मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें।
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र
सृष्टि के सर्वश्रेष्ठ जीवनों में उत्पन्न एक जीवन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र का जीवन-परिचय:-
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| Bhagawan Shri Ram about |
चैत्रशुक्ल नवमी आर्यो व हिन्दुओ का ही नही बल्कि पूरे संसार के सभी विवेकशील लोगों के लिए भी आदर्श मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचन्द्र जी का जन्म दिवस पर्व है। इस पर्व को भगवान श्री रामचन्द्र जी के भक्त अपनी-अपनी तरफ से सर्वत्र मनाते हैं। हम वैदिक धर्म को मानने वेल आर्य हैं और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचन्द्र जी भी वैदिक धर्म के साक्षात क्रियात्मक सत्य है जो इतिहास रूप हैं।
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने वेदों द्वारा निर्मित सभी मर्यादाओं का पालन किया
उन्होंने ईश्वरीय ज्ञान वेदों द्वारा निर्मित सभी मर्यादाओं का पालन किया और यह सिद्ध यह सिद्ध करके बताया कि वैदिक शिक्षायें पुस्तकीय ज्ञान न होकर वरण वह पूरा का पूरा संपूर्ण जीवन में धारण व पालन करने योग्य है। आज भगवान श्री रामचंद्र का जन्म दिवस पर्व है, जो हमें यह अवसर प्रदान करता है कि हम उनके जीवन के गुणों वा चरित्रो का चिन्तन व मनन करें और उनसे कुछ शिखे यह मानव जीवन सर्वव्यापक व सर्वज्ञ ईश्वर, जो भगवान श्री रामचंद्र जी के भी उपास्य थे,भगवान श्री राम ने हमे न्याय ,धर्म,सत्य,पुन्य,और कर्तव्य की ओर जाने की प्रेरणा देते है ।
वो हमे न्याय ,धर्म,सत्य,पुन्य,और कर्तव्य की ओर जाने की प्रेरणा देते है । जो मानव उनके चरित्र का पालन तोड़ा सा भी करता है वह भगवान का सबसे अच्च्छा और प्रिय बन जाता हैं । और धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर होकर जीवन के ध्येय व लक्ष्य को प्राप्त करते हैं। आज की आधुनिक संस्कृति खाओं, पीयों और जीओं,मज़े करो में विश्वास रखती है।
भगवान श्री रामचंद्र वह आदर्श मनुष्य वा महापुरुष थे जिन्होंने
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र वह आदर्श मनुष्य वा महापुरुष थे जिन्होंने अपने जीवन को वेदमय बनाकर वेद की हर शिक्षा का यथावत् पालन किया था। इसको मानने वाले लोग पिछले जन्म मे घोर अन्धकार को प्राप्त करते है और जन्म व मृत्यु के बन्धन में पड़कर दुःखसागर में जन्म-जन्मान्तर तक अपने कर्मों का भुक्तांन भोगते हैं। वेद सृष्टि के आरम्भ में ईश्वर प्रदत्त वह ज्ञान है जिससे मनुष्य की सर्वांगीण उन्नति होती है।🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित यह भजन " मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र [ भक्तिलोक ] Bhagawan Shri Ram about" मर्यादा पुरुषोत्तम के पावन चरित्र का स्मरण कराता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के सिद्धांतों के अनुसार, राम का नाम स्वयं राम से भी अधिक सामर्थ्यवान है। इस भजन की लय और शब्द भक्त को सीधे साकेत धाम की पावन चेतना से जोड़ते हैं।
भजन का प्रमुख भाव शरणागति का है। जब जीव समस्त सांसारिक प्रपंचों से थककर भगवान राम के चरणों में शरण लेता है, तो उसे परम अभय की प्राप्ति होती है। राम नाम की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है और अंतःकरण में धर्म और सत्य के प्रति निष्ठा दृढ़ होती है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
सनातन ग्रंथों के अनुसार, राम नाम का जाप कलयुग का सर्वश्रेष्ठ साधन माना गया है। वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में राम नाम की असीम महिमा गाई गई है। यह भजन साधक के मन में वैराग्य, संयम, दया और कर्तव्य परायणता जैसे नैतिक मूल्यों का संचार करता है।
प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। राम नाम के संकीर्तन से व्यक्ति का आत्मबल जागृत होता है, भय तथा शंकाओं का नाश होता है और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य रखने की शक्ति प्राप्त होती है। यह पारिवारिक सौहार्द और मर्यादा की स्थापना में सहायक है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
राम भजन का संकीर्तन प्रातःकाल स्नान के पश्चात राम दरबार की प्रतिमा के सम्मुख घी का दीपक जलाकर करें। तुलसी की माला से राम नाम का जप करने के पश्चात इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
राम भजन के गायन से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
राम भजन के संकीर्तन से मानसिक शांति, उत्तम चरित्र, और विपत्तियों में धैर्य बनाए रखने का आत्मबल प्राप्त होता है।
राम नाम जप के लिए सर्वश्रेष्ठ माला कौन सी है?
भगवान श्री राम के मंत्र जाप और संकीर्तन के लिए तुलसी की माला को सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत पवित्र माना गया है।
क्या राम भजन बच्चों के संस्कारों के लिए उपयोगी है?
हाँ, भगवान राम के मर्यादापूर्ण चरित्र के भजन सुनने से बच्चों में बड़ों के प्रति सम्मान, सत्यप्रियता और उच्च नैतिक संस्कारों का विकास होता है।

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