Ram Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

मनवा रामा रामा बोल तेरा क्या लागे रे मोल भजन इन हिंदी

पढ़ें मनवा रामा रामा बोल तेरा क्या लागे रे मोल भजन इन हिंदी का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

सनातन धर्म की समृद्ध संगीत और भजन परंपरा में "मनवा रामा रामा बोल तेरा क्या लागे रे मोल" एक अत्यंत लोकप्रिय, हृदयस्पर्शी और वैराग्य से परिपूर्ण भजन है। यह भजन जीव को सांसारिक मोह-माया, प्रपंचों और भौतिकता की अंधी दौड़ से जगाकर भगवान श्री रामचंद्र जी के पावन नाम संकीर्तन की ओर प्रवृत्त करता है। इस भजन का मुख्य भाव पूर्ण शरणागति, सादगी और राम नाम की असीम महिमा का गान करना है। कलयुग में ईश्वर प्राप्ति का सबसे सरल साधन 'नाम जप' बताया गया है, और यह भजन इसी सिद्धांत को अत्यंत सरल एवं सुमधुर शब्दों में प्रस्तुत करता है। चाहे सुबह की प्रार्थना हो, संध्या आरती हो, या कोई सत्संग-सभा, इस भजन की गूंज भक्त के अंतःकरण में शांति, संतोष और भक्ति का संचार करती है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ मनवा रामा रामा बोल तेरा क्या लागे रे मोल ॥

(कोरस / मुखड़ा)
मनवा रामा रामा बोल, तेरा क्या लागे रे मोल।
रामा रामा बोल, तेरा क्या लागे रे मोल॥
मनवा रामा रामा बोल, तेरा क्या लागे रे मोल...॥

(अंतरा - १)
राम नाम के दो अक्षर हैं, दोनों हैं अनमोल।
मनवा रामा रामा बोल, तेरा क्या लागे रे मोल॥
रामा रामा बोल, तेरा क्या लागे रे मोल...॥

(अंतरा - २)
राम नाम की महिमा न्यारी, गाते वेद पुराण।
जिसने राम का नाम लिया, उसका हुआ कल्याण॥
मनवा रामा रामा बोल, तेरा क्या लागे रे मोल॥
रामा रामा बोल, तेरा क्या लागे रे मोल...॥

(अंतरा - ३)
सुख में राम, दुख में राम, राम ही राम पुकार।
राम नाम की नौका से ही, होगा बेड़ा पार॥
मनवा रामा रामा बोल, तेरा क्या लागे रे मोल॥
रामा रामा बोल, तेरा क्या लागे रे मोल...॥

(अंतरा - ४)
खाली हाथ आया बंदे, खाली हाथ जाएगा।
राम नाम की पूंजी ही, साथ तेरे जाएगी॥
मनवा रामा रामा बोल, तेरा क्या लागे रे मोल॥
रामा रामा बोल, तेरा क्या लागे रे मोल...॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन मानव मन को संबोधित करते हुए उसे जीवन की परम सच्चाई और ईश्वर भक्ति की ओर मोड़ने का प्रयास करता है। भजन की शुरुआत में ही मन को 'मनवा' कहकर पुकारा गया है, जो कि एक अत्यंत आत्मीय और प्रेमपूर्ण संबोधन है। कवि मन से प्रश्न करता है कि हे मन! तू राम नाम का उच्चारण क्यों नहीं करता? राम नाम का जाप करने में तेरा कोई धन या भौतिक मूल्य (मोल) खर्च नहीं होता। यह पूरी तरह से निःशुल्क है, फिर भी इसका आध्यात्मिक फल अनंत है।

भजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि संसार की हर वस्तु को प्राप्त करने के लिए मनुष्य को कठिन परिश्रम करना पड़ता है और मूल्य चुकाना पड़ता है, लेकिन भगवान का नाम एक ऐसा दिव्य खजाना है जो बिना किसी मूल्य के केवल सच्चे भाव से प्राप्त किया जा सकता है। यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन क्षणभंगुर है। मनुष्य इस पृथ्वी पर खाली हाथ आता है और खाली हाथ ही विदा हो जाता है। मृत्यु के पश्चात केवल उसके द्वारा किए गए सत्कर्म और राम नाम की संचित आध्यात्मिक पूंजी ही उसके साथ जाती है। इसलिए, सांसारिक प्रपंचों में समय गंवाने के बजाय निरंतर राम नाम का जप करना चाहिए ताकि इस भवसागर से पार उतरा जा सके।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन का सनातन परंपरा में अत्यंत विशिष्ट स्थान है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • नाम संकीर्तन की महिमा: गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में लिखा है - "कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा"। यह भजन इसी सनातन सत्य को प्रतिपादित करता है।
  • वैराग्य भाव की उत्पत्ति: भजन के शब्द मनुष्य के भीतर छिपे मोह को दूर कर वैराग्य और संतोष की भावना जाग्रत करते हैं।
  • सरलता और सुगमता: इस भजन की भाषा अत्यंत सरल है, जिससे बच्चे से लेकर वृद्ध तक सभी इसे आसानी से समझ और गा सकते हैं।
  • मन का नियंत्रण: चंचल मन को एकाग्र करने के लिए राम नाम का निरंतर उच्चारण एक अचूक औषधि की तरह कार्य करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि भगवान के नाम का स्मरण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष परिस्थितियां और समय अत्यंत फलदायी माने गए हैं:

  • प्रातः काल की प्रार्थना: सुबह के समय मन शांत और शुद्ध होता है। इस समय इस भजन का गायन करने से पूरे दिन सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
  • संध्या वंदन और सत्संग: शाम के समय परिवार के सदस्यों के साथ बैठकर या मंदिर में सत्संग के दौरान इस भजन को सामूहिक रूप से गाना अत्यंत आनंददायक होता है।
  • विशेष धार्मिक अवसर: राम नवमी, दिवाली, सुंदरकांड पाठ, हनुमान जयंती और अन्य मांगलिक अवसरों पर इस भजन का गायन विशेष रूप से किया जाता है।
  • गायन की विधि: इस भजन को गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा, विनम्रता और समर्पण का भाव होना चाहिए। यदि संभव हो तो करताल, मंजीरा या ढोलक की थाप पर इसे सामूहिक रूप से गाएं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित है। राम नाम की महिमा का वर्णन आदि काल से ही विभिन्न संतों और ऋषियों द्वारा किया जाता रहा है। देवर्षि नारद, महर्षि वाल्मीकि, गोस्वामी तुलसीदास, संत कबीरदास और संत रैदास जैसे महान विभूतियों ने राम नाम को ही समस्त दुखों का निवारण करने वाला बताया है। इस भजन की शैली संत कबीर के निर्गुण पदों और तुलसीदास जी के सगुण पदों के सुंदर समन्वय जैसी प्रतीत होती है, जो जीव को आत्मज्ञान की ओर ले जाती है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन भारत की लोक-चेतना और पारंपरिक भक्ति संगीत का हिस्सा है। इसकी रचना किसी एक विशिष्ट कालखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक परंपरा और लोक गायकों के माध्यम से परिष्कृत होकर हम तक पहुंची है। भारत के ग्रामीण अंचलों में होने वाले कीर्तनों और भजनों में इसे सदियों से गाया जाता रहा है। आधुनिक समय में कई प्रसिद्ध शास्त्रीय और पाश्र्व गायकों ने इसे अपने मधुर स्वर में गाकर वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें अवधी और लोक भाषाओं का पुट देखने को मिलता है। इसकी काव्य शैली अत्यंत प्रवाहमयी और गीतात्मक है। इसमें प्रयुक्त रूपक और उपमाएं (जैसे 'राम नाम की नौका' और 'राम नाम की पूंजी') सीधे हृदय को स्पर्श करती हैं। भजन की लयबद्धता ऐसी है कि यह सुनते ही मन को शांत कर देती है और श्रोता को ध्यान की अवस्था में ले जाती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण जीवन सीख देता है जो आज के आधुनिक युग में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं:

