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