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समर चली महाकाली भजन लिरिक्स ( Samar Chali Mahakali Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

169 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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महाकाली की महत्ता: शक्ति और संहार का स्वरूप

महाकाली की महिमा गाने का यह भजन भक्तों को शक्ति और साहस की अनुभूति कराता है।

समर चली महाकाली.समर चली महाकाली.काला खप्पर हाथ धरे माँ.मुंडन माला डाली.समर चली महाकाली.समर चली महाकाली………एक हाथ में खडग धरे माँ.दूजे त्रिशूल है धारी.तीजे में है चक्र सुदर्शन.चौथे कटार संभाली.समर चली महाकाली.समर चली महाकाली………आँखों से चिंगारी छोड़े.मुह से निकले ज्वाला.थर थर कांपे देखो असुरदल.ऐसी ले किलकारी.समर चली महाकाली.समर चली महाकाली……पल में कई दानव संहारे.पल में चट कर डाली.पल में कई को राख बनाई.एसी ले हुंकारी.समर चली महाकाली.समर चली महाकाली………कालो की माँ काल बनी रे.रणचंडी माँ ज्वाला.दे मुझे आँचल की छाया.मैया मेहरावाली.समर चली महाकाली.समर चली महाकाली... माँ

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन के मूल tema में महाकाली की महत्ता और शक्ति का बखान किया गया है। 'समर चली महाकाली' का परिचय देती पंक्ति से यह स्पष्ट होता है कि महाकाली युद्ध और जीत की देवी हैं। वह अपने हाथ में खडग, त्रिशूल और चक्र थामे हुए हैं, जो उनकी अद्वितीय शक्ति एवं संहारक रूप को दर्शाता है। यहाँ 'काला खप्पर' का उल्लेख, महाकाली की रहस्यमयता और गहराई को प्रकट करता है। देवी का हर आयाम, उनके शक्तिशाली स्वरूप को उजागर करता है, जैसे कि 'आँखों से चिंगारी छोड़े'। यह दर्शाता है कि उनकी दृष्टि में न केवल शक्ति है, बल्कि वे अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहती हैं। असुरों का संहार जो पल में किया जाता है, यह दिखाता है कि कैसे महाकाली अधर्म का नाश करती हैं।

महाकाली की स्तुति में की गई बानियाँ भक्तों के मन में एक अद्भुत श्रद्धा एवं डर पैदा करती हैं। 'पल में कई दानव संहारे' और 'काली माँ' के संबोधन से हमें यह एहसास होता है कि महाकाली केवल संहारक देवी नहीं हैं, बल्कि वे रक्षक और शांति की प्रदाता भी हैं। 'रणचंडी माँ ज्वाला' के रूप में महाकाली का वर्णन, युद्ध में साहस और विजय का प्रतीक है। भक्त गाते हैं 'दे मुझे आँचल की छाया', जो माँ से सुरक्षा की प्रार्थना है। यह एक गहन आत्मीयता और आस्था का संकेत है, कि भक्त माँ से शांति और सुख की कामना कर रहा है।

इस भजन में भक्तिभाव का नजारा भी साफ दीखता है। महाकाली की पूजा, भक्ति मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें प्रेम और श्रद्धा समाहित होती है। उनकी शक्ति के साथ, भक्त बुराईयों का सामना करने की प्रेरणा पाते हैं। भक्ति के इस मार्ग में, साधक अपनी मनोकामनाएँ माँ से मांगते हैं लेकिन उस दौरान उनका भक्ति भाव अति आवश्यक होता है। महाकाली की उपासना केवल भक्ति का ही आडम्बर नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर के डर को पराजित करने, अद्वितीय साहस पाने और सच्चाई के मार्ग पर चलने के लिए भी एक प्रेरणा होती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

महाकाली का यह भजन हिन्दू संस्कृति में बहुत महत्वपूर्ण है। काली देवी का उल्लेख विभिन्न पुराणों, विशेषकर देवीभागवत पुराण और मार्कंडेय पुराण में मिलता है। यहाँ महाकाली को 'काल रात्रि' और 'कालिका' के रूप में पूजा जाता है। उनके युद्ध और संहारक स्वरूप को दर्शाते हुए, यह भजन भक्तों को न केवल प्रेरणा देता है बल्कि उन्हें अन्याय एवं बुराई के खिलाफ खड़े होने के लिए भी प्रोत्साहित करता है। रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों में भी देवी की महत्ता का उल्लेख मिलता है, जहाँ वे शक्ति और विजय की प्रतीक मानी जाती हैं।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। महाकाली के इस भजन का जप मानसिक, शारीरिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक है। यह ध्यान और साधना के माध्यम से तनाव को कम करता है, आत्मविश्वास बढ़ाता है और सकारात्मक ऊर्जा को आकार देता है। भक्तों द्वारा इस भजन का नियमित पाठ करने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मन में शांति एवं समर्पण का भाव विकसित होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

महाकाली के इस भजन का सबसे उपयुक्त समय प्रातः या संध्या का होता है। भक्तों को चाहिए कि वे इस समय पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ हल्के रंग के वस्त्र पहनें। पूजा के दौरान एक दीया जलाएं और माँ को फूल एवं फल अर्पित करें। ध्यानपूर्वक स्थिर अवस्था में बैठकर, पूर्ण मनोयोग के साथ भजन का जाप करें। मन को केंद्रित रखने के लिए अपनी आँखें बंद करें और माता के प्रति अपने भाव व्यक्त करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

महाकाली का इस भजन में मुख्य रूप क्या है?

इस भजन में महाकाली की शक्ति, संहारक रूप और युद्ध के प्रतीक के रूप में पूजा की गई है। यह भजन भक्तों को साहस और विजय की अनुभूति कराता है।

महाकाली की उपासना क्यों आवश्यक है?

महाकाली की उपासना बुराई, अंधकार और अनैतिकता के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित करती है। यह भक्तों को व्यक्तिगत कठिनाईयों से उबरने और शक्ति पाने में मदद करती है।

इस भजन का जप करने का सही समय क्या है?

इस भजन का जप सुबह या शाम को करना श्रेयस्कर है, विशेषकर तब जब भक्त एकाग्रता और समर्पण से भजन का पाठ करते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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