|| अपने मन को ही मंदिर बना लो ||


 || अपने मन को ही मंदिर बना लो ||
|| श्याम सुंदर को वो बिठा लो ||


चाहे देश में रहो प्रदेश में रहो,

किसी भी तरह में रहो, रहो

अपने मन में प्रभु को बसा लो,

|| श्याम सुंदर को वो बिठा लो ||


उनकी करुणा में कोई कमी नहीं है

उन्हें पा लो कही तुम बुला लो कही

उनके चरणों को कुर से लगा लो

 श्याम सुंदर को वह बिथा लो


नैन के आंसूयो से पखारो चरण,

पाहि केह कर के जाओ प्रभु की शरण,

अपनी करुणा से परभू को रिजा लो,

|| श्याम सुंदर को वो बिठा लो ||