  • संतोष का महत्व: भौतिक वस्तुओं के पीछे भागने के बजाय जो हमारे पास है, उसमें संतुष्ट रहना और ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना।
  • अहंकार का त्याग: यह याद रखना कि हम इस संसार में खाली हाथ आए थे और खाली हाथ ही जाएंगे, जिससे हमारे भीतर का अहंकार शांत होता है।
  • सच्चा धन क्या है?: सांसारिक धन-दौलत यहीं छूट जाएगी, केवल राम नाम रूपी आध्यात्मिक धन ही आत्मा के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगा।
  • समर्पण की शक्ति: जब जीव स्वयं को पूरी तरह से भगवान के चरणों में समर्पित कर देता है, तो वह सभी प्रकार के भयों से मुक्त हो जाता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द/वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
मनवा हे चंचल मन / अंतःकरण मनुष्य का वह आंतरिक भाव जो सांसारिक विषयों में भटकता रहता है।
मोल कीमत / मूल्य सांसारिक वस्तुओं को खरीदने के लिए चुकाया जाने वाला धन।
अनमोल जिसका कोई मूल्य न लगाया जा सके राम नाम की अमूल्य शक्ति जो किसी भी भौतिक संपत्ति से श्रेष्ठ है।
नौका नाव / बेड़ा भवसागर (संसार रूपी समुद्र) को पार कराने वाला साधन।
पूंजी धन / संचित खजाना जीवन भर कमाए गए सत्कर्म और ईश्वर भक्ति का संचय।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

१. "मनवा रामा रामा बोल, तेरा क्या लागे रे मोल।"
हे मेरे चंचल मन! तू निरंतर राम नाम का जप कर। इस पावन नाम को बोलने में तेरा कोई खर्च नहीं होता, न ही कोई शारीरिक या आर्थिक मूल्य चुकाना पड़ता है। यह अत्यंत सुलभ और कल्याणकारी है।

२. "राम नाम के दो अक्षर हैं, दोनों हैं अनमोल।"
'रा' और 'म' - ये दो अक्षर मिलकर 'राम' बनते हैं। ये केवल वर्णमाला के अक्षर नहीं हैं, बल्कि ब्रह्मांड की परम ऊर्जा के प्रतीक हैं। इनका मूल्य संसार की किसी भी बहुमूल्य धातु या मणि से अधिक है।

३. "राम नाम की महिमा न्यारी, गाते वेद पुराण। जिसने राम का नाम लिया, उसका हुआ कल्याण॥"
राम नाम की महिमा अत्यंत निराली और अनंत है। चारों वेद और अठारह पुराण भी इसकी पूरी महिमा का गान करने में असमर्थ हैं। इतिहास साक्षी है कि जिसने भी सच्चे मन से राम नाम की शरण ली, उसका उद्धार निश्चित रूप से हुआ है।

४. "सुख में राम, दुख में राम, राम ही राम पुकार। राम नाम की नौका से ही, होगा बेड़ा पार॥"
चाहे जीवन में सुख की धूप हो या दुख की छांव, हर परिस्थिति में केवल राम नाम का ही सहारा लेना चाहिए। यह संसार एक विशाल और अशांत समुद्र की तरह है, और राम नाम वह सुरक्षित नौका है जो हमें इस पार से उस पार ले जा सकती है।

५. "खाली हाथ आया बंदे, खाली हाथ जाएगा। राम नाम की पूंजी ही, साथ तेरे जाएगी॥"
हे मनुष्य! तू इस संसार में रिक्त हस्त आया था और अंत समय में भी तुझे खाली हाथ ही प्रस्थान करना होगा। तेरी गाढ़ी कमाई, महल और गाड़ियां यहीं धरी रह जाएंगी। केवल राम नाम के जप से अर्जित की गई आध्यात्मिक पूंजी ही परलोक में तेरे साथ जाएगी।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

राम नाम की महिमा को दर्शाने वाला एक अत्यंत प्रसिद्ध श्लोक, जो भगवान शिव माता पार्वती से कहते हैं:

"राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे।
सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने॥"

अर्थ: हे सुमुखी (पार्वती)! मैं निरंतर 'राम, राम, राम' इस प्रकार राम नाम में ही रमण करता हूं। राम का यह एक नाम विष्णु के हजार नामों (विष्णु सहस्रनाम) के समान फल देने वाला है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम मनवा रामा रामा बोल तेरा क्या लागे रे मोल
आराध्य देव भगवान श्री रामचंद्र जी (मर्यादा पुरुषोत्तम)
मुख्य विषय राम नाम की महिमा, वैराग्य और समर्पण
भजन का भाव भक्ति भाव, शांत रस, शरणागति
भाषा सरल हिंदी (लोक शैली)
उपयुक्त अवसर प्रातः कालीन प्रार्थना, सत्संग, राम नवमी, सुंदरकांड पाठ
मुख्य संदेश सांसारिक मोह का त्याग और निरंतर नाम जप

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि राम नाम का जप पूरी तरह से सरल और निःशुल्क है, फिर भी यह मनुष्य को भवसागर से पार उतारने की असीम शक्ति रखता है। यह हमें सांसारिक मोह-माया को छोड़कर ईश्वर भक्ति की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है।

राम नाम को अनमोल इसलिए कहा गया है क्योंकि इसकी कोई भौतिक कीमत नहीं लगाई जा सकती। यह नाम जप साधक को मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और अंततः मोक्ष प्रदान करता है, जो संसार की किसी भी मूल्यवान वस्तु से परे है।

यद्यपि राम नाम का जप कभी भी किया जा सकता है, परंतु ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः काल) और संध्या काल के समय इस भजन का गायन और श्रवण सबसे अधिक फलदायी और मन को शांति देने वाला माना जाता है।

यह भजन सीधे तौर पर किसी एक ग्रंथ से नहीं है, लेकिन इसके सिद्धांत रामचरितमानस, वाल्मीकि रामायण और श्रीमद्भागवत महापुराण में वर्णित 'नाम संकीर्तन' की महिमा से पूरी तरह मेल खाते हैं।

"राम नाम की पूंजी" का अर्थ है वह आध्यात्मिक संचय या पुण्य जो मनुष्य जीवन भर भगवान के नाम स्मरण और सत्कर्मों के माध्यम से अर्जित करता है। यही वह एकमात्र धन है जो मृत्यु के बाद भी आत्मा के साथ जाता है।

सामूहिक रूप से भजन गाने से वातावरण में सकारात्मक तरंगों का संचार होता है, आपसी भाईचारा बढ़ता है और मन की एकाग्रता तीव्र होती है। संकीर्तन से सामूहिक चेतना का शुद्धिकरण होता है।

हां, इस भजन की भाषा अत्यंत सरल और इसकी धुन बहुत ही सुमधुर व आसान है। बच्चे इसे बहुत जल्दी सीख सकते हैं, जिससे उनमें बचपन से ही अच्छे संस्कार और आध्यात्मिक रुचि विकसित होती है।

'बेड़ा पार' होने का तात्पर्य जन्म और मृत्यु के चक्र (संसार चक्र) से मुक्ति पाकर मोक्ष की प्राप्ति करना और भगवान के परम धाम को प्राप्त करना है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्ति और दर्शन के गहन सिद्धांतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। "मनवा रामा रामा बोल" भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन के अंतिम सत्य को उजागर करने वाला एक आध्यात्मिक उपदेश है। इस भजन के माध्यम से जीव को अपनी वास्तविक पहचान और जीवन के वास्तविक उद्देश्य का स्मरण कराया गया है। यह सामग्री पूरी तरह से पारंपरिक मान्यताओं, संतों के वचनों और सनातन ग्रंथों के अनुकूल है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री (संदर्भ एवं व्याख्या सहित सामग्री)

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत महापुराण: नाम संकीर्तन की महिमा और कलयुग के धर्म का वर्णन।
  • श्रीरामचरितमानस (गोस्वामी तुलसीदास): बालकांड और उत्तरकांड में राम नाम की महिमा के प्रसंग।
  • सनातन भजन परंपरा: भारत के विभिन्न क्षेत्रों में प्रचलित पारंपरिक लोक भजन संग्रह।

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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